बुधवार, 8 अक्टूबर 2025

कांग्रेस के स्तम्भ थे स्वर्गीय श्री कुलदीप कपूर

अजमेर ने कांग्रेस के स्तम्भ, शहर जिला कांग्रेस के निवर्तमान उपाध्यक्ष श्री कुलदीप कपूर को खो दिया है। गत दिवस उनका देहावसान हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनकी गिनती वरिष्ठतम और बिंदास नेताओं में होती थी। किसी भी बैठक या धरना-प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी उनकी दबंग आवाज से दर्ज होती थी। जिंदादिली उनके मिजाज में शुमार थी। वे शहर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट श्री जसराज जयपाल के करीबी थे और उनकी कार्यकारिणी में महामंत्री व प्रवक्ता रहे। पूर्व विधायक डॉ राजकुमार जयपाल के साथ छाया की तरह दिखाई देते थे। कुछ साल पहले जब स्वर्गीय श्री कपूर गंभीर बीमार हुए थे, जब डॉ जयपाल ने उनके इलाज में अहम भूमिका अदा की थी। स्वर्गीय श्री कपूर जमीन से जुडे नेता थे। आम कार्यकर्ताओं से गर्मजोशी से मिला करते थे। शहर की ज्वलंत समस्याओं के निवारण के लिए सदैव तत्पर रहा करते थे। वयोवृद्ध होने के बाद भी उन्होंने श्री विजय जैन की कार्यकारिणी में बतौर उपाध्यक्ष सक्रियता दिखाई। पार्टी के हर कार्यक्रम में उपस्थिति जरूर दर्ज करवाते थे। महकते व्यक्तित्व के धनी स्वर्गीय श्री कपूर बेहतरीन परफ्यूम के शौकीन थे। उनका निधन अपूरणीय क्षति है। उन जैसे नेता विरले ही पैदा होते हैं। उनका अभाव न केवल कांग्रेस अपितु पूरे शहर को खलता रहेगा। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

हरदिल अजीज थे खादिम जनाब अब्दुल बारी चिश्ती

महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के खादिम व वरिष्ठ भाजपा नेता अब्दुल बारी चिश्ती अपने किस्म के अनूठे नेता थे। अत्यंत विनम्र जनाब बारी साहब गिनती की उन शख्सियतों शुमार थे, जिन्होंने परंपरा के विरूद्ध जा कर भाजपा से नाता जोडा। बावजूद इसके उनकी शख्सियत ऐसी थी कि पूरे खादिम समाज, मुस्लिमों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं में लोकप्रिय रहे। उन्होंने भाजपा की अनेक हस्तियों को दरगाह जियारत करवाई। उन्होंने साबित कर दिया कि खुद्दाम हजरात भले ही किसी भी राजनीतिक विचारधारा से जुडे हों, मगर उनके लिए ख्वाजा साहब के प्रति अकीदत अहम है। वे ख्वाजा साहब को चाहने वालों में कोई भेदभाव नहीं किया करते। उनका गत गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को इलाज के दौरान इंतकाल हो गया। 77 वर्षीय चिश्ती भारत सरकार द्वारा गठित दरगाह कमेटी के उपाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक गेगल पंचायत के सरपंच भी रहे। जनसंघ के समय से उनका भाजपा से जुड़ाव रहा। वे भाजपा अल्संख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी रहे। उन्हें गंज स्थित चिल्ले पर सुपुर्दे खाक किया गया। उनकी सोयम की फतेहा शनिवार दोपहर 2 बजे दरगाह शरीफ के अहाता ए नूर में होगी।


सोमवार, 29 सितंबर 2025

साहित्य को समर्पित श्री उमेश चौरसिया

सेवानिवृत्ति के उपरांत और अधिक ऊर्जा से सरस्वती की सेवा का संकल्प


सुपरिचित साहित्यकार श्री उमेश चौरसिया 29 सितंबर 2025 को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हो गए। अजमेर के साहित्य जगत व रंगकर्मीय पटल पर सर्वाधिक सक्रिय व ऊर्जावान हस्ताक्षरों में से एक हैं श्री उमेश कुमार चौरसिया। साहित्य को समर्पित यह शख्स न केवल अपनी सुवास बिखेर रहा है, अपितु नवोदित लेखकों को भी पल्लवित व पुष्पित करने में जुटा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो, जबकि वे किसी न किसी साहित्यिक गतिविधि से न जुड़े हों।

कहते हैं न कि विद्या ददाति विनयम, ठीक उसी को चरितार्थ करती है उनके चेहरे पर पसरी विनम्रता। व्यवहार की सरलता, सहजता आपको तनिक भी अहसास नहीं होने देती कि भीतर एक गंभीर चिंतक व सृजनधर्मी का निवास है।

श्री चौरसिया ने अब तक 52 पुस्तकों का लेखन किया है। उन्हें अब तक अनेकानेक पुरस्कार मिल चुके हैं। गत दिवस जब उन्होंने सेवानिवृत्ति पर आयोजित समारोह के निमंत्रण दिया तो, मैने विनोद करते हुए कहा कि आप तो अभी जवान हैं, बोर्ड आपको सेवानिवृत्त कैसे कर रहा है? उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरी से सेवानिवृत्ति है, उन्हें अब और अधिक उर्जा से मां सरस्वती की सेवा करने का मौका मिलेगा। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनकी सृजनधर्मिता को प्रणाम करता है। साथ ही उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करता है।

सोमवार, 15 सितंबर 2025

क्या दोषी अफसरों को सजा मिल पाएगी?

हाल ही जब आनासागर के किनारे को पाट कर बनाए गए सेवन वंडर्स को कोर्ट के आदेश से तोडने की कार्यवाही आरंभ हुई तो उस पर जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। मीडिया लगातार हेमरिंग कर रहा है। कई ब्लॉगर्स ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बुद्धिजीवी चीख चीख कर सरकार को नींद से जगाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन भी अधिकारियों की इसके निर्माण में अहम भूमिका रही, जिन्होंने नियमों की अवहेलना कर जानबूझ कर इसका निर्माण होने दिया, उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। जितना भी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई उन अधिकारियों से की जानी चाहिए। आम आदमी पार्टी की नेत्री श्रीमती कीर्ति पाठक ने तो सोशल मीडिया पर बाकायदा एक अधिकारी का नाम लेकर बताया कि उन्होंने व श्रीमती मीना त्यागी ने इस अवैध निर्माण के बारे में आगाह किया तो अधिकारी ने कहा कि यह तय करना हमारा काम है, आप तय नहीं करेंगी कि कहां क्या बनना है। आज हर अजमेरवासी की भी यह भावना है कि नुकसान की भरपाई जिम्मेदार अफसरों से की जानी चाहिए। लोगों का दर्द गौर करने के लायक है कि विकास में पिछडते जा रहे अजमेर में बमुश्किल हुए विकास कार्य भी ध्वस्त किए जा रहे हैं।

जरा पीछे मुड कर देखें तो आपको ख्याल में आ जाएगा कि जिन दिनों सेवन वंडर्स का निर्माण आरंभ किया गया था, तब कई जागरूक लोगों ने ऐतराज जताया था कि आनासागर के किनारों का पाट कर इसका निर्माण करना गलत है। मीडिया ने भी अपनी भूमिका बखूबी निभाई। बाकायदा फोटोज छापे, किनारे को मिट्टी से पाटते हुए। मगर जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी थीं। आनासागर का जल भराव क्षेत्र कम होने पर खूब चिंता जताई गई, जिसका नतीजा बाद में पूरे अजमेर ने भुगता, मगर संबंधित अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। किसी भी अधिकारी ने इन सवालों के जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। अचरज होता है कि नियम विरूद्ध हो रहे निर्माण को संज्ञान में लाए जाने को अफसरों ने नजरअंदाज क्यों कर किया? क्या किसी का दबाव था या निजी हित साधे जा रहे थे?

यह बेहद अफसोसनाक है कि कथित रूप से स्मार्ट किए जा रहे अजमेर का चेहरा चमकाने की बजाय, उस पर कालिख पोती जा रही है। अफसोस इस बात पर भी कि कुछ विघ्नसंतोशी सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व पार्शद अषोक मलिक पर तोहमत लगा रहे हैं कि एक तो अजमेर में वैसे ही विकास हो नहीं पाता, और जब होता है तो उन जैसे लोग उसे तुडवाने में लगे हुए हैं।

आज जब अजमेर की आत्मा आर्तनाद कर रही है कि तब क्या सरकार इस पर गौर करेगी? या फिर इसके लिए भी किसी सोशल एक्टिविस्ट को कोर्ट में गुहार लगानी पडेगी? राजनीति से जुडे लोगों को तो एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से ही फुरसत नहीं है। उनसे अपेक्षा करना बेमानी है। अब देखते हैं कि क्या दोषी अफसरों के गले नापे जाते हैं या नहीं। सिस्टम की जैसी रवायत है, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि लोगों की आवाजें नक्कारखाने में तूती की तरह दब जाएंगी। ऐसा लगता है कि फिर अधिकारियों को बचाने का कोई न कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा।


रविवार, 14 सितंबर 2025

जिंदादिल कांग्रेस नेता श्री हरीश मोतियानी नहीं रहे

अजमेर ने गत दिवस एक ऐसे कांग्रेस नेता को खो दिया, जो किसी समय अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख कांग्रेस दावेदार माने जाते थे। वे थे भूतपूर्व पार्षद स्वर्गीय श्री हरीश वासदेव मोतियानी उर्फ लक्खी। वस्तुतः लंबे समय तक भूतपूर्व मंत्री स्वर्गीय श्री किशन मोटवानी का कांग्रेस में वर्चस्व रहा, इस कारण मोतियानी सहित डॉ लाल थदानी, रमेश सेनानी, राजकुमारी गुलाबानी, हरीश हिंगोरानी सरीखे कई नेता टिकट हासिल नहीं कर पाए। मोतियानी पूर्व विधायक श्री गोपाल बाहेती व पूर्व उपमंत्री स्वर्गीय श्री ललित भाटी के करीबी रहे। वे जिंदादिल व बिंदास प्रकृति और हंसमुख स्वभाव के धनी थे। समाजसेवा में भी बहुत सक्रिय रहे।  

उनका जन्म 12 जुलाई 1961 में हुआ। उन्होंने 1981 में राजकीय महाविद्यालय से बीकॉम की डिग्री हासिल की। विवाह 30 मई 1987 को हुआ। वे युवा अवस्था से ही कांग्रेस में अनेक पदों पर सक्रिय रहे। सन् 1990 से 1995 तक नगर निगम में पार्षद रहे। उनके पिताश्री स्वर्गीय वासदेव मोतियानी का स्याही का कारोबार था, जो मिनिस्टर इंक के नाम से प्रसिद्ध रहा। पिताश्री के निधन के बाद उन्होंने कारोबार संभाला। उन्होंने 1996 से स्टेश्नरी का होलसेल कारोबार आरंभ किया।