गुरुवार, 20 अगस्त 2026
डॉ. शामिका रवि ने किया बिहार के प्रथम सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस का विधिवत शुभारंभ
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. शामिका रवि ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव की पहल, दूरदृष्टि और नेतृत्व की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरी नीति और शासन जैसे समसामयिक विषय पर केंद्र की स्थापना समय की आवश्यकता है। देश तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल कक्षाओं और पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रह सकती। उच्च शिक्षण संस्थानों को समाज और शासन के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं पर शोध करना होगा और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए नीति संवाद को मजबूत करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केंद्र शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देगा और नीति-निर्माताओं तथा अकादमिक जगत के बीच प्रभावी संवाद का मंच बनेगा।
कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव ने कहा कि सेंटर फॉर अर्बन पॉलिसी एंड गवर्नेस केवल एक नए अकादमिक केंद्र की शुरुआत नहीं, बल्कि शहरी भारत की बदलती जरूरतों पर शोध, संवाद और नीति-विमर्श के लिए समर्पित मंच का निर्माण है। उन्होंने कहा कि बिहार के शहर तेजी से बदल रहे हैं। शहरीकरण से आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और विकास के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ आवास, यातायात, जलापूर्ति, स्वच्छता, पर्यावरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इन समस्याओं का समाधान स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध आंकड़ों और नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर ही संभव है।
प्रो. शरद कुमार यादव ने कहा कि शहरी समस्याओं को समझने के लिए केवल एक विषय का दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं है। अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, पर्यावरण अध्ययन, इंजीनियरिंग, प्रशासन, सार्वजनिक नीति और डेटा विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों को साथ लेकर बहुविषयक शोध की आवश्यकता है। केंद्र का उद्देश्य इसी समन्वित दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास रहेगा कि केंद्र शोध, नीति और व्यावहारिक शासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करे। विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वास्तविक शहरी समस्याओं, स्थानीय निकायों और समुदायों के साथ काम करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में बेहतर आधारभूत संरचना और प्रभावी प्रशासन बेहद जरूरी है। शहरों के विकास के लिए स्वच्छता, पेयजल, परिवहन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं की मजबूत व्यवस्था के साथ शहरी प्रशासन को अधिक जवाबदेह, सक्षम और नागरिक केंद्रित बनाना होगा। उन्होंने कुलपति की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह केंद्र बिहार में शहरी नीति और प्रशासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने सरकार, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि शहरी विकास को केवल सड़कों, भवनों और भौतिक आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं किया जा सकता। बेहतर शहर के लिए पारदर्शी प्रशासन, नागरिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन और समान अवसर भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन, स्वच्छता, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाएं सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। उन्होंने केंद्र की स्थापना को विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार बताया।
केंद्र के माध्यम से सरकार, शहरी स्थानीय निकायों, विकास एजेंसियों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है। यहां विशेषज्ञ व्याख्यान, नीति संवाद, शोध परियोजनाएं, कार्यशालाएं, क्षेत्रीय अध्ययन, अंतर्विषयक शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शहरी विकास की जमीनी चुनौतियों से परिचित कराने के साथ उन्हें शोध और नीति-विश्लेषण की व्यावहारिक समझ देना है।
कार्यक्रम में शहरी विकास, सुशासन, स्थानीय शासन, नागरिक सहभागिता और भविष्य की शहरी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिहार के सतत और समावेशी शहरी विकास के लिए प्रमाण आधारित नीति, सक्षम स्थानीय संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थियों के साथ पटना स्थित अन्य शोध संस्थानों के शिक्षकों एवं शोधार्थियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।
कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह केंद्र शहरी नीति, शासन और विकास के क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और नीति संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य ज्ञान को समाज और शासन की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। बिहार के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में स्थानीय अनुभवों और प्रमाणों पर आधारित ज्ञान का निर्माण ही बेहतर नीति और बेहतर शहरों की आधारशिला बनेगा।
बदलती सामाजिक संवेदनाओं में वृद्धों को चाहिए उजाले
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस-21 अगस्त, 2026
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस समाज के अंतर्मन को झकझोरने एवं वृद्धों की त्रासद स्थितियों पर सोचने को विवश करता है कि जिन हाथों ने परिवार की नींव रखी, जिन कंधों ने बच्चों के भविष्य का भार उठाया और जिन अनुभवों ने जीवन की अनेक कठिन राहों को पार करने में अगली पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया, उन्हीं वृद्ध माता-पिता को जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेलापन, उपेक्षा, असुरक्षा और अपमान क्यों झेलना पड़ रहा है? निश्चित ही कहीं-न-कहीं हमारी सामाजिक संवेदना कमजोर हुई है। जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान सहज संस्कार होना चाहिए था, वहां उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए अलग से दिवस मनाना हमारी सामूहिक आत्मचिंता का विषय है। भारत तेजी से वृद्ध होती आबादी की ओर बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 के अनुसार 2050 तक भारत की आबादी में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत हो सकती है; यानी हर पांच भारतीयों में लगभग एक वरिष्ठ नागरिक होगा। यह केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के सामने आने वाली एक बड़ी चुनौती है। अधिक उम्र तक जीना मानव सभ्यता की उपलब्धि है, लेकिन यदि लंबी आयु के साथ अकेलापन, बीमारी, आर्थिक असुरक्षा और भावनात्मक उपेक्षा जुड़ जाए तो दीर्घ जीवन वरदान के बजाय बोझ जैसा अनुभव होने लगता है।भारत की पारंपरिक संस्कृति में वृद्ध व्यक्ति परिवार के मुखिया, मार्गदर्शक और अनुभव के भंडार माने जाते थे। संयुक्त परिवार में उनकी भूमिका केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे परिवार की स्मृति, परंपरा और संस्कारों के जीवंत केंद्र होते थे। लेकिन तेजी से बदलती जीवनशैली, महानगरीय संस्कृति, रोजगार के लिए पलायन, छोटे परिवारों की प्रवृत्ति, उपभोक्तावाद और बढ़ती व्यक्तिवादी सोच ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। आज कई वृद्ध अपने ही घर में रहते हुए भी भावनात्मक रूप से अकेले हैं। उनके पास रहने को छत है, लेकिन संवाद के लिए कोई अपना नहीं; परिवार है, लेकिन समय नहीं; संतान है, लेकिन अपनापन कम होता जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस वृद्ध ने जीवनभर परिवार को अपने केंद्र में रखा, सेवानिवृत्ति के बाद वही परिवार उसे अपने केंद्र से बाहर करने लगता है। नौकरी में रहते हुए जिस व्यक्ति की सलाह महत्वपूर्ण थी, नौकरी से मुक्त होते ही उसकी उपयोगिता जैसे समाप्त मान ली जाती है।
वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या इसी बदलती सामाजिक संरचना का संकेत है। हर वृद्धाश्रम दुख की कहानी नहीं है; कुछ स्थानों पर वे अकेले और असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा और देखभाल का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। लेकिन जब वृद्धाश्रम उन माता-पिता का अंतिम ठिकाना बन जाए जिन्हें सक्षम संतान केवल इसलिए घर से दूर कर देती है कि वे आधुनिक जीवन की सुविधाओं के बीच ‘असुविधा’ बन गए हैं, तब प्रश्न केवल परिवार का नहीं, पूरे समाज के संस्कारों का बन जाता है। संपत्ति अपने नाम कराने के बाद माता-पिता से दूरी बना लेना, उनकी बीमारी को बोझ समझना या उन्हें केवल घरेलू जिम्मेदारियों के लिए उपयोग करना ऐसी प्रवृत्तियां हैं, जिन पर समाज को गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए। यह भी सच है कि वृद्धावस्था की समस्या केवल युवाओं की संवेदनहीनता से पैदा नहीं होती। वरिष्ठ नागरिकों को भी बदलते समय के साथ स्वयं को बदलना होगा। नई पीढ़ी की स्वतंत्रता, निजी निर्णय और जीवनशैली को समझना होगा। अनावश्यक हस्तक्षेप से बचते हुए अपने अनुभव को आदेश नहीं, मार्गदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना होगा। उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन मन का बूढ़ा हो जाना अनिवार्य नहीं। वरिष्ठ नागरिक यदि सामाजिक गतिविधियों, अध्ययन, सेवा, आध्यात्मिकता, सामुदायिक कार्यक्रमों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े रहें तो उनका जीवन अधिक सक्रिय, सार्थक और आनंदपूर्ण बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कल आया फैसला बुजुर्गों के लिए कानूनी संजीवनी की तरह है जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि संतान माता-पिता की देखभाल और भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहती है, तो वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और सम्मान की रक्षा के लिए कानून के तहत बच्चों को उस संपत्ति से बेदखल करने का रास्ता खुला है।
सरकार की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। विशेष रूप से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आय की परवाह किए बिना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज देना एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार अक्टूबर 2024 में शुरू हुए इस विस्तार से लगभग छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है; जून 2026 तक योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए कवरेज का दायरा इसी दिशा में आगे बढ़ाया गया है। इसी प्रकार अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य केवल वृद्धों को आश्रय देना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, आवास, सक्रिय एवं उत्पादक वृद्धावस्था, कौशल, परिवहन तथा पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करना भी है। योजना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता, वृद्धाश्रम, सहायक उपकरण, सक्रिय वृद्धावस्था और अनुभव आधारित रोजगार जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है। ये प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं की सफलता अंततः उनके अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी पहुंचने पर निर्भर करती है। पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा, डिजिटल सेवाओं और कानूनी संरक्षण को अधिक सरल, सुलभ और स्थानीय स्तर पर प्रभावी बनाना अभी भी आवश्यक है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा जितनी जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी भावनात्मक सुरक्षा है। पैसा दवा खरीद सकता है, लेकिन अकेलेपन का उपचार नहीं कर सकता। अस्पताल शरीर का इलाज कर सकता है, लेकिन उपेक्षा से घायल मन का उपचार परिवार का प्रेम ही कर सकता है। इसलिए वृद्ध कल्याण को केवल सरकारी योजना या पेंशन के दायरे में नहीं देखा जा सकता। परिवार को यह समझना होगा कि वृद्ध माता-पिता को केवल भोजन और दवा नहीं चाहिए; उन्हें बातचीत चाहिए, सम्मान चाहिए, निर्णयों में सहभागिता चाहिए और यह भरोसा चाहिए कि वे परिवार के लिए अब भी महत्वपूर्ण हैं। आज की युवा पीढ़ी को यह बात विशेष रूप से समझनी होगी कि माता-पिता का वर्तमान हमारे भविष्य का संकेत है। जो व्यवहार हम आज अपने वृद्ध माता-पिता के साथ करेंगे, आने वाला समय उसी व्यवहार को हमारे सामने खड़ा करेगा। आज हम युवा हैं, कल हम वृद्ध होंगे। आज जिन आंखों को हम अनदेखा कर रहे हैं, कल उन्हीं जैसी आंखों में हमारी अपनी संतानों के व्यवहार का प्रतिबिंब दिखाई दे सकता है। इसलिए वृद्धों की सेवा दया नहीं, कर्तव्य है; उनका सम्मान उपकार नहीं, संस्कार है।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की वास्तविक सार्थकता तभी होगी जब यह एक दिन का आयोजन न रहकर जीवन की स्थायी दृष्टि बने। परिवार में सप्ताह में एक दिन नहीं, प्रतिदिन संवाद हो; समाज में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सक्रिय सामुदायिक मंच हों; स्थानीय संस्थाएं उन्हें ज्ञान, अनुभव और सेवा के अवसर दें; सरकार स्वास्थ्य, पेंशन और सुरक्षा की व्यवस्थाओं को मजबूत करे और युवा पीढ़ी अपनी सोच में परिवर्तन लाए। वृद्धावस्था जीवन की संध्या है, लेकिन संध्या का अर्थ अंधेरा नहीं होता। वह दिनभर की यात्रा के बाद सुनहरी रोशनी का समय भी हो सकती है। आवश्यकता केवल इतनी है कि परिवार उस रोशनी को बुझने न दे। हमारे वृद्ध जीवन के बीते हुए पन्ने नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुभव की खुली किताब हैं। यदि हम उनके अंतिम वर्षों को भय, अकेलेपन और उपेक्षा से भर देंगे तो हम केवल उनके साथ अन्याय नहीं करेंगे, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कारों को भी कमजोर करेंगे। इसलिए आज संकल्प होना चाहिए-वृद्धों के जीवन में अंधेरा नहीं, सम्मान का उजाला हो; अकेलापन नहीं, अपनापन हो; उपेक्षा नहीं, सहभागिता हो और शेष जीवन बोझ नहीं, आनंद एवं गरिमा का उत्सव बने। यही विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस का वास्तविक संदेश और हमारी सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।
प्रेषकः
(ललित गर्ग)
लेखक, पत्रकार, स्तंभकार
ई-253, सरस्वती कुंज अपार्टमेंट
25 आई. पी. एक्सटेंशन, पटपड़गंज
दिल्ली-110092, मो. 9811051133
नशे को ना, जिंदगी को हां: भंवरलाल गोठी स्कूल में गूंजा नशामुक्ति का संदेश
उत्कृष्ट साहित्य सम्मान–2026 से सम्मानित हुए सैनिक कवि गणपत लाल उदय
आदर्श आचार संहिता की पालना सुनिश्चित करें- श्री लोकबन्धु
जिला निर्वाचन अधिकारी ने ली चुनाव से सम्बन्धित समस्त प्रकोष्ठों की बैठक
निकाय क्षेत्र से रवाना होंगे मतदान दल, जल्द होगा रेण्डमाइजेशन
सभी अधिकारी कार्ययोजना का कैलेण्डर व चैक लिस्ट बनाएं
टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समयावधि में पूरी करें
जोनल व एरिया मजिस्ट्रेट नियुक्त कर जिम्मेदारी दें
अजमेर, 20 अगस्त। जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोक बन्धु ने स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए है कि आगामी दिनों में सम्पन्न होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में आदर्श आचार संहिता की अक्षरशः पालन सुनिश्चित की जाए। सभी प्रकोष्ठ अपने को आवंटित कार्य का कैलेंडर व चैक लिस्ट बनाएं। टेंडर की प्रक्रिया निर्धारित समयावधि में पूरी कर ली जाए। जोनल व एरिया मजिस्ट्रेटों की नियुक्त कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाए।
जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोक बन्धु ने गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभागार में चुनाव से जुड़े सभी प्रकोष्ठों के प्रभारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में अजमेर जिले के सभी निकायों में चुनाव होने हैं। सभी प्रकोष्ठ अपने से सम्बन्धित तैयारियां समय पर पूरी कर लें।
उन्होंने कहा कि सभी प्रकोष्ठ कामकाज का कैलेंडर बनाएं। चैकलिस्ट तैयार करें और टेंडर आदि प्रक्रिया करें। उन्होंने निर्वाचन शाखा को निर्देश दिए कि राज्य निर्वाचन आयोग से समन्वय, पत्राचार, मतदान केंद्रों की सूची के प्रकाशन, आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं के सत्यापन और चुनाव बैठकों में आयोजन का कार्य किया जाए। इसी प्रकार संस्थापन प्रकोष्ठ कार्मिकों की नियुक्ति आदेश जारी करने, मतगणना कार्मिकों की सूची पास-बैजेज प्रकोष्ठ को भेजने आदि का कार्य करे।
ईवीएम एवं मतपेटी प्रकोष्ठ ईवीएम/मतपेटियों की प्राप्ति, प्रथम स्तरीय जांच, रेंडमाइजेशन, मास्टर डेटा अपडेट, तैयारी, वितरण और संग्रहण सुनिश्चित करेगा। इसी प्रकार जिला निर्वाचन स्टोर प्रकोष्ठ सामग्री के रिकॉर्ड संधारण, वितरण तथा सेक्टर मजिस्ट्रेटों व मतदान दलों को सामग्री आवंटन का कार्य संभालेंगे।
इसी प्रकार शिकायत निवारण व मतदाता हेल्पलाइन (नियंत्रण कक्ष) प्रकोष्ठ द्वारा चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष का संचालन, डाक प्राप्ति, चुनाव दिवस की सूचना संकलन, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और वीडियोग्राफी समन्वय का कार्य किया जाएगा। आदर्श आचार संहिता प्रकोष्ठ द्वारा आचार संहिता की दैनिक मॉनिटरिंग, बैठकों के आयोजन, उल्लंघन शिकायतों के कंप्यूटर इंद्राज और राज्य निर्वाचन आयोग को दैनिक रिपोर्ट प्रेषण का कार्य किया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि मतदान एवं मतगणना दल गठन प्रकोष्ठ द्वारा मतदान, होम वोटिंग, सुविधा केंद्र व मतगणना दलों के रेंडमाइजेशन, फोटोयुक्त पहचान पत्र निर्माण तथा समय पर रवानगी का कार्य किया जाएगा। इसी प्रकार कानून व्यवस्था, सिक्योरिटी प्लान प्रकोष्ठ द्वारा एरिया व जोनल मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, संवेदनशील बूथों का चिन्हीकरण, कार्यपालक दण्डनायक शक्तियों का आवंटन, डिस्ट्रिक्ट सिक्योरिटी डिप्लॉयमेंट प्लान तैयार करने और लाइसेंसी हथियार जमा कराने की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने लेखा एवं निविदा प्रकोष्ठ, मतदान सामग्री प्रकोष्ठ, अल्पाहार व भोजन एवं रसद व्यवस्था प्रकोष्ठ, अभ्यर्थियों का निर्वाचन व्यय अनुवीक्षण प्रकोष्ठ, सरकारी एवं निजी वाहन अधिग्रहण एवं यातायात व्यवस्था प्रकोष्ठ, सामान्य व्यवस्था प्रकोष्ठ, मतगणना स्थल चयन, स्ट्रॉन्ग रूम व व्यवस्था प्रकोष्ठ, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ, मतपत्र एवं मुद्रण प्रकोष्ठ, डाक मतपत्र एवं ईडीसी प्रकोष्ठ, चुनाव पर्यवेक्षक प्रकोष्ठ, सांख्यिकी प्रकोष्ठ, मीडिया एवं निर्वाचन निर्देशिका मुद्रण प्रकोष्ठ, कंप्यूटर, साइबर सिक्योरिटी एवं आई.टी. प्रकोष्ठ, भुगतान (भत्ता व वाहन किराया) प्रकोष्ठ, तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था प्रकोष्ठ, पास-बैजेज, आवास एवं साफ-सफाई प्रकोष्ठ, एकल खिड़की प्रकोष्ठ, स्वीप प्रकोष्ठ, मतदाता सूची एवं रूट चार्ट प्रकोष्ठ, कार्मिक कल्याण प्रकोष्ठ, विशेष योग्यजन प्रकोष्ठ, पंचायत क्षेत्र स्तर व्यवस्था व एआरओ संबंधी कार्य प्रकोष्ठ को निर्देश दिए कि वे अपने से सम्बन्धित प्रकोष्ठ का कार्य समय पर सम्पादित करें।
बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री हर्षवर्धन अगरवाला, जिला परिषद के सीईओ श्री राम प्रकाश, उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अभिषेक गोयल सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के अधिकारी उपस्थित रहे।
*अजमेर मंडल पर कैटरिंग स्टालों एवं ट्रॉलियों के सघन निरीक्षण हेतु 15 दिवसीय विशेष जांच अभियान शुरू*
डीएसपी एसेट मैनेजर्स ने कोमल नारंग को वितरण प्रमुख बनाया
मुंबई, 20 अगस्त, 2026- डीएसपी एसेट मैनेजर्स प्राइवेट लिमिटेड (डीएसपीएएम) ने आज कोमल नारंग को वितरण प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की। वे उषा नायर का स्थान लेंगी। नायर डीएसपी से रिटायर हो रही हैं। नई भूमिका में कोमल डीएसपीएएम की वितरण रणनीति का नेतृत्व करेंगी। कंपनी का लक्ष्य वितरण भागीदारों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना और देशभर के निवेशकों तक अपने निवेश सॉल्यूशन की पहुंच बढ़ाना है।
कोमल को वित्तीय सेवा क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्हें वितरण, सेल्स नेतृत्व, कस्टमर एंगेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट का व्यापक अनुभव है। वह जियोब्लैकरॉक म्यूचुअल फंड से डीएसपीएएम में आईं हैं। जियोब्लैकरॉक में वह चीफ क्लाइंट ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। वहां उन्होंने सेल्स, मार्केटिंग और डिजिटल पहलों का नेतृत्व किया।
जियोब्लैकरॉक से पहले कोमल करीब 10 साल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट में रहीं। इस दौरान उन्होंने ग्राहक जुड़ाव और कारोबार विकास से जुड़े सीनियर लीडरशिप के पदों पर काम किया। उनका सबसे अंतिम अहम रोल हेड (कस्टमर एंगेजमेंट) था। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने एएमसी के बी2सी कारोबार का करोबार बनाया और इसकी प्रमुख रहीं। इससे पहले उन्होंने हेड (बिजनेस डेवलपमेंट) की भूमिका में रहते हुए वितरण कारोबार को संगठित किया।
अपने करियर के शुरुआती दौर में कोमल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में सेल्स और वितरण से जुड़े लीडरशिप वाले पदों पर रहीं। वे कोटक लाइफ इंश्योरेंस और इंडियाबुल्स में भी काम कर चुकी हैं।
डीएसपीएएम में कोमल सभी चैनलों, रणनीतिक गठजोड़ और वितरण मार्केटिंग से जुड़ी कंपनी की वितरण रणनीति को लीड करेंगी। उनका ध्यान पूरे वितरण तंत्र में भागीदारियों को मजबूत करने और निवेशकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर रहेगा। इसके साथ वे डीएसपी की देशभर में मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति के तहत वितरण नेटवर्क को और मजबूत करने पर काम करेंगी।
डीएसपी एसेट मैनेजर्स के एमडी और सीईओ कल्पेन पारेख ने कहा, “वितरण हमारे लिए केवल विकास का माध्यम नहीं है। यह भागीदारों के साथ दीर्घकालिक संबंधों के जरिए निवेशकों का भरोसा कायम रखने का तरीका है। जैसे-जैसे निवेशकों की जरूरतें बदल रही हैं, वैसे-वैसे हमें अपने वितरण तंत्र को समर्थन देने और उसके साथ जुड़ने के तरीके भी बदलने होंगे। हमारा ‘डिस्ट्रीब्यूटर सक्सेस फ्रेमवर्क’ केवल संवाद और अभियानों तक सीमित नहीं है। इस पहल के माध्यम से हम व्यावहारिक ग्रोथ मार्केटिंग फ्रेमवर्क साझा करते हैं, जो हमारे भागीदारों को वास्तविक कारोबारी चुनौतियों से निपटने और अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह एक सरल विश्वास पर आधारित है, जब हम वितरकों को मजबूत कारोबार खड़ा करने में मदद करते हैं, तो हम अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी बनाते हैं। कोमल को वितरण, कस्टमर एंगेजमेंट और कारोबार विकास का गहरा अनुभव है। हमें उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में हम इस दृष्टिकोण को देशभर के और अधिक भागीदारों तक पहुंचाएंगे।”
डीएसपी एसेट मैनेजर्स की वितरण प्रमुख कोमल नारंग ने कहा, “डीएसपी की दीर्घकालिक और निवेशक-केंद्रित सोच मेरे विचारों से पूरी तरह मेल खाती है। निवेशकों को उनके वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में मदद करने में वितरण भागीदारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेरा मानना है कि हमारी भूमिका केवल निवेश समाधान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसमें अपने निवेश संबंधी विचारों, विशेषज्ञता और निवेशकों की जरूरतों की समझ के माध्यम से हमारे भागीदारों को सार्थक मूल्य देना भी शामिल है। मैं अपने वितरण भागीदारों के साथ मिलकर संबंधों को और मजबूत करने, निवेश समाधानों की पहुंच बढ़ाने और निवेशकों के लिए लगातार बेहतर गुणवत्ता वाला अनुभव तैयार करने को लेकर उत्साहित हूं। डीएसपी की विकास यात्रा के इस महत्वपूर्ण दौर में इससे जुड़कर और अधिक मजबूत वितरण मंच तैयार करने में योगदान देने को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं।”
फिल्म ‘मस्त महिला मंडली’ की स्क्रीनिंग 23 अगस्त को जयपुर में
जयपुर। मुंबई की 10 महिलाओं द्वारा स्मार्टफोन के माध्यम से तैयार की गई 72 मिनट की सामुदायिक डॉक्यूमेंट्री ‘मस्त महिला मंडली’ की फिल्म स्क्रीनिंग जयपुर में 23 अगस्त को दोपहर 12 से 3 बजे तक जवाहर कला केंद्र, रंगायन में आयोजित की जाएगी। यह पहल गैर-सरकारी संगठन कोरो इंडिया के ‘ राइट टू पी– पेशाब का अधिकार’ अभियान से जुड़ी महिलाओं की सामुदायिक यात्रा पर आधारित है।
जयपुर में आयोजित होने वाले फिल्म स्क्रीनिंग का उद्देश्य महिलाओं और समुदाय के अनुभवों को स्मार्टफोन के माध्यम से दर्ज करने, अपनी कहानी स्वयं कहने तथा सामुदायिक मुद्दों पर फिल्म और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग करने की समझ विकसित करना है।
कार्यक्रम में ‘मस्त महिला मंडली’ द्वारा मोबाइल से फिल्म बनाने, कहानी को व्यवस्थित करने, इंटरव्यू एवं अनुभवों को रिकॉर्ड करने तथा स्थानीय मुद्दों को डिजिटल माध्यम से प्रभावी ढंग से सामने लाने से संबंधित अनुभव साझा किये जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, ‘मस्त महिला मंडली’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा अपने अनुभवों और अधिकारों को अपनी आवाज में सामने लाने की सामुदायिक पहल है। इसी दृष्टि से जयपुर में होने वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम भी महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के दौरान फिल्म निर्माण से जुड़े अनुभवों, महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक सिनेमा की संभावनाओं पर संवाद भी किया जाएगा।
संपर्क-
दीपचन्द माली (स्टेट लीड कोरो इंडिया राजस्थान ) मोबाइल- 9414322685
बाबूलाल नागा (मीडिया प्रतिनिधि) मोबाइल – 9829165513
झूलेलाल चालीहो समापन पर शुक्रवार 25 अगस्त को सॉय 5 बजे से अनासागर जेटी पर होगें धार्मिक कार्यक्रम
संतो के सानिध्य में होगा पंचमहाज्योति, दीपदान व महाआरती
अलग अलग मन्दिरों से आयेगी बहिराणा साहिब की पवित्र ज्योतअजमेर-20 अगस्त सिन्धु समिति की ओर से इच्छापूर्ण झूलेलाल मन्दिर के सहयोग से आराध्यदेव झूलेलाल के 25वें चालीहो महोत्सव के समापन अवसर पर आगामी 25 अगस्त को सांय 5 बजे से अनासागर जेटी पर विशाल धार्मिक आयोजन किया जायेगा। उक्त आयोजन की तैयारी पर चर्चा जयकिशन लख्याणी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में की गई।
मन्दिर अध्यक्ष राम बालवाणी ने बताया कि सन्त महात्माओं के कर कमलों से पूज बहिराणा साहिब की पंच महाज्योति प्रज्जवलन कर किया जायेगा।
संयोजक नरेन्द्र
बसराणी ने बताया कि धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम घनश्याम भगत, धर्मदास, चन्द्र भगत, प्रकाश मोटवाणी, ढोलण शर्मा, दीपक तेजावत व बंटी एण्ड पार्टी द्वारा प्रस्तुतियां दी जायेगी।
11 अलग अलग मन्दिरांे से आयेगी बहिराणा मण्डली -
सेवादार महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने बताया कि इच्छापूर्ण झूलेलाल मन्दिर के साथ पूज्य लाल साहब मन्दिर नसरपुर दरबार, श्री झूलेलाल मन्दिर वैशाली नगर, पूज्य सिंधी पंचायत सिन्धु भवन पंचशील नगर, श्री झूलेलाल मन्दिर अजयनगर, पूज्य उडेरो लाल मन्दिर आशागंज, श्री झूलेलाल मन्दिर सिन्धुवाडी, श्री झूलेलाल मन्दिर (साओ बहिराणो) केसरगंज, पूज्य झूलेलाल मन्दिर जेपी नगर सेक्टर-1, झूलेलाल मन्दिर, यू.आई.टी. कॉलोनी, माकडवाली रोड, आदर्श सिंधी पंचायत, आदर्श नगर सहित अलग अलग मन्दिरों में पूजा अर्चना के साथ बहिराणा साहब ज्योत सम्मिलित होगी। समापन पर अनासागर के तट पर सामूहिक दीपदान, महाआरती के साथ प्रसाद वितरण किया जायेगा।
बैठक में हरकिशन टेकचंदाणी, गोविन्द पारवाणी, घनश्यामदास चंदनाणी, ईश्वर पारवाणी, बाली फेरवाणी, जगदीश बसरमलाणी, सेवक पंजवाणी, अजीत पमनाणी, महेश टेकचंदाणी, दिलीप बूलचंदाणी सहित सेवादार उपस्थित थे।
पारंपरिक खेल हमारी सांस्कृतिक धरोहर-खाजूलाल चौहान
सतोलिया में क्वीन मैरी तथा मायापुर स्कूल व खो खो में टांक ग्लोबल स्कूल ने जीते दोनों खिताब
गुरूवार 22 अगस्त को बलिदानी राणा रतनसिंह के शौर्य पर संगोष्ठी का आयोजनअजमेर 20 अगस्त सिंधुपति महाराजा दाहरसेन की 1357वीं जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताओं में क्वीन मेरी स्कूल तथा मायापुर स्कूल ने सतोलिया के खिताब जीते वही खो-खो प्रतियोगिताओं में टॉक ग्लोबल स्कूल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दोनों वर्गों के खिताब पर कब्जा जमाया।
हरिभाऊ उपाध्याय नगर स्थित महाराजा दाहरसेन स्मारक परिसर में आयोजित दो दिवसीय पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि पारंपरिक खेल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, खेलकूद स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस अवसर पर महाराजा दाहरसेन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके समस्त परिवार के बलिदान को याद किया।
पूर्व उपमहापौर संपत सांखला ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि सिंधुपति महाराज दाहरसेन एक इतिहास पुरुष थे जिनके जीवन से प्रेरणा लेकर नए समाज का निर्माण करें। समारोह समिति के संयोजक राजस्थान धरोहर प्राधिकरण की पूर्व सदस्य कंवल प्रकाश किशनानी ने कहा कि महाराजा दाहरसेन एक सच्चे देशभक्त थे जिन्होंने आक्रांताओं का सफाया करने के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान दे दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल तकनीकी अधिकारी विनीत लोहिया ने की। भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए प्रतियोगिता में भाग लेने आए विभिन्न स्कूलों के नन्हे मुन्ने बच्चों को कहा कि इस तरह की खेलकूद प्रतियोगिताएं जीवन में नया उत्साह जाग्रत करती है।
आज के परिणाम सतोलिया बालक वर्ग विजेता क्वीन मैरी सी.सै.स्कूल अजमेर, उपविजेता टीम रा.उ.मा.वि.मायापुर सतोलिया बालिका वर्ग मे विजेता रा.उ.मा.वि.मायापुर,उपविजेता टीम मैस्कॉट द स्कूल अजमेर रहे।
खो-खो बालक वर्ग विजेता टांक ग्लोबल स्कूल अजमेर, उपविजेताः- मैस्कॉट द स्कूल अजमेर खो-खो बालिका वर्ग मे विजेता टांक ग्लोबल स्कूल अजमेर, उपविजेता रा.उ.मा.वि.मायापुर ओपन वर्ग की पुरूष खो-खो प्रतियोगिता मे विजेता टीम क्वीन मैरी स्पोर्टस एकेडमी, उपविजेता टीम मैस्कॉट द स्पोर्टस एकेडमी ओपन वर्ग की महिला खो-खो प्रतियोगिता मे विजेता टीम मैस्कॉट द स्पोर्टस एकेडमी, उपविजेता टीम रूटस एकेडमी अजमेर रही।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन मे रमेश एच. लालवाणी, सीताराम बच्चाणी, शैलेन्द्र परमार, सुशील भागचंदाणी व निर्णायको में किशोर कुमार मारोठियॉ, अक्षय चतुर्वेदी, शराफत खान, सुरेन्द्र पाल सिंह संधू, अमित सिंह,निकिता कुमारी गौतम, गजेन्द्र सिंह तॅवर, मोनिका रावत विक्रम सिंह राठौड़, भागचन्द जाट, अनिता रावत प्रमुख रहे।
विजेताओं को आगामी 23 अगस्त को प्रातः 9 बजे सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक पर आयोजित मुख्य समारोह में सम्मानित किया जायेगा।
कल गुरूवार को राणा रतन सिंह पर होगी संगोष्ठी का आयोजन
संयोजक शैलेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि गुरूवार 21 अगस्त सांय 4.30 बजे से स्मारक पर 1857 की क्रांति में बलिदानी राणा रतनसिंह के शौर्य पर संगोष्ठी का आयोजन जायेगा।
कवंलप्रकाश किशनानी,
मो.9829070059
VANTARA APPOINTS FORMER CITES SECRETARY-GENERAL JOHN E SCANLON AO AS INDEPENDENT CHAIR OF GOVERNING COUNCIL
Mr Scanlon has been appointed as independent Chair of Vantara's newly established Governing Council, its peak governing body
Jamnagar (Gujarat), 20th August 2026: Vantara is pleased to announce that John E. Scanlon AO has accepted its invitation to serve as the inaugural Chair of its newly established five-member Governing Council. The Council has overall responsibility for overseeing Vantara's conservation, care and rehabilitation, and compliance activities, including final authority over every decision to acquire an animal.
“Vantara has sought, obtained, and acted upon external advice as it takes bold steps to reset its operations. In making this reset, it has decided to voluntarily strengthen its internal due diligence governance, expertise and processes, and to pivot from ex situ rescue towards providing in situ support to countries, including in India,” said Mr. Scanlon.
“As Vantara grows and embeds these changes into its daily operations, it will have an ever-increasing global influence on advancing animal welfare, wildlife conservation and harmonious co-existence. I look forward to helping Vantara deliver on its reset and to making a lasting, transformative impact,” added Mr. Scanlon.
Mr Scanlon brings vast experience and expertise to Vantara, having worked across every continent and sector in the fields of environment protection, nature conservation and sustainable development. A lawyer by training, he has held senior leadership positions across the private sector, government, the United Nations, international institutions, and not-for-profit organisations, and is globally recognised for his strategic foresight and ability to deliver transformative, real-world action.
Mr. Scanlon was first approached by Vantara in April of this year, when he was asked if he would provide an independent report upon Vantara, together with a set of recommendations. He was engaged upon terms that ensured his complete independence from Vantara and, following several extensive visits, he submitted an independent report and recommendations. Vantara undertook to implement his recommendations in full, and he was thereafter requested to take on further roles, in an independent capacity, to assist Vantara with the implementation of these recommendations and to provide guidance and support more generally.
In 2019, Mr. Scanlon was awarded the prestigious Officer of the Order of Australia (AO) for distinguished service to wildlife conservation and protection through roles with international organizations. He has also been awarded the Adelaide University Distinguished Alumni Award, the esteemed Chinese Government Friendship Award, the Financial Crime Fighter of the Year Award, and the UNEP Baobab Award for Innovation.
Mr Scanlon’s past and present roles include: Secretary General, Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (Geneva); Principal Policy Advisor, UN Environment Programme (Nairobi); Director, Environmental Law Centre, International Union for the Conservation of Nature-IUCN (Bonn); Trustee, Royal Botanic Gardens Kew (London); Chair, Global Initiative to End Wildlife Crime (Hong Kong); Chair, UK Government Illegal Wildlife Trade Challenge Fund Advisory Group (London); Executive President, International Council of Environmental Law (Madrid); Strategic Advisor, World Commission on Dams (Cape Town); CEO, Department for Environment, Heritage and Aboriginal Affairs (Adelaide); Chair, Environment Protection Authority (Sydney); Commissioner, Murray Darling Basin Commission (Canberra); and Member, Steering Committee, IUCN World Commission on Environmental Law.
For more on Mr Scanlon see his LinkedIn profile here: https://ch.linkedin.com/in/
About Vantara:
Vantara, founded by Shri Anant Ambani, Executive Director of Reliance Industries Limited, is an animal welfare and conservation organisation.
Its ex situ programmes (care provided outside the natural habitat) include rescue, rehabilitation, treatment and long-term animal care (where required), supported by advanced veterinary medicine, species-specific nutrition, specialised infrastructure and multidisciplinary teams. Conservation breeding programmes are also undertaken to support the future restoration of viable populations in suitable natural habitats through rewilding.
Its in situ conservation work (conservation in animals’ natural habitats) supports native species restoration, habitat restoration and human-wildlife conflict mitigation efforts led by government authorities, conservation institutions and other partners in India and internationally.
बाजार कोलकाता ने एक्टर कार्तिक आर्िन को अपने 25वें वर्ि में
वषड 2002 में अपनी शुरुआत के बाद से बाजार ररटेल प्राइवेट हलहमटेड भारत के प्रमुख बेहतरीन वैल्यू ररटेल ब्ाोंड ों में से एक बन गर्ा है। इसने क्वाहलटी, हकफार्ती दाम और वैरार्टी के प्रहत अपनी प्रहतबद्धता से लाख ों ल ग ों का भर सा जीता है। हकफार्ती कीमत ों पर फैशन, लाइफस्टाइल और घर की जरूरी चीज ों की एक बडी रेंज पेश करते हुए र्ह ब्ाोंड मेटर , हटर्र-II, हटर्र-III के साथ उभरते बाजार ों में पररवार ों की जरूरत ों क पूरा करता है। कस्टमर एक्सपीररर्ोंस पर मजबूत फ कस और हवस्तार की महत्वाकाोंक्षी रणनीहत के साथ, बाजार क लकाता भारत भर में ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहक ों के हलए आधुहनक ररटेल क सुलभ बना रहा है।
इस जुडाव पर बात करते हुए काहतडक आर्डन ने कहा, मुझे बाजार क लकाता पररवार का हहस्सा बनकर बेहद खुशी ह रही है। इस ब्ाोंड ने क्वाहलटी वाले फैशन और लाइफस्टाइल उत्पाद ों क हकफार्ती और सुलभ बनाकर लाख ों ल ग ों का भर सा जीता है। पूवी भारत से एक मजबूत राष्ट्र ीर् वैल्यू ररटेल चेन बनने तक का उनका शानदार सफर वाकई प्रेरणादार्क रहा है। मैं इस र माोंचक ग्र थ स्ट री का हहस्सा बनने और पूरे भारत में ग्राहक ों से जुडने के हलए बेहद उत्साहहत हूँ।
इस पाटडनरशीप के पीछे की स च के बारे में बात करते हुए बाजार ररटेल प्राइवेट हलहमटेड के डार्रे क्टर और सीईओ, अहभषेक खेमका ने कहा, हमारा हमेशा से मानना रहा है हक बेहतरीन फैशन सभी के हलए सुलभ ह ना चाहहए। काहतडक आर्डन एक ऐसी नई पीढ़ी का प्रहतहनहधत्व करते हैं ज आत्महवश्वास से भरी, महत्वाकाोंक्षी और ल ग ों से जुडाव महसूस कराने वाली है। र्े गुण हमारे ग्राहक ों की बदलती स च क दशाडते हैं। एक क्षेत्रीर् वैल्यू ररटेलर से लेकर 13 राज् ों में 250 स्ट र के नेटवकड तक का हमारा सफर उस भर से क हदखाता है ज हमारे ग्राहक ों ने साल ों से हम पर जतार्ा है। जैसे-जैसे हम त्य हार ों के मौसम में कदम रख रहे हैं, र्ह सहर् ग देश भर के ग्राहक ों क प्रेररत करने और उनसे जुडने की हमारी र्ात्रा में एक र माोंचक अध्यार् की शुरुआत कर रहा है।
इस मौके पर बाजार क लकाता के माकेहटोंग हेड उमेश शमाड ने कहा, र्ह बाजार क लकाता के हलए एक अहम पल है। हमें अपने ब्ाोंड के फेस वैल्यू के तौर पर काहतडक आर्डन का स्वागत करते हुए बेहद खुशी ह रही है। जैसे-जैसे हम पूरे देश में अपना हवस्तार कर रहे हैं, वैसे-वैसे र्ह साझेदारी हमारे ब्ाोंड क और मजबूत करने में मददगार साहबत ह गी। ज भहवष्य में ग्राहक ों के साथ हमारे जुडाव क और गहरा करेगी।
बाजार क लकाता के बारे में: बाजार क लकाता 2002 से पूवी भारत में वैल्यू ररटेल सेगमेंट में अग्रणी ब्ाोंड रहा है।र्ह भारत की प्रमुख वैल्यू ररटेल चेन में से एक है। हकफार्ती कीमत ों पर बेहतरीन क्वाहलटी वाले प्र डक्ट देने के हलए मशहर इस कों पनी क 'इमेजेज ररटेल अवाडडडस' में कई बार 'पूवी भारत में सबसे सफल वैल्यू ररटेलर' का अवॉडड हमला है। पहिम बोंगाल, उत्तर प्रदेश, हबहार, झारखोंड, हत्रपुरा, असम, ओहडशा, तेलोंगाना, आोंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखोंड में 20 लाख वगड फुट से ज्ादा ररटेल स्पेस में फैले 250 से ज्ादा स्ट र के साथ, बाजार क लकाता फैशन, लाइफस्टाइल, ह म और र जमराड की जरूरत ों के प्र डक्ट की एक बडी रेंज पेश करता है। अपने बडे नेटवकड के जररए र्ह ब्ाोंड पूरे भारत में लाख ों ग्राहक ों के हलए मन में एक अलग पहचान बनाते हुए लगातार सफलता की सीढ़ी पर आगे बढ़ रहा है।
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