सोमवार, 9 सितंबर 2024
अजमेर के ब्लॉगर्स दे रहे हैं शासन-प्रशासन को दिशा
अजमेर का मीडिया आरंभ से तेज तर्रार रहा है। पूरा प्रदेश अजमेर के पत्रकारों की जागरूकता का लोहा मानता है। खोज खबर से लेकर सामाजिक सरोकार के साथ शासन-प्रशासन को दिशा देने का धर्म सतत निभाता रहता है। अब पत्रकारों की एक पीढी सेवानिवृत्त हो गई है। नई पीढी ने प्रिंट मीडिया की जिम्मेदारी ले ली है। यह सुखद है कि अनुभवी सेवानिवृत्त पत्रकारों की कलम की स्याही अब भी नम है। रिटायरमेंट के बार घर जा कर नहीं बैठे हैं। सभी ने सोशल मीडिया के जगत में प्रवेश कर लिया है, ब्लॉग लेखन आरंभ कर दिया है और अपने धर्म की पालना कर रहे हैं। पहले से बेहतर। अखबारों में तो एक मर्यादा में रह कर ही लिखा करते थे, मगर अब स्वछंद हैं। उनकी लेखनी में और अधिक निखार आ गया है। भाषा शैली और अधिक प्रभावी हो गई है। इसका सबसे बडा फायदा यह हो रहा है कि अब वह भी उजागर हो रहा है, जो अखबारों में रहते हुए अनछुआ, अप्रकाशित रह जाता था। तुलनात्मक रूप से देखेंगे तो पाएंगे कि शासन-प्रशासन का प्रिंट की तुलना में बेहतर मार्गदर्शन कर पा रहे हैं। स्थिति ये है कि पाठक रोज नए ब्लॉग्स का इंतजार करते हैं। इनके जरिए घटनाओं की त्वरित जानकारी तो मिलती ही है, खबरों के पीछे की खबरें भी संज्ञान में आती हैं। नए दौर में यूट्यूबर्स भी सूचना तंत्र का त्वरित इस्तेमाल कर रहे हैं। जो खबर अखबारों में दूसरे दिन पढने को मिलती थी, वह अब वीडियो की शक्ल में आज ही अभी देखने को मिल रही है। इस नए युग को प्रणाम।
सडक के बीचोंबीच गायों के झुंड क्यों?
इन दिनों पूरे नगर में हर चौराहे व मुख्य मार्गों पर बीचोंबीच गायों के झुंड दिखाई दे रहे हैं। जाहिर है वे यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। छोटी मोटी दुर्धटनाएं रोज हो रही हैं। लोग परेशान हैं। मगर नगर निगम बेबस सा प्रतीत होता है। मुझे कौतुहल हुआ कि गायें आखिर चौराहों पर व मार्गों के बीचोंबीच ही क्यों खडी होती हैं। मैेने ग्रामीण परिवेश से जुडे सुपरिचित एडवोकेट राकेश धाबाई से इसका सबब पूछा। उन्होंने बताया कि इस मौसम में गायें मक्खियों से बहुत परेशान हैं। मक्खियों को पूंछ से उडाते उडाते तंग हो जाती हैं। इस कारण कुछ आक्रामक भी हो गई हैं। बीच सडक पर इस कारण खडी होती हैं, क्यों कि वहां से वाहनों की आवाजाही से हवा के साथ मक्खियां उड जाती हैं। इससे गायों को राहत मिलती है। ऐसी राहत सडक के किनारे खडे होने पर नहीं मिल सकती।
रविवार, 8 सितंबर 2024
क्या कुछ दिन ठहर नहीं सकती थीं जिला कलेक्टर डॉ भारती दीक्षित?
इधर अजमेर जिला कलेक्टर डॉ भारती दीक्षित बारिश के जलजले से जूझ रही थीं, लगातार मॉनिटरिंग कर रही थीं। उधर उनके तबादले के आदेश आ गए। वे चंद घंटे में ही रिलीव हो गईं। पता नहीं खुद की मर्जी से, या उच्चाधिकारियों के दबाव में। जो कुछ भी हो, ऐन संकट के वक्त इस प्रकार रिलीव होना अनुचित व कष्टप्रद है। बेशक नए कलेक्टर लोकबंधु ने ज्वाइनिंग के साथ मौकों का निरीक्षण किया, अधिकारियों की बैठक ली, मगर समझा जा सकता है कि उन्हें हालात को ठीक से समझने व उनसे निपटने में वक्त लगेगा। जब हमारे पास अनुभवी और रोज मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी थे, तो क्यों कर उन्हें इतनी जल्दबाजी में रिलीव कर दिया गया? कैसी विडंबना है? अगर वे हालात सामान्य होने तक कुछ दिन यहीं रह जातीं तो क्या पहाड टूटने वाला था? मगर किसी भी स्तर पर इसका ख्याल नहीं रखा गया। अफसोसनाक।
प्रिंट व सोशल मीडिया साधुवाद का पात्र
भारी बरसात के बाद फायसागर के छलकने पर जब अजमेर में जलजला आ गया तो जान की परवाह किए बिना प्रिंट व सोशल मीडिया कर्मी चहुंओर पसर गए। चप्पे चप्पे के हालात का लाइव कवरेज लोगों को दिखाया। पूरा शहर पल पल अपडेट हो रहा था। प्रशासन के पास खुद का ऐसा कोई नेटवर्क नहीं था कि गली-गली मोहल्ले-माहल्ले की स्थिति का आकलन किया जा सके, मगर सोशल मीडिया ने ग्राउंड रिपोर्ट कर हालात से साक्षात्कार कराया। प्रशासन के लिए राहत कार्य करना आसान हो गया। यूट्यूबर्स ही नहीं, कई बुद्धिजीवी भी इस काम में जुट गए। इतना ही नहीं, रिपोर्टिंग की ड्यूटी करते हुए दैनिक भास्कर के पत्रकार मनीष सिंह चौहान व अतुल सिंह और फोटो जर्नलिस्ट मुकेश परिहार व रमेश डाबी ने स्कूली बच्चों की सहायता में जुट गए। वाकई ये सभी साधुवाद के पात्र हैं।
शनिवार, 7 सितंबर 2024
स्मार्ट सिटी के कार्यों की सीबीआई से जांच की जाए-धर्मेश जैन
अजमेर में बाढ़ के जो हालात उत्पन्न हुए हैं, उस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और नगर सुधार न्यास के पूर्व धर्मेश जैन ने मांग की है कि स्मार्ट सिटी के कार्यों की सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। उन्होंने कहा कि आनासागर में अवैध निर्माण होते रहे, मगर जिम्मेदार राजनेताओं व अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए पाथ वे बनाने का निर्णय किया गया और उसके लिए लाखों टन मिट्टी से आनासागर के किनारों को पाट दिया गया। परिणामस्वरूप आनासागर की भराव क्षमता कम हो गई। जैसे ही तेज बारिश आई, आनासागर छलक गया। और आज करीब पचास कॉलोनियों में पानी भर गया है। जनजीवन ठप हो गया है। यह सब राजनेताओं व अधिकारियों के गठजोड के चलते हुआ है। अजमेर स्मार्ट सिटी की बजाय नर्क सिटी बन गया है।
जैन ने कहा कि आनासागर के भराव क्षेत्र में जो सेवन वंडर बनाया गया है, उसे तोड़ने के लिए एनजीटी ने आदेश दे रखा है, लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन इन आदेशों की पालना नहीं कर रहा है। ज्ञातव्य है कि जैन आनासागर की दुर्गति को लेकर लगातार आवाज बुलंद करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उस पर कभी गौर नहीं किया। उलटे प्रशासन ने उन्हें परेशान करने तक की कोशिश की, ताकि उनका मुंह बंद किया जा सके। बावजूद इसके जैन जनहित के मुद्दे उठाते रहे, लेकिन पार्टी नेताओं का अपेक्षित सहयोग न मिलने व प्रशासन की हठधर्मिता के चलते आज अजमेर नर्क भोगने को मजबूर है।
घटना से पहले छप गई खबर
क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे कि किसी घटना से पहले खबर छप सकती है। यानि घटना बाद में हो और खबर पहले ही छप जाए। ऐसा असंभव है। लेकिन एक बार ऐसा हुआ। हुआ यूं कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री मोहन लाल सुखाडिया की भीलवाडा में सभा होनी थी। कार्यक्रम रात का था। उसका कवरेज उसी रात को करना कठिन था। तब संचार माध्यम आज जितने तेज नहीं थे। समाचार पत्र प्रबंधन ने राजस्थान के जाने माने वरिश्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री सी एल माथुर को जिम्मेदारी सौंपी। प्रबंधन के दबाव में उन्होंने कह दिया कि कोई दिक्कत नहीं है। मुझे पता है कि वे सभा में क्या बोलेंगे। उन्होंने खबर बना दी। छप गई। उधर हुआ यूं कि मुख्यमंत्री का दौरा अचानक स्थगित हो गया। बडी भद पिटी। दिलचस्प बात ये रही कि अगले दिन जब मुख्यमंत्री की सभा हुई तो उन्होंने वही सब कुछ बोला, जो कि अखबार में पहले से छप चुका था। असल में स्वर्गीय श्री माथुर स्वर्गीय श्री सुखाडिय़ा के प्रेस अटैची और राज्य मंत्रीमंडल के संपर्क अधिकारी रहे थे। इस कारण उन्हें अंदाजा था कि वे सभा में क्या बोल सकते हैं। है न दिलचस्प वाकया।
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