शुक्रवार, 6 मार्च 2026

अजमेर में 7 से 10 मार्च तक तृतीय अजमेर थिएटर फेस्टिवल

एनएसडी रंगमंडल के चार चर्चित नाटकों का होगा मंचन, सभी प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए निःशुल्क


अजमेर, 5 मार्च। शहर के रंगमंच और कला प्रेमियों के लिए 7 से 10 मार्च तक तृतीय अजमेर थिएटर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आज सूचना केन्द्र के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में फेस्टिवल का पोस्टर जारी किया गया तथा आयोजन की विस्तृत जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों को दी गई।
अपना थिएटर संस्थान के यॉबी जॉर्ज ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के रंगमंडल द्वारा प्रस्तुत नाटकों को देखने के लिए सामान्यतः दर्शकों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है, लेकिन अजमेर के कलाकारों और दर्शकों के लिए इन सभी नाटकों का मंचन निःशुल्क होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह अजमेर के रंगमंचीय इतिहास में पहला अवसर है जब नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के चार चर्चित नाटकों का मंचन एक साथ शहर में किया जा रहा है।
फेस्टिवल के दौरान चार दिनों तक प्रतिदिन शाम 7 बजे जवाहर रंगमंच पर नाटकों की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम की शुरुआत 7 मार्च को विजयदान देथा द्वारा लिखित “माई री मैं को से कहूं” के मंचन से होगी। 8 मार्च को मिथलेश्वर की कहानी पर आधारित नाटक “बाबूजी” प्रस्तुत किया जाएगा। 9 मार्च को धर्मवीर भारती का बहुचर्चित नाटक “अंधा युग” मंचित होगा तथा समारोह के समापन अवसर पर 10 मार्च को महाश्वेता देवी द्वारा लिखित प्रसिद्ध नाटक “बायन” का मंचन किया जाएगा। चारों ही प्रस्तुतियों में दर्शकों का प्रवेश निःशुल्क रहेगा।
प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए राजेन्द्र सिंह ने बताया कि यह थिएटर फेस्टिवल संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली, कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अजमेर तथा अजमेर विकास प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में आधुनिक नाट्य कला संस्थान, आप-हम संस्थान, कला अंकुर, इंडियन लेडीज क्लब, द टर्निंग पॉइंट पब्लिक स्कूल तथा न्यू आदर्श शिक्षा समिति सहयोगी संस्थाओं के रूप में सहभागिता निभा रही हैं।
प्रेस वार्ता में समारोह से जुड़े नाट्य कलाकार एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। इनमें निरंजन कुमार, विष्णु अवतार भार्गव, जुम्मा खान, उज्ज्वल मित्रा, संदीप, काव्यांश, अरविंद पाराशर, नंदकिशोर प्रजापति, शब्बीर, रवि, राहुल, पारस सहित अन्य कला प्रेमी मौजूद थे।

यॉबी जॉर्ज
मो. 9414258642


अजमेर मंडल पर महिला दिवस के उपलक्ष मे महिला खेल व मनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन

उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन अजमेर मंडल द्वारा महिला दिवस के उपलक्ष मे दिनांक 06.03.2026 को अध्यक्षा महिला कल्याण संगठन, अजमेर मंडल श्रीमती रिंकल भूतड़ा की गरिमामयी उपस्थिति में मंडल  कार्यालय के समीप स्थित जी एल ओ स्पोर्ट्स ग्राउंड  मे विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान खेल प्रतियोगिता व संगीत जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए ।कार्यक्रम में मंडल पर कार्यरत लगभग 60  महिला कर्मचारियों  ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में उत्तर पश्चिम रेलवे महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा श्रीमती रिंकल भूतड़ा के अलावा सचिव श्रीमती ज्योति उशाहरा और कोषाध्यक्ष श्रीमती सुषमा कुमारी सहित संगठन की अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थीं।


महिला कर्मचारिओं हेतु आयोजित इस कार्यक्रम में जिन खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया उसमें स्पून रेस, रिले रेस, वॉक विद बैलून , थ्री-लेग्ड रेस, जुम्बा, रेफरल, सिग्नेचर स्टेप ऑन गाने, शॉट पुट, हेड, शोल्डर, नी गेम, हुला हूप पास, म्यूजिकल चेयर, टग ऑफ वॉर जैसी प्रतियोगिताएं शामिल थी। प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

*मुख्य जनसंपर्क निरीक्षक, अजमेर*

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

गुरुवार को ही क्यों आरंभ होती हैं शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं?

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं गुरुवार 12 फरवरी 2026 से राज्यभर में आरंभ हो गईं। क्या आपको पता है कि सालों से बोर्ड की परीक्षाएं हर बार गुरुवार से ही क्यों आरंभ होती हैं? हालांकि परीक्षाएँ अक्सर गुरुवार से शुरू होने के पीछे कोई एक आधिकारिक, लिखित “धार्मिक नियम” नहीं है, बल्कि यह परंपरा, प्रशासनिक सुविधा और व्यावहारिक कारणों का मिश्रण माना जाता है। ज्ञातव्य है कि गुरुवार को बृहस्पति व सररस्वती का दिन माना जाता है, जो ज्ञान-शिक्षा और शुभारंभ से जुड़ा है। लंबे समय से शिक्षा से जुड़े कार्य, जैसे परीक्षा या शैक्षणिक कार्यक्रम, इस दिन शुरू करना शुभ समझा जाता रहा है। बहुत दिनचस्प बात है कि जब भी गुरूवार के अतिरिक्त किसी अन्य दिन से परीक्षाएं आरंभ की गईं तो उसमें कोई न कोई बाधा आई है। उसके बाद यह अलिखित नियम ही बना लिया गया कि परीक्षाएं गुरूवार से षुरू की जाएं। परीक्षाएं गुरूवार को ही आरंभ करने दूसरी वजह यह है कि गुरुवार से शुरुआत करने पर शुरुआती पेपर गुरुवार को हो कर शुक्रवार -शनिवार को हो जाते हैं और उसके बाद रविवार का स्वाभाविक ब्रेक मिल जाता है। इससे बोर्ड को प्रश्नपत्र वितरण, केंद्र व्यवस्था और आकस्मिक समस्याओं को संभालने का समय मिलता है। इसके अतिरिक्त सप्ताह की शुरुआत सोम-मंगल में स्कूलों का नियमित कामकाज रहता है, गुरुवार तक तैयारी और अंतिम व्यवस्थाएँ पूरी हो जाती हैं।


मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

वैभव गहलोत को अजमेर में लॉंच करने की तैयारी?

कानाफूसी है कि पूर्व मुख्यमंत्री अषोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के लिए अजमेर में जमीन तलाषी जा रही है? उन्हें मनरेगा बचाओ संग्राम का अजमेर जिला प्रभारी बनाए जाने से यह षगूफा उठा है कि वे अजमेर में खास दिलचस्पी ले रहे हैं। क्या वजह है कि उन्हें अजमेर का ही प्रभारी बनाया गया? एक मायने यह निकाले जा रहे हैं कि आरटीडीसी के पूर्व चेयरमेन धर्मेन्द्र सिंह राठौड अपना रूतबा गालिब करने के लिए आग्रह करके उन्हें अजमेर लाए हैं। बताने की जरूरत नहीं है कि राठौड अषोक गहलोत के खासमखास हैं और अनेक बार वैभव के साथ राजस्थान के अनेक दौरों में उनके साथ नजर आए हैं। दूसरा पहलु यह माना जा रहा है कि राठौड वैभव के लिए अजमेर में जमीन तलाष्ज्ञ रहे हैं। ज्ञातव्य है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अजमेर में तीन सीटें बनने की संभावना है। एक सामान्य सीट के लिए खुद राठौड जाजम जमा रहे हैं, जमा ही चुके हैं। दूसरी सामान्य सीट पर वैभव को उतारा जा सकता है। यहां माली जाति के पर्याप्त वोट हैं। ज्ञातव्य है कि अजमेर एक राजनीतिक चरागाह रहा है। वैभव ने मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला प्रभारी होने के नाते अजमेर में आयोजित प्रदर्षन में भाग लिया। अजमेर में उनकी दिलचस्पी का एक प्रमाण इससे भी स्थापित होता है कि अजमेर आगमन पर अजमेर माली सैनी समाज की ओर से ज्योतिबा फूले सर्किल पर उनका स्वागत किया गया। समाज की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि अजमेर माली बाहुल्य शहर है और मनरेगा जैसे जनहितकारी विषय की जिम्मेदारी अजमेर से जुड़े प्रतिनिधि को मिलना समाज के लिए गर्व का विषय है। साफ इषारा है कि आगे चल कर माली सैनी समाज की ओर से वैभव को अजमेर से चुनाव लडाए जाने की मांग की जाएगी। एक कयास यह भी है कि वैभव की नजर आगामी लोकसभा चुनाव पर हो, क्योंकि फिलवक्त अजमेर में कोई प्रबल दावेदार नहीं है।

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

जयपाल व भाटी में सुलह कैेसे हुई?

अजमेर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल व अजमेर दक्षिण के कांग्रेस प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के बीच सुलह हो गई है। बेषक अजमेर के राजनीतिक पन्ने पर अंकित इस ऐतिहासिक वाकये से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है। माना जाता है कि कम से कम भाटी समर्थकों के टिकट तो सुरक्षित हो गए हैं। समझौते के वक्त भाटी के इस कथन पर कि लड कर देख लिया, अब लाड कर के देखेंगे, के निहितार्थ समझने की तमाम कोष्ज्ञिषें हो रही हैं, लेकिन अभी तक यह सवाल अनुत्तरित ही है कि वाकई हुआ क्या था? किसने पहल की? किसने हस्तक्षेप किया? समझौेते की मंजिल नींव की किस ईंट पर खडी की गई है? अंदरखाने हुए करार के मुख्य बिंदु क्या हैं? केवल अनुमान ही लगाए जा रहे हैं। कुछ का मानना है कि मुकदमे में राजीनामा तो एक बहाना है, असल कहानी दिृवपक्षीय लाभ के लिए लिखी गई है। कोई कह रहा है कि अपने समर्थकों के टिकट सुनिष्चित करने के लिए भाटी को मजबूर होना पडा। कुछ राजनीति पर्यवेक्षक आंक रहे हैं कि निगम चुनाव में जीत के लिए जयपाल को हाथ आगे बढाना मजबूरी हो गया। वरना अपेक्षित परिणाम न आने पर आगे की राजनीतिक या़त्रा पर विराम लग जाता। सवाल यह भी तैर रहा है कि क्या हाथ मिलाने से पहले भाटी ने सचिन पायलट की मंजूरी ली है? क्या यह धर्मेन्द्र सिंह राठौड की षकुनी चाल की उपज तो नहीं है? क्या केवल नगर निगम चुनाव के लिए ही हाथ मिलाए गए हैं, या फिर विधानसभा चुनाव का भी तानाबाना बुना गया है? कहीं सुलह की चादर के नीचे द्रोपदी कोली का राजनीतिक भविश्य तो नहीं दफन हो जाएगा? क्या यह तय हुआ है कि टिकट तो भाटी को मिलेगी और जयपाल सरकार आने पर एडीए के अध्यक्ष होंगे? इन सब के बीच अजीबोगरीब स्थिति सालों से खेमों में बंटे उन सिपाहियों की हो गई है, जो एक दूसरे के खिलाफ बाहें ताने रहते थे। ऐसे अनेक सवालों की अबाबीलें अजमेर के राजनीतिक आकाष्ज्ञ में उड रही हैं। एक ओर जहां जयपाल राजा बॉस के नाम से जाने जाते हैं, वहीं भाटी अपने राजाई मिजाज के कारण चर्चित हैं। दोनों कें चेहरों पर इठलाती भोली भाली मुस्कान भले ही सहज लगती हो, मगर हैं दोनों कूटनीतिज्ञ। बहरहाल, दूसरी ओर कुछ लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस में ऐसे समझौतों की लंबी फेहरिष्त है, मगर उनका हश्र क्या हुआ, ढाक के तान पात।


 https://youtu.be/V0rmJnT8kZ4