मंगलवार, 5 नवंबर 2024

मेरी फितरत में जीहुज़ूर ना था, वरना साहब मेरा कुछ कसूर ना था

अजमेर के पत्रकार साथियों के कृतिव एवं व्यक्तित्व के बारे एक सीरीज लिखी तो मेरे पत्रकार साथी श्री अमित टंडन ने आग्रह किया कि अपने बारे में भी तो कुछ लिखिए। भला मैं अपने बारे में कैसे लिख सकता था? इस पर उन्होंने कहा कि वे यह जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं। उनके आग्रह को मैं टाल नहीं सका। उन्होंने जो कुछ लिखा, हूबहू पेश हैः-

अजमेर में पत्रकारिता के स्वर्णिम युग का आकलन यूं तो पुराने पत्रकार उस दौर के फ़्लैश बैक में जाकर करते हैं, जब बड़े अखबार के नाम पर दैनिक नवज्योति एक मात्र अखबार था, जो अजमेर से प्रकाशित होकर पूरे राज्य में वितरित होता था। मगर तब छोटे अखबारों, अर्थात राष्ट्रदूत, न्याय, रोज़मेल या आधुनिक राजस्थान जैसे मझोले (या शायद लघु) अखबार भी उतना ही दम रखते थे, जितनी ताकत राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर के अखबारों की मानी जाती थी। 

इस वजह से तब अजमेर में हर छोटे बड़े अखबार के पत्रकार का अपना एक कद और पहचान होती थी।

आप और हम जिस अजमेरनामा डॉट कॉम न्यूज पोर्टल पर अजमेर के पत्रकार व साहित्यकारों की सीरीज़ में जिन-जिन महानुभावों की जीवनी और कृतित्व के बारे में पढ़ रहे हैं, वो तो यकीनन अपनी छाप और पहचान के साथ एक इतिहास लिख रहे हैं। मगर, इस न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से आपको ये तमाम जानकारियां देने वाले इस पोर्टल के मुख्य संपादक श्री गिरधर तेजवानी स्वयं अजमेर की पत्रकारिता की तीसरी पीढ़ी के दिग्गज कलमकारों में से एक हैं। 

तीसरी पीढ़ी के इसलिए, क्योंकि प्रथम पीढ़ी में नवज्योति के संस्थापक कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी और उनके समकालीन पत्रकार रहे, दूसरी पीढ़ी में श्री नरेन्द्र चौहान व श्याम जी आदि रहे। श्री तेजवानी की पीढी ने तीसरे नंबर पर वो मशाल सम्भाली, और उस हिसाब से मैं चौथी पीढ़ी में शुमार हो गया। 

रिपोर्टिंग, संपादन लेखन आदि तो श्री तेजवानी का एक महत्वपूर्ण और अनेक उपलब्धि वाला क्षेत्र है ही, मगर श्री तेजवानी की सबसे बड़ी खासियत जो निजी तौर पर मुझे लगी, वो थी राजनीतिक टिपणियां और विश्लेषण। 

6 अप्रैल, 1997 को अजमेर में दैनिक भास्कर का पदार्पण हुआ और हम सब एक-एक करके उसमें जुड़ते चले गए और वहीं मेरी उनसे पहली मुलाकात हुई और साथ काम करने का अवसर मिला। आज उस बात को 28 साल हो गए। 

अमित टंडन

इस 28 साला सफर में मैंने निजी तौर पर एक धीर गंभीर समाचार विश्लेषक और राजनीतिक विचारक के रूप में श्री तेजवानी के ज्ञान की कई ऊंचाइयां देखीं। कोई भी चुनाव हो, स्थानीय निकाय से लेकर विधानसभा, लोकसभा या फिर किसी भी सहकारी समिति, जिला परिषद या छात्र संघ के चुनाव में उनके कयास, उनके आकलन, उनकी विशेष टिप्पणियां आज भी नज़ीर हैं।

डेस्क पर एक प्रभारी के रूप में उनके अधीन क्योंकि मैंने काम किया, तो समाचार की कसावट, सम्पादन की बारीकियां, शब्दों का चयन और हेडलाइंस लगाने का हुनर देख कर बहुत कुछ सीखा।

मुझे याद आता है कि जब भास्कर में संपादकीय साथियों को ऑनलाइन करके पेपरलेस पत्रकार बनाने की मुहिम चल रही थी, तब कंप्यूटर सिखाने की जिम्मदारी मुझ पर ही थी, और श्री तेजवानी ने उस दो माह के कोर्स के बाद ली गई परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किये थे। ये सीखने की उनकी ललक और इच्छाशक्ति का उदाहरण है, जिसका मैं प्रत्यक्ष गवाह रहा। क्योंकि सतत सीखते रहने की उनकी प्रवृत्ति उनका सकरात्मक पहलु थी। 

आज भी वे पत्रकारिता की सेवा कर रहे हैं। आज भी पत्रकारिता को एक पेशे या महज़ काम न समझ कर एक मिशन और एक क्रांति मानते हैं और उसी जोश से लिखते हैं जैसा मैंने उन्हें 28 साल पहले देखा था। 

मगर, एक बात जरूर कहना चाहूंगा, कि ईमानदार कलम अक्सर असल मुकाम पाने से पहले तोड़ दी जाती है। हालांकि इस कलम को तोडऩे के भी प्रयास हुए, मगर इस कलम की नोक इतनी तीखी और मजबूत है कि न ये टूटी औऱ न रुकी। आज भी शब्दों के बाण इस कलम से असत्य, अनाचार और अत्याचार पर वार कर रहे हैं, आज भी लेखनी जवान है। मगर अफसोस है तो इस बात का कि श्री गिरधर तेजवानी को किसी उच्च पद का जो हक़ किसी बड़े मीडिया हाउस में मिलना चाहिए था, वो न मिला। शायद पेशेवर पत्रकारिता के दौर में जवान हुई श्री तेजवानी की कलम की कद्र बड़े अखबारों ने नहीं जानी। खरी खरी और सच कह देने की उनकी आदत और मेरी आदत एक सी है। 

मुझे याद आता है हमारे एक वरिष्ठ पत्रकार व आला गज़लगो भ्राता श्री सुरेंद्र चतुर्वेदी ने एक बार मुझसे ये कहा था- अमित तुम और तेजवानी कड़वे लोग हो। अर्थात तुम लोग सच को सच कह कर खरी खरी सुना देते हो और अपने सेठ, बॉस या कंपनी को कहीं न कहीं नाराज़ कर देते हो, और आज के ज़माने में सच्चाई को तरक्की नहीं मिलती। श्री चतुर्वेदी हमारी इस साफगोई से खुश भी थे और गर्वित भी, मगर हमारी तरक्की के अवरोधों से दुखी भी थे। 

मगर, एक शेर याद आता है जो तेजवानी जी पर एकदम सटीक है-

मेरी फितरत में जीहुज़ूर ना था

वरना साहब मेरा कुछ कसूर ना था 

शख्सियत: स्वाधीनता सेनानी स्वर्गीया श्रीमती क्रांतिदेवी शर्मा

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री ज्वाला प्रसाद शर्मा की धर्मपत्नी स्वर्गीया श्रीमती क्रांतिदेवी ने आजादी के आंदोलन में पति के साथ कंधे से कंधा मिला कर भाग लिया। स्वर्गीय श्री कन्हैयालाल झा के घर जन्मी श्रीमती क्रांतिदेवी ने एम.ए. हिंदी तक शिक्षा अर्जित की है और लेखन कार्य करती थीं। वे आजादी के आंदोलन के दौरान जन प्रबल प्रचार समिति की अध्यक्ष रहीं। वे प्रदेश कांग्रेस की उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संघ महिला विंग की अध्यक्ष थीं। श्री ज्वाला प्रसाद के निधन के बाद आजाद भारत में वे समाजसेवा के लिए सतत कार्य करती रहीं। उनकी पुण्य स्मृति में गोष्ठियां किया करती थीं। उनकी सुपुत्री श्रीमती नीलिमा शर्मा भिनाय से कांग्रेस विधायक रहीं। कांग्रेस के दिल्ली दरबार में उनकी गहरी पकड थी।

शनिवार, 2 नवंबर 2024

अजमेर में कांग्रेस के स्तम्भ एडवोकेट जसराज जयपाल

अजमेर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष रहे एडवोकेट जसराज जयपाल अपने आप में एक संस्था हैं। आजादी के बाद अजमेर की राजनीति में उनके परिवार का खासा वर्चस्व बना हुआ है। उनका जन्म 13 मई 1930 को ब्यावर इलाके के छोटे से गांव झाक में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री केशवराम ब्यावर स्थित कपड़ा मिल में मुकद्दम के पद कार्यरत रहे और ब्यावर नगर पालिका के छह बार पार्षद बने। श्री जयपाल ने बी. कॉम., एम. ए. व एल.एल.बी. की डिग्रियां राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में पढ़ते हुए हासिल कीं। वकालत ही उनका पेशा है, मगर राजनीति में भी पूरा दखल रखते हैं। वे सन् 1967 से 1972 तक अजमेर जिले की भिनाय सीट से विधायक रहे और मंत्री भी बने। उन्होंने अनुसूचित जातीय जनजातीय समाज की अनेक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में विशेष कार्य किया और अनेक पुस्तकें भी लिखीं। अजमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के संचालक मंडल के सदस्य व राजस्थान उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष पद के रूप में राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसे सरकार ने यथावत स्वीकार कर लिया। उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीया श्रीमती भगवती देवी 1972 व 1980 के चुनाव में भिनाय विधानसभा सीट से विजयी हुई थीं। उनके सुपुत्र डॉ राजकुमार जयपाल 1985 में अजमेर पूर्व सीट से विधायक चुने गए थे। वे अजमेर क्लब के अध्यक्ष हैं।

हाल ही अजमेर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राठौड़ ने श्री जसराज जयपाल का उनके 95 वें जन्म दिन के अवसर पर नागरिक अभिनंदन किया। इस अवसर पर गुलाब सिंह राजावत, लोक अभियोजक विवेक पाराशर, अरविंद मीणा, अभय वर्मा, इंदर चंद मण्डूसिया, महेंद्र मेड़ता, राकेश मेहरा, महेश काला, पूर्व विधायक डॉ राजकुमार जयपाल, अशोक दायमा, कर्मचारी नेता रतन कोमल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अजमेर ने खो दिया समाजसेवी श्री श्यामसुंदर छापरवाल को

अजमेर ने हाल ही प्रमुख समाजसेवी श्री श्यामसुंदर छापरवाल को खो दिया। वे न केवल प्रतिष्ठित व्यवसायी थे, अपितु आध्यात्मिक नगर अजमेर में आयोजित विशाल धार्मिक आयोजनों में उनकी अहम भूमिका रही। श्रद्धेय श्री डोंगरे जी महाराज, कथा वाचक श्री मुरारी बापू, श्री रामसुखदास जी महाराज जैसे बडे संतों के प्रवचनों व कथाओं में उन्होंने बढ-चढ कर भाग लिया। ज्ञातव्य है कि ऐसे आयोजनों में धर्मप्राण समाजसेवियों स्वर्गीय श्री मणिलाल गर्ग, शंकर लाल बंसल, कालीचरण खंडेलवाल, रामेश्वर लाल फतेहपुरिया, सीताराम मंत्री आदि का भी अविस्मरणीय योगदान रहा है। श्री छापरवाल के भ्राता सर्वश्री भीमकरण, सत्यनारायण व गोपाल कृष्ण भी व्यवसाय के अतिरिक्त धार्मिक कार्यक्रमों में साथ देते थे। ऐसे कार्यक्रमों का मीडिया प्रबंधन जाने-माने पत्रकार स्वर्गीय श्री आर डी कुवेरा किया करते थे। श्री छापरवाल अर्थ संपन्न होने के बावजूद सादा जीवन जीते थे। उनका स्वर्गवास अजमेर के लिए अपूरणीय क्षति है। अजमेरनामा उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

हरदिल अजीज शख्सियत: डॉ. सुरेश गर्ग

डॉ. सुरेश गर्ग का नाम परिचय का मोहताज नहीं। शहर का शायद ही कोई ऐसा जागरूक व्यक्ति होगा, जो उनको न जानता हो, या जिसने इस हरदिल अजीज शख्सियत का नाम न सुना हो। असल में इसकी एक मात्र वजह ये है कि एक तो वे आम जनता से जुड़ी नगर पालिका सेवा में रहे, दूसरा ये कि उन्होंने केवल नौकरी ही नहीं की, बल्कि सदैव अजमेर से जुड़े हर राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मुद्दे से हर वक्त जुड़े रहे। सेवानिवृत्ति के बाद तो वे पूरी तरह अजमेर के लिए समर्पित हो गए हैं और अजमेर के हित से जुड़े हर मुद्दे पर अपना किरदार निभाने की कोशिश कर रहे हैं। वे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की गहन जानकारी की वजह से भी लोकप्रिय हैं। सेवाभाव की वजह से लागत मूल्य पर ही आयुर्वेद की दवाई दे देते हैं। यदि कोई निर्धन आ जाए तो उसे मुफ्त में ही दवा दे कर स्वयं को भाग्यवान समझते हैं। इस कार्य में उनकी पत्नी श्रीमती इन्द्र प्रभा गर्ग भी हाथ बंटाती हैं।

स्वर्गीय श्री किशन स्वरूप जी गर्ग के घर 13 फरवरी 1948 को जन्मे डॉ. गर्ग ने एमए व एलएलबी तक अध्ययन किया है और बायोकेमिस्ट व आयुर्वेद रत्न की शिक्षा भी अर्जित की है। उन्होंने 14 साल तक जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में सेवाएं दीं और उसके बाद 28 साल तक राजस्थान नगरपालिका सेवा में रहे और 16 साल पहलेअधिशाषी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में आप आयुर्वेद व होम्योपैथी की प्राइवेट पै्रक्टिस कर रहे हैं। सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारी संगठनों की गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। सहकारी क्षेत्र में भागीदारी निभाते हुए दी अजमेर जलदाय कर्मचारी बचत व साख सहकारी समिति के निदेशक रहे। समाजसेवा के क्षेत्र में भी आपकी सक्रियता रही और 1970 से 78 तक स्वयंसेवी संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वूमन आर्गेनाइजेशन में निदेशक रहे। सेवारत अग्रवाल कल्याण परिषद के आजीवन संरक्षक, अग्रवंशज संस्थान के निदेशक, अग्रवाल वैवाहिक परिचय एवं सामूहिक सम्मेलन में उपाध्यक्ष व संयोजक और अग्रबंधु निर्देशिका के संपादक रहे। उन्होंने संत श्री मोरारी बापू की नौ दिवसीय कथा के आयोजन के संयोजन का जिम्मा निभाया। उन्होंने नगर पालिका कानून की पांच पुस्तकें, व्यंग्य व स्वास्थ्य पर पुस्तकें लिखीं। उन्होंने स्थानीय निकाय के बढ़ते कदम पत्रिका का संपादन किया है और अनेक स्मारिकाओं का प्रकाशन करवाया है। वर्तमान में आंखन देखी पाक्षिक व रिमझिम साप्ताहिक में संपादन का कार्य कर रहे हैं। रिमझिम प्रकाशन ने अजमेर के इतिहास, वर्तमान व भविष्य पर रचित पुस्तक अजमेर एट ए ग्लांस का प्रकाशन  किया है। स्वाभाविक रूप से पुस्तक के प्रकाशन में उनकी अहम भूमिका रही है। वे सन् 2001 से 2005 तक अजयमेरू प्रेस क्लब में  निदेशक रह चुके हैं। सन् 1970 से 1980 तक सामाजिक संस्था में प्रगतिशील युवक संघ में महामंत्री रहे व वर्तमान में उसके अध्यक्ष हैं। राजनीतिक से आपका शुरू से जुड़ाव रहा। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशियों के खुल कर काम करने की वजह से भाजपा शासनकालों में अजमेर से स्थानांतरित हो कर बाहर रहना पड़ा। केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री श्री सचिन पायलट से नजदीकी की बदौलत शहर कांग्रेस के उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हैं। उनकी पत्नी श्रीमती इन्द्र प्रभा गर्ग सन् 1982 से 90 तक शहर महिला कांग्रेस की महामंत्री रही हैं।