बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

पुष्कर के लिए मिल गया कांग्रेस प्रत्याशी?

दोस्तो, नमस्कार। पीसांगन पंचायत समिति के पूर्व प्रधान अषोक सिंह रावत के हाल ही कांग्रेस में षामिल होने से यह कौतुहल उत्पन्न हो गया है कि क्या कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पुश्कर का प्रत्याषी मिल गया है। ज्ञातव्य है कि अशोक सिंह रावत वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के टिकट पर पुष्कर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे थे। उन्हें 16,052 मत मिले थे। इस चुनाव में भाजपा के सुरेश सिंह रावत विजयी रहे थे। रावत का राजनीतिक सफर इससे पहले भाजपा से भी जुड़ा रहा है। वे पीसांगन पंचायत समिति के प्रधान रह चुके हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने अजमेर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद का चुनाव भी जीता था। इस तरह उनकी पहचान अधिवक्ता, पूर्व पंचायत समिति प्रधान और विधानसभा चुनाव लड़ चुके राजनीतिक चेहरे के रूप में रही है। अब कांग्रेस में उनकी नई भूमिका को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या कांग्रेस उन्हें पुष्कर क्षेत्र में संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपेगी? क्या वे आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर कांग्रेस के साथ आए हैं? या उनका उद्देश्य जिले में पार्टी संगठन को मजबूत करने में योगदान देना है? इन सवालों का उत्तर उनके आधिकारिक बयान और पार्टी नेतृत्व के अगले कदमों से ही स्पष्ट हो सकेगा। पुश्कर के मौजूदा राजनीतिक हालात के अनुसार वहां हाल तक पूर्व ष्ज्ञिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर इंसाफ ही एक मात्र दावेदार हैं। चूंकि वे तीन बार पराजित हो चुकी हैं, इस कारण ऐसा माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में उनको टिकट मिलना संदिग्ध है। अन्य दावेदारों में पूर्व विधायक डॉ श्रीगोपाल बाहेती व आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह राठौड की गिनती होती है। बाहेती एक बार वहां के विधायक रह चुके हैं और दूसरी बार निर्दलीय चुनाव लड चुके हैं और अब अजमेर उत्तर में दिलचस्पी ले रहे हैं। राठौड की रूचि भी पुश्कर की बजाय अजमेर उत्तर में अधिक दिखाई देती है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि रावत कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार होंगे। कदाचित इसी षर्त के आधार पर ही कांग्रेस में आए हों। समझा जाता है कि कांग्रेस अब पुश्कर की बजाय मसूदा में मुस्लिम प्रत्याषी उतारेगी। संभव है श्रीमती इंसाफ को वहां चुनाव लडने को कहे, मगर वे इसके लिए राजी होंगी, इसमें संदेह है। वैसे बतौर मुस्लिम वर्तमान में वाजिद खान चीता प्रबल दावेदार हैं, जो कि एक बार बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड चुके हैं और अब कांग्रेस में हैं। पूर्व विधायक हाजी कयूम खान भी उम्मीद पाले हुए हैं। हालांकि सचिन पायलट के खासमखास पूर्व विधायक राकेष्ज्ञ पारीक भी मैदान में डटे हैं, लेकिन अगर किसी मुस्लिम को टिकट देने का फार्मूला बना तो उन्हें मायूस होना पड सकता है।


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