मंगलवार, 6 जनवरी 2026
बहुत साल पहले मेरे पिताजी ने आरंभ किया था ऑनेस्टी स्टोर
हाल ही दैनिक भास्कर में एक खबर छपी है, जिसका षीर्शक है- स्कूल चला रहा है बिना दुकानदार के दुकान ताकि बच्चे ईमानदार बनें। इसमें बताया गया है कि पष्चिम बंगाल के बनगांव में एक ऐसी दुकान जहां सामान तो बिकते हैं, मगर दुकानदार नहीं होता। मुझे यह जानकारी आपसे साझा करते हुए गर्व होता है कि बहुत वर्श पहले मेरे पिताजी स्वर्गीय श्री टी सी तेजवानी ने डूंगरपुर जिले के पुनाली गांव में स्थित सेंकडरी स्कूल में इसी प्रकार की दुकान खोली थी। तब वे स्कूल में प्रधानाचार्य थे। मैं कक्षा छह में पढता था। पिताजी ने स्कूल के एक कमरे में स्टेषनरी की एक दुकान खोली थी। दीवार पर स्टेषनरी की हर वस्तु की रेटलिस्ट चस्पा थी। साथ में एक बॉक्स रखा था। दुकान की देखरेख कोर्इ्र नहीं करता था। बच्चों को जो भी वस्तु चाहिए होती थी, वे उसे ले लेते थे और रेट लिस्ट में लिखी राष्ज्ञि बॉक्स में डाल देते थे। हर सप्ताह बिकी हुई वस्तुओं और बॉक्स में जमा राष्ज्ञि का मिलान किया जाता था। कभी कोई गडबडी नहीं हुई। यानि बच्चे सामान लेते समय पूरी ईमानदारी बरतते थे। इससे एक तो उन्हें स्टेषनरी उचित दर पर मिलती थी, दूसरा उनमें ईमानदारी का गुण विकसित होता था। आज जब भास्कर में छपी खबर पढी तो यकायक ख्याल आ गया कि मेरे पिताजी ने कितने साल पहले इस प्रकार का सफल प्रयोग किया था।
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