शुक्रवार, 22 मई 2026

प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

एमडीएस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर व्याख्यान, पुस्तक विमोचन एवं विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन

अजमेर, 22 मई। महार्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन को समर्पित विविध कार्यक्रमों, व्याख्यानों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन पर्यावरण विज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) तथा राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की मूल आधारशिला है तथा इसके संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन एवं प्राकृतिक आवासों के विनाश के कारण जैव विविधता गंभीर संकट का सामना कर रही है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने तथा पर्यावरणीय चेतना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का आह्वान किया। प्रो. अग्रवाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूज्य माना गया है। ऋग्वेद से लेकर कालिदास के साहित्य तक प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा देने तथा साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण को जोड़ते हुए “ईको-क्रिटिसिज्म” जैसे विषयों पर शोध कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. सुजीत नरवाडे, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) ने “अजमेर क्षेत्र में लेसर फ्लोरिकन पक्षी का संरक्षण” विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोकलिया एवं आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ एवं संकटग्रस्त पक्षी लेसर फ्लोरिकन के संरक्षण प्रयासों की जानकारी देते हुए उसके आवास, व्यवहार एवं संरक्षण चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संरक्षण कार्यों पर आधारित एक रोचक वीडियो भी प्रदर्शित किया, जिसे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अत्यंत रुचि के साथ देखा।

पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। वहीं वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद पारीक ने स्थानीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों एवं पारंपरिक जैव संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर की जैव विविधता पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें एक पुस्तक परिसर की वृक्ष विविधता पर आधारित थी, जबकि दूसरी पुस्तक विश्वविद्यालय परिसर की समृद्ध जैव विविधता के सचित्र सूचीकरण से संबंधित थी।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डिजिटल इन्फोग्राफिक प्रतियोगिता में रिया खटीक ने प्रथम, तन्वी सिंह ने द्वितीय तथा अमीषा करवासरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में वंशिका खीची प्रथम, कल्याण प्रसाद खंडेलवाल द्वितीय तथा प्राची शर्मा तृतीय स्थान पर रहीं। बर्ड ट्रिविया प्रतियोगिता में रूबी ने प्रथम, आयुषी मीणा ने द्वितीय तथा विकास जांगिड़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं फ्लोरा ट्रिविया प्रतियोगिता में शालू चौधरी प्रथम, हिमांशु बकोलिया द्वितीय एवं सानिया खान तृतीय स्थान पर रहीं। कार्यक्रम में प्रो. प्रवीण माथुर, प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. आशीष भटनागर, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. राजू शर्मा, डॉ. सपना जैन, डॉ. श्रुति ओझा, डॉ. रेनू जांगिड़ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। अंत में सभी विजेताओं को बधाई देते हुए जैव विविधता संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों का संकल्प लिया गया।

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