इनमें अव्वल है भाजपा नेता औंकार सिंह लखावत, जो खुद भी एक समय में पत्रकारिता कर चुके हैं। वे हिंदुस्तान समाचार न्यूज एजेंसी के लिए काम करते थे। उनके पत्रकारों से मधुर संबंध रहे हैं। लेकिन दिलचस्प बात है कि जब वे अजमेर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने न्यास में स्वछंद विचरण करने वाले पत्रकारों पर अंकुष लगा दिया था। उन्होंने पत्रकारों को रियायती दर पर भूखंड देने की कवायद की थी, मगर जब लगा कि इसको लेकर बहुत फंफूद होगी तो फाइल दफ्तर दाखिल कर दी। बाद में दैनिक नवज्योति के प्रधान संपादक दीनबंधु चौधरी के प्रयासों से तत्कालीन मुख्यमंत्री अषोक गहलोत ने पत्रकारों को पट्टे बांटे थे। कम लोगों को ही पता होगा कि अजमेर में भास्कर का प्रकाषन करवाने में लखावत की भूमिका रही है।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के तो कई पत्रकार मुरीद हैं। कुछ पत्रकार, जो पहले उनके विरोध में समाचार छापा करते थे, वे अब उनके गुणगान करते हैं। उनका प्रदेष स्तरीय पत्रकारों पर खासा प्रभाव है।
अजमेर नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष व पुश्कर के कांग्रेस विधायक डॉ श्रीगोपाल बोहती भी पत्रकारों से मित्रता रखते आए हैं। उनकी जाफरी में तो पत्रकारों की खूब आवाजाही रहती थी। हालांकि उनकी पत्रकारों से दोस्ती रही, मगर कभी छपास के रोगी नहीं हुए। इस कारण जब भी कोई विज्ञप्ति जारी करते थे, तो वह प्राथमिकता से छपती थी।
अजमेर नगर परिशद के भूतपूर्व सभापति स्वर्गीय श्री वीर कुमार तो पत्रकारों से गहरी दोस्ती रखा करते थे। रोजाना षाम चार बजे उनके दफ्तर में चाय-नाष्ते पर पत्रकार जुटा करते थे। पत्रकारों से ट्यूनिंग सबसे बडी मिसाल यह रही कि जब परिशद ने फन एंड फूड को ध्वस्त किया तो दूसरे दिन अखबारों यह छपा कि फन एंड फूड अज्ञात परिस्थियों में स्वतः धराषायी हो गया।
अजमेर नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष धर्मेष जैन पत्रकारों से मधुर संबंध रखते आए हैं। पत्रकारों ने उसका लाभ भी उठाया। लेकिन कई बार ऐसा भी प्रतीत हुआ कि अखबार उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं किया। दिलचस्प बात है कि उनकी इच्छा थी कि दैनिक समाचार पत्र आरंभ किया जाए, मगर उचित टीम नहीं मिलने के कारण उन्होंने विचार त्याग दिया।
कांग्रेस नेता हाजी कयूम खान, महेन्द्र सिंह रलावता, बाबूलाल सिंगारिया, महेष ओझा, कैलाष झालीवाल आदि की पत्रकारों से गहरी दोस्ती रही है। झालीवाल का मदारगेट स्थित आफिस लंबे समय से पत्रकारों का ठीया रहा है।
कांग्रेस नेता राजेष टंडन भी पत्रकारों से सहयोग लेकर अजमेर के हितों के लिए कई ज्वलंत मुद्दों को उठाते रहे हैं। भास्कर प्रबंधन से उनके मधुर संबंध रहे हैं।
अजमेर नगर परिशद के पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह षेखावत पत्रकारों से व्यक्तिगत दोस्ती रखते आए हैं। पत्रकारिता में रूचि के चलते उन्होंने न्यूज चैनल भी आरंभ किया। इसी क्रम में भूतपूर्व उपमंत्री स्वर्गीय श्री ललित भाटी का ख्याल आता है, जिन्होंने रोजमेल अखबार निकाला था। मस्तमौला कांग्रेस नेता हेमंत भाटी के भी पत्रकारों से मुधर संबंध रहे हैं, मगर वे अपनी सामाजिक गतिविधियों के समाचार प्रकाषित करवाने का आग्रह कम ही करते हैं। उनके संरक्षण में यूट्यूब चैनल आरंभ हुआ था, मगर तकनीकी गडबडी के चलते वह बंद हो गया। भूतपूर्व काबीना मंत्री स्वर्गीय श्री किषन मोटवानी, हाजी कयूम खान, बाबूलाल सिंगारियां, महेष ओझा आदि नेताओं ने भी अखबार प्रकाषित किए हैं।
अजमेर षहर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल अपने सहज सरल स्वभाव के चलते पत्रकारों के प्रिय हैं। यारबाज टाइप के पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिया पत्रकारों से दोस्ती रखते हैं। जब वे जिला प्रमुख थे, तब उनके दफ्तर में खबरनवीसों का जमावडा लगा रहता था।
भाजपा नेता नीरज जैन भी पत्रकारों से दोस्ती रखते आए हैं। उनकी खासियत यह है कि वे प्रदेष स्तरीय पत्रकारों के साथ उठते-बैठते हैं।