रविवार, 21 दिसंबर 2025

अजमेर से पहले ही मिल गई थी ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार की अनुमति?

ऐसी मान्यता है कि अजमेर शहर के केन्द्र में नया बाजार के पास स्थित अकबर के किले से ही सम्राट जहांगीर ने दस जनवरी या दस अप्रैल 1916 ईस्वी को इंग्लेंड के राजा जॉर्ज पंचम के दूत सर टामस रो को ईस्ट इंडिया कंपनी को हिंदुस्तान में व्यापार करने की अनुमति दी थी। टामस रो यहां कई दिन जहांगीर के साथ रहा। यह अनुमति एक चार्टर (फरमान) के रूप में दी गई थी, जो आगे चलकर भारत में अंग्रेजों के उपनिवेश की नींव रखने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बना।

इस बारे में एक मत यह है कि इतिहास में यह घटना वास्तव में 1616 ईस्वी में अजमेर दरबार में हुई थी। ऐतिहासिक अभिलेखों में सटीक दिनांक स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। समकालीन विवरण केवल यह बताते हैं कि सर थॉमस रो 10 जनवरी 1616 को अजमेर पहुंचे थे। उन्होंने जहांगीर के दरबार में लगभग जनवरी से मार्च 1616 तक वार्ताएं कीं। इन वार्ताओं के बाद, मार्च 1616 के आसपास जहांगीर ने उन्हें व्यापार की अनुमति वाला फरमान जारी किया।

ज्ञातव्य है कि इस किले का निर्माण अकबर ने 1571 से 1574 ईस्वी में राजपूतों से होने वाले युद्धों का संचालन करने और ख्वाजा साहब के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए करवाया था। जहांगीर ने भी 1613 से 1616 के दौरान यहीं से कई सैन्य अभियानों का संचालन किया। 

लेकिन कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह कहना सही नहीं है कि 10 अप्रैल को अजमेर में ही ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार की अनुमति दी गई थी। वास्तव में, ईस्ट इंडिया कंपनी को मुगल बादशाह जहांगीर ने 1613 में सूरत में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति दी थी। इसके बाद, 1615 में सर थॉमस रो ने जहांगीर से पूरे मुगल साम्राज्य में व्यापार करने और फैक्ट्रियां स्थापित करने का शाही फरमान प्राप्त किया। इन शुरुआती व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र मुख्य रूप से सूरत और अन्य तटीय शहर थे।

कुछ इतिहासकार मानते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने की अनुमति 31 दिसंबर 1600 को मिली थी। इस दिन इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एक शाही फरमान जारी किया, जिसके तहत कंपनी को भारत और पूर्वी देशों (मुख्यतः एशिया) के साथ व्यापार करने का विशेष अधिकार प्राप्त हुआ। इस चार्टर के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी को 15 वर्षों के लिए व्यापार का एकाधिकार दिया गया था। ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने की अनुमति विभिन्न चरणों में मिली, न कि किसी एक निश्चित दिन। इसकी शुरुआत 17वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में हुई।

1600- इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का राजकीय चार्टर दिया। इस चार्टर ने कंपनी को व्यापार का एकमात्र अधिकार दिया, लेकिन यह सीधे भारत में व्यापार की अनुमति नहीं थी।

1608- कंपनी ने भारत में अपना पहला व्यापारिक केंद्र सूरत में स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन मुगल बादशाह जहांगीर से स्थायी अनुमति नहीं मिल पाई।

1613- मुगल बादशाह जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में एक कारखाना स्थापित करने की अनुमति दी। यह भारत में व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआती अनुमति थी।

1615- सर थॉमस रो, इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में जहांगीर के दरबार में आए और उन्होंने कंपनी के लिए व्यापारिक रियायतें प्राप्त कीं, जिससे कंपनी को भारत के अन्य हिस्सों में भी व्यापार करने की अनुमति मिली।

इसलिए, यह कहना मुश्किल है कि ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने की अनुमति किस एक दिन मिली। यह एक धीरे-धीरे विकसित होने वाली प्रक्रिया थी, जो विभिन्न मुगल शासकों से प्राप्त विभिन्न अनुमतियों और रियायतों पर आधारित थी। 1613 में सूरत में कारखाना स्थापित करने की अनुमति को भारत में कंपनी के व्यापारिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा सकता है।

-तेजवाणी गिरधर