पुष्कर में एक छोटे से आश्रम में रहते थे, जिसे हिरदारामजी की कुटिया कहा जाता है। अकाल के दौरान उनकी प्रेरणा से जीव सेवा समिति ने अजमेर जिले में सैकडों प्याऊ खोली थीं। अभाव ग्रस्त गांवों में टैंकरों से पानी की टैंकर सप्लाई किए गए। उनकी ही प्रेरणा से दयाल वीना डायग्नोस्टिक सेंटर व पागारानी हॉस्पीटल संचालित हैं। उनकी स्मृति में अजमेर में हर साल निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर और यूरोलॉजी कैम्प आयोजित होते हैं। बैरागढ भोपाल में उनके नाम से जनसेवा के बीसियों प्रोजेक्ट संचालित हैं। ऐसी महान हस्ती के अनुयाइयों के अनूठे अनुभव हैं। वे उनकी कृपा पाने को आतुर रहते थे। उनके आदेश की पालना को तत्पर रहते थे। उनके आशीर्वाद से अनेक श्रद्धालुओं के जीवन परिवर्तित हो गए। अगर वे किसी को सहज भाव में गाली दे देते तो वह अपने आपको धन्य समझता था। ऐसे अनेक प्रसंग हैं कि जिन को उन्होंने गाली दे कर पुकारा वह मालामाल हो गया, निहाल हो गया। कैसी अनूठी कीमिया रही होगी। किसी पर कृपा बरसाने का अनोखा तरीका।
शनिवार, 1 फ़रवरी 2025
स्वामी श्री हिरदाराम जी की गाली निहाल कर देती थी
शुक्रवार, 31 जनवरी 2025
धर्मेश जैन देंगे अजमेर को सिटी सेंट्रल मॉल की सौगात
भाजपा नेता श्री धर्मेश जैन देंगे अजमेर को विशाल कमर्शियल कॉम्पलैक्स- सिटी सेंट्रल मॉल की सौगात
अजमेर। वरिष्ठ भाजपा नेता व अजमेर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष रहे स्वप्नदृश्टा श्री धर्मेश जैन का एक और सपना साकार होने की दिशा में कदम रख चुका है। वे अजमेर को विशाल कमर्शियल कॉम्पलैक्स- सिटी सेंट्रल मॉल की सौगात देने वाले हैं। कचहरी रोड पर शहर के पहले कमर्शियल कॉम्पलैक्स स्वामी कॉम्पलैक्स के सामने रेलव बिसिट की भूमि पर इसका शिलान्यास 31 जनवरी, 2025 को युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि, मथुरा के श्री मृत्युंजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कॉम्पलैक्स के लिए 1800 वर्ग गज भूमि रेलवे से खुली नीलामी में साठ साल की लीज पर ली गई है।बेशक यह एक कॉमर्शियल प्रोजेक्ट है, कमाने के लिए खोला गया है, लेकिन महानगरीय संस्कृति की ओर बढ़ रहे स्मार्ट सिटी अजमेर के लिए चार चांद लगाने जैसा है।
श्री धर्मेश जैन के पुत्र और युवा भाजपा नेता अमित जैन, जो कि इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हैं, ने बताया कि सिटी सेंट्रल मॉल पहला कॉम्पलैक्स है, जिसका रजिस्ट्रेशन राजस्थान रियल एस्टेट रेग्युलेटिरी ऑथोरिटी (रेरा) से करवाया गया। इसके निर्माणाधीन पांच मंजिला विशाल मॉल में लिफ्ट, एक्सिलेटर सहित सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। पूरा कॉम्पलैक्स एयर कंडीशंड होगा। कॉम्पलैक्स के चीफ एक्जीक्यूटिव जयपुर निवासी सिद्धार्थ गुप्ता हैं। यहां ऑफिस व दुकान के लिए बुकिंग करवाने वालों को बैक से ऋण मिल सकेगा।
प्रसंगवश बताना उचित होगा कि श्री धर्मेश जैन ने कोई 48 साल पहले 1974 में देवगढ़ मदारिया से अजमेर आने पर सबसे पहले पृथ्वीराज मार्ग स्थित बिजली के पंखों और सिलाई मशीन का कारोबार शुरू किया। यहां से आरंभ हुआ व्यावसायिक सफर कडी मेहनत और व्यवसायगत चातुर्य के दम पर आज ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका हैं, जहां उनका परिवार होटल, कपडा व रियल एस्टेट के क्षेत्र में प्रतिष्ठा अर्जित कर चुका है।
ज्ञातव्य है कि कुछ साल पहले श्री धर्मेश जैन ने अजमेर को एक लाजवाब सौगात दी थी। उन्होंने शहर के हृदय स्थल गांधी भवन के पास रेलवे परिसर में तालेड़ा बिल्डिंग के सबसे ऊपर आठवीं मंजिल अर्थात रूफ टॉप पर स्काई ग्रिल रेस्टोरेंट का शुभारंभ किया। इसकी लोकेशन वाकई सुप्रीम है, जहां से पूरे शहर का विहंगम दृश्य नजर आता है। पूरा शहर, माने पूरा शहर, 360 डिग्री। यह तो हुई उनकी निजी उपलब्धि, जब वे यूआईटी के अध्यक्ष थे, तब भी सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कितनी ही ऐतिहासिक सौगातें अजमेर को दीं। वे वास्तव में स्वप्नदृश्टा हैं, जो अजमेर की बहबूदी के लिए अनेक ख्याल अपने जेहन में समेटे हुए हैं।
गुरुवार, 30 जनवरी 2025
रचनात्मक राजनीति के प्रेरणा स्रोत: स्व. श्री रामनिवास मिर्धा
आइये 29 जनवरी को उनकी पुण्य तिथि के मौके पर उनके बारे में कुछ जानेंः-
स्वर्गीय श्री मिर्धा विलक्षण प्रतिभा व व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी गिनती सिद्धांतवादी राजनीतिज्ञों, चिंतकों, दार्शनिकों के रूप में होती है। एक किसान परिवार में जन्म लेने के बाद ईमानदारी व कर्मठता के दम पर उन्होंने लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ तक अपने बौद्धिक, राजनीतिक व प्रशासनिक कौशल का लोहा मनवाया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये मानी जाती है कि अनेकानेक उच्च पदों पर रहते हुए भी वे सौम्य व शांत स्वभाव के बने रहे और उनका पूरा जीवन निष्कलंक रहा।
उनका जन्म मूल रूप से राजस्थान के नागौर जिले के कुचेरा गांव निवासी जाने-माने किसान नेता श्री बलदेवराम मिर्धा के घर 24 अगस्त, 1924 को बाड़मेर जिले के जसोल गांव में हुआ, जबकि वे पुलिस अधिकारी थे। स्व. श्री मिर्धा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और जिनेवा-स्विट्जरलैंड के ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में एमए व एलएलबी की उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने अपना कैरियर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में शुरू किया, मगर जल्द ही इस्तीफा दे कर सक्रिय राजनीति में आ गए। वे सन् 1953 से 1967 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे और इस दरम्यान 1954 से 1057 तक कृषि, सिंचाई व यातायात विभाग के मंत्री और 1957 से 1967 तक विधानसभा के अध्यक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व निर्वहन किया। इसके बाद 1967 में वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 1970 से 1980 के दौरान केन्द्र सरकार के मंत्री रहे और विदेश, संचार, कपड़ा, सिंचाई, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण सहित अनेक विभागों के मंत्रालयों का कामकाज देखा। वे 1977 से 1980 तक राज्यसभा के उपसभापति भी रहे। वे 1991 से 1996 तक बाड़मेर से लोकसभा सदस्य भी रहे। वे सिक्यूरिटी व बैंकिंग ट्रांजेक्शन में अनियमितता के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत-अमेरिकी संस्कृति और शिक्षा पर उप आयोग के सह अध्यक्ष के रूप में काम किया और 1993 से 1997 तक यूनेस्को के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य भी रहे। वे इंडियन हैरिटेज सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष, इंडियन फेडरेशन ऑफ यूएन एसोसिएशन के अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के ट्रस्टी और संगीत नाटक अकादमी व ललित कला अकादमी के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने अनेक स्थानों पर नृत्य केन्द्रों की स्थापना करवाई। पैंतीस वर्ष से कम आयु के कलाकारों को युवा पुरस्कार देने की योजना उन्हीं के दिमाग की उपज थी। उन्हीं के कार्यकाल में संगीत नाटक अकादमी की झांकी को गणतंत्र दिवस समारोह में प्रथम पुरस्कार हासिल हुआ। गत 29 जनवरी 2010 को वे इस फानी दुनिया को सदा के लिए अलविदा कर गए।
स्वर्गीय श्री मिर्धा की धर्मपत्नी का नाम श्रीमती इंदिरा मिर्धा था। उनके घर-आंगन में तीन पुत्र व एक पुत्री ने जन्म लिया। उनके एक पुत्र श्री हरेन्द्र मिर्धा वर्तमान में राजस्थान के प्रमुख कांग्रेस नेताओं में शुमार हैं, जिनका विवाह राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रहे श्री परसराम मदेरणा की पुत्री रतन मिर्धा के साथ हुआ। उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और 1998 से 2004 तक काबीना मंत्री के रूप में सार्वजनिक निर्माण विभाग का काम देखा। वे वर्तमान में नागौर से कांग्रेस विधायक हैं। उनके एक पुत्र व एक पुत्री हैं। पुत्र श्री रघुवेन्द्र मिर्धा की गिनती उभरते हुए कांग्रेस नेताओं में होती है। नागौर जिले का युर्वा वर्ग उनमें अपना भविष्य तलाशता है।
-तेजवानी गिरधर
7742067000
मंगलवार, 28 जनवरी 2025
एक दूसरे के पर्याय डॉ. रशिका महर्षि - दिलीप महर्षि
दिलीप महर्षि आयुर्वेद विभाग में काम करते थे। स्वाभाविक रूप से नौकरी के अतिरिक्त सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी कम ही नजर आई, मगर सच यह है कि नौकरी से पहले वे अजमेर व पुश्कर के पुराने घरानों से संबंद्ध रहे। शहर की धडकन पर उनकी पकड थी। बिंदास व्यक्तित्व। दंबग पर्सनेलिटी। बडा रुतबा था। सिद्धांत के पक्के। इसी वजह से उनके चेहरे पर दृढता चमकती थी, मगर नारियल की तरह भीतर से कोमल, सहृदय। बहुत सूझबूझ। कूल माइंडेड। विलक्षण व्यक्तित्व।
चंद साल पहले डॉ. रशिका महर्षि ने पति श्री दिलीप महर्षि को अपनी किडनी दान की थी। और अपना जीवन सार्थक कर लिया। यूं समझें कि दिलीप के शरीर में रशिका की किडनी नहीं, बल्कि उनके प्राण प्रतिस्थापित थे। एक दूसरे के बीच अटूट स्नेह। एक दूसरे के पूरक। बहादुर औरत ने पोस्ट ऑपरेटिव समस्याओं का किस प्रकार हिम्मत से मुकाबला किया, वह सभी शुभचिंतकों के संझान में है। पति की सेवा का अनूठा उदाहरण। साथ में बच्चों की बेहतरीन परवरिश में कोई कमी नहीं। इस शख्सियत का रोचक पहलु ये कि दैनंदिन पारीवारिक व्यस्तताओं के बाद भी सार्वजनिक जीवन में भरपूर सक्रियता उनके अदम्य उत्साह का प्रमाण है। संघर्ष में भी उत्सव तलाशने की अद्भुत कीमिया। ऊर्जा से लबरेज इस महिला से सकारात्मकता की किरणें फूटती हैं। ऐसी सफल नारी का संबल थे दिलीप महर्षि। हर कदम पर उनके साथ खडे नजर आए। पूर्णतः खिले इस पुष्प को जीवनी शक्ति मिलती रही जड में मौजूद दिलीप महर्षि से। अब मलाल सिर्फ इतना कि अपनी किडनी दान देकर जीवन देने के बाद प्रकृति ने दूसरे मार्ग से हठात जीवन छीन लिया। अफसोस। अफसोस इस बात का भी कि पारीवारिक जिम्मेदारियों, व्यस्तताओं के चलते डॉ. रशिका महर्षि में अध्यात्म और पत्रकारिता के क्षेत्र में जिन नए आयामों और उंचाइयों को छूने की संभाव्यता थी, वह भ्रूण अवस्था में ही रह गई। उम्मीद है कि बिंदास रशिका वज्राघात से उबर कर नए प्रतिमान स्थापित करने में कामयाब होंगी।

