रविवार, 21 अप्रैल 2013

क्या आदर्शनगर एसएचओ को सम्मानित किया जाना चाहिए?


असल में यह सवाल इस कारण उठता है क्योंकि अजमेर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश टंडन ने जैसे ही फेसबुक पर आदर्शनगर एसएचओ मुकेश यादव को सम्मानित करने की राज्य सरकार से गुजारिश की तो एक सज्जन विनय शर्मा ने एक सवाल खड़ा कर दिया कि क्या कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी करते हुए अपनी ड्यूटी को ठीक से अंजाम देता है तो उसे सम्मानित किया जाना चाहिए?
आइये, जरा देखिए कैसे हुई क्रिया-प्रतिक्रिया:-
mukesh yadav s.h.o adarsh nagar police station has done a wonder job he arrested 3 accused of rape with a minor girl within 24 hours my salute to him he should be rewarded by rajasthan police or goverment of rajasthan we should proud on him as a police officer

Vinay Sharma
 सबसे पहले आप को बधाइ, फिर यादव सहाब को बधाइ, मगर मुझे कुछ ऐसा लगता है कि कल से एक अध्यापक को अछा पढाने का और एक बुस ड्राइवर को अच्छी बस च्लाने का भी एनाम देना पढेगा, सर आप मुझे negative ना समझे बल्कि हुमे हमारे समाजिक व न्यायिक दायित्वू का निर्वहन करने को प्रेरित करे, हमारी पगार हमारे ही देश वासियो के गाढी पसीने की कमाइ से आती है, और अपना कार्य करना हमारा दायित्व है, फिर आप जैसे विद्वान उसे सराहे तो हमारी हिम्मत जरुर बढती है उस के लिए आप का ध्न्यवाद.
Raaj Bhatia aise mahole main koi aise kam kare to use protsahan dena achi bat hai.thanx tandon sahab
यानि कि मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना। एक ही तथ्य को देखने का नजरिया अलग-अलग है, बस। बहरहाल, अब आप ही तय कीजिए कि क्या होना चाहिए?

शनिवार, 20 अप्रैल 2013

वरिष्ठ पत्रकार अनिल लोढ़ा शुरू करने जा रहे हैं नया सैटेलाइट न्यूज चैनल

T V addANIL LODHAअजमेर के मूल निवासी व वर्तमान में जयपुर में पत्रकारिता की धूम मचा रहे वरिष्ठ पत्रकार अनिल लोढ़ा जल्द ही एक नया सैटेलाइट न्यूज चैनल शुरू करने जा रहे हैं। समझा जाता है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शुरू होने जा रहे इस चैनल में राजस्थान की जनता को चुनावी उठापटक, सटीक समाचार विश्लेषण के साथ अन्य समाचार भी देखने-सुनने को मिलेंगे। कहने की जरूरत नहीं है कि लोढ़ा की एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप में कितनी धाक है। राज्य के राजनीतिक समीकरण उनकी अंगुलियों के पोरों पर थिरकते हैं।
उनके व्यक्तित्व के बारे में तो आप जानते ही हैं, आइये जानते उनके अब तक कैरियर के बारे में:-
पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रदेशभर में अजमेर का नाम रोशन करने वाले चंद पत्रकारों में से एक हैं अनिल लोढ़ा। कहावत है पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। इसे चरितार्थ करने वाले अनिल लोढ़ा अध्ययनकाल के दौरान राजकीय महाविद्यालय के सर्वश्रेष्ठ वक्ता के रूप में स्थापित हो गए। 19 मई, 1956 को जन्मे लोढ़ा ने राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित अंतर्विश्वविद्यालयी युवा समारोह में प्रतिनिधित्व किया और अनेक वाद-विवाद व काव्य प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत हुए।
राजस्थान पत्रिका के संवाददाता के रूप में पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अजमेर में नवभारत टाइम्स के ब्यूरो प्रमुख रहते हुए उन्होंने खोज खबर के मामले में कई कीर्तिमान स्थापित किए। इसके पश्चात जयपुर में दैनिक समाचार जगत का संपादन कर जता दिया कि उनमें सम्पादन की भी विलक्षण प्रतिभा है। इसी प्रतिभा से प्रभावित हो कर जयपुर से शुरू हुए दैनिक भास्कर ने राजस्थान में अपना जाल बिछाने के लिए उनके अनुभव का लाभ लिया। समाचार समन्यवयक के रूप में उन्होंने दैनिक भास्कर को एक साल में ही अग्रणी समाचार पत्र का दर्जा दिलाने में अहम भूमिका अदा की। उनकी कुशल प्रबंधन शैली का फायदा उठाते हुए उन्हें अनेक संस्करणों को शुरू करने का जिम्मा भी सौंपा गया। इसके बाद इसी समाचार पत्र समूह ने जब इलेक्टॉनिक मीडिया में कदम रखा तो भास्कर टीवी के संपादन का दायित्व उन्हें सौंपा गया। राजनीतिक विश्लेषण में उनका कोई सानी नहीं है। इसी योग्यता का उपयोग करते हुए पिछले दिनों ईटीवी राजस्थान ने उन्हें विधानसभा चुनाव के विशेष कार्यक्रम का संचालन सौंपा, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। उनकी लेखन विधा की बारीक जानकारी रखने वाले बताते हैं कि उनका शब्द विन्यास इतना सटीक होता है कि उसमें एक भी शब्द इधर से उधर नहीं किया जा सकता। वर्तमान में वे अपना स्वयं का सुनहरा राजस्थान साप्ताहिक समाचार पत्र संचालित कर रहे हैं, जिसके जयपुर, मुंबई, कोलकाता व दुबई संस्करण निकल रहे हैं।
-तेजवानी गिरधर

बुधवार, 17 अप्रैल 2013

स्थानीय के चक्कर में तो नहीं अटकी थी दरगाह कमेटी?


जैसे ही सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स को नजदीक देख अरसे से लंबित पड़े दरगाह कमेटी के पुनर्गठन की मांग उठी, उसके दो-तीन दिन बाद ही कमेटी का गठन हो गया। अर्थात कमेटी के नए सदस्यों के नाम तो पहले ही तय हो चुके थे, मगर घोषित नहीं किए जा रहे थे, वरना मांग के दो-तीन दिन के अंदर देश के विभिन्न भागों के प्रतिनिधियों का चयन इतना जल्दी कैसे हो गया?
ज्ञातव्य है कि कमेटी नौ सदस्यों की होती है, मगर उसमें केवल सात ही नियुक्त किए गए हैं, बाकी के दो सदस्यों के नाम अभी तय नहीं हो पाए हैं। समझा जाता है कि ये दोनों अजमेर के होंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि कमेटी में इन्हीं स्थानीय सदस्यों की नियुक्ति को लेकर ज्यादा विवाद है, क्योंकि केवल इन्हीं को रोका गया है। जैसे ही उर्स की नजदीकी के कारण कमेटी के पुनर्गठन की जरूरत महसूस हुई और इसकी मांग भी उठी तो सात सदस्य तो घोषित कर दिए गए, मगर दो लंबित कर दिए गए। बेशक बाहर के सदस्यों को लेकर भी प्राथमिकता का सवाल रहा होगा, मगर उसको लेकर विवाद होने की कोई संभावना नहीं हो सकती। विवाद केवल स्थानीय सदस्यों को लेकर ही होगा। जानकारी के अनुसार दरगाह कमेटी में शामिल होने के लिए स्थानीय लोगों में पूर्व सदस्य इलियास कादरी के साथ ही खादिम सैयद नातिक चिश्ती, सैयद इकबाल चिश्ती, सैयद लियाकत हुसैन मोईनी व सैयद गुलाम किबरिया चिश्ती समेत करीब 20 लोगों ने भी आवेदन किया था। जाहिर सी बात है कि इन्होंने अपने-अपने रसूखातों का उपयोग किया है और चूंकि उनमें टकराव की नौबत आई होगी, इस कारण कमेटी की घोषणा जल्द करने की मजबूरी के चलते दो सदस्यों का नाम लंबित कर दिया गया। अब चूंकि दो स्थान खाली हैं, इस कारण इन पर काबिज होने के लिए खींचतान और बढ़ेगी और घोषणा में और अधिक देरी हो सकती है। संभव है अब ईद के बाद ही शेष सदस्यों की नियुक्ति हो। इन दो स्थानों पर काबिज होने के लिए खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय में सचिव ललित के पंवार से भेंट कर दबाव बनाया है कि खादिमों को तवज्जो दी जाए, क्योंकि वे दरगाह की परंपराओं व रस्मों और जायरीन की जरूरतों को बेहतर जानते हैं। कुछ इसी तरह की बात युवा खादिम सैयद नातिक चिश्ती ने कही है। उनका कहना था कि जो व्यक्ति करीब होता है, वही बेहतर तरीके से अच्छाई-बुराई जानता है। खदिम से बेहतर जायरीन के बारे में किसे जानकारी हो सकती है। जिन लोगों को यहां भेजा जाता है, वे यहां के बारे में कुछ नहीं जानते। उन्होंने मांग रखी है कि कमेटी में 3 स्थानीय सदस्य शामिल होने चाहिए। इनमें एक गैर खादिम और दो खादिम होने चाहिए।
बहरहाल, अब देखना ये है कि स्थानीय स्तर पर कौन भारी पड़ कर अपना नाम कमेटी में शामिल करवा पाता है।
-तेजवानी गिरधर

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

सिंधियों के स्वाभिमान की रक्षा के लिए अब सिंधु सेना की तैयारी


अजमेर के युवा कांग्रेसी नेता नरेश राघानी मधुकर ने सिंधियों के स्वाभिमान की रक्षा के लिए एक नई पहल की है। वे सिंधु सेना के नाम से एक संगठन बनाने जा रहे हैं। अपने ब्लॉग जज्बातनामा में उन्होंने इस नई पहल का खुलासा किया है कि सिंधु सेना के गठन की पृष्ठभूमि क्या है और यह किस प्रकार काम करेगी।
आइये, उन्हीं के शब्दों में जानें क्या सोच है उनकी-

सिंधियों के स्वाभिमान कि रक्षक सिंधु सेना ... में आपका स्वागत है

किसी भी समाज कि पहली आवश्यकता क्या है ? अधिकांश लोग कहेंगे कि समाज के लोगों में एकता हो, लोग समृद्ध हो ,समाज के बच्चे पड़ लिख कर संस्कारित हो और अपने परिवार और समाज का नाम रौशन करें आदि आदि . मेरे विचार में इसे थोडा और विश्लेषात्मक ढंग से सोच कर देखिये जैसे ... यह सब बातें और सामाजिक उद्देश्य अपनी जगह सही है परन्तु सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है इन सभी उदेश्यों कि सम्मानजनक पूर्ती ,और वो तभी संभव है जब उस समाज के फलने फूलने और विकसित होने के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल हो ,ऐसा माहौल जिसमे कोई अपमान तिरस्कार आदि न हो. जब आपके आस पास ऐसा सुरक्षित माहौल होगा तभी तो अच्छे अच्छे विचार आएंगे और उन पर शांति से काम होगा उसके बाद ही समाज को गौरव प्राप्ति होगी.यदि आप किसी तरह कि असुरक्षा महसूस करते है तो विचारशून्य हो जाते है और वही आपकी सोच खतम हो जाती है इसका मतलब है कि सबसे बड़ी चीज़ है सुरक्षा और सम्मानजनक माहौल . इसे सिंधी समाज के नज़रिए से देखते है आइये मैं सभी सिंधी भाइयों से पूछना चाहता हू कि क्या आप आज इस देश कि आजादी के बाद से लेकर आज तक सब कुछ सहन कर अपना वजूद बनाने के पश्चात क्या पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं ? उत्तर कड़वा हैं परन्तु सत्य है और वो उत्तर है नहीं ... चाहे सिंधी समाज के लोगों ने विभाजन के पश्चात बहुत परिश्रम किया और इस देश कि मिट्टी में ही घुल मिल गए और न सिर्फ वजूद खडा किया बल्कि आज अपने आप को भारतीय कहलाने में गर्व महसूस करते है ... परन्तु आज पिछले कुछ वर्षों से राजनीति के क्षेत्र में जातिवाद हावी होने कि वजह से हम अपना वजूद कायम रखने कि इस दौड में कुछ पिछड़ने लगे है . हम परिश्रम कर के धन अर्जित तो कर लेते है लेकिन उस धन कि सुरक्षा नहीं कर पाते और कई जगह शोषण का शिकार होकर रह जाते है . इस प्रवर्ति कि वजह से कई जगह हमें कायरता का ठप्पा भी लगा दिया जाता है जो कि अनुचित है .ऐसे कई अनुचित शोषण के उदहारण आपको मिल जायेंगे सिंधियों के प्रती जिन्हें सिंधी बड़ी खामोशी और शालीनता से बर्दाश्त करता आ रहा है और आज इसी खामोशी ने उसे कायरता का मुखोटा पहना दिया है एक आम धारणा बन गयी है कि सिंधी कि प्रवर्ति डरपोक और आसानी से दबाव में आने वाली है, इसी प्रवर्ती में बदलाव लाने कि आवश्यकता महसूस हो रही है जिसका बीड़ा "सिंधु सेना " उठाना चाहती है जिसका उद्देश्य और एक मात्र एजेंडा होगा सिंधी समाज के लोगों कि रक्षा और सिंधियों के प्रति इस आम धारणा में बदलाव लाना ...
यह कोई राजनीतिक दल नहीं हैं न ही किसी भी मौजूदा राजनीतिक दल का अंश . यह सम्माज हित में,समाज कि रक्षा क लिए, समाज के लोगो कि ताकात का स्तंभ है . हर सिंधी में स्वाभिमान से और सम्मान से जीने कि आदत का बीजारोपण ... और सिंधियों कि तरफ बढ़ने वाले हर खतरे को रोकना सिंधी समाज कि ढाल बनकर और सिंधी समाज कि संस्कृति और सोच हेतु सुरक्षित माहौल तैयार करना इस बात का विशेष तौर पे ख्याल रखना कि सिंधियों को केवल शोषण कि वास्तु न मना जाए और इस सोच को भी बदलना कि सिंधी को आसानी से दबाया जा सकता हैं इस कार्य को पूरा करने के लिए ५० वर्ष कि आयु से कम वाले उर्जावान व्यक्तियों कि सिंधु सेना में भरती शुरू होने जा रही है जिसके संचालन हेतु समाज के वरिष्ठ जानो का सलाहकार मंडल होगा .
 
सिंधु सेना एक ऐसा दल होगा जो किसी भी सिंधी पे आपातकाल में हद से हद ४० मिनट में पीड़ित सिंधी भाई के एक फोन पे उसके पास होगा और उसे विप्पति के क्षणों में सहायता देगा और स्वाभिमान कि रक्षा करेगा सिंधी secular हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि आज सिंधी हमे न सिर्फ इस देश में बल्कि सारे विश्व में हर संस्कृति में घुल मिल कर व्यवसाय करता दिखाई दे रहा है जो दर्शाता है कि सिंधी कितनी मिलनसार कौम है लेकिन सिंधी कौम के इस स्वभाव का यह मतलब नहीं है कि सिंधी स्वाभिमान कि कीमत पर समझौता करेगा .. इसे आप एक सोशल आर्मी भी कहेंगे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी .... जो कि बिना किसी हिंसा के सिंधी भाईयों को स्वाभिमान से जीने में मदद करेगी और ज़रूरत पड़ने पे सिंधु नदी कि पवन संस्कृति कि रक्षा हेतु किसी भी हद तक जायेगी ... मुझे मेरे इस पावन कार्य में सभी इष्ट मित्रों के आशीर्वाद कि आवश्यकता हैं और इस कार्य को करने हेतु सुझाव हो तो वो भी अवश्य बताये मैं परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना करता हूँ कि मुझे व मेरे साथियों को कौम के स्वाभिमान कि रक्षा हेतु आशीर्वाद दे ताकि हम हमारी माटी का क़र्ज़ चुका सकें जय श्री कृष्ण जय झूलेलाल सुझाव हेतु मुझ से फोन पे बात कर सकते हैं आप मेरा नंबर है 09829070307

सचिन का दफ्तर खोले जाने की उठ रही है मांग


अजमेर के सांसद व केन्द्रीय कंपनी मामलात राज्य मंत्री सचिन पायलट का एक दफ्तर अजमेर में भी खोले जाने की मांग उठ रही है। इस मुद्दे पर इन दिनों फेसबुक पर चर्चा हो रही है।
आइये, जरा देखें, कौन क्या कह रहा है:-
बहस की शुरुआत करते हुए अजमेर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष किशन गुर्जर ने कहा कि-
AJMER WASIYO, MAINE HAMARE LOKPRIYA MP AND CENTRAL MINISTER ADARNIYA SACHIN PILOT SAAB KO EK SUJHAV DIYA KI AAPKA EK OFFICE AJMER ME BHI HONA CHAHIYE, JAHAN AAM NAGRIK APANI FARIYAD PESH KAR SAKE. KYA AAP MERE IS SUJHAV SE SAHMAT HA. IF YES, THAN LIKE OR SHARE. ---RAJESH TANDON.
इस पर युवा पत्रकार नवीन वैष्णव ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि:-
yes hona hi chahiye kyuki aam aadmi apni daastan sunane delhi thodi ja sakta h. vese ajmer ka durbhagya h ki yaha k mp ka yaha na to ghar na hi koi office h
एक और पत्रकार शाकिर रहमान खान ने कहा कि:-
bhai yeh sab election ke time par kyon yad aaya he tondon sab is se pahle aapka sujhav kaha tha ... ?
डीएवी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर विनय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी कि:-
Yes atleast mis understanding toh bani rahegi apne janpratinidhi ke lol sabha mein hone ki

इस पर किशन गुर्जर ने पलट कर प्रतिक्रिया दी कि:-
shakir bhai , tandon saab ne yeh sujhav aaj se do saal pahale diya tha. Aub tandon saab ko chunav nahi ladana ha,isiliye hum sab ko bhi bata rahe ha, verna Sachin ko kan me kahate.
बहस में आम आदमी पार्टी की अजमेर प्रभारी भी कूदीं और उन्होंने कहा कि:-
India Against Corruption Andolan ke samay 2011 main ye sujhaav ham ne Sachin ji ko diya tha par unhone aaj tak kaan nahi dhara. Ab election ka samay nikat hai shayad un ka man kar jaaye...
उल्लेखनीय है कि स्थानीय हिंदी पाक्षिक अजयमेरु ने भी इस सिलसिले में अपनी बात प्रकाशित की है। उसमें लिखा था कि इसमें कोई दोराय नहीं कि आप अजमेर के विकास के लिए सतत प्रयत्नशील हैं और लगातार दौरा करके यहां की खैर-खबर भी लेते रहते हैं। समय-समय पर अजमेर जिले में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करके जनता के रू-ब-रू हुए हैं। जनता ने भी आपको भरपूर सम्मान व प्यार दिया है। समाज के प्रत्येक तबके ने आपके स्वागत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। एक लोकप्रिय राजनेता व जनता में अपनी प्रतिष्ठा पैदा करने की कसौटी पर आप खरे उतर रहे हैं। पिछले दिनों आयोजित मेगा मेडिकल कैंप आपकी उल्लेखनीय उपलब्धि में शुमार है। मगर एक कमी आज भी यहीं की जनता को अखरती है। जनता चाहती है कि वह अपने जनप्रतिनिधि तक अपनी बात सुगमता से पहुंचा सके। यह तभी सम्भव हो सकता है जब माह में कम से कम एक बार आप आम जनता के लिए समय निकालें। माह में कम से कम एक दिन जनता दरबार लगाएं व व्यवस्थित तरीके से जनता की भावनाओं व उनके दु:ख-दर्द को सुनें व उनके निराकरण की कार्य योजना बनाएं। इसके अतिरिक्त अपना एक दफ्तर भी बनाएं, जहां आपका कोई प्रतिनिधि कम से कम जनता की अपेक्षा व शिकायतें दर्ज कर आप तक नियमित रूप से पहुंचा दे। आप अपनी कोई वेबसाइट भी कायम करें, जहां पर  जनता अपनी बात पहुंचा सके।
कुल जमा बात ये है कि पायलट के स्थानीय दफ्तर की वाकई दरकार है, ताकि आम लोग अपनी शिकायतें और सुझाव आदि दे सकें। इस प्रकार उनका सचिन से सीधा संपर्क हो सकता है। यदि लोगों को उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप जवाब भी मिलेगा तो उन्हें वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
-तेजवानी गिरधर