बुधवार, 8 अक्टूबर 2025
कांग्रेस के स्तम्भ थे स्वर्गीय श्री कुलदीप कपूर
गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025
हरदिल अजीज थे खादिम जनाब अब्दुल बारी चिश्ती
सोमवार, 29 सितंबर 2025
साहित्य को समर्पित श्री उमेश चौरसिया
सेवानिवृत्ति के उपरांत और अधिक ऊर्जा से सरस्वती की सेवा का संकल्प
सुपरिचित साहित्यकार श्री उमेश चौरसिया 29 सितंबर 2025 को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हो गए। अजमेर के साहित्य जगत व रंगकर्मीय पटल पर सर्वाधिक सक्रिय व ऊर्जावान हस्ताक्षरों में से एक हैं श्री उमेश कुमार चौरसिया। साहित्य को समर्पित यह शख्स न केवल अपनी सुवास बिखेर रहा है, अपितु नवोदित लेखकों को भी पल्लवित व पुष्पित करने में जुटा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो, जबकि वे किसी न किसी साहित्यिक गतिविधि से न जुड़े हों।
कहते हैं न कि विद्या ददाति विनयम, ठीक उसी को चरितार्थ करती है उनके चेहरे पर पसरी विनम्रता। व्यवहार की सरलता, सहजता आपको तनिक भी अहसास नहीं होने देती कि भीतर एक गंभीर चिंतक व सृजनधर्मी का निवास है।
श्री चौरसिया ने अब तक 52 पुस्तकों का लेखन किया है। उन्हें अब तक अनेकानेक पुरस्कार मिल चुके हैं। गत दिवस जब उन्होंने सेवानिवृत्ति पर आयोजित समारोह के निमंत्रण दिया तो, मैने विनोद करते हुए कहा कि आप तो अभी जवान हैं, बोर्ड आपको सेवानिवृत्त कैसे कर रहा है? उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरी से सेवानिवृत्ति है, उन्हें अब और अधिक उर्जा से मां सरस्वती की सेवा करने का मौका मिलेगा। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनकी सृजनधर्मिता को प्रणाम करता है। साथ ही उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करता है।
सोमवार, 15 सितंबर 2025
क्या दोषी अफसरों को सजा मिल पाएगी?
जरा पीछे मुड कर देखें तो आपको ख्याल में आ जाएगा कि जिन दिनों सेवन वंडर्स का निर्माण आरंभ किया गया था, तब कई जागरूक लोगों ने ऐतराज जताया था कि आनासागर के किनारों का पाट कर इसका निर्माण करना गलत है। मीडिया ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई। बाकायदा फोटोज छापे, किनारे को मिट्टी से पाटते हुए। मगर जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी थीं। आनासागर का जल भराव क्षेत्र कम होने पर खूब चिंता जताई गई, जिसका नतीजा बाद में पूरे अजमेर ने भुगता, मगर संबंधित अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। किसी भी अधिकारी ने इन सवालों के जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। अचरज होता है कि नियम विरूद्ध हो रहे निर्माण को संज्ञान में लाए जाने को अफसरों ने नजरअंदाज क्यों कर किया? क्या किसी का दबाव था या निजी हित साधे जा रहे थे?
यह बेहद अफसोसनाक है कि कथित रूप से स्मार्ट किए जा रहे अजमेर का चेहरा चमकाने की बजाय, उस पर कालिख पोती जा रही है। अफसोस इस बात पर भी कि कुछ विघ्नसंतोशी सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व पार्शद अषोक मलिक पर तोहमत लगा रहे हैं कि एक तो अजमेर में वैसे ही विकास हो नहीं पाता, और जब होता है तो उन जैसे लोग उसे तुडवाने में लगे हुए हैं।
आज जब अजमेर की आत्मा आर्तनाद कर रही है कि तब क्या सरकार इस पर गौर करेगी? या फिर इसके लिए भी किसी सोशल एक्टिविस्ट को कोर्ट में गुहार लगानी पडेगी? राजनीति से जुडे लोगों को तो एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से ही फुरसत नहीं है। उनसे अपेक्षा करना बेमानी है। अब देखते हैं कि क्या दोषी अफसरों के गले नापे जाते हैं या नहीं। सिस्टम की जैसी रवायत है, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि लोगों की आवाजें नक्कारखाने में तूती की तरह दब जाएंगी। ऐसा लगता है कि फिर अधिकारियों को बचाने का कोई न कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा।
रविवार, 14 सितंबर 2025
जिंदादिल कांग्रेस नेता श्री हरीश मोतियानी नहीं रहे
उनका जन्म 12 जुलाई 1961 में हुआ। उन्होंने 1981 में राजकीय महाविद्यालय से बीकॉम की डिग्री हासिल की। विवाह 30 मई 1987 को हुआ। वे युवा अवस्था से ही कांग्रेस में अनेक पदों पर सक्रिय रहे। सन् 1990 से 1995 तक नगर निगम में पार्षद रहे। उनके पिताश्री स्वर्गीय वासदेव मोतियानी का स्याही का कारोबार था, जो मिनिस्टर इंक के नाम से प्रसिद्ध रहा। पिताश्री के निधन के बाद उन्होंने कारोबार संभाला। उन्होंने 1996 से स्टेश्नरी का होलसेल कारोबार आरंभ किया।