उनका जन्म जयपुर में 4 जनवरी 1969 को हुआ। उन्होंने गणित में एम फिल की डिग्री हासिल की। 1991 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ। राजस्थान में अनेक जिलों में उच्च पदों पर काम किया। उनका राज्य प्रशासनिक सेवा में 1998, 2009, 2011 में पदोन्नत किया गया। अजमेर में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर काम किया। इसके बाद आईएएस बनाए गए। उन्होंने 4 सितंबर 2024 को खैरथल-तिजारा जिले के कलक्टर के रूप में कार्यभार संभाला था। यहां कार्यकाल के दौरान उनके पैरों में तेज दर्द रहने लगा और घुटने की समस्या भी बढ़ती चली गई। स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उन्होंने सरकार से तबादले का अनुरोध किया, जिसके बाद 25 नवंबर 2025 को उनका स्थानांतरण उनके गृह शहर अजमेर कर दिया गया। अजमेर में उन्हें राजस्व मंडल में सदस्य के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया था। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजली अर्पित करता है।
अजमेरनामा
खबरों के पीछे की खबर
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026
जनप्रिय अफसर श्री किशोर कुमार का देहावसान
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
आखिर कब होगी एडीए अध्यक्ष की नियुक्ति?
यह सर्वविदित ही है कि पहले यूआईटी हो या अब एडीए, शहर के विकास के नए आयाम स्थानीय राजनीतिक व्यक्ति के अध्यक्ष रहने पर स्थापित हुए हैं। जब भी प्रशासनिक अधिकारी के हाथों में कमान रही है, विकास की गति धीमी हुई है। इसके अनेक उदाहरण हैं। वजह ये है कि जिला कलेक्टर या संभागीय आयुक्त के पास अध्यक्ष का भी चार्ज होने के कारण वे सीधे तौर पर कामकाज पर ध्यान नहीं दे पाते। वैसे भी उनकी कोई विशेष रुचि नहीं होती। वे तो महज औपचारिक रूप से नौकरी को अंजाम देते हैं। उनके पास अपना मूल दायित्व ही इतना महत्वपूर्ण होता है कि वे टाइम ही नहीं निकाल पाते। निचले स्तर के अधिकारी ही सारा कामकाज देखते हैं। इसके विपरीत राजनीतिक व्यक्ति के पास अध्यक्ष का कार्यभार होने पर विकास के रास्ते सहज निकल आते हैं। एक तो उसको स्थानीय जरूरतों का ठीक से ज्ञान होता है। इसके अतिरिक्त जनता के बीच रहने के कारण यहां की समस्याओं से भी भलीभांति परिचित होता है। वह किसी भी विकास के कार्य को बेहतर अंजाम दे पाता है। प्रशासनिक अधिकारी व जनता के प्रतिनिधि का आम जन के प्रति रवैये में कितना अंतर होता है, यह सहज ही समझा जा सकता है। राजनीतिक व्यक्ति इस वजह से भी विकास में रुचि लेता है, क्योंकि एक तो उसकी स्थानीय कामों में दिलचस्पी होती है, दूसरा उसकी प्रतिष्ठा भी जुड़ी होती है। उनका प्रयास ये रहता है कि ऐसे काम करके जाएं ताकि लोग उन्हें वर्षों तक याद रखें और उनकी राजनीतिक कैरियर भी और उज्ज्वल हो।
इस बात के प्रमाण हैं कि जब भी न्यास के अध्यक्ष पद पर कोई राजनीतिक प्रतिनिधि बैठा है, शहर का विकास हुआ है। चाहे कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की। हर न्यास अध्यक्ष ने चाहे शहर के विकास के लिए, चाहे अपनी वाहवाही के लिए, काम जरूर करवाया है। पृथ्वीराज चौहान स्मारक, सिंधुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक, लवकुश उद्यान, झलकारी बाई स्मारक, वैकल्पिक ऋषि घाटी मार्ग, अशोक उद्यान, राजीव उद्यान, गौरव पथ, महाराणा प्रताप स्मारक सहित अनेक आवासीय योजनाएं उसका साक्षात प्रमाण हैं। सरकारों की अरुचि अथवा कोई अन्य मजबूरी हो सकती है, मगर अध्यक्ष की नियुक्ति समय पर न होना अजमेर शहर के लिए नुकसानदेह है। महत्वपूर्ण ये नहीं है कि नियुक्ति के दावेदारों को इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि शहर के विकास में अहम भूमिका अदा कर सकने वाली इस विशेष संस्था की निष्क्रियता से शहर का विकास अवरुद्ध हो रहा है। ये उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि दावेदारों की अपेक्षा पूरी हो, बल्कि जरूरी ये है कि अजमेर वासियों की अपेक्षाएं पूरी हों।
वर्तमान में प्राधिकरण प्रशासनिक अधिकारियों भरोसे ही चल रहा है। ऐसे में विकास तो दूर रोजमर्रा के कामों की हालत भी ये है कि जरूरतमंद लोग चक्कर लगा रहे हैं और किसी को कोई चिंता नहीं। नियमन और नक्शों के सैंकड़ों काम अटके पड़े हैं। स्पष्ट है कि विकास अवरुद्ध हुआ है। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि प्राधिकरण गठित होने की वजह से भविष्य में विकास की रफ्तार तेज होने की आशा बलवती हुई थी। वजह ये कि प्राधिकरण का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया था। इसके तहत किशनगढ़ और पुष्कर शहर के अतिरिक्त 118 गांव भी इसका हिस्सा बन गए। यानि कि प्राधिकरण यूआईटी की तुलना में एक उच्च शक्ति वाली संस्था बन गई। न्यास अध्यक्ष को 25 लाख रुपए और सचिव को दस लाख रुपए के वित्तीय अधिकार थे, मगर अध्यक्ष और कमिश्नर (सचिव) दोनों के वित्तीय अधिकार एक-एक करोड़ रुपए हो गए। इसमें सरकार की ओर से घोषित एक चेयरमैन के अलावा एक सचिव और 19 सदस्यों का प्रावधान है। 19 सदस्यों में से 12 सदस्य अधिकारी और 7 सदस्य राजनीतिक नियुक्तियों के रखने का प्रावधान है। जैसे ही प्राधिकरण का गठन हुआ तो सभी समाचार पत्रों में यह शीर्षक सुर्खियां पा रहा था कि अब लगेंगे अजमेर के विकास को पंख। उम्मीद जताई गई थी कि सही योजनाएं बनीं और तय समय में काम पूरे हुए तो एक दशक में ही अजमेर महानगर में तब्दील हो सकता है। इसके ठोस आधार भी हैं। प्राधिकरण की सीमाएं किशनगढ़ औद्योगिक क्षेत्र तक हैं, यानि केंद्रीय विद्यालय तक हमारी पहुंच हो गई है। बाड़ी घाटी अब प्राधिकरण का हिस्सा है, यानि विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बने पुष्कर तीर्थ को हम विकास की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं दे सकते हैं। ब्यावर रोड पर सराधना और नारेली तीर्थ हमारी सीमा में आ जाने से हम कई दृष्टि से विकसित हो जाएंगे। हवाई अड्डा तो गेगल निकलते ही हम छू लेंगे। कुल मिला कर अजमेर विकास प्राधिकरण का गठन अजमेर के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता था। मगर वह इस कारण नहीं हो पा रहा कि पिछली बार भी नियुक्ति में देरी हुई, इस बार भी हो रही है।
कुल मिला कर जब तक प्राधिकरण के सदर पद पर किसी राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होती, तब तक अजमेर का विकास यूं ही ठप पड़ा रहेगा।
रविवार, 29 मार्च 2026
पूर्व लोकप्रिय पार्षद श्री दीपेन्द्र लालवानी का देहावसान
रविवार, 22 मार्च 2026
निर्यापक मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज संसघ का हुआ केसरगंज में भव्य मंगल प्रवेष
अजमेर 22 मार्च ( ) समाधीष्ठ आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महा-मुनिराज एवं आचार्य 108 श्री समय सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य निर्यापक मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज संसघ का भव्य मंगल प्रवेश अलवर गेट से केसरगंज स्थित श्री 1008 पार्ष्वनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन मन्दिर पर हुआ।उत्सव एवं प्रचार प्रसार संयोजक दीपक जैन कोठारी ने बताया कि महाराज संसघ बुन्देलखण्ड से विहार करते हुए रविवार को प्रातः 08ः00 बजे श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन मंदिर जी केसरगंज में जुलूस के रूप में पहंुचे जहॉं ब्राहमी महिला मण्डल, आदि सृष्टि महिला मण्डल, सुनन्दा महिला मण्डल द्वारा महाराज श्री की मंगल कलष के साथ अगवानी की गई। श्री 1008 पार्ष्वनाथ दिगम्बर जैसवाल जैन मन्दिर कमेटी के सभी सदस्य व पदाधिकारियों द्वारा मंदिर जी पर महाराज संसघ की भव्य अगवानी की गयी एवं पाद् पक्षालन कर आरती उतारी गयी। मंगल जुलूस में महिलाऐं, पुरूष व बच्चे हाथो में ध्वजा लेकर जयघोष के साथ चले। तत्पश्चात् प्रातः 9ः00 बजे मदन गोपाल रोड, दैनिक नवज्योति वाली गली केसरगंज में एक विशाल धार्मिक सभा का आयोजन हुआ जहॉं निर्यापक मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज के प्रवचन हुए।
इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए निर्यापक मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज संसघ ने कहा कि मानव जीवन में अनेक दुख सुख आते रहते है। सच्चा मानव एवं भक्त वही है जो सुख के दिन में भी परम पिता परमेष्वर को याद करता है यदि वह सुख के दिनो में प्रभु का स्मरर्ण करता है ऐसे भक्त के जीवन में कभी दुख नहीं आते है। इस अवसर पर उपस्थित यभ्सी माताओं व बहनो एवं महानुभावो को आर्षीवाद प्रदान किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील कुमार ढिलवारी, मंत्री सुनील साहबजाज, प्रसार प्रसार व उत्सव संयोजक दीपक जैन कोठारी, कपिल दनगसिया, योगेन्द्र कोलानायक, राकेश घीया सहित समस्त मंदिर कमेटी व समाज बन्धु उपस्थित रहे।
(दीपक जैन कोठारी)
उत्सव संयोजक
मो. 8209302264
अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन, जिला शाखा अजमेर
वैश्य समाज ने पुष्कर महायज्ञ में लिया सहभाग, दिया एकता व संस्कार का संदेश
अजमेर 20 मार्च / पावन तीर्थ पुष्कर में आयोजित हो रहे भव्य शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन अजमेर द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सहभाग किया गया। आतंकवाद के शमन, हिन्दू राष्ट्र निर्माण एवं विश्व कल्याण के उद्देश्य से यज्ञ सम्राट महा मंडलेश्वर प. पू. स्वामी श्री प्रखर जी महाराज के सान्निध्य में चल रहे इस दिव्य अनुष्ठान में वैश्य महासम्मेलन के पदाधिकारियों एवं वैश्य बंधुओं ने विधिवत परिक्रमा एवं पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया तथा संत निवास में महाराज श्री के दर्शन एवं आशीर्वचन का लाभ प्राप्त किया इस अवसर पर उपस्थित वैश्य समाज के पदाधिकारियों ने महामंडलेश्वर संत श्री प्रखर जी महाराज का माल्यार्पण कर व शॉल व दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन भी किया तथा पुष्कर की पावन धरा पर विश्व कल्याण हेतु किये जा रहे महायज्ञ के लिए आभार व्यक्त किया l
इस अवसर पर वैश्य समाज के प्रमुख पदाधिकारी मुख्य संरक्षक कालीचरण दास खंडेलवाल, संरक्षक रमेशचंद अग्रवाल,जिलाध्यक्ष रमेशचंद तापड़िया, जिला महामंत्री उमेश गर्ग, प्रदेश मंत्री सूरज नारायण लखोटिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश चंद गोयल एवं शैलेंद्र अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र मित्तल, कार्यकारी अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता, युवा उपाध्यक्ष दीपक चोपड़ा, प्रमोद डीडवानिया, विष्णु प्रकाश गर्ग, दिनेश प्रणामी, कमल बानुड़ा, लोकेश सोजतिया, सुरेश राठी सहित अनेक वैश्य बंधुओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वैश्य समाज के पदाधिकारियों ने महायज्ञ के मुख्य यजमान श्री चंद्रप्रकाश जी दुबे से भी मुलाकात की तथा उनका माल्यार्पण कर व दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया l
संत प्रखर जी महाराज ने प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि ऐसे पावन अनुष्ठान समाज में एकता, संस्कार एवं राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करते हैं। हमें अपने धर्म, संस्कृति और समाज के उत्थान हेतु सदैव संगठित होकर कार्य करना चाहिए।
भवदीय
उमेश गर्ग
जिला महामंत्री
9829793705



