मंगलवार, 25 फ़रवरी 2025

इसे कहते हैं लोकप्रियता

 दैनिक भास्कर के 25 फरवरी 2025 के अंक में देखा कि एक साथ एक ही शख्स के प्रति ढेर सारे श्रद्धांजलि संदेष छपे हैं। चकित रह गया। मैने अपनी समझ में आज तक ऐसा साथ इतने लोगों की ओर से श्रद्धांजलि संदेश नहीं देखे। वह भी पांचवी पुण्यतिथि पर। निश्चित ही वे बहुत लोकप्रिय हैं। वे हैं स्वर्गीय श्री परशोत्तम दास गिदवानी उर्फ पषु भाई। सुपरिचित व्यवसायी। विरले ही ऐसे होते हैं, जिन्हें इतनी शिद्दत से लोग याद किया करते हैं। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल भी उनको भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2025

125 साल पहले बना था अजमेर का गांधी भवन

अजमेर में स्थित गांधी भवन प्रसिद्ध स्मारक है। गांधी भवन 125 साल पहले ट्रैवर टाउन हॉल के नाम से बनवाया गया था! बताया जाता है कि 1895 ई. से 1900 ई. के बीच अजमेर मेरवाड़ा के चीफ कमिश्नर जी एच ट्रेवर की याद में गांधी भवन का निर्माण करवाया गया था। उस वक्त उसका नाम ट्रैवर टाउन हॉल रखा गया था। 1905 में पुरातत्वविद श्री गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने विक्टोरिया हॉल पुस्तकालय नाम से पुस्तकालय की स्थापना की। आजादी के बाद इसका नाम गांधी भवन पुस्तकालय रखा गया। प्रदेश के 88 दानदाताओं ने धन इकट्ठा करके गांधी भवन का निर्माण करवाया था। उस वक्त 5 रुपए की भी बहुत कीमत थी। गांधी भवन के लिए चंदा देने वालों की सूची में 5 रुपए का चंदा देने वालों के भी नाम हैं। 88 दानदाताओं ने कुल बीस हजार की रकम इकट्ठा करके गांधी भवन का निर्माण कराया था। सर्वाधिक 3 हजार रुपए दो महाराजाओं ने दिए, जिनमें उदयपुर के महाराणा और जोधपुर के तत्कालीन शासकों के नाम शामिल हैं। अलवर और बीकानेर के तत्कालीन शासकों ने भी 15-15 सौ रुपए का दान दिया था। साथ ही जैसलमेर के शासक ने 1 हजार और किशनगढ़ के शासक ने 5 सौ रुपए दिए थे।

अजमेर के इतिहास के बारे खासी जानकारी रखने वाले श्री नारायण सिंह के अनुसार इस भवन के लिए भूमि अजमेर के प्रसिद्ध जनाब अल्लाहरखा साहब ने दान में दी थी। नगर पालिका ने भवन और बगीचा बनवाया। इस बगीचे में महात्मा गांधी की मूर्ति स्थापित है। गांधी भवन के पीछे एक सरकारी स्कूल बना हुआ है। गांधी भवन में वाचनालय में देश में प्रकाशित विभिन्न दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और पत्रिकाएं निशुल्क पढऩे की सुविधा उपलब्ध कराई गई। गांधी भवन के बड़े हॉल में कई गणमान्य व्यक्ति व्याख्यान देने आते थे। मैंने यहां एक मर्तबा फिल्म अभिनेता महिपाल (पारसमणि, वीर भीमसेन में अभिमन्यु का रोल करने वाले) को हूबहू सामने देखा था। वर्ष 1960-70 के दशकों में गांधी भवन का बगीचा बड़ी साइज का था, जो अब छोटा कर दिया गया है। संभवत सड़क चौड़ी करने का ही उद्देश्य रहा होगा।
गांधी भवन में शाम को आठ बजे बच्चों वाली लायब्रेरी वाले कमरे की खिड़की पर बड़ा सा लाउडस्पीकर लगा कर आकाशवाणी के समाचारों का प्रसारण किया जाता था। इन समाचारों को सुनने के लिए जन साधारण की भीड़ से बगीचा भर जाता था।
गांधी भवन के बगीचे में एक बार वार्ड मेम्बरों की लंबी हड़ताल चली थी और पूरा शहर देखने आता था, जैसे कोई मेला लगा हो। अब भी यह शहर का सर्वाधिक व्यस्त रहने वाला चौराहा है।

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2025

जिंदादिल पुलिस अधिकारी श्री बलराज खोसला नहीं रहे

रिटायर्ड पुलिस उप अधीक्षक श्री बलराज सिंह खोसला पुत्र स्वर्गीय श्री दीवान सिंह खोसला का रविवार, 16 फरवरी को निधन हो गया। उनकी गिनती ईमानदार पुलिस अधिकारियों में तो होती ही थी, वे एक प्रखर बुद्धिजीवी भी थे। बहुत जिंदादिल व ऊर्जावान इंसान थे। चेहरे पर स्मित मुस्कान उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। तनिक विनोदपूर्ण थे। उनकी भाषा शैली में अव्यवस्था के प्रति व्यंग्य झलकता था। विशेष रूप से अजमेर के हालात को लेकर वे बहुत चिंतित रहते थे। वे काफी समय तक सीआईडी में भी रहे, इस कारण उनके जेहन में गोपनीय जानकारियां थीं। कानून व्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के बारे में गहरी जानकारी थी। अजमेर में सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रखने में उनकी महति भूमिका थी। उन्हें यह भलीभांति जानकारी थी कि अजमेर की समस्याओं की जड कहां है? सीआईडी में रहने की वजह से वे बहुत रिजर्व नेचर के थे, लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों चर्चा करते थे और अपना खास नजरिया रखते थे। पिछले कई वर्षों से मेरे संपर्क में थे। अजमेर सहित राज्य व देश के ज्वलंत विषयों पर उनसे कई बार लंबी चर्चा होती रही। मैने कई बार आग्रह किया अपनी जानकारियां व अनुभव लाइव शेयर करें, मगर वे संकोच कर जाते थे। अलबत्ता, उन्होंने मुझे कई आर्टिकल लिखने के लिए विषय साझा किए। अफसोस, उनके जैसा अनुभवी अधिकारी बहुत सी उपयोगी जानकारियां अपने जेहन में रख कर विदा हो गया। उनका देहावसान अजमेर के लिए अपूरणीय क्षति है। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

-तेजवाणी गिरधर

7742067000


रविवार, 16 फ़रवरी 2025

सिंधी पत्रकारिता के स्तम्भ श्री हरीश वरियानी नहीं रहे

देश में सिंधी पत्रकारिता जगत के जाने-माने हस्ताक्षर श्री हरीश वरियानी का रविवार, 16 फरवरी 2025 को निधन हो गया। सिंधी भाषा, साहित्य व संस्कृति के संरक्षण व संवर्द्धन में उनका अमूल्य योगदान रहा है। वे सिंधी भाषा के दैनिक हिंदू के संपादक थे। सिंधी भाषा का दैनिक अखबार प्रकाशित करना बेहद कठिन था, मगर उनके दिल में सिंधी भाषा की सेवा का अदम्य जज्बा था। उन्होंने अनेक सिंधी लेखकों को प्रोत्साहित किया। पुरुषार्थ, कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने आपको को पत्रकारिता के क्षेत्र में अग्रणी स्तम्भ के रूप में स्थापित किया। वे बहुत जिंदादिल व हंसमुख इंसान थे। अभिवादन में ओम नमः शिवाय बोलना उनकी पहचान थी। समाज को दिए अविस्मरणीय योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। वे सिंधी समाज के प्रेरणा स्तंभ थे, जिनसे पूरे समाज को ऊर्जा मिलती रही। वे सिंधु जागृति मंच के समन्वयक थे। सिंधी समाज महासमिति, अजमेर ने उनको सिंध रत्न अलंकरण से सम्मानित किया।

उनका जन्म 30 मई 1949 को सिन्ध के नसरपुर में श्री धर्मदास वर्यानी के घर हुआ। उन्होंने श्रमजीवी कॉलेज से 1968 में बीए किया। 29 मई 1975 को विवाह हुआ। सन् 1975 से 1983 तक कचहरी रोड स्थित बाइडिंग वर्क और अजमेर आर्ट प्रिंटर्स में मुद्रण का कार्य संभाला। कपड़े का व्यवसाय भी किया। 1975 में आपके परिवार ने सिंधी दैनिक अखबार हिन्दू शुरू किया। इसके अहमदाबाद व मुम्बई में भी संस्करण हैं। 1981 से 2006 तक आप द्वारा, उसके बाद आपके परिवार द्वारा संत कंवरराम साप्ताहिक का प्रकाशन किया जा रहा है। सितम्बर 2009 से दैनिक हिन्दू का जयपुर संस्करण भी प्रारंभ किया। जयपुर से 2012 में कंचन केसरी हिन्दी दैनिक आरम्भ किया है। वे अजमेर जिला पत्रकार संघ एवं अजयमेरू जिला पत्रकार संघ, अजमेर सिंधी सेंट्रल महासमिति, वैशाली सिंधी समाज व वैशाली नगर स्थित हेमू कालाणी पार्क समिति, तोपदड़ा स्थित झूलेलाल धर्मशाला ट्रस्ट, सिंधु दीप संस्था में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। तीन बार राजस्थान सिंधी अकादमी के सदस्य रहे। आकाशवाणी, जयपुर पर उनकी अनेक वार्ताएं प्रसारित हुईं। उनके सुपुत्र श्री कमल वरियानी उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर सिंधी भाषा की सेवा करते रहे हैं। जाहिर है आगे भी वे उस मशाल को प्रज्ज्वलित रखेंगे।

अजमेर में चौरसियावास रोड स्थित श्रीनिवास कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय श्री वरियानी पिछले कुछ समय से बीमार थे और जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के आईसीयू में अंतिम सांस ली। उनके निधन से सिंधी समाज व पत्रकार जगत में दुख की लहर छा गई। उनकी अंतिम यात्रा सोमवार को उनके निवास से आंतेड स्थित श्मशान के लिए सुबह 11 बजे रवाना होगी। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनके निधन पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता है।


शनिवार, 15 फ़रवरी 2025

प्रथम राजा अजयपाल का स्मारक क्यों नहीं बनाया?

अजमेर के सुपरिचित बुद्धिजीवी श्री नारायण सिंह ने अजमेर के प्रथम राजा अजयपाल का स्मारक बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने सवाल किया है कि अजमेर के नेता राजा अजयपाल का स्मारक बनाना क्यों भूल गये? क्या अजमेर के नेताओं को अजमेर के प्रथम राजा अजयपाल से अनुराग नहीं है? ज्ञातव्य है कि पिछले कुछ वर्शों में अमुक अमुक जाति, धर्म के मतदाताओं के साधने के लिए महाराजा दाहरसेन स्मारक, वीरांगना झलकारी बाई स्मारक, पृथ्वीराज चौहान स्मारक, महाराणा प्रताप स्मारक, विवेकानंद स्मारक और कई सर्किल तो बनाए गए, मगर किसी भी राजनेता को अजमेर के प्रथम राजा अजयपाल का स्मारक बनाने का ख्याल नहीं आया। पुष्कर घाटी में महाराणा प्रताप का स्मारक बनाया गया है, जब कि वहां पर अजमेर के राजा अजयपाल का स्मारक बनाना चाहिए था। पर्यटन की दृष्टि से पुष्कर घाटी में सांझी छत बनाई गई, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पाया, उसके बजाय वहां अजयपाल की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। माना कि जो भी स्मारक बनाए गए हैं, उनका महत्व है, मगर राजा अजयपाल का भी महत्व कम नहीं है। माना कि अजमेर के निकट ही अजयपाल का मंदिर है, वह पर्यटन स्थल है, मगर वहां आम आदमी का पैर नहीं पडता। इसलिए अजयपाल को महत्व देने के लिए अजमेर में ही उनका स्मारक बनाया जाना चाहिए।

https://youtu.be/JENwdEG2Zm4