शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

अब डॉक्टर बाहेती की बारी है


कहते हैं कभी-कभी चाय से ज्यादा केतली गरम हो जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ गुरुवार को। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की ओर से पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर भू-रूपांतरण से संबंधित विवादित धारा 90बी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाए जाने पर जितना पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को उबलना था, उससे कहीं अधिक नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश जैन फट पड़े।
जैन ने कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि कांग्रेस सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में जम कर भ्रष्टाचार करने के लिए ही इसे लागू किया था और अब जबकि उस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है तो फिर भ्रष्टाचार करने के लिए बीच की गली निकालने कोशिश कर रही है। सरकार की गलती को छुपाने के लिए स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर झूठा और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उनके आरोप में दम नजर आता है क्योंकि अगर इस धारा का भाजपा सरकार ने दुरुपयोग कर टकसाल बना लिया था और इसमें खामियां थीं तो कांग्रेस ने सत्ता में आते ही इसे हटा क्यों नहीं दिया? हाईकोर्ट के रोक लगाने पर ही धारा क्यों हटाई गई?
खैर, इस मुद्दे पर धारीवाल के बयान पर प्रदेश भाजपा क्या रुख अख्तियार करती है, ये उतना दिलचस्प नहीं है, जितना कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व न्यास अध्यक्ष जैन का खुद को पाक साबित करना और बिना नाम लिए पूर्व न्यास अध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल बाहेती को आरोपों के कटघरे में खड़ा करना। जैन ने नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष पद के अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए चुनौती दी है कि धारीवाल एक भी ऐसा मामला बताएं, जिसमें 90 बी के तहत नियमों की अनदेखी अथवा भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने यह तक घोषणा की है कि अगर उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार का एक भी मामला साबित कर दिया जाता है तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। सीधी सी बात है, हालांकि इस पर प्रतिक्रिया देने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर वसुंधरा राजे अथवा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी की बनती है, मगर जैन ने धारीवाल के आरोप को सीधे तौर पर अपने ऊपर ले लिया है, तभी तो जवाबी हमला कर रहे हैं। वैसे इसमें बुराई भी क्या है? सांच को आंच नहीं। एक सिंधी कहावत है-सच त बीठो नच। अर्थात जो सच्चा है, वो खुले आम मस्ती में नाच सकता है। जैन भी अपने आप को सच्चा बताते हुए बेबाक बयानी कर रहे हैं।
जैन ने अजमेर का ही हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान नगर सुधार न्यास के जरिए जम भ्रष्टाचार करते हुए इस धारा का खुला दुरुपयोग किया गया है। भ्रष्टाचार की पराकाष्टा इसी से साबित होती है कि कस्टोडियन, स्कीम एरिया में काश्तकारों के लिए अध्रिहीत की गई जमीन, आनासागर डूब क्षेत्र सहित नालों तक की जमीनों का नियमन कर दिया गया। यह सीधे सीधे तौर पर पूर्व न्यास अध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल बाहेती पर चलाया गया है। अब ये बाहेती की जिम्मेदारी है कि वे सामने आएं।

ये सचिन व नसीम की नाकामी है


महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के आगामी 800वें सालाना उर्स में जायरीन की आवक ज्यादा होने की संभावना के मद्देनजर बनाई विशेष योजना के लिए हुई अनेक बैठकों के बाद भी सरकार ने फूटी कौड़ी तक जारी नहीं की है। असल में तकरीबन तीस सौ करोड़ रुपए की योजना बीरबल की खिचड़ी की तरह ऐसी पकी है कि उस पर उर्स से पहले अमल न होने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। इसी कारण उसे अलग-अलग चरणों में पूरा करने का निर्णय किया गया। पहले चरण में अस्सी करोड़ के काम कराने का तय किया गया और कामों की सूची भी राज्य सरकार को भेज दी गई, मगर अफसोस कि अब तक सरकारी अधिकारी राशि आने का ही इंतजार कर रहे हैं। अब तो इतना कम समय बचा है कि अगर अस्सी करोड़ जारी भी हो गए तो महज लीपापोती हो कर रह जाएगी। इसकी आशंका इस लेखक ने अपने ब्लॉग पर कोई पांच माह पहले ही जाहिर कर दी थी।

हालांकि यह हमारे देश व राज्य की शासन व्यवस्था के तौर-तरीकों का ही परिणाम है, मगर इसके लिए प्रयासों की कमी के लिए सीधे तौर पर अजमेर के सांसद व केन्द्रीय
संचार राज्य मंत्री सचिन पायलट व शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ को जिम्मेदार ठहराया जाए तो कोई अतशयोक्ति नहीं होगी। अगर उन्होंने गंभीर प्रयास किए होते तो इस योजना का ऐसा हश्र नहीं होता। पायलट अपने खाते में चाहे जितनी उपलब्धियां दर्ज करवा चुके हों और नसीम अख्तर भी अजमेर के विकास के लिए चाहे जितनी शिद्दत जाहिर करती हों, मगर उन दोनों के खाते में यह नाकामी तो दर्ज हो ही चुकी है। ऐसे प्रभावशाली मंत्रियों के रहते भी अगर अजमेर पर सरकार गौर नहीं कर रही तो इसका सीधा सा अर्थ है कि या तो उनकी ऊपर सुनने वाला कोई नहीं है या फिर उन्होंने इसे पूरी गंभीरता से नहीं लिया। असल में यह योजना जब चर्चा में आई और उस पर पहली बैठक प्रदेश के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने अजमेर में ली, तभी पूत के पग पालने में नजर आ गए थे। धारीवाल की मौजूदगी में हुई अहम बैठक ही बेनतीजा रही थी। जिस योजना पर तकरीबन तीन सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाने का विचार हो, ऐसी महत्वपूर्ण बैठक के लिए न तो कोई पुख्ता एजेंडा तैयार किया गया था और न ही संभागियों को उसकी तैयारी करके आने को कहा गया। जिला प्रशासन से भी पहले कोई एक्सरसाइज नहीं करवाई गई। रही सही कसर खादिम प्रतिनिधियों व विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी के बीच हुई नौंकझोंक ने पूरी कर दी। धारीवाल को भी लगा कि यहां विवाद है और उसके लिए संभागीय आयुक्त अतुल शर्मा को जिम्मेदारी दी कि वे सभी पक्षों की आम सहमति बना कर सरकार को रिपोर्ट करें। उनके रिपोर्ट भेजने से लेकर राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच संवाद ही इतना लंबा हो गया है कि अब तक कुछ भी नहीं हो पाया है।
दरअसल मास्टर प्लान के लिए जो प्रस्ताव मोटे तौर पर रखे गए हैं, वे कोई नए नहीं हैं। उन पर पहले भी कई बार विचार हो चुका है। हर साल होने वाले उर्स मेले से पूर्व और विशेष रूप से 786वें उर्स मेले के दौरान भी लगभग इन्हीं प्रस्तावों पर चर्चा हो चुकी है, मगर उन पर अमल करने की इच्छा शक्ति न सरकार ने दिखाई और न ही प्रशासन में इतनी हिम्मत की वह बर्र के छत्ते में हाथ डाले। प्रशासन का भी यही रवैया रहा है कि जैसे-तैसे मेला निपटा लिया जाए। मेला शांति से संपन्न होने पर वह शुक्र अदा करने के लिए मजार शरीफ पर चादर पेश कर खुद भी चादर ओढ़ कर सो जाता है। ताजा मामले में भी ऐसा ही हुआ। एक तो जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और दूसरा अधिकारियों की बेरुखी के कारण आज साफ लगने लगा है कि केवल तीन माह में अस्सी करोड़ रुपए के काम करवाए ही नहीं जा सकेंगे। अर्थात लीपापोती की आशंका सच होती दिखाई दे रही है।
यहां उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के अन्तर्गत विभिन्न मार्गों के विकास, नालियों के निर्माण, सीवरेज, विद्युत सप्लाई उपकरण, सुरक्षा, पार्किंग, शौचालय, कोरिडोर, दरगाह शरीफ के प्रवेश द्वारों की चौड़ाई बढाना, अग्नि शमन, विश्राम स्थलियों का विकास, ईदगाह के विकास के साथ-साथ अजमेर शहर की कई बड़ी सड़कों के निर्माण एवं विकास का प्रावधान रखा गया है। ऐसी बड़ी योजना यदि पूरी तरह से लागू हो जाए और उस पर पूरी ईमानदारी के साथ काम हो तो शहर की काया ही पलट जाएगी। मगर समय के अभाव में काम पूरे होने से पहले ही उर्स सर पर आ जाएगा। इस योजना को लेकर अजमेर फोरम ने भी खूब माथपच्ची की, मगर सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अजमेर के दोनों मंत्रियों ने कितनी गंभीर कोशिश की, वह सबके सामने आ ही चुका है। रहा सवाल बेचारे प्रशासन का तो वह राशि न मिलने के कारण लाचारी जता रहा है। यहां उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ख्वाजा साहब के 786वें उर्स में विशेष पैकेज आया था, मगर तब भी इतना कम समय था कि कामों में लीपापोती हुई और बाद में लंबे समय तक उसकी जांच होती रही।

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

ये कलेक्टर की लापरवाही नहीं तो क्या है?


महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कलेक्ट्रेट में आयोजित मौन सभा में जिला कलेक्टर श्रीमती मंजू राजपाल व अतिरिक्त कलेक्टर मोहम्मद हनीफ, अतिरिक्त कलैक्टर शहर जगदीश पुरोहित व एसडीएम निशु अग्निहोत्री उपस्थित नहीं हुए। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार के आदेशों की पालना में अधिकारी आयोजन की औपचारिकता तो निभाते हैं, मगर उसके प्रति गंभीरता नहीं बरतते। और अधिकारियों का तो पता नहीं कि वे नियत समय 11 बजे हुई सभा में क्यों नहीं पहुंचे, मगर जिला कलैक्टर श्रीमती मंजू राजपाल तो अपने चैंबर में ही थीं, फिर भी नहीं पहुंचीं। अतिरिक्त कलैक्टर शहर जगदीश पुरोहित जरूर नियत समय से पहले सभा में पहुंच गए, मगर उन्हें यकायक ख्याल आया श्रीमती राजपाल का, तो वे उन्हें बुलाने गए और इसी दौरान हूटर बज गया, नतीजतन वे सभा में शामिल होने से वंचित रह गए। जैसा कि वे बताते हैं, उन्होंने श्रीमती राजपाल के साथ उनके चैंबर में ही दो मिनट का मौन रखा। सवाल ये उठता है कि जब सरकार के आदेश के तहत हर दफ्तर में मौन सभा होनी थी तो जिले में इस आयोजन के आदेश प्रसारित करने वाली जिला कलैक्टर खुद क्यों नहीं शामिल हुईं? वे चाहे जितनी भी व्यस्त रही हों, मगर कम से कम उन्हें तो समय पर उपस्थित रहना ही चाहिए था। हालांकि अतिरिक्त कलैक्टर जगदीश पुरोहित का तर्क है कि जो जहां हो, वहीं उसे दो मिनट का मौन रखना था, तो सवाल उठता है कि ऐसे में सभा आयोजित करने की जरूरत ही क्या थी? हर कोई अपनी-अपनी सीट पर ही मौन रख लेता। उनके बयान में विरोधाभास साफ झलकता है। यदि उनका तर्क सही है तो वे काहे को जिला कलैक्टर को बुलाने गए? जिला कलेक्टर को उनके चैंबर में ही मौन करने देते, अर्थात उन्हें इस बात का अहसास था कि जिला कलेक्टर को सभा में होना ही चाहिए। इसी कारण वे उन्हें बुलाने गए और उन्हें भी हूटर बज जाने के कारण वहीं पर मौन रखना पड़ा।
ऐसा प्रतीत होता है कि हम सरकारी स्तर पर होने वाले आयोजनों को बेगार समझने लगे हैं और मजबूरी में आयोजन करते हैं, जबकि हमारी उनमें कोई रुचि नहीं होती। ताजा प्रकरण भले ही कोई बहुत गंभीर न हो, मगर यह हमारी प्रवृत्ति को तो उजागर करता ही है। आपको याद होगा कि पिछले साल 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस समारोह महज औपचारिक रूप से मनाने और पर्यटन मंत्री श्रीमती बीना काक की इच्छा के अनुरूप समारोह को शानदार तरीके से अधिकाधिक लोगों के बीच आयोजित न करने पर श्रीमती काक ने नाराजगी जाहिर की थी। इस बार जरूर श्रीमती राजपाल ने पूरा ध्यान रखा और श्रीमती काक ने भी उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

सोमवार, 30 जनवरी 2012

न्यास की तोडफ़ोड़ से उठे नेताओं पर कई सवाल

चंद्रवरदाई नगए ए ब्लॉक एवं जवाहर की नाड़ी में न्यास की अतिक्रमियों के विरुद्ध कार्रवाई से उठे बवाल ने अजमेर के नेताओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां इस मुद्दे ने न्यास अध्यक्ष नरेन शहाणी भगत की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेन्द्र सिंह रलावता की प्रशासन विरोधी पहल ने सभी को चौंका दिया है। हालांकि न्यास की विशेषाधिकारी प्रिया भार्गव के चैंबर में हुए हंगामे से भौंचक्की रह गईं विधायक श्रीमती अनिता भदेल तनिक परेशानी में आई हैं, लेकिन साथ ही नए साल में उन्हें अपनी बुझती राजनीति को चमकाने का मौका भी मिल गया है। रहा सवाल सांसद व केन्द्रीय संचार राज्य सचिन पायलट का तो भला से कांग्रेसी नेताओं की आपसी फूट के कारण रिंग मास्टर की भूमिका अदा करने से क्यों चूकते?
असल में जैसे ही न्यास के अधिकारियों ने अध्यक्ष भगत की गैर मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की तो सबसे पहला सवाल ये उठा कि क्या यह उनकी जानकारी में हुआ अथवा उन्हें कुछ पता ही नहीं है? अगर उनकी अनुमति से ऐसा हुआ है तो राजनीतिक लिहाज से यह एक आत्मघाती कदम था। वे अभी न्यास की कार्यप्रणाली को ठीक से समझ ही नहीं पाए हैं, विकास की दिशा में एक डग भर नहीं चले हैं कि नए साल की शुरुआत तोडफ़ोड़ से कर रहे हैं तो ये आगे चल कर घाटे का सौदा साबित हो सकता है। जैसा कि स्वयं भगत कह रहे हैं कि कागजी कार्यवाही पहले से ही चल रही थी और अतिक्रमणों को तोडऩे की योजना तो पहले ही बन गई थी तो क्या वजह रही कि जब तक जिला कलेक्टर के पास कार्यभार था, तब उन्होंने अंजाम की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाया? भगत के आते ही कार्यवाही की याद कैसे आ गई? कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिकारी ये सोच रहे थे कि वे तो भगत की आड़ लेकर जनता के आक्रोष से बच जाएंगे? हालांकि हुआ उलटा। संयोग से गुस्से का शिकार विशेषाधिकारी प्रिया भार्गव को होना पड़ा।
यदि भगत की जानकारी के बिना ही अतिक्रमण हटाए गए तो यह उनके लिए बेहद शर्मनाक है। यह स्थिति नगर निगम में मेयर कमल बाकोलिया व प्रशासन के बीच बिगड़ी ट्यूनिंग की याद दिलाती है। कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रशासनिक अधिकारी भगत को भी नहीं गांठ रहे हैं? इससे भगत की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठते हैं।
उधर मामले की ज्यादा दिलचस्प बनाया शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेन्द्र सिंह रलावता ने। उन्होंने अपनी पार्टी की सरकार और कांग्रेस के न्यास अध्यक्ष के रहते तोडफ़ोड़ की जांच के लिए कमेटी बना कर यह साबित कर दिया कि वे भगत को नीचा दिखाना चाहते हैं। यह कह कर कि अतिक्रमण हटाना न्यास के कार्यक्षेत्र में है और वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करेंगे, पिंड छुड़ा सकते थे, मगर उन्होंने जांच की पहल कर यह साबित करने की कोशिश की वे जनता के ज्यादा हमदर्द हैं। अपनी सरकार के खिलाफ ही कदम उठाने की बेवकूफी से यह संदेह भी होता है कि कहीं वे अपने उग्रवादी व अति उत्साही सलाहकारों के चक्कर में तो नहीं आ गए? बहरहाल बताया ये जा रहा है कि जैसे ही बवाल उठा तो पायलट ने उनकी क्लास ले डाली। दरअसल वे भगत व बाकोलिया के साथ दिल्ली गए तो आगामी मेगा हैल्थ कैंप की तैयारियों के सिलसिले में थे, मगर वहां पायलट की डांट खा बैठे। इसका परिणाम ये हुआ कि अजमेर आने के बाद उनका सुर बदल गया और वे भगत के नेतृत्व में पीडि़तों की सुध लेेने की बात करने लगे।
कांग्रेसी नेताओं में तालमेल की कमी का भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने जम कर फायदा उठाया। उनका निशाना ही ये था कि अगर कार्यवाही जायज थी तो कांग्रेस को जांच कमेटी क्यों बनानी पड़ी? अर्थात गलती का अहसास कांग्रेस को भी है। रहा सवाल विशेषाधिकारी प्रिया भार्गव के साथ बदसलूकी और उसके कारण उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे का तो मौके के वीडियो फुटेज साफ दर्शाते हैं कि प्रदर्शन के दौरान उग्र हुए पीडि़त उनके नियंत्रण में ही नहीं रहे। वे हक्की बक्की रह गईं। प्रिया भार्गव के बाल खींचने की कोशिश करने वाली महिला को काबू में करने में उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ी। हकीकत ये है श्रीमती भदेल से कहीं ज्यादा नेतागिरी गणपत सिंह रावत कर रहे थे और उत्तेजना उन्होंने ही फैलाई। मगर जो कुछ हुआ, उसकी नैतिक जिम्मेदारी से वे नहीं बच सकतीं। हां, प्रदर्शन का नेतृत्व करके उन्हें अपनी बुझती राजनीति को चमकाने का मौका जरूर मिल गया। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद पूरी भाजपा भी उनके समर्थन में आ खड़ी हुई। हालांकि भाजपा नेताओं ने यह कहना पूरी तरह से झूठ ही है कि प्रदर्शन के दौरान न्यास कार्यालय में किसी भी प्रकार की अभद्रता नहीं की गई थी और न्यास प्रशासन ने दुराग्रह पूर्वक यह मुकदमा दर्ज कराया है। सच्चाई ये है कि प्रिया भार्गव के बाल नुचने में चंद लम्हों का फासला रह गया था। उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां भी बकी गईं। आशियाना उजडऩे से दु:खी पीडि़तों का गुस्सा जायज भले ही ठहराया जाए, मगर जो कुछ हुआ वह कानून-व्यवस्था के नाम पर सवाल तो खड़ा करता ही है। इसमें पुलिस की निष्क्रियता साफ तौर पर देखी जा सकती है। ऐसे में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद (अजमेर इकाई) गुस्सा गलत नहीं माना जा सकता। उधर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन गुर्जर का मामले में फच्चर डाल कर अनिता भदेल की पैरवी करना जरूरत समझ में नहीं आया कि उन्हें बैठे-बैठे क्या सूझी? ऐसे में अगर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के प्रदेश महासचिव प्रियदर्शी भटनागर को लंबी गुमनामी के बाद प्रशासन की पैरवी, भदेल के खिलाफ कार्यवाही की मांग व गुर्जर के बयान का विरोध करने की सूझी तो ये उनकी सेहत के लिए ठीक ही है।
हां, इतना जरूर सही है कि न्यास प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ही भीषण सर्दी में घर उजाड़ दिए। एक ओर सरकार बड़ी भारी संवेदनशीलता दिखाते हुए गरीबों को बसाने की योजना बनाती है तो दूसरी ओर उन्हें उजाडऩे समय क्रूर क्यों हो जाती है। सवाल ये भी उठता है कि जब अतिक्रमण हो रहा था, तब प्रशासन क्यों घोड़े बेच कर सो रहा था? अब भू माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही की बात की जा रही है, मगर उन अधिकारियों व कर्मचारियों का क्या होगा, जिनके रहते सरकारी भूमि का अवैध बेचान हो गया?

शनिवार, 28 जनवरी 2012

वेब न्यूज पोर्टल अजमेरनामा लोकार्पित




इंटरनेट पर नए न्यूज पोर्टल अजमेरनामा का लोकार्पण शनिवार को मसाणिया भैरवधाम, राजगढ़ के प्रमुख उपासक श्री चंपालाल जी महाराज ने स्वामी कॉम्पलैक्स में आयोजित एक समारोह में कंप्यूटर का बटन दबा कर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के जरिए अजमेर को पूरे विश्व में विशिष्ट पहचान मिलेगी और विदेश में बैठे अजमेर के प्रेमी यहां की खबरों से तुरंत वाकिफ हो सकेंगे।
समारोह के विशिष्टि अतिथि पूर्व सांसद श्री औंकारसिंह लखावत ने कहा कि ऐतिहासिक नगरी की शुरू से अलग पहचान रही है और इस पोर्टल के माध्यम से इसमें और इजाफा होगा। उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वालों को चेताया कि उन्हें अब अपने आपको पारदर्शी बना लेना चाहिए, वरना जिस तेज गति से मीडिया अब इलैक्टोनिक संचार माध्यम से आगे बढ़ रहा है और इंटरनेट के जरिए मोबाइल फोन तक पहुंच चुका है, सार्वजनिक जीवन में की गई हर गलती पकड़ ली जाएगी। नगर निगम के मेयर श्री कमल बाकोलिया ने कहा कि इस पोर्टल से अजमेर वासियों में इंटरनेट के बारे जागृति आएगी और अजमेर के विकास में इसका बेशक योगदान रहेगा। नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष श्री नरेन शहाणी भगत ने कहा कि पोर्टल के जरिए दूर विदेश में बैठे अजमेर वासी को यहां की खबरें आसनी से मिल सकेंगी। इससे अजमेर वासी एक दूसरे के और नजदीक आएंगे। विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया के कदम मिलाते हुए आरंभ हुए इस पोर्टल से अजमेर का नाम रौशन होगा। मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी समूह के एमडी श्री कंवलप्रकाश ने मीडिया के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यूं तो ख्वाजा साहब की दरगाह व तीर्थराज पुष्कर की बदौलत अजमेर सांप्रदायिक मिसाल के रूप में गिना जाता है, लेकिन अजमेरनामा पोर्टल इंटरनेट की दुनिया में जल्द ही अजमेर को विशेष पहचान दिलाने में कामयाब होगा।
पोर्टल के एडिटोरियल हैड गिरधर तेजवानी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि अजमेर की राजनीतिक, प्रशासनिक व सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों पर केन्द्रित इस पोर्टल में न केवल अजमेर के ताजा-तरीन समाचार होंगे, अपितु विश्व, राष्ट्र व प्रदेश के प्रमुख घटनाक्रम के साथ खेल, व्यापार, मनोरंजन, ज्योतिष, स्वास्थ्य और साइंस एंड टैक्नोलॉजी की नवीनतम जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इस पर प्रमुख समाचारों की वीडियो क्लीपिंग भी देखी जा सकेंगी। जल्द ही इसी पोर्टल के जरिए अजमेर एट ए ग्लांस पुस्तक का पोर्टल भी देखा जा सकेगा। इसके अतिरिक्त फोन कॉल पर विभिन्न प्रकार की सेवाएं शुरू करना भी प्रस्तावित है।
इस मौके पर एनडीटवी के अजमेर रीजन हैड मोइन खान ने पोर्टल के फीचर का लाइव शो किया। श्री चंपालाल जी महाराज ने पोर्टल को डवलप व डिजायन करने वाले टैक्नोक्रेसी के मुबारक खान को माल्यार्पण कर आशीर्वाद दिया। समारोह के आरंभ में सभी अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया। समारोह का संचालन श्रीमती माधवी स्टीफन ने किया।