मंगलवार, 26 नवंबर 2024
अदिति मेहता पर था शेखावत का वरदहस्त
सोमवार, 25 नवंबर 2024
अजमेर जिले में एक ही कलेक्टर नाकाफी
रविवार, 24 नवंबर 2024
अजमेर में अग्रणी ब्लॉगर हैं डॉ राजेन्द्र तेला
शुक्रवार, 22 नवंबर 2024
शख्सियत: सर्वश्रेष्ठ जनसंपर्क अधिकारी रहे हैं श्री प्यारे मोहन त्रिपाठी
उनका जन्म 1 जनवरी, 1956 को हुआ। उन्होंने बी.कॉम., एम. कॉम. (वित्तीय प्रबंध) और एम.ए. हिंदी की डिग्रियां हासिल कीं। उन्होंने सरकारी सेवा सहायक जनसंपर्क अधिकारी के रूप में शुरू की और चूरू, बीकानेर, भीलवाड़ा व अजमेर में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में काम किया। इसी प्रकार राजस्थान आवासन मंडल, जयपुर के जनसंपर्क अधिकारी भी रहे। अक्टूबर 1996 से अक्टूबर 1997 तक महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के उप कुल सचिव भी रहे। वे इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर और कोटा खुला विश्वविद्यालय, कोटा के काउंसलर भी रहे हैं।
वे उपराष्ट्रपति स्व. श्री भैरोंसिंह शेखावत के हाथों 15 सितंबर, 2003 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुए। इसी प्रकार 15 अगस्त, 1996 को उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त 30 मई, 1999 को यूनेस्को फेडरेशन अवार्ड और 2000 में प्रतिष्ठित माणक अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। वे चार बार जिला स्तर पर भी सम्मानित हुए और दो बार पुष्कर व उर्स मेले में राज्य स्तर पर राज्यस्तरीय प्रदर्शनी पुरस्कार हासिल किया। दोनों मेलों को दुनिया में पहचान दिलाने में उनकी अहम भूमिका है। अनेक बार दूरदर्शन और आकाशवाणी में परिचर्चाओं में भाग ले चुके हैं और उनके एक हजार से भी ज्यादा लेख-फीचर देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग में मीडिया एडवाइजर व एक्सपर्ट के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी के सीई भी रहे हैं।
रविवार, 17 नवंबर 2024
मौजूदा सृष्टि की रचना से पहले भी पुष्कर मौजूद था?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सृष्टि की रचना के संदर्भ में ब्रह्मा जी का जो स्थान बताया गया है, वह इन कथाओं में स्पष्ट नहीं हो पाता। वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण से देखें तो रचनात्मकता की पूरी प्रक्रिया को इस तरह नहीं समझा जा सकता कि पहले से कोई स्थान या प्राणी मौजूद थे।
इस पर राजस्थान सरकार के पूर्व वित्तीय सलाहकार व दार्शनिक श्री गोविंद देव व्यास ने बहुत सटीक व विहंगम दृश्टि डाली है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि यदि आप गीता पढ़ें, उससे पहले लिखे हुए पुराण पढ़ें, यह सुस्पष्ट है कि इस पृथ्वी पर कई बार सृष्टि की रचना हुई। प्रलय आए। सृष्टि समाप्त हुई और बहुत पहले यदि पीपल के पत्ते पर पैर का अंगूठा लिए हुए भगवान कृष्ण को देखा हो तो वह प्रलय के समय की फोटो है। ऐसा पुराणों में अंकित है। यदि जल प्रलय होता है तो पृथ्वी का अधिकांश भाग जलमग्न हो जाता है। उस समय जीव नहीं होते हैं। हिंदू धर्म के कई मतावलंबियों के अनुसार सृष्टि की जब भी पुनः रचना हुई हैं, हर युग आए हैं, सत से कलयुग तक। भारतीय दर्शन के महान विद्वान ने कहा है कई चीजें अनिवरचनीय होती हैं, इन्हें मानव बुद्धि से समझा नहीं जा सकता। गीता में भगवान ने यही कहा है कि हे अर्जुन, पहले भी मेरे कई जन्म हुए और इसके बाद भी होंगे। कुछ तथ्य विश्वास के होते हैं। अविश्वास पर तो हम अपनों को भी नहीं मानते। कुछ लोग तो हमारे पूर्वजों के होने और नहीं होने या काल्पनिक होने पर भी सवाल उठाते हैं। हां, हमारे दर्शन की एक विधा यह भी कहती है की ब्रह्मा, विष्णु, महेश के या अन्य देवताओं के सांकेतिक अर्थ भी हैं। हमारे यहां तो यह भी कहा गया है कि एक ही बात को विद्वान अलग-अलग व्यक्त करते हैं। यह धरती युगों युगों से है। कितनी बार प्रलय के बाद सृष्टि की फिर रचना हुई है।
हिंदू फिलोसोफी के अनुसार, कल्प ब्रह्मांड के समय-चक्र cosmic time cycle की एक इकाई है, जिसे ब्रह्मा के एक दिन (जिसे ब्रह्मा का एक काल भी कहते हैं) के रूप में वर्णित किया गया है।
कल्प का विवरण
1. ब्रह्मा का एक दिन
ब्रह्मा के एक दिन को कल्प कहा जाता है।
एक कल्प में 14 मन्वंतर होते हैं, और प्रत्येक मन्वंतर में 71 चतुर्युग (सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, और कलियुग का चक्र) होते हैं।
ब्रह्मा का एक दिन = 4.32 अरब मानव वर्ष।
रचनाकार का नाम ब्रह्मा हो सकता है या कोई और यह धरती पुष्कर की हो सकती है या कहीं ओर। कहीं ना कहीं। कोई जीव पहली बार ही आया होगा और विषय विश्वास का है। शायद हमारे धर्म ने ईश्वर से विश्वास करना इसलिए सिखाया कि हम अपनों पर विश्वास कर सकें और फिर अन्य पर विश्वास कर सकें। यह मेरे बहुत निजी विचार हैं। तेजवानी साहब का विषयों को उठाना उन पर चर्चा करना निष्कर्ष निकालना या निकलवाना, यह स्तुत्य है।
श्री व्यास ने जिन बिंदुओं को रेखांकित किया है, उनमें महत्वपूर्ण बात यह है कि यह धरती युगों युगों से है। कितनी बार प्रलय के बाद सृष्टि की फिर रचना हुई है। ऐसे में संभव है, मौजूद सृष्टि की रचना ब्रह्माजी ने पुष्कर में की हो, जो कि पहले से मौजूद रहा हो।


