शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

इधर उधर की

 क्यों सिंधी सिंधी करते हैं?

हाल ही महावीर सर्किल पर अतिक्रमण हटाए गए। इस पर एक प्रतिक्रिया खूब वायरल है। वो यह कि ब्राह्मण समाज ब्राह्मण के साथ, लेकिन जूस वाले सिंधी के साथ सिंधी समाज अभी तक सामने नहीं आये, फिर क्यों सिंधी सिंधी करते हैं आप, बंद करो ये सिंधी होने का नाटक, दुख में सिंधी का साथ नहीं देते और सिन्धुत्व की बात करते हैं सब।


क्योंकि हम शिक्षक हैं

बरसात व बाढ की आषंका को देखते हुए स्कूलों में दो दिन छुट्टी घोशित की गई, मगर अध्यापकों व स्टाफ को स्कूल जाना होगा। उनकी छुट्टी नहीं है। इस पर अध्यापिका व अजयमेरू प्रेस क्लब की पूर्व महासचिव सुश्री सुमन शर्मा ने अध्यापकों के दर्द को बयां करते हुए एक बहुत मार्मिक पोस्ट साझा की है। आप भी देखिएः- 


क्योंकि हम शिक्षक हैं

हम हर जोखिम उठा सकते हैं, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

अधिकारों की बात हम नहीं कर सकते, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

कर्तव्य सभी पूरे करने होंगे, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हम समाज के प्रति कृतसंकल्प हैं, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हमारा वजूद रहे ना रहे, हमें औरों को बचाना होगा, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

आपदा की हकीकत को समझना होगा, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हमारा घर परिवार बच्चे कहां, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हम फौलाद के बने हैं, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हमें सर्दी नहीं लगती क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हमारे घरों में पानी नहीं भरता क्योंकि हम शिक्षक हैं।

सैलाब भी हमें क्या डुबोएगा, हम तो शिक्षक हैं।

हमें चुप रहना है, क्योंकि हम शिक्षक हैं।

हमारी इतनी ही अहमियत है कि हम मात्र शिक्षक हैं।

जिला-प्रशासन भी वाकिफ है कि हम मात्र शिक्षक हैं।

हमारी सुरक्षा जरूरी नहीं, क्योंकि हम मात्र शिक्षक हैं।


आपदा को अवसर बना कर बेवजह कटाक्ष

बरसात की आपदा को लेकर एक ओर जहां कुछ लोग विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर तंज कस रहे हैं, वहीं चर्चित भाजपा कार्यकर्ता पुश्पेन्द्र सिंह ने देवनानी की तरफदारी करते हुए एक पोस्ट साझा की है। प्रस्तुत है उसका संक्षिप्त रूपः-

आपदा को अवसर बनाकर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष व अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी पर बेवजह कटाक्ष की राजनीति सिर्फ ईष्या, द्वेष व अहंकार का अभिमान मात्र है। जनता को भाजपा के प्रति गुमराह करने की एक स्क्रिप्ट बनाई गई है। और यह सब कब हो रहा है, जब अजमेर में विकास को गति मिलने वाली है। मौके को भुनाने की कोशिश जलकुंभी को लेकर भी की गई थी। मौके को भुनाने के लिए राजनीति करने के लिए कुछ लोग निकल चले भाजपा शासन-प्रशासन पर कलंक लगाने के लिए। पर सारे मंसूबों पर पानी फेरते हुए देवनानी ने शासन और प्रशासन के साथ मिल कर  आनासागर पर आई विपदा पर बड़ी सूझबूझ और निष्ठा के साथ विजय हासिल कर आनासागर के प्राण बचाए।

एक बात पूछना चाहता हूं आपने चिंता की आड़ लेकर रोष प्रदर्शन तो कर दिया पर क्या समस्या का समाधान हो जाने पर एक धन्यवाद तक नहीं दिया।

अध्यापकों को छुट्टी न देना उचित या अनुचित?

अत्यधिक बरसात व बाढ की आशंका के मद्देनजर 7 व 8 सितंबर को सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। यह स्कूलों के अध्यापकों व कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। इसको लेकर अध्यापकों में नाराजगी है कि सरकार को बच्चों की सुरक्षा की तो चिंता है, मगर अध्यापकों की नहीं। उनकी बात तर्कपूर्ण लगती है, मगर दूसरी ओर अधिकारी वर्ग से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि स्कूलों में छुट्टी बच्चों की सुरक्षा के लिए ज्यादा जरूरी है। अध्यापकों का छुट्टी की अपेक्षा करना उचित नहीं है, क्योंकि अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी छुट्टी नहीं दी गई है। आपदा के समय में सभी कर्मचारियों को मुस्तैद रखना जरूरी है। किसी संकट के वक्त उन्हें आपदा प्रबंधन में लगाया जा सकता है। इस आदेश में शनिवार 7 सितंबर की छुट्टी करना तो ठीक है, मगर जब रविवार 8 सितंबर की छुट्टी है ही, तो उस दिन छुट्टी का आदेश अटपटा प्रतीत होता है। आदेश में एक दिलचस्प तथ्य नजर आता है। वो यह कि अगर कोई संस्था प्रधान छुट्टी के दिन संस्था का संचालन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इससे ऐसा परिलक्षित होता है कि इस प्रकार की व्यवस्था की अवहेलना होती रही है, इसी कारण खास तौर पर चेतावनी जारी की गई है। यह सही भी है। अब तक ऐसा अनुभव रहा है कि अनेक स्कूलें इस प्रकार की व्यवस्था का उल्लंधन करती रही हैं।