शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

क्या कांग्रेस को पुष्कर के लिए संभावित प्रत्याशी मिल गया?

अजमेर जिला बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव में अशोक सिंह रावत को अध्यक्ष चुना जाना भले ही वकील जमात का मसला हो, मगर इसने एक राजनीतिक संभावना को जन्म दिया है। इसके लिए रावत की पृश्ठभूमि को देखना होगा। रावत ने गत विधानसभा का चुनाव आरएलपी के चुनाव चिन्ह पर पुष्कर से भाजपा उम्मीदवार सुरेश सिंह रावत के सामने लड़ा था। उन्हें 16 हजार से भी ज्यादा वोट प्राप्त हुए थे। वे पूर्व में पीसांगन पंचायत समिति के प्रधान भी रह चुके हैं। यानि राजनीति का भरपूर अनुभव है। पिछले चुनाव में भले ही उन्होंने किन्हीं समीकरणों के तहत आरएलपी का दामन थामा हो, मगर आगामी चुनाव में कांग्रेस उन पर विचार कर सकती है। उसकी एक वजह यह भी है कि रावत को कांग्रेस विचारधारा वाले वकीलों का साथ मिला है। वैसे भी पुश्कर में श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ के लगातार तीसरी बार हारने के बाद एक वैक्यूम उत्पन्न हो गया है। हालांकि कांग्रेस यहां मुस्लिम को प्राथमिकता देती रही है, मगर उसे अगर मसूदा में कोई उपयुक्त मुस्लिम उम्मीदवार मिल जाए तो वह पुश्कर में रावत पर दाव खेल सकती है। चूंकि पिछले चुनाव में उन्हें समाज के नेता डॉ. शैतान सिंह रावत और कपालेश्वर मंदिर के महंत सेवानंद गिरी का साथ मिला था, अतः प्रयोग के बतौर उन्हें ब्यावर में भी आजमाया जा सकता है। वैसे इतना पक्का माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कोई मौका नहीं छोडेंगे।


गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

सिख समाज की पहचान थे स्वर्गीय श्री जोगेन्द्र सिंह दुआ

पूर्व कांग्रेस पार्षद स्वर्गीय श्री जोगेन्द्र सिंह दुआ अजमेर में सिख समाज के जाने-माने समाजसेवक थे। असल में वे सिख समाज की पहचान थे। जब भी सर्व धर्म सम्मेलन अथवा बैठक होती थी तो उनको जरूर बुलाया जाता था। वे अत्यंत सरल व सहज स्वभाव के मालिक थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1939 को श्री मेला सिंह उर्फ मानसिंह दुआ के घर हुआ। उन्होंने दसवीं कक्षा तक अध्ययन किया और व्यवसाय के रूप में भवन निर्माण सामग्री बेचने का काम शुरू किया। वे फर्शी पट्टी विक्रेता एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व संरक्षक, श्री गुरु सिंह सभा, अजमेर के सचिव, राज्य खालसा पंथ के सदस्य,  पहाडग़ंज श्री गुरु तेग बहादुर स्कूल के अध्यक्ष, नशा मुक्त अजमेर एसोसिएशन के अध्यक्ष, दक्षिण ब्लाक  कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अजमेर जिला भ्रष्टाचार निरोधक बोर्ड के पूर्व सदस्य और जिला स्थाई लोक अदालत के पूर्व सदस्य थे।

https://thirdeye.news/choupal/4142/


शोक सभाओं का दुर्भाग्यपूर्ण आयोजन

प्रमुख समाजसेवी व भारतीय सिंधु सभा के उपाध्यक्ष श्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने एक विचारणीय पोस्ट भेजी है। आप भी पढियेः- शोक सभाएं आजकल दुःख बांटने और मृतक के परिवार को सांत्वना देने के अपने मूल उद्देश्य से भटक गईं हैं। आजकल शोक सभाओं के आयोजन के लिए विशाल मंडप लगाए जा रहे हैं। सफेद पर्दे और कालीन बिछाई जाती है या किसी बड़े बैंक्वेट हाल में भव्य सभा का आयोजन किया जाता है, जिससे यह लगता है कि कोई उत्सव हो रहा है। इसमें शोक की भावना कम और प्रदर्शन की प्रवृत्ति ज्यादा दिखाई देती है। मृतक का बड़ा फोटो सजा कर भव्यता के माहौल में स्टेज पर रखा जाता है। यहां तक कि मृतक के परिवार के सदस्य भी अच्छी तरह सज-संवर कर आते हैं। उनका आचरण और पहनावा किसी दुःख का संकेत ही नहीं देता।

समाज में अपनी प्रतिष्ठा दिखाने की होड़ में अब शोक सभा भी शामिल हो गई है। सभा में कितने लोग आए, कितनी कारें आईं, कितने नेता पहुंचे, कितने अफसर आए, इसकी चर्चा भी खूब होती है। ये सब परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार बन गए हैं। उच्च वर्ग को तो छोड़िए, छोटे और मध्यमवर्गीय परिवार भी इस अवांछित दिखावे की चपेट में आ गए हैं। शोक सभा का आयोजन अब आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई परिवार इस बोझ को उठाने में कठिनाई महसूस करते हैं पर देखा-देखी की होड़ में वे न चाह कर भी इसे करने के लिए मजबूर होते हैं।

इस आयोजन में खाना, चाय, कॉफी, मिनरल वाटर, जैसी चीजों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। पूरी सभा अब शोक सभा की बजाय एक भव्य आयोजन का रूप ले रही है। यह उचित नहीं है। शोक सभाओं को अत्यंत सादगीपूर्ण ही हो होना चाहिए।


बुधवार, 18 दिसंबर 2024

लोकप्रिय गायक व लेखक थे स्व. श्री मिरचूमल सोनी

स्व. श्री मिरचूमल सोनी अपने जमाने के विलक्षण गायक कलाकार व लेखक थे। भूतपूर्व भाजपा पार्षद स्वर्गीय श्री सेवकराम सोनी के साथ उनकी जोडी बहुत लोकप्रिय थी। वे एक दूसरे पर्याय थे। 

स्वर्गीय श्री सोनी का जन्म नवम्बर, 1933 में मांझन्द, जिला दादू सिन्ध प्रान्त में हुआ था। उन्होंने सिन्धी फाइनल तथा शास्त्रीय संगीत में विशारद की शिक्षा अर्जित की। पेशे से स्वर्णकार होने के साथ ही उनको गीत, संगीत, नाटक, साहित्य एवं लेखन में महारत हासिल थी। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी थीं, जिनमें प्रमुख हैं मुहिन्जो मुल्क मलीर, रुह जा रोशनदान, मोतियन जो महिराण। उनको अनेक सम्मान हासिल हुए। उनको राजस्थान सिन्धी अकादमी की और से ‘रुह जा रोशनदान‘ पुस्तक लिखने पर अवार्ड दे कर सम्मानित किया गया था। उनके कई कार्यक्रम आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर भी प्रसारित हुए। उन्होंने कई स्टेज कार्यक्रमों का मंचन भारत के विभिन्न शहरों में एवं विदेशों में खास कर हांगकांग में स्वर्गीय श्री सेवकराम सोनी के साथ गोरधन भारती के सान्निध्य में किया। वे बडड़िया सिन्धी स्वर्णकार समाज में सलाहकार व सम्मानित सदस्य थे। भोलेश्वर मण्डल, वैशाली नगर के अध्यक्ष भी थे। वैशाली सिन्धी सेवा समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य थे। शहर की विभिन्न समितियों में सक्रिय योगदान एवं भागीदारी रखते थे।

वे बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रतिज्ञत स्वयंसेवक थे। भारतीय सिन्धु सभा, अजमेर के स्थापना के समय से ही सक्रिय सदस्य रहे। भारतीय सिन्धु सभा द्वारा आयोजित सिन्धी कार्यशाला में उन्होंने सिन्धी गीत संगीत का ज्ञान भावी पीढ़ी को दिया। उनका स्वर्गवास 18 दिसम्बर 2011 को हुआ।

मंगलवार, 17 दिसंबर 2024

केकडी बार अध्यक्ष मनोज आहूजा में छिपी है राजनीतिक संभावना

राज्य में सरकार बदलने के साथ केकडी जिले के अस्तित्व पर संषय उत्पन्न हो गया है। पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ रघु षर्मा सहित अन्य जागरूक नेता केकडी को पिछली सरकार में हासिल जिले का दर्जा बरबरार रखने की मुहिम छेडे हुए हैं। इस मुहिम को एक और ताकत मिल गई है। केकड़ी जिला बार एसोसिएशन के हाल ही चुने गए अध्यक्ष मनोज आहूजा ने मन्तव्य जाहिर कर दिया है कि वे केकडी को हासिल जिला मुख्यालय का दर्जा कायम रखने का पूरा प्रयास करेंगे।

वे बहुत जुझारू, बहुआयामी, मुखर व जागरूक वकील हैं। राजनीति में भी उनकी गहरी दिलचस्पी है, जो किसी से छिपी नहीं है। किसी समय विधायक ब्रह्मदेव कुमावत के सारथी थे। वकालत के अतिरिक्त जन समस्याओं के निराकरण के लिए भी सतत प्रयत्नषील रहते हैं। पत्रकारिता में भी दखल रखते हैं। खुद का वीडियो चैनल चलाते हैं। जाति से सिंधी आहूजा का केकडी में भले ही सषक्त जातिगत आधार न हो, मगर जिस तरह से वे केकडी बार के अध्यक्ष चुने गए हैं, उससे साबित होता है कि उनकी क्षेत्र में खासी लोकप्रियता है। वकालत के कारण उनकी अजमेर में आवाजाही रहती है। उन्होंने यहां अपना फ्रेंड सर्किल भी बना रखा है। पिछले चुनाव में पार्शद ज्ञान सारस्वत को समर्थन देकर उन्होंने अजमेर की सरजमीं अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। इतना ही नहीं, वासुदेव देवनानी के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस की। जरूर वे किसी भावी ताने बाने का बीजारोपण करने अजमेर आए थे, वरना केकडी से यहां आने का क्या मकसद हो सकता है। मूलतः कांग्रेस विचारधारा से जुडे हैं, ऐसे में कांग्रेस अजमेर उत्तर के लिए विचार कर सकती है। कदाचित दूरदृश्टि के तहत ही उन्होंने बहुत पहले अजमेर में मकान बनवाया हो। हालांकि यह बात दूर की कौडी है, मगर राजनीति संभावनाओं खेल है, जिसमें कुछ भी संभव है।