शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग सत्रह
स्वर्गीय श्री नवलराय बच्चानी
सिंधी भाषा व साहित्य की सुरक्षा व विकास के लिए अजमेर के पूर्व विधायक स्वर्गीय श्री नवलराय बच्चानी ताजिंदगी काम किया। नब्बे से भी अधिक उम्र तक उन्होंने सिंधी भाषी बच्चों को सिंधी लिपी की शिक्षा देने के लिए विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से कक्षाएं आयोजित कीं। वे सन् 1979 में राजस्थान सिंधी अकादमी की प्रथम सामान्य सभा के सदस्य रहे। सन् 1994 से 97 तक अकादमी के अध्यक्ष रहे। अकादमी ने उन्हें सन् 2005 में टी. एल. वासवाणी पुरस्कार से नवाजा। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें झूलेलाल संक्षिप्त जीवन परिचय, सिंधुपति महाराजा दाहरसेन का जीवन चरित्र, डॉ. हेडगेवार का जीवन परिचय, वृहद सिंधु ज्ञान सागर ग्रंथ, गुरुजी गोलवलकर, सिंध, वृहद झूलेलाल पुस्तक आदि प्रमुख हैं। उन्होंने श्रीमती कमला गोकलानी के सहयोग से के. आर. मलकानी की अंग्रेजी पुस्तक सिंध स्टोरी का सिंधी अनुवाद किया। उन्होंने भारतीय सिंधु महासभा की अनेक स्मारिकाओं का संपादन किया। अनगिनत साहित्यिक गोष्ठियों में शिरकत की और आकाशवाणी से उनकी अनेक वार्ताएं प्रसारित हुईं। 7 मार्च 2010 को भारतीय सिंधु सभा व श्री झमटमल तोलाराम वाधवानी चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मुंबई में अच्छे समाज सेवक के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया। इसी प्रकार 10 अप्रैल 2010 को सिंधी शिक्षा विकास समिति की ओर से भी सम्मानित किया गया।

स्वर्गीय श्री नरेन्द्र राजगुरू
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक रहे स्वर्गीय श्री नरेन्द्र राजगुरू का नाम हालांकि आम जन मानस में अंकित नहीं है, मगर अपने जमाने में पत्रकारिता जगत में जाने-माने हस्ताक्षर थे। उन्होंने देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दी हैं और तकरीबन अस्सी वर्ष की उम्र में भी सतत लेखन कार्य जारी रखे हुए थे। उन्होंने जोधपुर में बीए ऑनर्स व मुंबई में पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। उन्होंने डॉ. सत्यकामत विद्यालंकार के अभियान सप्ताहिक से लेखन कार्य शुरू किया। खादी ग्रामोद्योग मुम्बई व जयपुर में प्रचार सहायक व प्रचार अधिकारी रहे। इसके बाद डीसीएम की गृह पत्रिका से संपादन का कार्य शुरू किया। हिंद सायंकाल लि., मुम्बई में प्रचार अधिकारी के रूप में काम किया। हिंदी डायजेस्ट नवनीत, मुंबई में उपसंपादक के रूप में काम किया। मुम्बई में ही अनुजा मासिक पत्रिका आरंभ कर उसका संपादन किया। मुम्बई में ही दैनिक सांध्यकालीन समाचार पत्र सायंदीप का संपादन किया। वे टाइम्स ऑफ इंडिया पत्र समूह, मुंबई में प्रशासनिक विभाग सहायक व अधिकारी के रूप में काम किया, लेकिन साथ ही लेखन कार्य भी जारी रखा। उन्हें लेखन की प्रेरणा डॉ. सत्येन्द्र जी व डॉ. धर्मवीर भारती से मिली। देश ही नहीं विदेश में ओमान के एक छोटे पत्र समूह और विश्व प्रसिद्ध संस्था नाफेन में भी काम किया। इस दौरान उन्हें लंदन व रूस जाने का मौका मिला। सन् 1949 से उनकी कहानियां देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं:- उपन्यास एक और नीलम, उपन्यास गुलनार, कहानी संग्रह विश्वकर्मा के आंसू, कहानी संग्रह उगते सूरज की लाली, संस्मरण वृतांत दर्द की खुली किताब(मीना कुमारी), दिल तो पागल है, गजल संग्रह (अंग्रेजी में), उपन्यास बीहड़ों की रानी। उन्होंने पत्रकार निदेशिका का भी किया। वे अजयमेरू प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग सोलह
श्री एस. पी. मित्तल
अजमेर की पत्रकारिता में श्री एस. पी. मित्तल किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। यदि यह कहा जाए कि वे एक ब्रांड हो गए हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस शख्स में गजब की ऊर्जा है। संघर्ष के मुकाबले कभी न थकने वाले इस इंसान ने पत्रकारिता में कई नए आयाम स्थापित किए हैं। अजमेर में पहली बार व्यवस्थित तरीके से केबल नेटवर्क पर लोकल न्यूज चैनल चलाने का श्रेय श्री मित्तल के खाते में ही दर्ज है। यूं अजमेर में सर्वप्रथम 1997 में यूनाइटेड वीडियो चैनल के लाइसेंस पर अजमेर चैनल के नाम से न्यूज चैनल शुरू हुआ था, जिसका संचालन श्री नानक भाटिया ने किया। सांपद्रायिक उपद्रव के दौरान उत्पात को दिखाए जाने पर जिला प्रशासन इसे रुकवा दिया। हालांकि बाद में यह चैनल फिर शुरू हुआ, मगर केबर वार के चलते फिर बंद हो गया। बाद में सन् 2000 में श्री मित्तल ने अजमेर अब तक के नाम से व्यवस्थित न्यूज चैनल आरंभ किया। इसका प्रसारण ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद आदि उप खण्डों पर भी किया जाता था। सीमित साधनों में केबल पर न्यूज चलाना चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन इस काम को उन्होंने अपने अंजाम तक पहुंचाया। अजमेर वासियों के लिए यह पहला अनुभव था, इस कारण लोग बहुत दिलचस्पी के साथ इसे देखते थे। बाद में केबल वार के चलते उन्हें प्रसारण बंद करना पड़ा। दिलचस्प बात ये है कि श्री मित्तल ने दैनिक भास्कर के मुख्य संवाददाता की अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर अजमेर वासियों लोकल न्यूज चैनल से साक्षात्कार करवाया। यह अपने आप में एक बड़ी दुस्साहसपूर्ण उपलब्धि थी।
श्री मित्तल को पत्रकारिता विरासत में मिली। पिता स्वर्गीय श्री कृष्ण गोपाल गुप्ता ने पत्रकारिता की जो सीख दी, उसी के अनुरूप वे आज भी पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। श्री गुप्ता भभक नामक पाक्षिक का संचालन करते थे। यथा नाम तथा गुण की उक्ति को चरितार्थ करते हुए यह समाचार पत्र वाकई भभकता था। उनके निधन के बाद श्री मित्तल ने उसे उसी तीखे तेवर के साथ जारी रखा, जिसका प्रकाशन आज भी जारी है। श्री मित्तल ने लंबे समय तक राष्ट्रदूत व पंजाब केसरी के लिए बतौर ब्यूरो प्रमुख कार्य किया। जब राष्ट्रदूत का प्रकाशन अजमेर से आरंभ हुआ तो वे उसके पहले स्थानीय संपादक थे। पत्रकारिता में उनके लिए यह एक बड़ी उपलब्धि थी, मगर प्रबंधन से मतभेद के चलते उन्होंने एक झटके में इसे तिलांजलि दे दी।  बाद में जब दैनिक भास्कर अजमेर आया तो उन्होंने ही उसकी जाजम बिछाई। सरकूलेशन बढ़ाने के लिए जनता से सीधे जुड़े अनेक कार्यक्रम संचालित किए। इनमें वार्ड वार रूबरू कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि उनमें केवल पत्रकारिता के ही नहीं, अपितु प्रबंधन के भी गुण हैं। तकरीबन आठ साल तक भास्कर में डट काम किया और मुख्य संवाददाता के रूप में अनेक शानदार स्टोरीज की। विशेष रूप से प्रशासन व राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ रही है। उन्होंने दैनिक नवज्योति के प्रथम पृष्ठ का भी संपादन किया। उसके बाद दैनिक पंजाब केसरी के अजमेर संस्करण के प्रभारी रहे। वहां भी तनिक विवाद के चलते नौकरी छोडऩे में देर नहीं लगाई। जीवन के इस मोड़ पर आ कर उन्होंने नियमित रूप से ब्लॉग लिखने का अनूठा प्रयोग किया। हालांकि यह काम अनार्थिक होने के साथ-साथ श्रमसाध्य है, मगर पता नहीं किस चक्की का आटा खाते हैं कि नियमित रूप से तीन-चार ब्लॉक लिख देते हैं। अनेक वाट्स ऐप ग्रुप्स में उसका प्रसार है और पाठकों को इंतजार रहता है कि आज उन्होंने क्या लिखा है। हालांकि उनसे भी पहले मैंने अजमेरनामा नाम से ब्लॉग लेखन तब आरंभ किया, जब अधिसंख्य पत्रकार इंटरनेट पर हिंदी फोंट यूनिकोड के बारे में जानते तक नहीं थे, मगर नियमित ब्लॉग लेखन का श्रेय श्री मित्तल को ही जाता है। अब तो अनेक ब्लॉगर हाथ आजमा रहे हैं। श्री मित्तल अब यू ट्यूब पर टॉक शो भी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय चैनल्स पर डिबेट में हिस्सा लेते हैं।
पत्रकारिता के साथ पत्रकारों के हितों के लिए भी उन्होंने कई काम किए हैं। वे जिला पत्रकार संघ के महासचिव रहे हैं और उनके कार्यकाल में ही जिले के पत्रकारों का पहला सफल सम्मेलन हुआ था। वे अजयमेरू प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे हैं। हर साल आयोजित होने वाले फागुन महोत्सव में उनकी अहम भूमिका होती है। वे विश्व संवाद केन्द्र अजयमेरू के अध्यक्ष हैं और हर साल उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित करते हैं।
जहां तक लेखनी का सवाल है, उनकी भाषा सीधी सपाट होती है, उसमें अलंकारों का बहुत अधिक उपयोग नहीं होता, मगर सूचना के लिहाज से वह अपडेट होती है। तेवर तो उनके मिजाज में है ही। उनकी लेखनी की प्रशंसा भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने भी की। 17 नवम्बर, 2005 को राष्ट्रपति के रूप में अजमेर आए कलाम ने तब श्री मित्तल और उनके परिवार के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए सर्किट हाउस आमंत्रित किया। इस मुलाकात की रिपोर्ट जब कलाम ने भभक समाचार पत्र में पढ़ी तो राष्ट्रपति ने शुभकामनाएं भिजवायीं।
पत्रकारिता में अनेक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद विविधता व नवाचार में अपनी प्रतिभा झोंकने वाले वे इकलौते धुन के पक्के पत्रकार हैं। चंद शब्दों में कहा जाए तो वे डंके की चोट पर लिखने वाले निडर व जीवट वाले और कभी न थकने वाले पत्रकार हैं। नवोदित पत्रकारों को उनसे सीख लेनी चाहिए।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग पंद्रह
श्री सुरेश कासलीवाल
ग्रामीण पृष्ठभूमि के वरिष्ठ पत्रकार श्री सुरेश कासलीवाल ने जब पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया तो उन्होंने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि यही उनका केरियर हो जाएगा। असल में वे निकटवर्ती मांगलियावास गांव के सरपंच थे। सन् 1989 में पहली बार उपसरपंच चुने गए। उसके बाद सन् 1995 से 2000 तक व सन् 2005 से 2010 तक सरपंच रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरी पंचायत में जैन समाज का मात्र एक ही परिवार है, अर्थात जनता ने उनका व्यवहार देख कर बिना किसी जात-पांत के वोट दिए। सरपंच रहते बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए जलग्रहण के क्षेत्र में राजस्थान में अव्वल दर्ज का काम किया। इसके उपलक्ष में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया। मुंबई के पांच सितारा ग्रांड हयात होटल में आयोजित समारोह में न्यायाधिपति ए. एम. अहमदी से पुरस्कार लेते हुए उन्होंने राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। दिल्ली दूसरे स्थान पर रहा।
वे पीसांगन पंचायत समिति की 45 ग्राम पंचायतों के सरपंच संघ के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए नहीं थे और न ही किसी पार्टी के सदस्य रहे, लेकिन तत्कालीन पुष्कर विधायक स्वर्गीय श्री रमजान खान से गहरी दोस्ती थी। तब नसीराबाद विधानसभा सीट के लिए भाजपा में दो दावेदारों के बीच टिकट को लेकर घमासान चल रहा था। स्वर्गीय श्री रमजान खान को लगा कि दोनों को छोड़ किसी तीसरे बेदाग व दबंग युवा पर दांव खेला जाए। उन्होंने ही तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री भैरोंसिंह शेखावत से यह कह कर नसीराबाद से विधानसभा चुनाव का टिकट देने की सिफारिश की कि ये बंदा तेज-तर्रार व जनता को समर्पित होने के कारण लोकप्रिय है और जीत जाएगा। उनसे चुनाव की तैयारी करने को भी कह दिया गया, लेकिन भाजपा ने ऐन वक्त पर समझौते के तहत नसीराबाद सीट जनता दल को दे दी और स्वर्गीय श्रीकरण चौधरी ने चुनाव लड़ा। वे हार गए।
जहां तक पत्रकारिता का सवाल है, यह उन्होंने महज शौक के लिए शुरू की। सबसे पहले मांगलियावास टाइम्स के नाम से पाक्षिक समाचार पत्र आरंभ किया। समाचार पत्र को छपवाने और ग्राम पंचायत के कामों के सिलसिले में अजमेर आना-जाना होता था। जनप्रतिनिधि की भूमिका निभाते-निभाते यकायक दैनिक न्याय से जुड़े और एक रिपोर्टर के रूप में बैटिंग शुरू की। आरंभ से आक्रामक तेवर था। संयोग से दैनिक न्याय जैसे दबंग अखबार का प्लेटफार्म मिला। उन्होंने वहां वर्ष 1994 में लगातार 15 दिन तक भीलों के चंगुल में अजमेर वाले ख्वाजा के नाम से एक सीरीज दी, जिससे रातों-रात निडर पत्रकार के रूप में लोकप्रिय हो गए। पूरा खादिम समुदाय नाराज हो गया। तब आगे खबर नहीं लिखने पर उन्हें एक लाख की रिश्वत पेश की, नहीं माने तो सीरीज रोकने के लिए उनके खिलाफ कलेक्ट्रेट तक जुलूस भी निकाला गया। बहुत रिस्क थी, मगर वे बेधड़क लिखते गए। न्याय ही वह मंच था, जहां उन्होंने हर दिशा, अर्थात हर फील्ड में चौके-छक्के लगाने की योग्यता को साबित किया। उसके बाद कुछ समय तक दैनिक आधुनिक राजस्थान के संपादकीय प्रभारी रहे और समाचार जगत के लिए भी काम किया। सन् 1997 में दैनिक भास्कर से जुड़े। राजनीति व प्रशासन की बीट के साथ-साथ शायद ही ऐसा कोई महकमा हो, जिसकी उन्होंने रिपोर्टिंग नहीं की हो। दरगाह क्षेत्र की रिपोर्टिंग के तो मास्टर रहे। ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण जिला परिषद व ग्राम पंचायतों पर जबरदस्त पकड़ रही है। क्या मजाल कि कोई खबर छूट जाए। खबर छूटना तो दूर, सदैव लीड रोल में रहे हैं। उनकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि रूटीन की खबर के अतिरिक्त सदैव इस पर नजर रखते हैं कि स्पेशल रिपोर्ट तलाश की लाई जाए। उन्होंने अनेक ऐसी स्टोरीज की हैं, जिस पर आम तौर पर अन्य पत्रकारों की नजर तक नहीं जा पाती। उनकी उस स्टोरी को बड़ी तारीफ मिली, जिसमें उन्होंने बताया कि बाल विवाह रोकने के लिए बने शारदा एक्ट को बनाने वाले हरविलास शारदा ने खुद बाल विवाह किया था। वे अजमेर के ही रहने वाले थे। महिला सरपंचों पर केन्द्रित एक एक्सक्लूसिव स्टोरी, जिसका शीर्षक था- महिला सरपंच नहीं जानतीं कि मुख्यमंत्री का नाम क्या है?, पर उन्हें भास्कर के अजमेर संस्करण में पहला पुरस्कार मिला। उनकी कई स्टोरीज दैनिक भास्कर में ऑल एडीशन छप चुकी हैं। यह उनकी योग्यता का ही प्रतिफल है कि भास्कर जैसे अखबार में चीफ रिपोर्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर पहुंचे हैं। लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव उनका विश्लेषण बिल्कुल सटीक गया है। मतगणना के 3 दिन पहले ही किसके खाते में सीट जाएगी, इसका खुलासा कर देना, उनके राजनीतिक पंडित होने को साबित करता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री सचिन पायलट भी जब अजमेर से चुनाव हारे तब उन्होंने पहले ही व्यक्तिगत चर्चा में बता दिया कि वे चुनाव बड़े अंतर से हारेंगे। हाल ही में रिजु झुनझुनवाला के चुनाव में भी खुलकर बताया कि वे हार में सचिन पायलट का रिकॉर्ड तोड़ेंगे यानी 1 लाख 71 हजार से अधिक मतों से हारेंगे। उन्हें उत्कृष्ठ पत्रकारिता के लिए जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। अंदर की बात ये है कि इसके लिए उन्होंने आवेदन नहीं किया था, जिला कलेक्टर आरुषि मलिक की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपने स्तर पर ही उनका नाम पुरस्कार के लिए चयनित किया।
एक पत्रकार के लिए सामाजिक सरोकारों से जुडऩे और निष्पक्ष पत्रकारिता भी करने के बीच सामंजस्य बैठाना बेहद कठिन होता है। श्री कासलीवाल की कई कलेक्टरों व अन्य अधिकारियों से दोस्ती रही, लेकिन प्रशासन की खामी संबंधित खबरें लिखने को लेकर कभी समझौता नहीं किया।
श्री कासलीवाल वर्तमान में अजयमेरू प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं और क्लब भवन के लिए जनप्रतिनिधियों के कोष से धन जुटाने में कसर नहीं छोड़ी। हाल ही में काफी समय से लंबित तकरीबन 45 लाख रुपए की स्वीकृति राज्य सरकार से खुद लेकर आये, जिससे दूसरी मंजिल पर कमरों का निर्माण होगा। वैशाली नगर स्थित नए भवन में साधन सुविधाएं जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। राजनीतिज्ञों व प्रशासनिक अधिकारियों से काम कैसे करवाया जाता है, यह बखूबी जानते हैं। अपनी इसी कलाकारी के दम पर कोटड़ा स्थित पत्रकार कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष के नाते जम कर विकास कार्य करवा रहे हैं। अजमेर की शायद ये इकलौती कॉलोनी होगी, जिसमें सड़क के दोनों और कलर ब्लॉक तक लगे हुए हैं। पत्रकारिता के अलावा सामाजिक सरोकार में भी वे काफी सक्रिय है। लॉयन्स क्लब समेत अन्य संस्थाओं के जरिये अलग-अलग गांवों में हर साल जरूरतमंदों को 300 कंबल, स्वेटर, कपड़े और अब तक कई जरूरतमंद कन्याओं के विवाह में घर गृहस्थी के सामान दिलवा चुके हैं। क्लब अध्यक्ष रहते हुए क्लब के जरिये दो कन्याओं के विवाह में सहयोग कर नई शुरुआत कर चुके हैं।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग चौदह
श्री आर. डी. कुवेरा
श्री आर. डी. कुवेरा अजमेर के वरिष्ठतम पत्रकार हैं। उनका जन्म 19 सितम्बर 1933 को किशनगढ़ में स्वगीय श्री रतनलाल कुवेरा के घर हुआ।  सन् 1974 में उन्होंने साप्ताहिक लगन एक्सप्रेस व जिला कांग्रेस कमेटी के मुखपत्र कांग्रेस समाचार का संपादन किया। सन् 1975 से 81 तक दैनिक नवज्योति के लिए पूरे राजस्थान का भ्रमण कर अनेक स्थानों पर संवाददाता व एजेंट नियुक्त किए। अजमेर नगर सुधार न्यास के भूतपूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री माणकचंद सोगानी के साथ न्यास के लिए जनसंपर्क प्रभारी का कार्य किया। उन्होंने जयपुर में कांग्रेस शताब्दी समारोह के अवसर पर स्वर्गीय श्री मथुरादास माथुर के साथ विशाल प्रदर्शनी का संयोजन किया और एक्जीबीशन एट ए ग्लांस का संपादन किया।
सन् 1985 से 2009 तक दैनिक आधुनिक राजस्थान के बीकानेर व जयपुर ब्यूरो प्रमुख रहे। वे संत श्री रामचंद्र डोंगरे, श्री रामसुखदास महाराज व श्री मुरारी बापू के अजमेर व सलेमाबाद में आयोजित प्रवचन कार्यक्रमों के मीडिया प्रभारी भी रहे हैं। इसी प्रकार सामाजिक क्षेत्र में मग ब्राह्मण समाज के वैवाहिक परिचय सम्मेलनों के मीडिया प्रभारी और अखिल भारतीय सर्वोदय सम्मेलन में मीडिया व वालेंटियर सेवा के संयुक्त संयोजक रहे हैं।  वर्तमान वे राज्य सरकार के अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार हैं और राजस्थान पत्रकार निदेशिका, मासिक पत्रिका स्वतंत्र जैन चिंतन व अजयमेरु टाइम्स पाक्षिक के संपादकीय सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं। वे जयपुर में पिंक सिटी प्रेस क्लब के संस्थापक सदस्य हैं और राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ में अनेक पदों रहे हैं। हाल ही दैनिक नवज्योति के प्रधान संपादक श्री दीनबंधु चौधरी के जीवन पर आधारित गौरव ग्रंथ के लिए तथ्य संकलन, प्रबंधन, संपादन व प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई है। पुस्तक के जयपुर में हुए विमोचन समारोह में आपको मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने सम्मानित किया। आज तकरीबन 87 साल की उम्र में भी लेखन कार्य जारी रखे हुए हैं। विभिन्न विषयों पर लिखित पुस्तकों व डायरेक्ट्रीज का संकलन करने का पुराना शौक है, इस कारण उनके पास पुस्तकों का भंडार है। 
उनके जीवन की सफलता का दूसरा पहलु ये है कि उनके प्रयासों से ही आज उनके दोनों सुपुत्र प्रतिष्ठित फर्म कुवेरा काड्र्स एंड गिफ्ट व न्यू कुवेरा गिफ्ट आइटम्स का संचालन कर रहे हैं।
एक सफल पत्रकार के साथ कुशल व्यवसायी के जीवन में कितने दिलचस्प रंग रहे हैं, जरा उन पर भी नजर डाल लेते हैं:-
सन् 1953 में मैट्रिक पास करने के तुरंत बाद उन्होंने इंडियन इंश्योरेंस कंपनी में एजेंट का कार्य शुरू किया। इसके बाद किशनगढ़ में न्यू सुमेर टॉकीज के मैनेजर रहे। बाद में जोधपुर के जॉर्ज टॉकीज सर्किट की ओर से फिल्म प्रतिनिधि के रूप में काम किया। इसी प्रकार मैसर्स हुकमचंद संचेती एंड संस के विक्रय प्रतिनिधि के रूप में भी काम किया। सन् 1958 में टेरिटोरियल आर्मी के प्रशिक्षण शिविर में सर्वश्रेष्ठ केडेट का पुरस्कार प्राप्त किया। उन्होंने सेना प्रमुख की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट भी हासिल है। उन्होंने 1959 में 105 इन्फेंट्री बटालियन में रह कर नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लिया। इसके बाद किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय जयनारायण व्यास के संपर्क में आए। उन्हीं के आदेश पर उन्हें शिक्षा विभाग में क्लर्क की नौकरी करने का मौका मिला। बाद में ग्रेड बदलवा कर ब्यावर के सनातन धर्म हायर सेकंडरी स्कूल और पटेल हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षण कार्य किया। तकरीबन 12 वर्ष तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने निजी व्यवसाय शुरू कर दिया और अजमेर में बुक सेंटर के नाम से दुकान खोली एवं लाइब्रेरी सप्लाई व प्रकाशन का कार्य शुरू किया। वे अजमेर गांधी शांति प्रतिष्ठान के कार्यालय प्रभारी और श्री गोकुलभाई भट्ट के शराबबंदी आंदोलन के कार्यालय प्रभारी भी रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने ब्यावर में स्वर्गीय श्री घनश्याम जी से कत्थक का विधिवत दो साल प्रशिक्षण लिया है और प्रदेश के अनेक स्थानों पर लोकनृत्य सहित कई सांस्कृतिक प्रदर्शन किए हैं।
-तेजवानी गिरधर
7742067000

सोमवार, 30 सितंबर 2019

दंगल सजने से पहले मालिश कर रहे हैं चुनावी पहलवान

कई नेताओं को है पुष्कर नगर पालिका के अध्यक्ष पद की लॉटरी निकलने का इंतजार 
पुष्कर। आसन्न नगर निकाय चुनाव में हालांकि पुष्कर नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए लॉटरी नहीं निकली है, अर्थात अभी ये पता नहीं कि अध्यक्ष किस कैटेगिरी का होगा, बावजूद इसके संभावनाओं के इस दंगल में शिरकत करने के लिए तकरीबन सात दावेदारों ने तो खुल्लम खुल्ला दावेदारी जताने का मानस बना रखा है, वहीं तकरीबन नौ ने सपने संजो रखे हैं कि लॉटरी निकलेगी, उसी के अनुरूप निर्णय लेंगे। मुंगेरीलाल के सपनों का राज खुल जाने के बाद दावेदारों का असली खेल शुरू हो जाएगा। कोई सच में दावा करेगा तो कोई किसी को निपटाने की तैयारी करेगा। दिलचस्प बात ये है कि कई नेताओं ने तो गुट बना कर हर विकल्प खुला छोड़ रखा है। जैसे ही लॉटरी खुलेगी, वे अपना पत्ता खोल देंगे। आपको बता दें कि आगामी 3 अक्टूबर को साफ हो जाएगा कि पालिका अध्यक्ष किस कैटेगिरी को होगा, तभी चुनावी आकाश पर छाये बादल छटेंगे।
यदि लॉटरी सामान्य पुरुष के लिए निकलती है तो सबसे पहले व प्रबल दावेदार स्वाभाविक रूप से मौजूदा अध्यक्ष कमल पाठक होंगे, मगर अभी वे अपना मन नहीं बना पाए हैं। उसकी वजह कदाचित ये होगी कि पिछली बार तो पार्टी हाईकमान की सरपरस्ती में पार्षदों के बहुमत के आधार पर अध्यक्ष बन गए, लेकिन सीधे चुनाव में जीत का गणित क्या होगा, उसको ले कर संशय हो सकता है। दावे चाहे जितने कर लें, मगर सिटिंग अध्यक्ष होने के कारण एंटी इन्कंबेंसी फैक्टर दिक्कत कर सकता है।
दूसरे प्रबल दावेदार हैं अरुण वैष्णव। वे ऊर्जा से लबरेज हैं और टिकट मिलने पर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने का मन बनाए हुए हैं। उन्हें यकीन है कि पार्टी उनको सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। मौजूदा बोर्ड पर तंज कसते हुए खम ठोक कर कहते हैं कि तीर्थ की मर्यादा को न मानने वाला दावेदारी कर भी कैसे सकता है।
वार्ड नंबर 2 की पार्षद रही मंजू डोलिया यूं तो नवनिर्मित वार्ड 17 या 15 से पार्षद का चुनाव लडऩे का मन बना चुकी है, परंतु यदि सामान्य पुरुष या महिला की लॉटरी निकलती है तो वे अपनी दावेदारी प्रमुखता से करेंगी। उनकी दावेदारी में दम की वजह भी है। 300 वोटों से विजयी होना और दो बार निर्दलीय विजेता बन कर पिछले 20 सालों में उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया है।
इसी प्रकार भाइयों की कलह के शिकार बाबूलाल दगदी व जयनारायण दगदी भाजपा व कांग्रेस से दावेदारी जता रहे हैं। उनका कहना है कि अनुभव से ही राजनीति संभव है। पुष्कर में फैले नशा कारोबार पर अंकुश, गंदगी से निजात व होटल व्यवसाय को सुचारू करना उनकी प्राथमिकता में है।
नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके शिवस्वरूप महर्षि ने 5-6 पार्षदों का जाल बिछा कर अपनी दावेदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। एक तो राजनीति के अनुभव को भुनाने का वक्त आ गया है और दूसरा पार्टी आलाकमान का भी उन्हें संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना है कि काम की प्राथमिकता वक्त के साथ-साथ सुनिश्चित की जाएगी।
पुष्कर नारायण भाटी पुष्कर वासियों के बीच चिर परिचित नाम है। कई पदों पर रहने के बाद अध्यक्ष पद की लाइन में अपने आप को सबसे आगे खड़ा पाते हैं। उनका कहना है कि ओबीसी सीट की लॉटरी निकलते ही निश्चित हो जाएगा कि अध्यक्ष कौन बनेगा। इसी प्रकार वार्ड नंबर 15 के पार्षद कमल रामावत ने भी दावेदारी के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
साधन संपन्न रामजतन चौधरी भी अपनी दावेदारी सुनिश्चित कर चुके हैं, मगर वे बहुत चतुर हैं। या यूं कहिये कि घुन्ने हैं। उनका यह डायलोग देखिए, कितना दिलचस्प है कि वे सक्रिय राजनीति नहीं करते, मगर राजनीति से अछूते भी नहीं हैं। उनका कहना है कि ईमानदार और पुष्करराज से प्रेम करने वाला व्यक्ति ही अध्यक्ष पद का दावेदार होना चाहिए, जिससे कि पुष्कर में पनप रहे भ्रष्ट्राचार को विराम दिया जा सके। कांग्रेस के पुराने चावल जगदीश कुर्डिया ने भी अपनी दावेदारी सुनिश्चित कर दी है क्योंकि उनकी पत्नी श्रीमती मंजू कुर्डिया अध्यक्ष रह चुकी है। स्वाभाविक रूप से उन्हें पालिका के कामकाज की पूरी जानकारी है और राजनीति का भी लंबा अनुभव है। गोपाल तिलोनिया सीधे तौर पर दावेदारी तो नहीं रख रहे, मगर ये कहते हैं कि अध्यक्ष पद उसी व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, जो काम करने का मादा रखता हो। इसी प्रकार अध्यक्ष पद की लॉटरी अगर ओबीसी के लिए खुलती है तो राजेंद्र महावर दावेदारी के लिए पूरी ताकत लगा देंगे।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दामोदर शर्मा पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। टिकट मिलना तो बहुत बाद की बात है, मगर उनको पूरी उम्मीद है कि उनके नाम पर कोई आंच नहीं आएगी। उनके साथ दिक्कत ये है कि वरिष्ठ होने के बावजूद गुटबाजी से विलग नहीं हैं। किसी समय पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ के नजदीकी रहे शर्मा अब पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती के करीबी माने जाते हैं, जो कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खासमखास हैं।

-तेजवानी गिरधर
अजमेर की मशाल से साभार