गुरुवार, 20 अगस्त 2026

डॉ. शामिका रवि ने किया बिहार के प्रथम सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस का विधिवत शुभारंभ

 आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में बिहार के प्रथम सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस का विधिवत शुभारंभ आज प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ. शामिका रवि ने किया। इस दौरान कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार डॉ. राजभूषण चौधरी, सांसद शांभवी चौधरी तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव समेत विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। इस केंद्र की स्थापना,  बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के लिए प्रमाण आधारित शोध की दिशा में महत्वपूर्ण है।


उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. शामिका रवि ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव की पहल, दूरदृष्टि और नेतृत्व की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरी नीति और शासन जैसे समसामयिक विषय पर केंद्र की स्थापना समय की आवश्यकता है। देश तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल कक्षाओं और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रह सकती। उच्च शिक्षण संस्थानों को समाज और शासन के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं पर शोध करना होगा और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए नीति संवाद को मजबूत करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केंद्र शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देगा और नीति-निर्माताओं तथा अकादमिक जगत के बीच प्रभावी संवाद का मंच बनेगा।

कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव ने कहा कि सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस केवल एक नए अकादमिक केंद्र की शुरुआत नहीं, बल्कि शहरी भारत की बदलती जरूरतों पर शोध, संवाद और नीति-विमर्श के लिए समर्पित मंच का निर्माण है। उन्होंने कहा कि बिहार के शहर तेजी से बदल रहे हैं। शहरीकरण से आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और विकास के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ आवास, यातायात, जलापूर्ति, स्वच्छता, पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इन समस्याओं का समाधान स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध आंकड़ों और नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर ही संभव है।

प्रो. शरद कुमार यादव ने कहा कि शहरी समस्याओं को समझने के लिए केवल एक विषय का दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं है। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन, इंजीनियरिंग, प्रशासन, सार्वजनिक नीति और डेटा विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों को साथ लेकर बहुविषयक शोध की आवश्यकता है। केंद्र का उद्देश्य इसी समन्वित दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास रहेगा कि केंद्र शोध, नीति और व्यावहारिक शासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करे। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वास्तविक शहरी समस्याओं, स्थानीय निकायों और समुदायों के साथ काम करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

वहीं, मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में बेहतर आधारभूत संरचना और प्रभावी प्रशासन बेहद जरूरी है। शहरों के विकास के लिए स्वच्छता, पेयजल, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं की मजबूत व्यवस्था के साथ शहरी प्रशासन को अधिक जवाबदेह, सक्षम और नागरिक केंद्रित बनाना होगा। उन्होंने कुलपति की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केंद्र बिहार में शहरी नीति और प्रशासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने सरकार, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।

सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि शहरी विकास को केवल सड़कों, भवनों और भौतिक आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं किया जा सकता। बेहतर शहर के लिए पारदर्शी प्रशासन, नागरिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और समान अवसर भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन, स्वच्छता, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाएं सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। उन्होंने केंद्र की स्थापना को विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार बताया।

केंद्र के माध्यम से सरकार, शहरी स्थानीय निकायों, विकास एजेंसियों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है। यहां विशेषज्ञ व्याख्यान, नीति संवाद, शोध परियोजनाएं, कार्यशालाएं, क्षेत्रीय अध्ययन, अंतर्विषयक शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शहरी विकास की जमीनी चुनौतियों से परिचित कराने के साथ उन्हें शोध और नीति-विश्लेषण की व्यावहारिक समझ देना है।

कार्यक्रम में शहरी विकास, सुशासन, स्थानीय शासन, नागरिक सहभागिता और भविष्य की शहरी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिहार के सतत और समावेशी शहरी विकास के लिए प्रमाण आधारित नीति, सक्षम स्थानीय संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थियों के साथ पटना स्थित अन्य शोध संस्थानों के शिक्षकों एवं शोधार्थियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।

कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह केंद्र शहरी नीति, शासन और विकास के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और नीति संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य ज्ञान को समाज और शासन की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। बिहार के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में स्थानीय अनुभवों और प्रमाणों पर आधारित ज्ञान का निर्माण ही बेहतर नीति और बेहतर शहरों की आधारशिला बनेगा।

बदलती सामाजिक संवेदनाओं में वृद्धों को चाहिए उजाले

 विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस-21 अगस्त, 2026

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस समाज के अंतर्मन को झकझोरने एवं वृद्धों की त्रासद स्थितियों पर सोचने को विवश करता है कि जिन हाथों ने परिवार की नींव रखी, जिन कंधों ने बच्चों के भविष्य का भार उठाया और जिन अनुभवों ने जीवन की अनेक कठिन राहों को पार करने में अगली पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया, उन्हीं वृद्ध माता-पिता को जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेलापन, उपेक्षा, असुरक्षा और अपमान क्यों झेलना पड़ रहा है? निश्चित ही कहीं-न-कहीं हमारी सामाजिक संवेदना कमजोर हुई है। जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान सहज संस्कार होना चाहिए था, वहां उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए अलग से दिवस मनाना हमारी सामूहिक आत्मचिंता का विषय है। भारत तेजी से वृद्ध होती आबादी की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 के अनुसार 2050 तक भारत की आबादी में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत हो सकती है; यानी हर पांच भारतीयों में लगभग एक वरिष्ठ नागरिक होगा। यह केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के सामने आने वाली एक बड़ी चुनौती है। अधिक उम्र तक जीना मानव सभ्यता की उपलब्धि है, लेकिन यदि लंबी आयु के साथ अकेलापन, बीमारी, आर्थिक असुरक्षा और भावनात्मक उपेक्षा जुड़ जाए तो दीर्घ जीवन वरदान के बजाय बोझ जैसा अनुभव होने लगता है।

भारत की पारंपरिक संस्कृति में वृद्ध व्यक्ति परिवार के मुखिया, मार्गदर्शक और अनुभव के भंडार माने जाते थे। संयुक्त परिवार में उनकी भूमिका केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे परिवार की स्मृति, परंपरा और संस्कारों के जीवंत केंद्र होते थे। लेकिन तेजी से बदलती जीवनशैली, महानगरीय संस्कृति, रोजगार के लिए पलायन, छोटे परिवारों की प्रवृत्ति, उपभोक्तावाद और बढ़ती व्यक्तिवादी सोच ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। आज कई वृद्ध अपने ही घर में रहते हुए भी भावनात्मक रूप से अकेले हैं। उनके पास रहने को छत है, लेकिन संवाद के लिए कोई अपना नहीं; परिवार है, लेकिन समय नहीं; संतान है, लेकिन अपनापन कम होता जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस वृद्ध ने जीवनभर परिवार को अपने केंद्र में रखा, सेवानिवृत्ति के बाद वही परिवार उसे अपने केंद्र से बाहर करने लगता है। नौकरी में रहते हुए जिस व्यक्ति की सलाह महत्वपूर्ण थी, नौकरी से मुक्त होते ही उसकी उपयोगिता जैसे समाप्त मान ली जाती है।
वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या इसी बदलती सामाजिक संरचना का संकेत है। हर वृद्धाश्रम दुख की कहानी नहीं है; कुछ स्थानों पर वे अकेले और असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा और देखभाल का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। लेकिन जब वृद्धाश्रम उन माता-पिता का अंतिम ठिकाना बन जाए जिन्हें सक्षम संतान केवल इसलिए घर से दूर कर देती है कि वे आधुनिक जीवन की सुविधाओं के बीच ‘असुविधा’ बन गए हैं, तब प्रश्न केवल परिवार का नहीं, पूरे समाज के संस्कारों का बन जाता है। संपत्ति अपने नाम कराने के बाद माता-पिता से दूरी बना लेना, उनकी बीमारी को बोझ समझना या उन्हें केवल घरेलू जिम्मेदारियों के लिए उपयोग करना ऐसी प्रवृत्तियां हैं, जिन पर समाज को गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए। यह भी सच है कि वृद्धावस्था की समस्या केवल युवाओं की संवेदनहीनता से पैदा नहीं होती। वरिष्ठ नागरिकों को भी बदलते समय के साथ स्वयं को बदलना होगा। नई पीढ़ी की स्वतंत्रता, निजी निर्णय और जीवनशैली को समझना होगा। अनावश्यक हस्तक्षेप से बचते हुए अपने अनुभव को आदेश नहीं, मार्गदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना होगा। उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन मन का बूढ़ा हो जाना अनिवार्य नहीं। वरिष्ठ नागरिक यदि सामाजिक गतिविधियों, अध्ययन, सेवा, आध्यात्मिकता, सामुदायिक कार्यक्रमों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े रहें तो उनका जीवन अधिक सक्रिय, सार्थक और आनंदपूर्ण बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कल आया फैसला बुजुर्गों के लिए कानूनी संजीवनी की तरह है जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि संतान माता-पिता की देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहती है, तो वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए कानून के तहत बच्चों को उस संपत्ति से बेदखल करने का रास्ता खुला है।
सरकार की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। विशेष रूप से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आय की परवाह किए बिना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज देना एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार अक्टूबर 2024 में शुरू हुए इस विस्तार से लगभग छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है; जून 2026 तक योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कवरेज का दायरा इसी दिशा में आगे बढ़ाया गया है। इसी प्रकार अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य केवल वृद्धों को आश्रय देना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, आवास, सक्रिय एवं उत्पादक वृद्धावस्था, कौशल, परिवहन तथा पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करना भी है। योजना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता, वृद्धाश्रम, सहायक उपकरण, सक्रिय वृद्धावस्था और अनुभव आधारित रोजगार जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है। ये प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं की सफलता अंततः उनके अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी पहुंचने पर निर्भर करती है। पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, डिजिटल सेवाओं और कानूनी संरक्षण को अधिक सरल, सुलभ और स्थानीय स्तर पर प्रभावी बनाना अभी भी आवश्यक है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा जितनी जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी भावनात्मक सुरक्षा है। पैसा दवा खरीद सकता है, लेकिन अकेलेपन का उपचार नहीं कर सकता। अस्पताल शरीर का इलाज कर सकता है, लेकिन उपेक्षा से घायल मन का उपचार परिवार का प्रेम ही कर सकता है। इसलिए वृद्ध कल्याण को केवल सरकारी योजना या पेंशन के दायरे में नहीं देखा जा सकता। परिवार को यह समझना होगा कि वृद्ध माता-पिता को केवल भोजन और दवा नहीं चाहिए; उन्हें बातचीत चाहिए, सम्मान चाहिए, निर्णयों में सहभागिता चाहिए और यह भरोसा चाहिए कि वे परिवार के लिए अब भी महत्वपूर्ण हैं। आज की युवा पीढ़ी को यह बात विशेष रूप से समझनी होगी कि माता-पिता का वर्तमान हमारे भविष्य का संकेत है। जो व्यवहार हम आज अपने वृद्ध माता-पिता के साथ करेंगे, आने वाला समय उसी व्यवहार को हमारे सामने खड़ा करेगा। आज हम युवा हैं, कल हम वृद्ध होंगे। आज जिन आंखों को हम अनदेखा कर रहे हैं, कल उन्हीं जैसी आंखों में हमारी अपनी संतानों के व्यवहार का प्रतिबिंब दिखाई दे सकता है। इसलिए वृद्धों की सेवा दया नहीं, कर्तव्य है; उनका सम्मान उपकार नहीं, संस्कार है।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की वास्तविक सार्थकता तभी होगी जब यह एक दिन का आयोजन न रहकर जीवन की स्थायी दृष्टि बने। परिवार में सप्ताह में एक दिन नहीं, प्रतिदिन संवाद हो; समाज में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सक्रिय सामुदायिक मंच हों; स्थानीय संस्थाएं उन्हें ज्ञान, अनुभव और सेवा के अवसर दें; सरकार स्वास्थ्य, पेंशन और सुरक्षा की व्यवस्थाओं को मजबूत करे और युवा पीढ़ी अपनी सोच में परिवर्तन लाए। वृद्धावस्था जीवन की संध्या है, लेकिन संध्या का अर्थ अंधेरा नहीं होता। वह दिनभर की यात्रा के बाद सुनहरी रोशनी का समय भी हो सकती है। आवश्यकता केवल इतनी है कि परिवार उस रोशनी को बुझने न दे। हमारे वृद्ध जीवन के बीते हुए पन्ने नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुभव की खुली किताब हैं। यदि हम उनके अंतिम वर्षों को भय, अकेलेपन और उपेक्षा से भर देंगे तो हम केवल उनके साथ अन्याय नहीं करेंगे, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कारों को भी कमजोर करेंगे। इसलिए आज संकल्प होना चाहिए-वृद्धों के जीवन में अंधेरा नहीं, सम्मान का उजाला हो; अकेलापन नहीं, अपनापन हो; उपेक्षा नहीं, सहभागिता हो और शेष जीवन बोझ नहीं, आनंद एवं गरिमा का उत्सव बने। यही विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस का वास्तविक संदेश और हमारी सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।
प्रेषकः


(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कुंज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज
दिल्ली-110092, मो. 9811051133 

नशे को ना, जिंदगी को हां: भंवरलाल गोठी स्कूल में गूंजा नशामुक्ति का संदेश

 ब्यावर: श्री वर्द्धमान शिक्षण समिति द्वारा संचालित भंवरलाल गोठी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ब्यावर में ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सहयोग से “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।


कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ एवं संस्कारयुक्त जीवनशैली अपनाने तथा समाज में नशामुक्ति का संदेश प्रसारित करने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, सकारात्मक सोच, आत्म-अनुशासन, राजयोग एवं स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में बी.के. विमला दीदी, बी.के. प्रीति दीदी, बी.के. मनीषा बहन, बी.के. पुष्पा बहन, बी.के. अशोक भाटी जी, बी.के. कमलेश एवं बी.के. रमेश ने सहभागिता की। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार, शिक्षा, कार्यक्षमता एवं सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रहकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।

इस अवसर पर वर्द्धमान परिवार की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया। वर्धमान परिवार ने कहा कि नशामुक्त भारत के संदेश को विद्यार्थियों एवं समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस प्रेरणादायक पहल के लिए विद्यालय स्टाफ एवं वर्द्धमान परिवार ने ब्रह्माकुमारीज संस्था के सभी सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए साधुवाद प्रेषित किया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री धर्मेंद्र कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहना और स्वस्थ, संस्कारयुक्त एवं सकारात्मक जीवन अपनाना प्रत्येक विद्यार्थी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा अपने परिवार, मित्रों एवं समाज के अन्य लोगों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करें।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने का संकल्प लेकर सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।

कार्यक्रम सकारात्मक, प्रेरणादायक एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों में नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा भी मिली।

उत्कृष्ट साहित्य सम्मान–2026 से सम्मानित हुए सैनिक कवि गणपत लाल उदय

 सैनिक सेवा के साथ साहित्य के क्षेत्र में निरंतर रचनात्मक योगदान देने वाले सैनिक कवि एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री गणपत लाल उदय को ABKMS Foundation द्वारा “उत्कृष्ट साहित्य सम्मान–2026” से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान “वतन के वास्ते जीना–वतन के वास्ते मरना” साझा काव्य-संकलन में उत्कृष्ट सृजन एवं रचनात्मक साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

           यह पुस्तक बुक्सक्लिनिक पब्लिशिंग, बिलासपुर (छत्तीसगढ़), भारत द्वारा प्रकाशित की गई है। प्रकाशन संस्था का मुख्य उद्देश्य लेखकों को सशक्त बनाना तथा पाठकों को प्रेरित करना है। पुस्तक में कुल 143 पृष्ठ हैं, जिसमें 70 रचनाकारों के परिचय एवं उनकी कविताओं को स्थान दिया गया है। पुस्तक का SKU कोड 2752 तथा ISBN 978-93-7254-462-6 है।
       पुस्तक का कवर डिज़ाइन आर्यन धीवर तथा आंतरिक सज्जा लव थवेट द्वारा की गई है। पुस्तक के अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। बुक्सक्लिनिक पब्लिशिंग वैश्विक स्तर पर 20 लाख से अधिक पाठकों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित होने की बात कहता है। पुस्तक में व्यक्त विचार संबंधित लेखकों के निजी विचार हैं।
              पुस्तक के सफल प्रकाशन एवं विमोचन के लिए आदरणीय अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हार्दिक शुभकामना संदेश पुस्तक के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित किया गया है।
        सैनिक सेवा के साथ साहित्य-सृजन में सक्रिय गणपत लाल उदय देशभक्ति, सैनिक जीवन, सामाजिक सरोकार एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े विषयों पर निरंतर लेखन करते रहे हैं। “उत्कृष्ट साहित्य सम्मान–2026” से सम्मानित होना उनके साहित्यिक एवं रचनात्मक सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सैनिक कवि एवं साहित्यकार
गणपत लाल उदय अरांई, अजमेर, राजस्थान

आदर्श आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करें- श्री लोकबन्धु

 जिला निर्वाचन अधिकारी ने ली चुनाव से सम्बन्धित समस्त प्रकोष्ठों की बैठक

निकाय क्षेत्र से रवाना होंगे मतदान दल, जल्द होगा रेण्डमाइजेशन

सभी अधिकारी कार्ययोजना का कैलेण्डर व चैक लिस्ट बनाएं

टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समयावधि में पूरी करें

जोनल व एरिया मजिस्ट्रेट नियुक्त कर जिम्मेदारी दें


अजमेर, 20 अगस्त। जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोक बन्धु ने स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए है कि आगामी दिनों में सम्पन्न होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में आदर्श आचार संहिता की अक्षरशः पालन सुनिश्चित की जाए। सभी प्रकोष्ठ अपने को आवंटित कार्य का कैलेंडर व चैक लिस्ट बनाएं। टेंडर की प्रक्रिया निर्धारित समयावधि में पूरी कर ली जाए। जोनल व एरिया मजिस्ट्रेटों की नियुक्त कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाए।

जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोक बन्धु ने गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभागार में चुनाव से जुड़े सभी प्रकोष्ठों के प्रभारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में अजमेर जिले के सभी निकायों में चुनाव होने हैं। सभी प्रकोष्ठ अपने से सम्बन्धित तैयारियां समय पर पूरी कर लें।

उन्होंने कहा कि सभी प्रकोष्ठ कामकाज का कैलेंडर बनाएं। चैकलिस्ट तैयार करें और टेंडर आदि प्रक्रिया करें। उन्होंने निर्वाचन शाखा को निर्देश दिए कि राज्य निर्वाचन आयोग से समन्वय, पत्राचार, मतदान केंद्रों की सूची के प्रकाशन, आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं के सत्यापन और चुनाव बैठकों में आयोजन का कार्य किया जाए। इसी प्रकार संस्थापन प्रकोष्ठ कार्मिकों की नियुक्ति आदेश जारी करने, मतगणना कार्मिकों की सूची पास-बैजेज प्रकोष्ठ को भेजने आदि का कार्य करे।

ईवीएम एवं मतपेटी प्रकोष्ठ ईवीएम/मतपेटियों की प्राप्ति, प्रथम स्तरीय जांच, रेंडमाइजेशन, मास्टर डेटा अपडेट, तैयारी, वितरण और संग्रहण सुनिश्चित करेगा। इसी प्रकार जिला निर्वाचन स्टोर प्रकोष्ठ सामग्री के रिकॉर्ड संधारण, वितरण तथा सेक्टर मजिस्ट्रेटों व मतदान दलों को सामग्री आवंटन का कार्य संभालेंगे।

इसी प्रकार शिकायत निवारण व मतदाता हेल्पलाइन (नियंत्रण कक्ष) प्रकोष्ठ द्वारा चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष का संचालन, डाक प्राप्ति, चुनाव दिवस की सूचना संकलन, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और वीडियोग्राफी समन्वय का कार्य किया जाएगा। आदर्श आचार संहिता प्रकोष्ठ द्वारा आचार संहिता की दैनिक मॉनिटरिंग, बैठकों के आयोजन, उल्लंघन शिकायतों के कंप्यूटर इंद्राज और राज्य निर्वाचन आयोग को दैनिक रिपोर्ट प्रेषण का कार्य किया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि मतदान एवं मतगणना दल गठन प्रकोष्ठ द्वारा मतदान, होम वोटिंग, सुविधा केंद्र व मतगणना दलों के रेंडमाइजेशन, फोटोयुक्त पहचान पत्र निर्माण तथा समय पर रवानगी का कार्य किया जाएगा। इसी प्रकार कानून व्यवस्था, सिक्योरिटी प्लान प्रकोष्ठ द्वारा एरिया व जोनल मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, संवेदनशील बूथों का चिन्हीकरण, कार्यपालक दण्डनायक शक्तियों का आवंटन, डिस्ट्रिक्ट सिक्योरिटी डिप्लॉयमेंट प्लान तैयार करने और लाइसेंसी हथियार जमा कराने की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने लेखा एवं निविदा प्रकोष्ठ, मतदान सामग्री प्रकोष्ठ, अल्पाहार व भोजन एवं रसद व्यवस्था प्रकोष्ठ, अभ्यर्थियों का निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण प्रकोष्ठ, सरकारी एवं निजी वाहन अधिग्रहण एवं यातायात व्यवस्था प्रकोष्ठ, सामान्य व्यवस्था प्रकोष्ठ, मतगणना स्थल चयन, स्ट्रॉन्ग रूम व व्यवस्था प्रकोष्ठ, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मतपत्र एवं मुद्रण प्रकोष्ठ, डाक मतपत्र एवं ईडीसी प्रकोष्ठ, चुनाव पर्यवेक्षक प्रकोष्ठ, सांख्यिकी प्रकोष्ठ, मीडिया एवं निर्वाचन निर्देशिका मुद्रण प्रकोष्ठ, कंप्यूटर, साइबर सिक्योरिटी एवं आई.टी. प्रकोष्ठ, भुगतान (भत्ता व वाहन किराया) प्रकोष्ठ, तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था प्रकोष्ठ, पास-बैजेज, आवास एवं साफ-सफाई प्रकोष्ठ, एकल खिड़की प्रकोष्ठ, स्वीप प्रकोष्ठ, मतदाता सूची एवं रूट चार्ट प्रकोष्ठ, कार्मिक कल्याण प्रकोष्ठ, विशेष योग्यजन प्रकोष्ठ, पंचायत क्षेत्र स्तर व्यवस्था व एआरओ संबंधी कार्य प्रकोष्ठ को निर्देश दिए कि वे अपने से सम्बन्धित प्रकोष्ठ का कार्य समय पर सम्पादित करें।

बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री हर्षवर्धन अगरवाला, जिला परिषद के सीईओ श्री राम प्रकाश, उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अभिषेक गोयल सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के अधिकारी उपस्थित रहे।