बुधवार, 8 मई 2013

भाजपा क्यों नहीं उठा रही पाक जायरीन का मुद्दा


पाकिस्तान में भारतीय नागरिक सरबजीत की हुई हत्या के विरोध और पाक जायरीन को जियारत की अनुमति न देने की मांग के सिलसिले में राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति की ओर से चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में भाजपा के जिम्मेदार नेता तो खुल कर भाग ले रहे हैं, मगर इस मुद्दे पर खुद भाजपा संगठन अग्रणी भूमिका नहीं निभा रहा, इसको लेकर लोगों के बीच खूब कानाफूसी हो रही है।
आपको याद होगा कि पाकिस्तानी जायरीन को अनुमति न देने का मुद्दा सबसे पहले कुछ संगठनों व भाजपा विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी ने अपने स्तर पर उठाया था, मगर उसका कोई असर नहीं हुआ। इस पर बाद में इसे अभियान की शक्ल दी राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति ने। मजे की बात ये है कि इसमें भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरण माहेश्वरी, प्रदेश मंत्री एवं विधायक अनिता भदेल और भाजयुमो नेता व पार्षद नीरज जैन आदि ने भी भाग लिया। अभियान को कितना जनसमर्थन मिल रहा है, इसका अंदाजा इसी बात ये लगाया जा सकता है कि मा.शि.बोर्ड कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत व महामंत्री रणजीत सिंह समेत अन्य कर्मचारियों, राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष बलराम शर्मा, माहेश्वरी प्रगति संगठन के अध्यक्ष अजय ईनाणी और यहां तक कि स्कलों के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया और तकरीबन पचास हजार से भी ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। इससे भी बड़ी बात ये है कि कई मुस्लिमों व खादिमों ने भी इसे समर्थन दिया है। मगर आज तक भाजपा ने संगठन के तौर पर इस मुद्दे पर कोई सक्रिय भूमिका अदा नहीं की है। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की संगठन के स्तर पर यह चुप्पी सवाल तो खड़े करती ही है। ऐसा प्रतीत होता है कि शहर भाजपा अध्यक्ष प्रो. रासासिंह रावत चुक से गए हैं या फिर वे फिलहाल केवल सुराज संकल्प यात्रा में ही अपनी एनर्जी खर्च करना चाहते हैं, क्योंकि उसी में किया गया काम विधानसभा चुनाव में काम आएगा। सच जो कुछ भी हो, मगर उनकी निष्क्रियता पर कानाफूसियां तो होनी ही हैं।

अन्ना और केजरीवाल एक ही हैं?


प्रत्यक्षत: भले ही देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल अलग-अलग हों, मगर स्थानीय स्तर पर दोनों के कार्यकर्ता एक ही हैं। आगामी 10 मई को अन्ना हजारे के अजमेर आगमन पर उनके स्वागत और आमसभा की व्यवस्था आम आदमी पार्टी की अजमेर प्रभारी श्रीमती कीर्ति पाठक के नेतृत्व में ही की जा रही है।
ज्ञातव्य है कि जनलोकपाल के एकजुट हो कर आंदोलन करने के बाद केजरीवाल और उनकी टीम ने अन्ना से अलग हो कर आम आदमी पार्टी का गठन किया और सक्रिय राजनीति में आ गए। अब तो आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारियां तक चल रही हैं। अन्ना हजारे ने केजरीवाल के अलग होने पर नए सिरे से टीम अन्ना का गठन किया, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह को प्रमुख रूप से शामिल किया गया। पूर्व आईपीएस किरण बेदी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता तो उनके साथ हैं ही। टीम अन्ना में हुई इस दोफाड़ से आंदोलन कमजोर पडऩे की आशंका में कई कार्यकर्ताओं को निराशा भी हुई। कुछ कार्यकर्ता तो सीधे ही आम आदमी पार्टी में शमिल हो गए, जबकि कुछ ने अन्ना हजारे के साथ रहना ही पसंद किया और फिलहाल  वे घर बैठ गए। जहां तक श्रीमती कीर्ति पाठक का सवाल है, यह सबको पता है कि अजमेर में अन्ना आंदोलन को चलाने का श्रेय उनको व उनकी टीम को ही जाता है, मगर आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो वे उसमें शामिल हो गईं। आज वे अजमेर की प्रभारी हैं, मगर उन्होंने अपने आपको अन्ना हजारे के आंदोलन से अलग नहीं किया। ऐसे में जाहिर है कि जब अन्ना हजारे का अजमेर का कार्यक्रम बना तो सीधे उनसे ही संपर्क किया गया और उन्होंने सहर्ष सारी व्यवस्था करने का जिम्मेदारी ले ली। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके प्रमुख सहयोगी दीपक गुप्ता, सुशील पाल, नील शर्मा, दिनेश गोयल आदि हाथ बंटा रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि आम आदमी पार्टी के ये सभी कार्यकर्ता अन्ना हजारे के कार्यक्रम को अंजाम देने के लिए  जनतंत्र मोर्चा के बैनर तले जुटे हुए हैं। यह जनतंत्र मोर्चा कब गठित हुआ, इसकी जानकारी तो नहीं है, मगर ताजा गतिविधि से यह स्पष्ट है कि कम से कम अजमेर में तो आम आदमी पार्टी और जनतंत्र मोर्चा एक ही हैं, उसके कार्यकर्ता भी समान हैं, बस बैनर अलग-अलग नजर आते हैं। लगता ये है कि आम आदमी पार्टी में गई श्रीमती पाठक अपने साथ पूरी टीम को एकजुट किए हुए हैं, इस कारण अन्ना हजारे को जनतंत्र मोर्चा के लिए अलग से कोई नेतृत्व करने वाला मिला ही नहीं। ऐसे में इस बात की सहज ही कल्पना की जा सकती है कि आम आदमी पार्टी की ओर से उन्हें अन्ना के कार्यक्रम को सफल बनाने की हरी झंडी दी गई होगी। बहरहाल, राष्ट्रीय स्तर पर भले ही अन्ना व केजरीवाल अलग-अलग हों, मगर अजमेर में एक ही नजर आते हैं। कदाचित और स्थानों पर भी कुछ ऐसा ही हो। इससे तनिक संदेह भी होता है कि कहीं वे किसी एजेंडे विशेष के लिए अलग-अलग होने का नाटक तो नहीं कर रहे। इस बारे में जब अन्ना कह ही चुके हैं कि वे भले ही अलग-अलग रास्ते पर हैं, मगर उनका उद्देश्य तो एक ही है। ऐसे में अगर दोनों के कार्यक्रमों को एक ही कार्यकर्ता अंजाम देते हैं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
खैर, अन्ना हजारे की सभा के लिए श्रीमती पाठक दिन-रात एक किए हुए हैं। ऐसे आयोजन में खर्च भी होता है, सो गैर राजनीतिक और उदारमना देशप्रेमियों से चंदा भी एकत्रित किया जा रहा है। आप समझ सकते हैं इस जमाने में बिना किसी लाभ के कौन चंदा देता है, हर कोई उसके एवज में कुछ न कुछ चाहता ही है, ऐसे में चंदा एकत्रित करना कितना कठिन काम होगा, इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है, चूंकि फिलवक्त दोनों संगठनों के पास देने को कुछ नहीं है। वैसे, कार्यकर्ताओं में जैसा उत्साह है, उम्मीद की जा रही है कि अन्ना हजारे का आकर्षण और उनकी मेहनत से सभा सफल होगी।
ज्ञातव्य है कि अन्ना हजारे 10 मई को यहां आजाद पार्क में सभा को संबोधित करेंगे। उनके साथ पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह, वल्र्ड सूफी काउंसिल के चेयरमैन सूफी जिलानी और चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय भी होंगे। हजारे दोपहर 12 बजे अजमेर आएंगे। परबतपुरा बाइपास पर उनका स्वागत किया जाएगा। उसके बाद वाहन रैली के रूप में शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए ऋषि उद्यान पहुंचेंगे। इसके बाद हजारे पुष्कर जाएंगे। उसके बाद दरगाह जाकर जियारत करेंगे। इसके बाद शाम 6.30 बजे आजाद पार्क में सभा को संबोधित करेंगे।
-तेजवानी गिरधर

मंगलवार, 7 मई 2013

चंद खादिमों के बयान को बना दिया पूरी जमात का फैसला


पाकिस्तान में भारतीय कैदी सरबजीत की हत्या के बाद देश में व्याप्त गुस्से को मुखर करते हुए जहां संघ सहित अन्य संगठन पाकिस्तान से ख्वाजा साहब के उर्स में आने वाले जायरीन जत्थे को अनुमति न देने का दबाव बना रहे हैं, वहीं दरगाह शरीफ से जुड़े चंद खादिमों की ओर से पाक जायरीन को जियारत न करवाने का बयान आने के बाद खादिमों की रजिस्टर्ड संस्थाएं अंजुमन सैयद जादगान व अंजुमन शेख जादगान अचंभित हैं। हालांकि उनका अब भी यही कहना है कि उन्होंने पाक जायरीन को जियारत न करवाने का फैसला नहीं किया है, मगर अनेक अखबारों में सुर्खियां यही हैं कि खादिम जियारत नहीं करवाएंगे, भले ही उनकी खबरों में इक्का-दुक्का खादिमों के नाम हैं। इसी प्रकार कुछ अखबारों ने दरगाह दीवान का हवाला दे कर भी कह दिया कि उन्होंने पाक जायरीन को अनुमति न देने की मांग की है, जबकि हकीकत ये है कि उन्होंने इस आशय का कोई बयान ही जारी नहीं किया है।
असल में हुआ यूं कि पाक जायरीन के खिलाफ कुछ संगठनों की ओर से बनाए गए माहौल से प्रभावित हो कर अथवा चर्चित होने अथवा अपनी देशभक्ति जताने के लिए कुछ खादिमों ने भी कुछ पत्रकारों को यह बयान दे दिया कि वे पाक जायरीन को जियारत नहीं करवाएंगे। हालांकि यह बयान तकरीबन दो हजार खादिमों में से तीन-चार खादिमों का ही है, और वह भी किन्हीं प्रमुख खादिमों का नहीं, मगर चूंकि खबर चौंकाने वाली थी, इस कारण अखबारों ने बड़ी हैडिंग में यह छाप दिया कि अजमेर के खादिम जियारत नहीं करवाएंगे। इसका संदेश यह गया कि खादिमों की पूरी जमात ही पाक जायरीन का विरोध कर रही है, जबकि खादिमों की दोनों अंजुमनें इस मामले में चुप हैं। जागरण ई-पेपर में यह तक लिखा है कि यह निर्णय खादिमों की एक बैठक में लिया गया, जबकि इस प्रकार की कोई बैठक हुई ही नहीं। इस बारे में अधिसंख्य खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद वाहिद अंगारा शाह ने पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने इस प्रकार का कोई निर्णय नहीं किया है। उनका कहना है अगर सरकार पाक जायरीन को अजमेर शरीफ का वीजा देती है तो वे परंपरागत रूप से पाक जायरीन का इस्तकबाल करेंगे।
उधर दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान के हवाले से छपा है कि वे पहले ही पाकिस्तानी जायरीनों को भारत में प्रवेश नहीं देने की बात कह चुके हैं, जबकि उन्होंने इस आशय की कोई बात कही ही नहीं। लीजिए गत 2 मई को उनकी ओर से अधिकृत रूप से जारी बयान को देख लीजिए, जिसमें कहीं यह नहीं कहा गया है कि वे पाक जायरीन के आने का विरोध कर रहे हैं।

OFFICE OF THE
SPIRITUAL HEAD OF THE SHRINE,
SUCCESSOR GREAT GRANDSON AND HEREDITARY SAJJADANASHIN
(GADDINASHIN ) OF HAZRAT KHWAJA  MOINUDDIN HASAN CHISHTY (R.A.) AJMER
Resi:- Qadeem Haweli Dewan Sahib Dargah Shareef Ajmer
Phone : 0145-2626741, Cell: 09829119171
e-mail  sajjadanashinajmer@gmail .com, dargahdiwanajmer@gmail.com
अजमेर । पाकिस्तान की जेल में नाजायज रूप से कत्ल किये गऐ भारतीय नागरीक सरबजीत सिंह की मौत पर गहरा दुख एवं शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुऐ सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के वंशज ओर दरगाह के सज्जादनशीन एवं मुस्लिम धर्म प्रमुख दरगाह दीवान सैय्यद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि सरबजीत की मौत के बाद पाक खुफिया ऐजेंसी आई.एस.आई. द्वारा देश में सांप्रदायिक माहौल खराब करने की शाजिश बेनकाब हो गई है इसलिऐ इस नाजुक समय में देश को एकता और सदभावना का परिचय देकर पाक की इस साजिश को विफल करना चाहिये।
दीवान सैय्यद जैनुल आबेदीन अली खान ने एक ब्यान जारी कर कहा कि सरबजीत की मौत एक दुखद घटना है मगर इसका दुसरा पहलू यह है कि पाकिस्तान की खुफिया ऐजेंसी आई.एस.आई. का मंसूबा उसकी हत्या करवाकर भारत में सांप्रदायिक माहौल खराब करके अस्थिरता पैदा करने का था इस लिये पाक के इस नापाक उद्देश्य को भारत के नागरीकों को समझकर ऐसी परिस्थिती के समय सांप्रदायिक सोहार्द का परिचय देकर पाक को मुंह तोड़ जवाब देना चाहिये। जिससे मुल्क में अमन शान्ति फिजा बरकरार रहे।
उन्होने कहा कि भारत सरकार को चाहिये की पाकिस्तान सरकार और आई.एस.आई. के इस अमानविय करतूत को अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के समक्ष उठा कर जो लोग इस घिनौने कारनामें के लिये जिम्मेदार हें उनके खिलाफ के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग रखें। उन्होने मुस्लिम धर्म गुरू की हैसियत से तमाम दुनिया के इस्लामिक देशों से इस मसले पर पाक की निन्दा करने की अपील करते हुऐ कहा कि पाक की इस गैर जिम्मेदाराना हरकत से दुनियां भर के मुसलमानों को शमिन्दगी महसूस हुई है। इस्लाम अमन पसंद मजहब है ओर वह इस किस्म की कार्यवाही की इजाजत नहीं देता। दुनियाऐ इन्सानियत के सामने पाक इस्लाम की कैसी तस्वीर पेश करना चाहता है।
दरगाह दीवान ने कहा कि अगर देश के पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ओर राजीव गांधी जैसे नेता होते तो यह परिस्थिती नहीं पैदा नहीं होती क्योंकि उनमें कड़े राजनीतिक कदम उठाने की ताकत थी जिसकी वजह से वह पाकिस्तान को इस बात के लिये मजबूर कर देते कि उसे सरबजीत को किसी कीमत पर भारत भेजना पड़ता। क्योंकि राजीव गांधी अपने राजनीतिक कोशल के बल पर सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान के भतीजे युनूस खान के पुत्र शहरयार खान को अमरीका से छुड़ा  कर भारत लेकर आऐ थे। उन्होने मुल्क के तमाम उलेमाओं से इस दर्दनाक एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निन्दा करने की अपील की है।
दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान
वंशज एवं सज्जादानशीन (दरगाह दीवान)
ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर शरीफ
बहरहाल, फिलहाल चंद खादिमों के बयानों को पूरी जमात का रुख बताए जाने से अंजुमन अचंभित है, मगर वह कुछ खादिमों के निजी विचार को रोक भी नहीं सकती।
पाकिस्तान तो कर रहा है जायरीन भेजने की तैयारी
जहां तक इस मसले पर पाकिस्तान के रुख का सवाल है, जानकारी है कि वहां तकरीबन छह सौ जायरीन को भारत भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है, जिन समेत अन्य सभी पाकिस्तानी पर्यटकों से भारत में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। संभव है पाक जायरीन का आने का कार्यक्रम 12 मई का बने। रहा सवाल भारत सरकार के रुख तो वह पहले पूरी स्थिति का आकलन करेगी और उसी के अनुरूप पाकिस्तान को संदेश भेजेगी। कयास ये लगाए जा रहे हैं कि जायरीन को आने तो दिया जाएगा, मगर उन्हें यहां मात्र एक दिन ही ठहरने की अनुमति दी जाएगी, जिसमें उन्हें कड़ी सुरक्षा में केवल जियारत का अनुमति होगी। खैर, देखते हैं क्या होता है, फिलहाल तो पाक जायरीन को लेकर माहौल गरमाया हुआ है।
-तेजवानी गिरधर

सोमवार, 6 मई 2013

पाक वेबसाइट पर भी है जायरीन के विरोध की चर्चा


पाकिस्तान में भारतीय कैदी सरबजीत की हत्या के बाद बिगड़े माहौल में पाकिस्तान से ख्वाजा साहब के उर्स में आने वाले जायरीन जत्थे को अनुमति न देने की मांग के समाचार भारतीय मीडिया पर तो हैं ही, पाकिस्तान के न्यू मीडिया पर भी इसकी चर्चा है।
http://www.thekooza.com नामक वेबसाइट पर इस मसले को कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है:-
Fail-safe security for Pak delegation’s Ajmer visit
AJMER: In view of the protest threats concerning the visit of a Pakistani delegation to the Dargah Sharif, record security will be in place during the upcoming ‘Urs’(death anniversary) of Khwaja Moinuddin Chishti at the shrine in Ajmer sharif.

A delegation from Pakistan comes here during the ‘Urs’ every year by a special train. This time, some groups have threatened to protest against the visit in the wake of the recent attack on Indian death-row prisoner Sarabjit Singh in a jail in Pakistan. The delegation is due to reach Ajmer on May 12.

On Wednesday minister of state for home Virendra Beniwal took stock of the security arrangements in Ajmer. He had a discussion with district officials regarding the security plan for the Pak delegation. The minister told the officials that apart from the state security, the Central Industrial Police Force will also be deployed to avert any uprising.

Beniwal reportedly visited Ajmer on the instructions of the Union Home Ministry, which is concerned about possible protests against the visitors from Pakistan.

BJP MLA Vasudev Devnani requested the central government not to provide visas to the Pak delegation. “There is anger among the people on the issue of Sarabjit and, therefore, it would not be worthwhile to invite those devotees to Ajmer,” Devnani said. “Any anti-social element can disturb the peace of this holy city.” He added

The Kooza News Desk with agencies.
इस साइट पर जाने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:-
http://www.thekooza.com/

पाक जायरीन को अनुमति न देना आसान नहीं


पाकिस्तान में भारतीय कैदी सरबजीत की हत्या के बाद बिगड़े माहौल में पाकिस्तान से ख्वाजा साहब के उर्स में आने वाले जायरीन जत्थे को अनुमति न देने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी मुखर हो गया है। राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति ने तो पाक जायरीन के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान ही छेड़ दिया है, जिसे के शनै: शनै: समर्थन मिल रहा है। कुछ मुस्लिम भी खुल कर सामने आ गए हैं। जाहिर है ऐसे में प्रशासन पसोपेश में है कि वह राज्य व केन्द्र सरकार को क्या रिपोर्ट भेजे? क्या वह हालात बिगडऩे के मद्देनजर अपनी तरफ से हाथ खड़े करता है या फिर सरकार के फैसले की अनुपालना किसी भी सूरत में करने को तैयार है, यह जल्द ही पता लग जाएगा।
वस्तुत: शुरू में इक्का दुक्का संगठनों ने फौरी तौर पर विरोध जताया था। इसके बाद भाजपा विधायक प्रो. वासुदेव देवनानी ने बाकायदा गृह राज्य मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल की सदारत हुई तैयारी बैठक में आवाज उठाई, मगर वह नक्कारखाने में तूती के समान अनसुनी कर दी गई। नगर निगम मेयर कमल बाकोलिया ने तो इसे अनुचित भी बताया। लेकिन बात उठी तो दूर तक ले जाने की तैयारी शुरू हो गई।
राष्ट्र रक्षा संकल्प समिति ने कार्यक्रम संयोजक अमित भंसाली के नेतृत्व में जन भावना को अभियान की शक्ल दी और सरबजीत की हत्या के विरोध में शुरू किया हस्ताक्षर अभियान शुरू करवा कर पाकिस्तान को शत्रु राष्ट्र घोषित करने और उर्स में पाक जायरीन को अनुमति न देने पर जोर देना शुरू कर दिया। आरएसएस के महानगर संघ चालक सुनील दत्त जैन ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत की अस्मिता पर कुठाराघात कर रहा है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान से आने वाले जायरीन के प्रवेश पर तत्काल पाबंदी लगाई जाए। गगवाना सरपंच असलम पठान ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि पाक से सभी रिश्ते तोड़ते हुए वहां से आने वाले जायरीन नहीं आने देना चाहिए। गेगल सरपंच अब्दुल जलील पाक सरकार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की पैरवी की। उग्रपंथी तेवर वाले भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नीरज जैन ने तो चेतावनी ही दे दी है कि पाक जायरीन को अनुमति दी तो परिणाम घातक हो सकते हैं। कुल मिला कर विरोध काफी मुखर हो चुका है। ऐसे में प्रशासन के लिए एक और मुसीबत हो गई है।
वैसे जानकारों का मानना है कि भले ही निचले स्तर पर इतना विरोध हो रहा है, मगर जायरीन को न आने देने का फैसला करना सरकार के लिए बहुत आसान नहीं होगा। यह केवल पाकिस्तानियों को आने देने का मसला मात्र नहीं है, इसके साथ अंतरराष्ट्रीय मानकों पर दो देशों के बीच के संबंधों की बुनियाद भी जुड़ी हुई है। पाकिस्तान स्थित हिंदू तीर्थ स्थलों पर भारतीयों के जाने का मसला भी जुड़ा हुआ है। वोट बैंक की राजनीति तो परोक्ष रूप से जुड़ी हुई ही है। ऐसे में लगता ये ही है कि सरकार हरसंभव कोशिश यही करेगी कि जायरीन जत्थे के आने में बाधा न डाली जाए। भले ही उसके लिए उसे अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने पड़ें। कड़ी सुरक्षा में जियारत करवाई जाए और ठहराये जाने वाले स्थल के बाहर इधर-उधर घूमने पर पाबंदी लगाई जाए। बाकी इतना तो तय है कि यदि वे आए तो विरोध प्रदर्शन जरूर होगा। वह कितना उग्र होगा, इस बारे में अभी कुछ कहना असंभव है। वैसे संभव ये भी है कि वह पाकिस्तान को यह संदेश भेजे कि फिलवक्त जो माहौल है, उसमें जायरीन आए तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी। ये तो हुई भारतीय पक्ष की बात, मगर अव्वल तो पहले यह पाकिस्तान तय करेगा कि वह ताजा माहौल में अपने नागरिकों को भारत भेजने की अनुमति देता है या नहीं। अब तक तो इस बारे में कोई सूचना ही नहीं मिली है कि कितने जायरीन आना चाहते हैं और उनके आने का कार्यक्रम क्या है।
-तेजवानी गिरधर