मंगलवार, 20 जनवरी 2026
एसआईआर विवाद पर मुस्लिम नेता खुश भी
एक ओर जहां एसआईआर के दौरान नाम कटवाये जाने की कवायद का आरोप लगाते हुए मुस्लिम नेता मुखर हैं, वहीं उनमें से कुछ इसे सकारात्मक दृश्टि से भी देख रहे हैं और कथित रूप से खुष्ज्ञ भी हैं कि इस बहाने कौम में जागृति तो आएगी। इस सिलसिले में एक मुस्लिम नेता से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि नाम कटवाने की षिकायतें सामने नहीं आतीं तो कदाचित समाज के लोग जागरूक नहीं होते। उनका मानना है कि चूंकि समाज के जागरूक कार्यकर्ता आपत्तियों का प्रतिकार करने में जुटे हैं, इस कारण यकायक जागृति भी आ रही है। इसका लाभ यह होगा कि अब उनका मतदान प्रतिषत बढ सकता है। जाहिर जो लोग अपना नाम कटने से बचाने मे कामयाब होंगे, कम से कम वे तो वोट डालेंगे ही। साथ ही अन्य भी मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वस्तुतः अफवाह के चलते एक आषंका यह फैल रही है कि यदि वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो आगे चल कर नागरिकता की समस्या आ सकती है। इस कारण वे अपना नाम बचाने में जुट गए हैं। ज्ञातव्य है कि मतदान के प्रति रूचि कम होने के कारण मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदान प्रतिषत अपेक्षाकृत कम रहता है। जागरूकता के अभाव में वे इस बात की परवाह ही नहंी करते थे कि उनका वोट बेकार हो रहा है। लेकिन अगर जागरूकता आई तो मतदान प्रतिषत में इजाफा होगा।
सोमवार, 19 जनवरी 2026
जिंदादिल डॉ. वाई. के. खन्ना का देहावसान
ब्यावर स्थित प्रसिद्ध जेएमडी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के संस्थापक, प्रसिद्ध सर्जन और क्रिकेट प्रशिक्षक डॉक्टर वाई. के. खन्ना का गत 18 जनवरी 2026 को देहावसान हो गया। पाइल्स के ऑपरेशन में उनको विशेषज्ञता हासिल थी। यह ऑपरेशन करवाने के लिए दूर-दूर के मरीज उनके यहां आते रहे। वे बहुत जिंदादिन इंसान थे। एनर्जी से लबरेज। चेहरे पर सदैव स्मित मुस्कार सबको आकर्षित करती थी। खासकर मरीज उनको निकट पा कर सूकून पाते थे। खेलों में उनकी बहुत दिलचस्पी थी। उन्होंने ब्यावर में दो बार राष्ट्रीय स्तर का डे-नाइट किक्रेट टूर्नामेंट कराया तथा हरभजन, विनोद काम्बले, गगन खोडा जैसे कई धुरंधर खिलाडियों को ब्यावर बुलाकर क्रिकेट खिलाकर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया। उनका जन्म 18 जुलाई 1956 को श्री वी.पी. खन्ना के घर हुआ। उन्होंने एम.एम.बी.एस. व एम.एस.(जनरल सर्जरी) की डिग्रियां हासिल की। आरंभ उन्होंने सरकारी नौकरी की, फिर जल्द ही अपना निजी हॉस्पीटल आरंभ किया, जिसने बहुत लोकप्रियता हासिल की। उनकी धर्मपत्नी डॉक्टर आशा खन्ना ने चिकित्सकीय क्षेत्र में उनका आजीवन साथ निभाया। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल डॉक्टर खन्ना के निधन पर अश्रुपूतिर श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
रविवार, 18 जनवरी 2026
एसआईआर के शोर का फायदा बीजेपी को
इन दिनों एसआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस चौडे धाडे आरोप लगा रही है कि सरकार द्वारा नियुक्त बी.एल.ओ. द्वारा फर्जी आपत्तियों की पुष्टि किये बगैर व पार्टी बी.एल.ए. के फर्जी हस्ताक्षरों द्वारा कूटरचित षिकायतों के आधार पर अल्पसंख्यकों व कांग्रेस विचाधारा के मतदाताओं के नाम हटाये जा रहे हैं, जो कि लोकतंत्र व मतदान प्रक्रिया के विरूद्ध है। इसी तरह का आरोप मुस्लिम एकता मंच ने भी लगाया है। मोटे तौर पर यही निहितार्थ निकल रहा है कि अल्पसंख्यकों के वोट बडे पैमाने पर कटवाने की कवायद चल रही है। विपक्ष के नाते कांग्रेस का विरोध प्रदर्षन उसकी मजबूरी है, मगर भाजपाई मन नही मन खुष्ज्ञ हैं कि कांग्रेस जितनी जोर से विरोध करेगी, मतदाताओं का धु्रवीकरण उतना अधिक होगा और उसका लाभ सीधे तौर पर भाजपा को होगा। ज्ञातव्य है कि अजमेर अति संवेदनषील है। यदाकदा ऐसे मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं, जिससे मतदाताओं का पोलराइजेषन हो। हालांकि ऐसे प्रयासों को कम ही सफलता मिल पाई है, और उसकी वजह है अजमेर का भाईचारे वाला मिजाज। आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय यहां अषांति नहीं चाहता। फिर भी ताजा एसआईआर विवाद से मतदाताओं के धु्रवीकरण का खतरा तो बना ही हुआ है। देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस कटने जा रहे नामों को कितना बचा पाती है, मगर धरातल पर काम करने की बजाय कोरी बयानबाजी और कोरा षोर मचाया तो उसका उलटा नुकसान हो सकता है।
पायलट की चादर पर कौतुहल बरकरार
पिछले दिनों उर्स के दौरान पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से ख्वाजा साहब की मजार षरीफ पर चादर चढाई गई, मगर आज तक उजागर नहीं हो पाया है कि नागौर जिले के जो युवा कांग्रेसी नेता चादर ले कर आए थे, वह क्या पायलट ने भेजी थी या फिर उन्होंने पायलट को खुष्ज्ञ करने के लिए अपनी ओर से ही चादर चढा दी? इस सवाल से भी बडा सवाल यह है कि क्या वजह रही कि चादर चढाए जाने के दौरान अजमेर के स्थानीय पायलट समर्थक महेन्द्र सिंह रलावता, हेमंत भाटी व विजय जैन को सूचित करना ही उचित नहीं समझा? इससे इस बात का अंदाजा लगता है कि नागौर के नेता ने अपने स्तर पर ही चादर चढाई थी। स्थानीय नेताओं को सूचित इसलिए नहीं किया क्योंकि वे नहंीं चाहते थे कि वे हाईलाइट हो जाएं। अकेले क्रेडिट लेना चाहते थे। यह वाकया वाकई चौंकाता है कि पायलट की ओर से चादर चढे और उनके समर्थकों को हवा तक न लगे। एक सवाल और उठता है कि इस बार पायलट ने अपनी ओर से चादर क्यों नहीं भेजी? हालांकि इस बात की संभावना कम है कि पायलट ने ही चादर भेजी हो, मगर यदि यह सही है तो स्थानीय राजनीति के लिहाज से गहरे निहितार्थ निकलते हैं।
शनिवार, 17 जनवरी 2026
संदीप धाभाई वार्ड एक में भाजपा टिकट के दावेदार
आसन्न अजमेर नगर निगम चुनाव की तिथियां घोशित होना बाकी है, मगर सियासी सरसराहट आरंभ हो चुकी है। हालांकि वार्डों में आरक्षण की लॉटरी निकलना षेश है, इस कारण अभी यह तय नहीं है कि कौन से वार्ड की स्थिति क्या होगी, मगर दावेदार कयास व संभावनाओं के आधार पर जमीन पर सक्रिय हो गए हैं। इसी सिलसिले में कानाफूसी है कि वार्ड एक में भाजपा की ओर से नए दावेदार के रूप में एडवोकेट संदीप धाभाई उभर कर आ रहे हैं। यूं यहां पहले से दो प्रबल दावेदार मौजूद हैं। पूर्व पार्शद संतीष्ज्ञ बंसल व मनोज जैन मित्तल। बंसल पिछली बार सजातीय व कांग्रेस के बागी षैलेन्द्र अग्रवाल की वजह से पराजित हो गए थे, मगर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से नजदीकी की वजह से अब भी दमखम रखते हैं। समझा जाता है कि अगर उनकी प्रबल इच्छा हुई तो टिकट हासिल करने में उन्हें दिक्कत नहीं आएगी। इसी प्रकार मित्तल भी अपने कनैक्षन के जरिए दावेदारी कायम रखे हुए हैं। इस बीच हरिभाउ उपाध्याय नगर विस्तार विकास समिति के अध्यक्ष एडवोकेट संदीप धाभाई समाजसेवक के रूप में अतिरिक्त सक्रियता के चलते दावेदार के तौर पर गिने जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में कांग्रेस से जुडे रहे, मगर अब उनके अधिसंख्य साथी भाजपा मानसिकता के हैं। अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्होंने देवनानी से अपनी नजदीकी स्थापित की है। साफ सुथरे, सहज सुलभ व सरल हैं, इस कारण क्षेत्र में लोकप्रिय हैं। अगर संघ की अनुकूलता रही तो टिकट हासिल कर भी सकते हैं।
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