गुरुवार, 22 जनवरी 2026

वार्डों के आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव हो

स्वामी न्यूज की ओर से नगर निगम के वार्डों में पार्शदों का रिपोर्ट कार्ड लिए जाने के दौरान एक विचार निकल कर आया है। वो यह कि वार्डों में विभिन्न वर्गों की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण होना चाहिए। असल में हर बार लॉटरी के जरिए विभिन्न वर्गों का आरक्षण निर्धारित किए जाने की वजह से पार्शद पूरी षिद्दत के साथ विकास कार्य करने में रूचि नहीं लेते, क्योंकि उन्हें आषंका होती है कि अगली बार उन्हें मौका नहीं मिलेगा। अगर विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए वार्डवार जनसंख्या के आधार पर आरक्षण फिक्स किया जाए तो इससे निर्वाचित पार्शद इस उम्मीद में बेहतर से बेहतर काम करवाएगा,  कि उसे दुबारा मौका मिलेगा। इससे विकास कार्य और अधिक होंगे। ज्ञातव्य है कि जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था विधानसभा चुनाव में है। इस कारण निर्वाचित विधायक पूरी ईमानदारी से काम करवाते हैं, क्यांें कि उन्हें अगली बार फिर चुनाव लडने की उम्मीद होती है। अजमेर की ही बात करें तो यहां जनता दोनों विधायकों के काम से संतुश्ट हो कर उन्हें लगातार जितवा रही है। रहा सवाल महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का तो इसकी जिम्मेदारी या तो राजनीतिक दलों पर आयद की जाए, या फिर उसकी लॉटरी निकाली जाए।


मंगलवार, 20 जनवरी 2026

एसआईआर विवाद पर मुस्लिम नेता खुश भी

एक ओर जहां एसआईआर के दौरान नाम कटवाये जाने की कवायद का आरोप लगाते हुए मुस्लिम नेता मुखर हैं, वहीं उनमें से कुछ इसे सकारात्मक दृश्टि से भी देख रहे हैं और कथित रूप से खुष्ज्ञ भी हैं कि इस बहाने कौम में जागृति तो आएगी। इस सिलसिले में एक मुस्लिम नेता से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि नाम कटवाने की षिकायतें सामने नहीं आतीं तो कदाचित समाज के लोग जागरूक नहीं होते। उनका मानना है कि चूंकि समाज के जागरूक कार्यकर्ता आपत्तियों का प्रतिकार करने में जुटे हैं, इस कारण यकायक जागृति भी आ रही है। इसका लाभ यह होगा कि अब उनका मतदान प्रतिषत बढ सकता है। जाहिर जो लोग अपना नाम कटने से बचाने मे कामयाब होंगे, कम से कम वे तो वोट डालेंगे ही। साथ ही अन्य भी मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वस्तुतः अफवाह के चलते एक आषंका यह फैल रही है कि यदि वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो आगे चल कर नागरिकता की समस्या आ सकती है। इस कारण वे अपना नाम बचाने में जुट गए हैं। ज्ञातव्य है कि मतदान के प्रति रूचि कम होने के कारण मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदान प्रतिषत अपेक्षाकृत कम रहता है। जागरूकता के अभाव में वे इस बात की परवाह ही नहंी करते थे कि उनका वोट बेकार हो रहा है। लेकिन अगर जागरूकता आई तो मतदान प्रतिषत में इजाफा होगा।


सोमवार, 19 जनवरी 2026

जिंदादिल डॉ. वाई. के. खन्ना का देहावसान

ब्यावर स्थित प्रसिद्ध जेएमडी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के संस्थापक, प्रसिद्ध सर्जन और क्रिकेट प्रशिक्षक डॉक्टर वाई. के. खन्ना का गत 18 जनवरी 2026 को देहावसान हो गया। पाइल्स के ऑपरेशन में उनको विशेषज्ञता हासिल थी। यह ऑपरेशन करवाने के लिए दूर-दूर के मरीज उनके यहां आते रहे। वे बहुत जिंदादिन इंसान थे। एनर्जी से लबरेज। चेहरे पर सदैव स्मित मुस्कार सबको आकर्षित करती थी। खासकर मरीज उनको निकट पा कर सूकून पाते थे। खेलों में उनकी बहुत दिलचस्पी थी। उन्होंने ब्यावर में दो बार राष्ट्रीय स्तर का डे-नाइट किक्रेट टूर्नामेंट कराया तथा हरभजन, विनोद काम्बले, गगन खोडा जैसे कई धुरंधर खिलाडियों को ब्यावर बुलाकर क्रिकेट खिलाकर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया। उनका जन्म 18 जुलाई 1956 को श्री वी.पी. खन्ना के घर हुआ। उन्होंने एम.एम.बी.एस. व एम.एस.(जनरल सर्जरी) की डिग्रियां हासिल की। आरंभ उन्होंने सरकारी नौकरी की, फिर जल्द ही अपना निजी हॉस्पीटल आरंभ किया, जिसने बहुत लोकप्रियता हासिल की। उनकी धर्मपत्नी डॉक्टर आशा खन्ना ने चिकित्सकीय क्षेत्र में उनका आजीवन साथ निभाया। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल डॉक्टर खन्ना के निधन पर अश्रुपूतिर श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

रविवार, 18 जनवरी 2026

एसआईआर के शोर का फायदा बीजेपी को

इन दिनों एसआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस चौडे धाडे आरोप लगा रही है कि सरकार द्वारा नियुक्त बी.एल.ओ. द्वारा फर्जी आपत्तियों की पुष्टि किये बगैर व पार्टी बी.एल.ए. के फर्जी हस्ताक्षरों द्वारा कूटरचित षिकायतों के आधार पर अल्पसंख्यकों व कांग्रेस विचाधारा के मतदाताओं के नाम हटाये जा रहे हैं, जो कि लोकतंत्र व मतदान प्रक्रिया के विरूद्ध है। इसी तरह का आरोप मुस्लिम एकता मंच ने भी लगाया है। मोटे तौर पर यही निहितार्थ निकल रहा है कि अल्पसंख्यकों के वोट बडे पैमाने पर कटवाने की कवायद चल रही है। विपक्ष के नाते कांग्रेस का विरोध प्रदर्षन उसकी मजबूरी है, मगर भाजपाई मन नही मन खुष्ज्ञ हैं कि कांग्रेस जितनी जोर से विरोध करेगी, मतदाताओं का धु्रवीकरण उतना अधिक होगा और उसका लाभ सीधे तौर पर भाजपा को होगा। ज्ञातव्य है कि अजमेर अति संवेदनषील है। यदाकदा ऐसे मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं, जिससे मतदाताओं का पोलराइजेषन हो। हालांकि ऐसे प्रयासों को कम ही सफलता मिल पाई है, और उसकी वजह है अजमेर का भाईचारे वाला मिजाज। आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय यहां अषांति नहीं चाहता। फिर भी ताजा एसआईआर विवाद से मतदाताओं के धु्रवीकरण का खतरा तो बना ही हुआ है। देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस कटने जा रहे नामों को कितना बचा पाती है, मगर धरातल पर काम करने की बजाय कोरी बयानबाजी और कोरा षोर मचाया तो उसका उलटा नुकसान हो सकता है।


पायलट की चादर पर कौतुहल बरकरार

पिछले दिनों उर्स के दौरान पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से ख्वाजा साहब की मजार षरीफ पर चादर चढाई गई, मगर आज तक उजागर नहीं हो पाया है कि नागौर जिले के जो युवा कांग्रेसी नेता चादर ले कर आए थे, वह क्या पायलट ने भेजी थी या फिर उन्होंने पायलट को खुष्ज्ञ करने के लिए अपनी ओर से ही चादर चढा दी? इस सवाल से भी बडा सवाल यह है कि क्या वजह रही कि चादर चढाए जाने के दौरान अजमेर के स्थानीय पायलट समर्थक महेन्द्र सिंह रलावता, हेमंत भाटी व विजय जैन को सूचित करना ही उचित नहीं समझा? इससे इस बात का अंदाजा लगता है कि नागौर के नेता ने अपने स्तर पर ही चादर चढाई थी। स्थानीय नेताओं को सूचित इसलिए नहीं किया क्योंकि वे नहंीं चाहते थे कि वे हाईलाइट हो जाएं। अकेले क्रेडिट लेना चाहते थे। यह वाकया वाकई चौंकाता है कि पायलट की ओर से चादर चढे और उनके समर्थकों को हवा तक न लगे। एक सवाल और उठता है कि इस बार पायलट ने अपनी ओर से चादर क्यों नहीं भेजी? हालांकि इस बात की संभावना कम है कि पायलट ने ही चादर भेजी हो, मगर यदि यह सही है तो स्थानीय राजनीति के लिहाज से गहरे निहितार्थ निकलते हैं।


शनिवार, 17 जनवरी 2026

संदीप धाभाई वार्ड एक में भाजपा टिकट के दावेदार

आसन्न अजमेर नगर निगम चुनाव की तिथियां घोशित होना बाकी है, मगर सियासी सरसराहट आरंभ हो चुकी है। हालांकि वार्डों में आरक्षण की लॉटरी निकलना षेश है, इस कारण अभी यह तय नहीं है कि कौन से वार्ड की स्थिति क्या होगी, मगर दावेदार कयास व संभावनाओं के आधार पर जमीन पर सक्रिय हो गए हैं। इसी सिलसिले में कानाफूसी है कि वार्ड एक में भाजपा की ओर से नए दावेदार के रूप में एडवोकेट संदीप धाभाई उभर कर आ रहे हैं। यूं यहां पहले से दो प्रबल दावेदार मौजूद हैं। पूर्व पार्शद संतीष्ज्ञ बंसल व मनोज जैन मित्तल। बंसल पिछली बार सजातीय व कांग्रेस के बागी षैलेन्द्र अग्रवाल की वजह से पराजित हो गए थे, मगर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से नजदीकी की वजह से अब भी दमखम रखते हैं। समझा जाता है कि अगर उनकी प्रबल इच्छा हुई तो टिकट हासिल करने में उन्हें दिक्कत नहीं आएगी। इसी प्रकार मित्तल भी अपने कनैक्षन के जरिए दावेदारी कायम रखे हुए हैं। इस बीच हरिभाउ उपाध्याय नगर विस्तार विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट संदीप धाभाई समाजसेवक के रूप में अतिरिक्त सक्रियता के चलते दावेदार के तौर पर गिने जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में कांग्रेस से जुडे रहे, मगर अब उनके अधिसंख्य साथी भाजपा मानसिकता के हैं। अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्होंने देवनानी से अपनी नजदीकी स्थापित की है। साफ सुथरे, सहज सुलभ व सरल हैं, इस कारण क्षेत्र में लोकप्रिय हैं। अगर संघ की अनुकूलता रही तो टिकट हासिल कर भी सकते हैं।


रविवार, 11 जनवरी 2026

प्रमुख समाजसेवी श्री मनोहर मोटवानी का देहावसान

अजमेर। प्रमुख समाजसेवी श्री मनोहर मोटवानी अब हमारे बीच नहीं रहे। व्यवसाय के क्षेत्र में तो उन्होंने प्रतिष्ठा पाई ही, समाजसेवा के लिए भी सतत समर्पित रहते थे। सिंध के नौशहरो नवाबशाह के निवासी श्री भगवान दास मोटवानी के सुपुत्र श्री मनोहर मोटवानी का जन्म 13 फरवरी 1960 को अजमेर में हुआ। उन्होंने 1975 में डीएवी स्कूल से दसवीं की पढाई की। पढाई के बाद व्यवसाय में जुट गए। केसरगंज में मनोहर ऑटोमोबाइल का काम किया। बाद में व्यापार बढा कर परबतपुरा चौराहा पर आरंभ किया। 1998 में ट्रक-ट्रेलर बॉडी निर्माण आरंभ किया। इसके बाद ग्रेनाइट कटिंग मशीन बनाना आरंभ किया। वे समाजसेवा में सदैव अग्रणी रहे। मधुर व्यवहार की वजह से वे लोकप्रिय थे। वे स्वभाव से जज्बाती थे। उनकी कमी समाज को सदा खलती रहेगी। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।


बुधवार, 7 जनवरी 2026

दैदीप्यमान नक्षत्र प्रो. राम जैसवाल का अवसान

अजमेर। शब्द, रेखा और रंग की साधना में जीवन अर्पित करने वाले प्रो. राम जैसवाल आज अनंत की यात्रा पर प्रस्थान कर गए। राजस्थान के साहित्य और कला आकाश का यह दैदीप्यमान नक्षत्र भौतिक रूप से भले ही ओझल हो गया हो, किंतु उसकी उजास आने वाली पीढ़ियों के रचनात्मक पथ को सदैव आलोकित करती रहेगी।

लगभग नब्बे वर्षों तक उन्होंने कहानी और कविता में संवेदना के रंग भरे और चित्रकला में मौन को बोलता बनाया। यदि उन्हें राजस्थान में कला शिक्षा का भीष्म पितामह कहा जाए, तो यह श्रद्धा का अलंकार मात्र नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक सत्य है। दयानंद महाविद्यालय के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग में उन्होंने दशकों तक न केवल कलाकार गढ़े, बल्कि मनुष्यता, अनुशासन और सौंदर्यबोध की परंपरा भी सौंप दी।

सरलता उनका स्वभाव थी और सहजता उनकी पहचान। बड़े कद के बावजूद वे सदैव विनम्र रहे—शायद इसीलिए इतने अपने थे। उनके शब्दों में गुरु की करुणा थी और उनकी रेखाओं में साधक का मौन।

आज कला-जगत ने एक प्रकाशस्तंभ खो दिया है, पर उनकी सृजन-यात्रा विरासत बनकर हमारे बीच जीवित रहेगी।

अजमेरनामा न्यूज पोर्टल इस महान सर्जक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

बहुत साल पहले मेरे पिताजी ने आरंभ किया था ऑनेस्टी स्टोर

 हाल ही दैनिक भास्कर में एक खबर छपी है, जिसका षीर्शक है- स्कूल चला रहा है बिना दुकानदार के दुकान ताकि बच्चे ईमानदार बनें। इसमें बताया गया है कि पष्चिम बंगाल के बनगांव में एक ऐसी दुकान जहां सामान तो बिकते हैं, मगर दुकानदार नहीं होता। मुझे यह जानकारी आपसे साझा करते हुए गर्व होता है कि बहुत वर्श पहले मेरे पिताजी स्वर्गीय श्री टी सी तेजवानी ने डूंगरपुर जिले के पुनाली गांव में स्थित सेंकडरी स्कूल में इसी प्रकार की दुकान खोली थी। तब वे स्कूल में प्रधानाचार्य थे। मैं कक्षा छह में पढता था। पिताजी ने स्कूल के एक कमरे में स्टेषनरी की एक दुकान खोली थी। दीवार पर स्टेषनरी की हर वस्तु की रेटलिस्ट चस्पा थी। साथ में एक बॉक्स रखा था। दुकान की देखरेख कोर्इ्र नहीं करता था। बच्चों को जो भी वस्तु चाहिए होती थी, वे उसे ले लेते थे और रेट लिस्ट में लिखी राष्ज्ञि बॉक्स में डाल देते थे। हर सप्ताह बिकी हुई वस्तुओं और बॉक्स में जमा राष्ज्ञि का मिलान किया जाता था। कभी कोई गडबडी नहीं हुई। यानि बच्चे सामान लेते समय पूरी ईमानदारी बरतते थे। इससे एक तो उन्हें स्टेषनरी उचित दर पर मिलती थी, दूसरा उनमें ईमानदारी का गुण विकसित होता था। आज जब भास्कर में छपी खबर पढी तो यकायक ख्याल आ गया कि मेरे पिताजी ने कितने साल पहले इस प्रकार का सफल प्रयोग किया था।