एक वक्त था जब पलाड़ा अजमेर में आए तो जिले में पहले से जमे हुए भाजपा नेताओं की कोशिश यही रहती थी कि उन्हें किसी भी तरह से आगे न बढने दिया जाए। मगर लक्ष्य साधने में अर्जुन की माफिक एकाग्र पलाड़ा ने भी ठान रखी थी कि एक बार जो राजनीतिक यात्रा शुरू की है तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखना है। उन्होंने सबसे पहला धमाका तब किया जब पुष्कर विधानसभा सीट का टिकट न मिलने पर निर्दलीय खड़े हो कर तकरीबन तीस हजार वोट हासिल कर लिए और नतीजतन भाजपा के दिग्गज नेता रमजान खान हार गए। धुन के पक्के पलाड़ा ने तय कर लिया था कि राजनीति में अहम स्थान बनाना ही है। भाजपाइयों ने साथ नहीं दिया फिर भी अपने दम पर एकला चालो रे की तर्ज पर चलते रहे। एक बार अपने जन्मदिन पर जब उन्होंने राष्ट्र रक्षा संकल्प रैली निकाली, जिसमें जिलेभर से आए 25 हजार से अधिक देशभक्तों ने शिरकत की। अकेले उनके दम पर ही जब भारी भीड़ उमड़ी तो सभी चकित रह गए। इससे पूर्व 28 फरवरी, 2004 को राजपूत समाज में राजनीतिक चेतना जागृति के लिए विशाल रैली का आयोजन किया, जिसमें जिलेभर के 12 हजार समाज बंधुओं ने भाग लिया।
उनकी संगठन शक्ति को देख कर स्थानीय भाजपा नेता भी समझ गए थे कि इस आंधी को रोका नहीं जा सकेगा। स्थानीय भाजपा नेताओं को बड़ी तकलीफ होती थी कि यह शख्स आगे आया तो उनका वजूद खतरे में पड़ जाएगा। वे तो चाहते ही नहीं थे कि उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट मिले, मगर पार्टी के बड़े नेता जानते थे कि इस युवा नेता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा। उनको टिकट दिया गया और उनकी जीत भी सुनिश्चित थी, मगर भाजपा के बागी श्रवण सिंह रावत ने उनके विधानसभा जाने के मार्ग में बाधा डाल दी। इसके बाजवूद श्री पलाड़ा ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार सक्रिय बने रहे। फिर पत्नी को जिला प्रमुख बना कर ही दिखाया कि वे कुशल रणनीतिकार हैं। उन्होंने पहले से जमे हुए भूतपूर्व जलदाय मंत्री स्वर्गीय प्रो. सांवरलाल जाट, भूतपूर्व सांसद स्वर्गीय प्रो. रासासिंह रावत सरीखे अनेक ऐसे नेताओं के मुंह बंद कर दिए हैं, जो कि उनके नाम पर नाक-भौं सिकोड़ते थे। उसके बाद उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुशील कंवर पलाडा मसूदा की विधायक बनीं। तत्पश्चात एक बार फिर धर्मपत्नी को जिला प्रमुख बना कर उन्होंने साबित कर दिया कि वे राजनीति के कुशल रणनीतिकार हैं।
ऊर्जा से ओतप्रोत, क्रांतिकारी विचार, कुछ कर गुजरने का जज्बा और अद्भुत संगठन शक्ति के धनी पलाड़ा गरीबों व असहायों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। आध्यात्मिक विचारों से ओतप्रोत पलाड़ा की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वे पर्याप्त दमखम के बावजूद बिलकुल सहज हैं। पिछले कई वर्षों से शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो, जब उनके दर पर मदद को आया जरूरतमंद खाली हाथ लौटा हो। धर्म-कर्म में विशेष आस्था रखने वाले पलाड़ा अब तक अनेक शिव परिवार स्थापित कर चुके हैं। उनके मन हर वक्त दान-पुण्य करने की भावना रहती है। जैसे ही सर्दी बढ़ती है, वे निकल पड़ते हैं गरीब व जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र और भोजन सामग्री बांटने।
नागौर जिले के पलाड़ा गांव में स्वर्गीय श्री पीरू सिंह राठौड़ के घर 25 जून 1970 को जन्मे पलाड़ा ने स्नातक स्तर तक शिक्षा अर्जित की है। परम शिवभक्त पलाड़ा की व्यावसायिक फर्मों में शिव शक्ति रॉयल्टीज प्रा. लिमिटेड, शिव कृपा साल्ट्स इंडस्ट्रीज, शिव कृपा मार्बल्स, मकराना और ओम शिव शक्ति एसोसिएट्स, भंवर सिंह पैलेस शामिल हैं। समाजसेवा की भावना से उन्होंने प्रिंट व इलैक्ट्रोनिक मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा है और अजमेर में सांध्य दैनिक सरे-राह समाचार पत्र और सरे-राह न्यूज चौनल का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं।
राजपूत समाज में भी उन्होंने समाजसेवा के जरिए विशेष स्थान बनाया है। वे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, अजमेर के संभाग प्रभारी, राजपूत सामूहिक विवाह समिति, पुष्कर के संरक्षक, मेजर शैतानसिंह राजपूत छात्रावास व शिक्षण संस्थान, अजमेर के मुख्य संरक्षक, श्री क्षत्रिय प्रतिभा विकास व शोध संस्थान, अजमेर के संरक्षक सदस्य, राजपूत एकता मंच के सरंक्षक और राजपूत स्टूडेन्ट यूथ ऑर्गेनाइजेशन, राजस्थान के प्रधान संरक्षक हैं।
राजनीति के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। वे बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति, अजमेर के सदस्य, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के सीनेट सदस्य, भारत स्काउट एंड गाइड, अजमेर मंडल के उप प्रधान रहे हैं। पृथ्वीराज चौहान शिक्षण संस्थान, सॉफ्ट वालीबॉल एसोसिएशन, अजमेर, राजस्थान ताईक्वांडो एसोसिएशन, अजमेर और अजमेर जिला शूटिंग वालीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वे लायंस क्लब के सदस्य और युवा निर्माण सेना, युवा नवनिर्माण सेना और अजमेर जिला कोरियर एसोसिएशन के संरक्षक हैं।