शुक्रवार, 22 मई 2026

बूंदी में 24 मई को होगा “बूंदी साहित्य-संस्कृति संवाद 2026”

 साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा मंथन

राजस्थान सरकार के संस्कृति विभाग ने भी साहित्यिक आंदोलन में सहभागिता के दिए निर्देश

बूंदी, 21 मई।
वर्ष 2010 से निरंतर जारी 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन की श्रृंखला में 24 मई 2026, रविवार को बूंदी में “बूंदी साहित्य-संस्कृति संवाद 2026” का आयोजन किया जाएगा। राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, लुप्त होती लोक एवं पारंपरिक कलाओं के संरक्षण तथा युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विमर्श होगा।

कार्यक्रम में साहित्यिक परिचर्चा, परिसंवाद और व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रदेश के साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार, शिक्षाविद, युवा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े बुद्धिजीवी भाग लेंगे। आयोजन बूंदी स्थित “द ब्लू डोर”, प्लॉट नंबर 1, उज्जीवन बैंक के ऊपर आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे प्रारंभ होगा।

वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने बताया कि पिछले कई वर्षों से राजस्थान के विभिन्न जिलों एवं पंचायत स्तर तक साहित्यिक और सांस्कृतिक संवादों के माध्यम से समाज को भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और जनचेतना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

इस आयोजन की विशेष बात यह भी है कि राजस्थान सरकार के कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश की विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अकादमियों को इस साहित्यिक आंदोलन में सहभागिता सुनिश्चित करने के संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। शासन उप सचिव बृजमोहन नोगिया द्वारा जारी पत्र में संबंधित अकादमियों को आवश्यक समन्वय के निर्देश दिए गए हैं।

आयोजन से जुड़े अशोक लोढ़ा और शाश्वत सक्सेना ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल साहित्यिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, संवाद और सकारात्मक वैचारिक वातावरण तैयार करना भी है।

आयोजकों ने साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों से कार्यक्रम में सहभागिता की अपील की है।

अनिल सक्सेना 'ललकार'
संस्थापक
21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन
9799535670

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