शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024
क्या कांग्रेस को पुष्कर के लिए संभावित प्रत्याशी मिल गया?
गुरुवार, 19 दिसंबर 2024
सिख समाज की पहचान थे स्वर्गीय श्री जोगेन्द्र सिंह दुआ
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शोक सभाओं का दुर्भाग्यपूर्ण आयोजन
समाज में अपनी प्रतिष्ठा दिखाने की होड़ में अब शोक सभा भी शामिल हो गई है। सभा में कितने लोग आए, कितनी कारें आईं, कितने नेता पहुंचे, कितने अफसर आए, इसकी चर्चा भी खूब होती है। ये सब परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार बन गए हैं। उच्च वर्ग को तो छोड़िए, छोटे और मध्यमवर्गीय परिवार भी इस अवांछित दिखावे की चपेट में आ गए हैं। शोक सभा का आयोजन अब आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई परिवार इस बोझ को उठाने में कठिनाई महसूस करते हैं पर देखा-देखी की होड़ में वे न चाह कर भी इसे करने के लिए मजबूर होते हैं।
इस आयोजन में खाना, चाय, कॉफी, मिनरल वाटर, जैसी चीजों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। पूरी सभा अब शोक सभा की बजाय एक भव्य आयोजन का रूप ले रही है। यह उचित नहीं है। शोक सभाओं को अत्यंत सादगीपूर्ण ही हो होना चाहिए।
बुधवार, 18 दिसंबर 2024
लोकप्रिय गायक व लेखक थे स्व. श्री मिरचूमल सोनी
स्वर्गीय श्री सोनी का जन्म नवम्बर, 1933 में मांझन्द, जिला दादू सिन्ध प्रान्त में हुआ था। उन्होंने सिन्धी फाइनल तथा शास्त्रीय संगीत में विशारद की शिक्षा अर्जित की। पेशे से स्वर्णकार होने के साथ ही उनको गीत, संगीत, नाटक, साहित्य एवं लेखन में महारत हासिल थी। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी थीं, जिनमें प्रमुख हैं मुहिन्जो मुल्क मलीर, रुह जा रोशनदान, मोतियन जो महिराण। उनको अनेक सम्मान हासिल हुए। उनको राजस्थान सिन्धी अकादमी की और से ‘रुह जा रोशनदान‘ पुस्तक लिखने पर अवार्ड दे कर सम्मानित किया गया था। उनके कई कार्यक्रम आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुए। उन्होंने कई स्टेज कार्यक्रमों का मंचन भारत के विभिन्न शहरों में एवं विदेशों में खास कर हांगकांग में स्वर्गीय श्री सेवकराम सोनी के साथ गोरधन भारती के सान्निध्य में किया। वे बडड़िया सिन्धी स्वर्णकार समाज में सलाहकार व सम्मानित सदस्य थे। भोलेश्वर मण्डल, वैशाली नगर के अध्यक्ष भी थे। वैशाली सिन्धी सेवा समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य थे। शहर की विभिन्न समितियों में सक्रिय योगदान एवं भागीदारी रखते थे।
वे बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिज्ञत स्वयंसेवक थे। भारतीय सिन्धु सभा, अजमेर के स्थापना के समय से ही सक्रिय सदस्य रहे। भारतीय सिन्धु सभा द्वारा आयोजित सिन्धी कार्यशाला में उन्होंने सिन्धी गीत संगीत का ज्ञान भावी पीढ़ी को दिया। उनका स्वर्गवास 18 दिसम्बर 2011 को हुआ।
मंगलवार, 17 दिसंबर 2024
केकडी बार अध्यक्ष मनोज आहूजा में छिपी है राजनीतिक संभावना
वे बहुत जुझारू, बहुआयामी, मुखर व जागरूक वकील हैं। राजनीति में भी उनकी गहरी दिलचस्पी है, जो किसी से छिपी नहीं है। किसी समय विधायक ब्रह्मदेव कुमावत के सारथी थे। वकालत के अतिरिक्त जन समस्याओं के निराकरण के लिए भी सतत प्रयत्नषील रहते हैं। पत्रकारिता में भी दखल रखते हैं। खुद का वीडियो चैनल चलाते हैं। जाति से सिंधी आहूजा का केकडी में भले ही सषक्त जातिगत आधार न हो, मगर जिस तरह से वे केकडी बार के अध्यक्ष चुने गए हैं, उससे साबित होता है कि उनकी क्षेत्र में खासी लोकप्रियता है। वकालत के कारण उनकी अजमेर में आवाजाही रहती है। उन्होंने यहां अपना फ्रेंड सर्किल भी बना रखा है। पिछले चुनाव में पार्शद ज्ञान सारस्वत को समर्थन देकर उन्होंने अजमेर की सरजमीं अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। इतना ही नहीं, वासुदेव देवनानी के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की। जरूर वे किसी भावी ताने बाने का बीजारोपण करने अजमेर आए थे, वरना केकडी से यहां आने का क्या मकसद हो सकता है। मूलतः कांग्रेस विचारधारा से जुडे हैं, ऐसे में कांग्रेस अजमेर उत्तर के लिए विचार कर सकती है। कदाचित दूरदृश्टि के तहत ही उन्होंने बहुत पहले अजमेर में मकान बनवाया हो। हालांकि यह बात दूर की कौडी है, मगर राजनीति संभावनाओं खेल है, जिसमें कुछ भी संभव है।
