मंगलवार, 7 जनवरी 2014

ललित भाटी ने पोष बड़े क्यों खिलाए?

हाल ही पूर्व उपमंत्री ललित भाटी ने विजय लक्ष्मी पार्क में पोष बड़े का आयोजन किया। इसकी राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है। सवाल ये उठ रहा है कि आखिर उन्हें यह आयोजन करने की जरूरत क्या थी? पोष बड़े के आयोजन आज तक तो मंदिरों अथवा घरों में ही होते रहे हैं, मगर स्टेटस सिंबल के लिए जिस प्रकार रोजा अफ्तार आयोजित किए जाते हैं, ठीक वैसे ही पोष बड़े का आयोजन हुआ तो यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है।
इसमें कोई दोराय नहीं कि यह भाटी का एक शक्ति प्रदर्शन था। यह जताने के लिए कि वे अभी चुके नहीं हैं। विशेष रूप से विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी चुप्पी और बाद में हार के लिए अजमेर के सांसद व केन्द्रीय कंपनी मामलात राज्य मंत्री सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराये जाने के बाद इस आयोजन के अर्थ निकाले जा रहे हैं। इसमें यूं तो उनकी मित्र मंडली में शामिल अनेक कांग्रेसी नेता, कुछ अफसरान व पत्रकार बंधु शामिल हुए, इक्का-दुक्का भाजपा नेता भी थे, मगर सचिन विरोधियों की संख्या कुछ अधिक ही थी। असल में सचिन खेमे की इस पर नजर थी कि कौन-कौन वहां मौजूद रहा। जाहिर है वहां मौजूद सचिन खेमे के माने जाने वाले कुछ लोग चिन्हित किए गए हैं। संभव है वे मित्रता व पुराने संबंधों के नाते वहां गए हों, मगर भाटी द्वारा सचिन की खिलाफत करने के बाद भी उनकी मौजूदगी रेखांकित करने वाली रही। बेशक इसकी रिपोर्टिंग भी हुई ही होगी। प्रसंगवश आपको बता दें कि ललित भाटी अजमेर दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के बड़े भाई हैं और हेमंत को टिकट दिलवाने में सचिन की अहम भूमिका रही थी। दोनों भाइयों के बीच के संबंधों के बारे में सबको पता है।
खैर, जो कुछ भी हो, मगर जैसी कि भाटी की फितरत है, वे कभी चुप नहीं बैठ सकते, यह उसी का नमूना था। और सब जानते हैं कि वे चर्चा में रहने के फंडे जानते हैं। 

रविवार, 5 जनवरी 2014

लो रावत समाज ने तो कर दिया दावा

लोकसभा चुनाव की तारीखें अभी घोषित भी नहीं हुई हैं कि टिकट की दावेदारी खुल कर सामने आने लगी है। रावत महासभा राजस्थान ने जिले में पुष्कर व ब्यावर दो विधानसभा सीटें जीतने से उत्साहित हो कर अब अजमेर संसदीय क्षेत्र से समाज के योग्य व्यक्ति को टिकट देने की मांग कर दी है। प्रदेशाध्यक्ष ज्ञान सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई महासभा की बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष सेवा सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, उपाध्यक्ष लाल सिंह रावत व शंभू सिंह ने कहा कि अजमेर रावत बाहुल्य क्षेत्र है। अत: यहां से समाज के व्यक्ति को ही टिकट दिया जाना चाहिए। हालांकि महासभा ने अपनी ओर से किसी का नाम नहीं सुझाया है, मगर समझा जाता है कि भाजपा की ओर झुकाव वाले रावत समाज की ओर से अजमेर के ही पूर्व सांसद व मौजूदा शहर भाजपा अध्यक्ष प्रो. रासासिंह रावत पूरी ताकत से दावेदारी करेंगे। वे इस आशय की मंशा जाहिर भी कर चुके हैं। उन्होंने यूं तो पुष्कर विधानसभा सीट के लिए भी दावेदारी की थी, मगर संभव है लोकसभा चुनाव में कंसीडर किए जाने के आश्वासन पर वे तब चुप हो गए थे। अब चुप रहने वाले नहीं हैं। ज्ञातव्य है कि वे अजमेर से छह बार चुनाव लड़े और पांच बार जीते। उनकी जीत का आधार मूल रूप से रावत वोट हुआ करते थे। पिछली बार इस कारण टिकट काट दिया गया क्योंकि रावत बहुल ब्यावर-मगरा इलाका परिसीमन में अजमेर संसदीय क्षेत्र से कट गया। मगर चूंकि बाहर से लाई गई किरण माहेश्वरी के हार जाने के कारण मैदान खाली है, इस कारण वे फिर दावेदारी करेंगे। हालांकि उन्हें पिछली बार राजसमंद से टिकट दिया गया, मगर हार गए, तब यही कहा था कि अगर अजमेर से ही टिकट दिया जाता तो वे जीत कर दिखा देते।
यूं परिसीमन के बाद भी रावतों के वोट इतने भी कम नहीं हो गए हैं कि दावा किया ही न जा सके। यह रावतों का ही दबाव था कि भाजपा को ब्यावर के साथ पुष्कर से भी रावत को ही टिकट देना पड़ा। ज्ञातव्य है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पुष्कर से रावत को टिकट न दिए जाने के कारण रावतों ने भाजपा की पुष्कर सहित तीन सीटें खराब कर दी थीं। इसी दबाव में इस बार भाजपा को टिकट देना पड़ा। अब लोकसभा चुनाव में रावत फिर दबाव बना रहे हैं। मगरा विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मदनसिंह रावत भी दावा कर सकते हैं, मगर उनका नकारात्मक पहलु ये है कि वे लगातार तीन बार नसीराबाद विधानसभा सीट से हार चुके हैं।
जातीय समीकरणों के लिहाज से जाटों की ओर से आपीएससी के पूर्व चेयरमैन सी. आर. चौधरी, अजमेर में कलेक्टर रह चुके महावीर सिंह और पूर्व जिला प्रमुख श्रीमती सरिता गैना के ससुर सी. बी. गैना दावा कर सकते हैं। एक और जाट सज्जन भी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के दौरान अहम भूमिका निभाई बताई।
राजपूतों की ओर से युवा भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा दावा ठोक सकते हैं। उनकी धर्मपत्नी सफल जिला प्रमख रही हैं और हाल ही मूसदा में कॉम्प्लीकेटेड विधानसभा चुनाव भी जीती हैं, इस कारण पलाड़ा उत्साहित हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक बड़ा जलसा करके अपनी दावेदारी जता भी दी थी। वैसे अजमेर नगर परिषद के पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व केकड़ी प्रधान रिंकू कंवर आदि के भी दावा ठोकने के आसार हैं।
वैश्य वर्ग से पूर्व नगर सुधार न्यास सदर धर्मेश जैन, पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिय़ा व शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा दावा कर सकते हैं। राजसमंद से भाजपा विधायक श्रीमती किरण माहेश्वरी भी वापस मैदान में आ सकती हैं। कदाचित उनकी रुचि प्रदेश की बजाय केन्द्र की राजनीति करने में हो। वे भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
दावेदारों में एक नाम मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की पुत्रवधू व झालावाड़ के भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह की धर्म पत्नी श्रीमती निहारिका राजे का भी है। इसके पीछे एक तर्क ये भी है कि अजमेर संसदीय क्षेत्र में तकरीबन डेढ़ लाख गुर्जर मतदाता हैं और श्रीमती निहारिका भी गुर्जर समाज की बेटी हैं।
-तेजवानी गिरधर
7742067000
tejwanig@gmail.com

शनिवार, 4 जनवरी 2014

भाजयुमो को अपनी सरकार पर ही भरोसा नहीं?

राजस्थान सरकार के पूर्व मुख्य सचेतक व केकड़ी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रघु शर्मा के खिलाफ लगातार पिछले तीन साल केकड़ी के अजमेर रोड पर स्थित अपने फार्म हाउस पर बीसलपुर की पाइपलाइन से अवैध कनैक्शन लेकर पानी की चोरी करने के मामले में सरवाड़ पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है, बावजूद इसके भारतीय जनता युवा मोर्चा को अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं हो रहा कि उन्हें गिरफ्तार किया भी जाएगा या नहीं। यह स्थिति तब है जबकि इस कारगुजारी की शिकायत क्षेत्रीय भाजपा विधायक शत्रुघ्र गौतम ने सिंचाई मंत्री सांवरलाल जाट से थी। जाट ने ही जलदाय विभाग के अधिकारियों को कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। इसके बाद जलदाय विभाग ने शर्मा के रघुवीरा नामक फार्म हाउस व सावर रोड पर ग्राम गुलगांव में स्थित शैलेन्द्र सिंह शक्तावत के फार्म हाउस से बीसलपुर पाइप लाइन से जोड़ी गई अवैध लाइनों को काट दिया था।
शर्मा के खिलाफ सरवाड़ व शक्तावत के खिलाफ केकड़ी पुलिस थाने में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व पानी चोरी का मुकदमा दर्ज करवाया गया था। जाहिर सी बात है कि अब इस पर बाकायदा कार्यवाही होगी, बावजूद इसके भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने रघु शर्मा के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया। उनके पुतले की शव यात्रा निकाली और उपखण्ड अधिकारी कार्यालय में तहसीलदार ओमप्रकाश जैन को ज्ञापन दे कर शर्मा व शक्तावत को गिरफ्तार करने की मांग की। बेशक यदि आरोप सही है तो मामला गंभीर है और कानूनन गिरफ्तारी जरूरी होगी तो वह भी होगी ही, मगर संभव है भाजयुमो के शहर अध्यक्ष सत्यनारायण चौधरी व उनके कार्यकर्ताओं को अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं। या फिर शर्मा को हराने के बाद भी गुस्सा कम नहीं हुआ है, जो इस प्रकार गुबार निकालना पड़ा। या फिर ये भी हो सकता है कि भाजपा के कार्यकर्ता आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपने आप को वार्मअप करना चाहते हैं।
हां, इसमें कोई दोराय नहीं कि इस मामले में जलदाय विभाग की मिलीभगत ही रही। मामला काफी पुराना है, फिर भी उसने कार्यवाही नहीं की और आज जा कर सहायक अभियंता कालूराम मीणा को यह कहना पड़ रहा है कि शर्मा के इस कथन में कोई सच्चाई नहीं है कि उन्होंने कनैक्शन के लिये फाइल लगाई थी। सवाल ये उठता है कि क्या उस अभियंता के खिलाफ भी कार्यवाही होगी, जिसके कार्यकाल में ये अवैध कनैक्शन हुआ था। खैर, केकड़ी के एडीशनल एसपी कह रहे हैं कि पेयजल विभाग की ओर से पानी चोरी व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट दी गई, जिस पर जांच की जा रही है और शीघ्र ही उचित कार्यवाही की जायेगी। अब देखना ये है कि क्या होता है? मगर इतना तय है कि जैसा भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा है, वे इस मामले को ठंडा तो नहीं होने देंगे।

टंडन साहब दे रहे हैं मुख्यमंत्री को सलाह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश टंडन की कांग्रेस में पूछ हो या नहीं, मगर भाजपा राज में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सलाह जरूर देना शुरू कर रहे हैं। असल में उन्होंने राजे से मांग की है कि वे 8-9 जनवरी को आयोजित कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस को रद्द करें। उन्होंने बाकायदा मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र लिख कर कहा है कि यह लगभग तय है कि सरकार मकर संक्रांति के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कलेक्टर एसपी के तबादले करेगी और जाहिर है कलेक्टर-एसपी नए आ जाएंगे। अत: सरकार मौजूदा कलेक्टर-एसपी के बजाय आने वाले नए कलेक्टर-एसपी को अपनी कार्य योजनाओं के बारे में समझाए तो ज्यादा बेहतर होगा। वैसे भी मौजूदा को समझाने का कोई मतलब नहीं है।
यूं एक बुद्धिजीवी के नाते उनका सुझाव वाकई काम का है, मगर चूंकि वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, इस कारण भाजपा सरकार को दी जा रही उनकी सलाह पर चौपाल पर चर्चा होना स्वाभाविक है। दिलचस्प बात ये है कि उन्हें ये पहले से पता है कि मकर संक्रांति के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कलेक्टर-एसपी के तबादले किए जाने हैं। सरकार की अंदर की जानकारी होना वाकई गौरतलब है। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी मौजूदा कलैक्टर-एसपी ने ही उनसे ऐसी सलाह देने को कहा हो? उनको तो पता ही है, मगर वे संभव है सुझाव देने की हिमाकत न कर पा रहे हों। बात राजे तक पहुंची तो संभव है सलाह भी मान ली जाए। अगर ऐसा हुआ तो प्रदेशभर के कलैक्टर-एसपी उन्हें दुआ देंगे। बहरहाल, जो कुछ हो, टंडन साहब का यह नया अवतार है बड़ा दिलचस्प। अपना तो सुझाव है कि उनको प्रशासनिक सलाहकार बना दिया जाना चाहिए। ज्ञातव्य है कि उनको प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उठने-बैठने का अच्छा खासा अनुभव है और उनके मसलों को भलीभांति समझते हैं। कांग्रेस राज में भी उर्स व पुष्कर मेले जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं। धरना तक देने से नहीं चूकते। अपनी इसी बेबाक बयानी और फक्कड़ अंदाज की वजह से ही वे हमेशा चर्चित रहते आए हैं।

गुरुवार, 2 जनवरी 2014

भगत के खिलाफ मामला बेहद कमजोर?

भूमि के बदले भूमि आवंटन के लिए रिश्वत के तौर पर प्लॉट और रुपए की डिमांड करने के मामले में एक सवाल हर एक के जेहन में है कि आखिर इस मामले में न्यास के पूर्व सदर नरेन शहाणी भगत का क्या होगा? विशेष रूप से सरकार अब भाजपा की है तो क्या उनके प्रति कड़ा रुख अपनाया जाएगा? विधानसभा चुनाव में महज इसी वजह से टिकट से हाथ धो बैठे, मगर अब क्या उनका राजनीतिक कैरियर भी चौपट हो जाएगा? असल में यह चर्चा इस कारण उठी है क्योंकि हाल ही मीडिया में यह खबर सुर्खियों में थी कि एक ओर जहां रिटायर्ड आईएएस अधिकारी खन्ना की ओर से की गई जांच में पूर्व अध्यक्ष नरेन शाहनी पर जहां कोई आरोप नहीं बन रहा, वहीं एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हें रिश्वत मांगने का दोषी ठहराया है।
इस सिलसिले में जानकारी ये भी आ रही है कि भगत के खिलाफ बना मामला बेहद कमजोर है। इसकी वजह ये बताई जा रही है कि जिस दिन की वॉइस रिकॉर्डिंग एसीबी के पास है, उस दिन भगत जयपुर में कांग्रेस स्थापना दिवस के कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। अजमेर से जयपुर जाते वक्त उनके साथ शहर कांग्रेस के दो बड़े दिग्गज भी थे। अगर यह वाकई सच है तो भगत के खिलाफ बनाया गया मामला या तो जयपुर मुख्यालय में ही दफ्तर दाखिल हो जाएगा, या फिर कोर्ट में पहुंचा तो पहली सुनवाई में ही फुस्स हो जाएगा। इसके अतिरिक्त बताया ये भी जा रहा है कि सबूत के तौर रखी गई ऑडियो रिकार्डिंग में भगत की आवाज साफ नहीं है, यानि कि फोरेंसिक लैब में वह रिजेक्ट भी हो सकती है।
सच क्या है ये तो वक्त ही बताएगा, मगर फिलवक्त खबर यही है कि भगत इस मामले में ज्यादा लपेटे में नहीं आएंगे। उन्हें जो नुकसान होना था, वह तो हो ही चुका, विधानसभा टिकट कटने की वजह से। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी असलियत जानते थे, मगर एक तो चुनाव के दौरान भगत को क्लीन चिट देने पर किसी भी प्रकार का आरोप झेलने को तैयार नहीं थे, दूसरा ये कि अगर भगत को पाक साफ घोषित कर दिया जाता तो वे टिकट के प्रबलतम दावेदार हो जाते, जबकि वे अपने चहेते डॉ. श्रीगोपाल बाहेती को टिकट देने का मानस बना चुके थे। उन्होंने मेहरबानी सिर्फ इतनी ही कि उनके खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया। बताते तो ये तक हैं कि उनको साफ इशारा था कि उनके लिए बेहतर यही रहेगा कि डॉ. बाहेती के साथ ईमानदारी से काम करें, वरना डॉ. बाहेती के हारने पर और साथ ही सरकार रिपीट होने पर उनका हश्र कुछ अच्छा नहीं होगा। लिहाजा भगत ने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया। अब स्थिति ये है कि भगत के साथ लगने पर भी बाहेती हार गए और वह भी बुरी तरह। यानि की लहर इतनी तेज थी कि भगत भी हथेली नहीं लगा पाए। उधर सरकार भी नहीं आई। रहा संगठन का सवाल तो हालत ये है कि कांग्रेस की बुरी तरह से हार के लिए किसी को भी सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है। ऐसे में जाहिर है भगत को कम से कम शक की नजर से तो नहीं देखा जाएगा।