शनिवार, 5 जुलाई 2025

रामसेतु को लेकर सोशल मीडिया को राम राम

दोस्तो, नमस्कार। सोषल मीडिया में बहुत कमियां हैं। खासकर फर्जी व फेक सूचनाओं पर आपत्ति की जाती है। मर्यादा की कोई सीमा नहीं है। वह आरोप वाजिब है। मगर यह कितना प्रभावषाली है, इसका सबूत हाल ही राम सेतु की एक भुजा के बरसात में क्षतिग्रस्त होने पर मिला। जैसे ही यह जानकारी मिली कि एक भुजा की सडक पर गड्ढा हो गया है, जमीन थोडी धंस गई है, सारे न्यूज चैनल के संवाददाता व यूट्यूबर्स सक्रिय हो गए। मौके पर पहुंच कर बहुत बारीकी से पडताल कर जनता को मसले से रूबरू कराया। सोषल मीडिया के सारे प्लेटफार्म्स पर यह खबर वायरल होने लगी। आम जन की प्रतिक्रिया भी खुल कर सामने आई। जनमत भी त्वरित रूप से हिलोरें लेने लगा। राजनीति भी गरमाने लगी। हल्ला मचने पर जिला प्रषासन भी हरकत में आया। उसने त्वरित कार्यवाही करते हुए यातायात रोक कर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करवाई। ऐसा नहीं कि जिन दिनों सोषल मीडिया नहीं था, तब कार्यवाही नहीं होती थी। होती थी, मगर इतनी त्वरित नहीं। अव्वल तो जनता को दूसरे दिन अखबार पढ कर पता लगता था। दूसरा, जनमत का पता ही नहीं लगता था। प्रषासन पर इतना दबाव नहीं पडता था, जितना आज रामसेतु को लेकर हुआ। जनता की समस्याओं को लेकर सोषल मीडिया की जागरूकता वाकई सराहनीय है। साधुवाद। राम राम।

https://youtu.be/E-eTXDBfLb4

गुरुवार, 3 जुलाई 2025

यानि अंग्रेज हमसे ज्यादा ईमानदार थे

हाल ही राम सेतु की एक भुजा पर सडक पर तेज बारिश के कारण गड्ढा हो गया तो सोशल मीडिया पर कडी प्रतिक्रिया सामने आई। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आरंभ हो गए। कांग्रेसी भाजपा को तो भाजपाई कांग्रेस को दोष दे रहे हैं। कोई राजनीतिक व्यवस्था को कोस रहा है तो कोई प्रशासनिक स्तर हुई लापरवाही पर तंज कस रहा है। बेशक घोटाले में राजनीतिक हिस्सेदारी होती है, मगर उसके रास्ते अफसरशाही ही निकालती है। और जैसे ही राजनीतिक खींचतान होती है, प्रशासनिक तंत्र सुकून में आ जाता है। कि आपस में झगडने से हम पर से ध्यान हट जाएगा। बस यहीं चूक हो जाती है। एक प्रतिक्रिया यह भी आई कि हमने जो ब्रिज बनाया, वह मात्र दो साल में क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि अंग्रेजों के जमाने में एक सौ साल से भी ज्यादा पहले बने मार्टिंडल ब्रिज का कुछ नहीं बिगडा। इस प्रतिक्रिया के गहरे अर्थ हैं। इस टिप्पणी से यह सवाल उठता है कि क्या अंग्रेज हमारे से अधिक ईमानदार थे? बेशक ब्रितानी हुकूमत ने स्वाधीनता आंदोलन को कुचलने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों को अनेक यातनाएं दीं, जो पीडादायक है, मगर ब्रिटिश सिस्टम में घोटाले नहीं होते थे। उस जमाने के अनेक निर्माण आज भी वजूद में हैं। सच तो यह है कि दरगाह और पुष्कर को छोड़ कर अगर अजमेर कुछ है तो उसमें अंग्रेज अफसरों का योगदान है। सीपीडब्ल्यूडी, सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एज्युकेशन, कलेक्ट्रेट बिल्डिंग, सेन्ट्रल जेल, पुलिस लाइन, टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, लोको-केरिज कारखाने, डिविजन रेलवे कार्यालय बिल्डिंग, मार्टिन्डल ब्रिज, सर्किट हाउस, अजमेर रेलवे स्टेशन, क्लॉक टावर, गवर्नमेन्ट हाई स्कूल, सोफिया कॉलेज व स्कूल, मेयो कॉलेज बिल्डिंग, लोको ग्राउण्ड, केरिज ग्राउण्ड, मिशन गर्ल्स स्कूल, अजमेर मिलिट्री स्कूल, नसीराबाद छावनी, सिविल लाइंस, तारघर, आर.एम.एस., गांधी भवन, नगर निगम भवन, जी.पी.ओ., विक्टोरिया हॉस्पिटल, मदार सेनीटोरियम, फॉयसागर, भावंता से अजमेर की वाटर सप्लाई, पावर हाउस की स्थापना, रेलवे हॉस्पिटल, दोनों रेलवे बिसिट आदि का निर्माण ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों के विजन का ही परिणाम था, जिससे अजमेर के विकास की बुनियाद पड़ी। वे निर्माण आज भी मजबूती के साथ खडे हैं। आज भी आप पुरानी पीढी के लोगों को यह कहते हुए सुनते होंगे कि मौजूदा राज से तो अंग्रेजों का राज अच्छा था। कुल जमा जैसे ही हमें आजादी मिली, स्वतंत्रता मिली, हमें बेईमानी करने की, घोटाले करने की छूट मिल गई। नतीजा सामने है।

क्या राजनीति इतनी गंदी हो गई है?

राजनीति का चेहरा कितना विद्रूप हो गया है कि सच बोलने वाला सियासत में हिस्सा लेना ही नहीं चाहता। चेहरा क्या, संपूर्ण राजनीति ही ऐसा दलदल हो गई है कि कोई सज्जन व्यक्ति उसमें फंसना नहीं चाहता। राजनीति में सच्चाई कम, आडंबर ज्यादा है। यानि राजनीति झूठ की बुनियाद पर टिकी है। इसका इशारा किया है केकडी बार ऐसोसिएशन के अध्यक्ष लोकप्रिय एडवोकेट मनोज आहुजा ने। उन्होंने अपनी फेसबुक वाल पर इसका तफसील से खुलासा किया है। उनकी पोस्ट हूबहू प्रस्तुत हैः-

नमस्कार मित्रों, कल कहीं सांत्वना देने पहुंचने पर उपस्थित मित्रों व अन्य ग्रामीणों ने कहा कि मैं भिनाय का विधायक बनने के लिए प्रयासरत हूं। इस पर मैंने उन्हें कहा कि मेरा राजनीति में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, न ही मैं अपने आपको इसके लिए फिट मानता हूं, लेकिन वो माने नहीं। 

दोस्तों, मेरा नेचर भगवान ने ऐसा बनाया है कि मैं गलत बात और गलत इंसान को स्वीकार ही नहीं कर पाता हूं, इसलिये मैं अपने आपको राजनीतिक फील्ड के योग्य मानता ही नहीं हूं। वहां आप अगर गलत को गलत कह दो तो बवाल हो जाए। वहां जीतने का पैरामीटर ही गलत और गलत लोग होते हैं। अभी हाल ही में मुझे मेरे साथियों ने बार अध्यक्ष का चुनाव लड़वाया। मैंने उन्हें वेरी फर्स्ट डे ही बोल दिया था कि 13 लोगों के पास मैं नहीं जाऊंगा, नहीं गया लास्ट तक... क्योंकि मुझे राजनीति करना आता ही नहीं है। चेहरे पर झूठी मुस्कान और नफरत के समय मुस्कान लाना न तो आया और न ही लाना चाहता हूं। इसलिये मित्रों मैं आप सभी को बता दूं कि मैं न तो किसी राजनीतिक दल का सदस्य हूं, न ही भविष्य में मैं विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा हूं। मेरा नेचर है लोगों के सुःख दुःख में शामिल होने का, वो सदैव रहेगा। मुझे वकालात और पत्रकारिता में मजा आता है मैं वो जीवन पर्यन्त करूंगा ही और रिलेशन निभाना,सुःख दुःख में शामिल होना मेरा नेचर है, जिसे मैं इसलिये चैंज नहीं कर सकता कि चार लोग ये और वो सोच रहे हैं।

श्री आहूजा अपनी जगह ठीक प्रतीत होते हैं, मगर सवाल यह उठता है कि सच बोलने वाले या सज्जन राजनीति में नहीं आएंगे तो राजनीति का क्या हाल होगा? तब तो राजनीति में शुचिता की उम्मीद करना बेकार है। बेशक श्री आहूजा अपनी ओर से राजनीति में नहीं आना चाहते, मगर कल यह भी तो हो सकता है कि बार चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी कुछ लोग उन्हें चुनाव लडवा दें। रहा सवाल लोगों की धारणा का तो, वह भी ठीक है, क्योंकि जो भी सोसायटी में सक्रिय होता है तो यही माना जाता है कि चुनाव की तैयारी कर रहा है। वे न केवल सफलता पूर्वक वकालत कर रहे हैं और जरूरतमंद की मदद को तत्पर रहते हैं, अपितु सामाजिक सरोकार के लिए भी सतत सक्रिय रहते हैं। वे जिले के चंद जागरूक व ऊर्जा न लोगों में गिने जाते हैं। ऐसे में अगर कोई ऐसा सोचता है कि वे चुनाव लड सकते हैं, तो वह अपनी जगह ठीक है।

बहरहाल, जब श्री आहूजा से सवाल किया गया कि आपने भिनाय का जिक्र क्यों किया है, जबकि वह तो मसूदा विधानसभा क्षेत्र में है, तो उन्होंने बताया कि ऐसा अनुमान है कि परिसीमन के बाद भिनाय फिर से विधानसभा क्षेत्र हो जाएगा। ऐसा सोच कर ही मित्र अनुमान लगा रहे हैं कि वे वहां से चुनाव लडने का मानस बना रहे हैं।


मंगलवार, 1 जुलाई 2025

अजमेर की बेटी रुमानी कपूर ने फहराया अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर परचम

अजमेर की बेटी और वर्तमान में अमेरिका के सिएटल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत रूमानी कपूर ने पिछले दिनों दुबई (यूएई) में हुई मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड यूएसए नॉर्थ-2025 प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्हें मिसेज ब्यूटीफुल हेयर 2025 का प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता 15 से 20 जून के बीच आयोजित हुई। रुमानी ने टैलेंट राउंड में राजस्थानी लोकनृत्य कालबेलिया को बेहद अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होंने लोहे की कीलों पर नृत्य कर महिलाओं की शक्ति, संतुलन और सहनशीलता का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। रूमानी ने अपनी प्रतिभा, सांस्कृतिक विरासत और आकर्षक व्यक्तित्व से सभी का दिल जीत लिया। उनकी रैंप वॉक को बॉलीवुड के प्रसिद्ध ट्रेनर्स मिसेज कविता खरायत और मिस्टर सनी कांबले ने तराशा, जबकि रनवे को मशहूर कोरियोग्राफर लुबना आदम ने निर्देशित किया। उनके सभी आउटफिट्स डिजाइनर अंजलि सहानी द्वारा विशेष रूप से डिजाइन किए गए थे।

रुमानी एक अनुभवी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जिन्होंने अमेरिका में हेल्थकेयर और डिजिटल तकनीक क्षेत्रों में नेतृत्व करते हुए कई सफल प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। इसके साथ ही वह दूसरा दषक एलजीओ के साथ ग्रामीण भारत में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती हैं और अमेरिका में को-म्यूजिक प्रो व एसएसएआईएस के साथ समावेशी कला व स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करती हैं। वे कई अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कार्यक्रमों की मास्टर ऑफ सेरेमनी रह चुकी हैं और एनजीओ के लिए सोशल मीडिया व इवेंट मैनेजमेंट भी संभालती हैं। रुमानी कपूर नारी सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं, जो अपने पारंपरिक मूल्यों को विश्व मंच पर आत्मविश्वास और सौंदर्य के साथ प्रस्तुत कर रही हैं।

उनका परिवार साधारण एवं शिक्षा से जुड़ा इंसानियत के प्रति सजग परिवार है। रुमानी केतकी सिन्हा और प्रिंस सलीम की बिटिया हैं। जिन्होंने सेंट मैरी कान्वेंट स्कूल अजमेर में शिक्षा प्राप्त की। स्कूल के दिनों से वह अकादमिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में आगे रही है। उन्होंने ऐमेटी युनिवर्सिटी जयपुर से टोप रेंक बीटेक किया। वहीं से अजीम प्रेमजी की विप्रो कम्पनी में जाब हासिल की। उसके बाद जयपुर निवासी राहुल कपूर से अजमेर में शादी हुई। 2019में सीमेन्स कम्पनी जोइन कर सीएटल शहर (अमेरिका) में सीनियर सोफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजिनियर के रूप में पति पत्नी कार्यरत हैं। वे अपनी सफलता के लिए मिसेज कविता खरायत, श्री सनी काम्बले, लुबना आदम और अंजलि साहनी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हैं।


सोमवार, 30 जून 2025

धनेश्वर मन्दिर सेवा ट्रस्ट के माध्यम से सेवाकार्य

अजमेर। जनता कॉलोनी, वैशाली नगर स्थित धनेश्वर मन्दिर में सेवा ट्रस्ट का गठन कर सेवा कार्य आरंभ किए जाएंगे। यह जानकारी मंदिर के सेवक दौलत राम खेमानी ने देते हुए बताया कि मंदिर की संस्थापिका संत सुश्री मोहिनी देवी खेमानी जी का जन्म 21 मई 1946 को सिन्ध में मटियारी गांव जिला हैदराबाद में हुआ था। आपके पिता का विवाह श्रीमती खेमी देवी से हुआ था। आपके दो भाई थे। आप सिन्ध से सीधा अजमेर आयीं, मगर पिता का व्यापार ठीक से नहीं चलने के कारण उनके साथ कोटा और फिर आगरा गयीं। 1950 में परिवार सहित वापस अजमेर आकर निवास करने लगीं। आपने केवल कक्षा चार तक शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही आप प्रभु भक्ति में लीन रहीं। 1954 में आपने राघवेंद्र सरकार के अनुयायी दादी धन्नी फकीर, एटा (यू.पी.) का सत्संग सुना और उनके साथ लगातार सम्पर्क में रहीं। 1962 में आप एटा जाकर गुरू से नाम दान लेकर आयीं और उनके आदेश से सत्संग करने लगीं। गुरू के साथ भारत भ्रमण भी किया। 1979 में आपने जनता कॉलोनी, वैशाली में मन्दिर बना कर सत्संग आरम्भ किया। गुरू के सिंधी तिथि दशम अंग्रेजी दिनांक 20 अक्टूबर 2004 को एटा में देह त्याग के बाद आपने भारत भ्रमण लगभग बन्द कर दिया है। अब आप वर्ष में दो बार एटा जाकर दर्शन लाभ लेती थीं तथा शेष समय अजमेर रहती थीं। और यहीं प्रभु अनुराग में अजमेर दरबार मे ही सर्व संगत के साथ हरि भजन कर जीवन व्यतीत किया। 


मन्दिर से आने वाले दान एवं शिष्टाचार भेंट में आये धन से गरीब बच्चों की शिक्षा, वृद्धा सेवा में अन्न-वस्त्र में ही खर्च कर दीदी नाम से पहचान से जानी जाती रही। उनके देवलोक गमन सिंधी तिथि 23 दिसंबर 2018 के बाद अब मन्दिर की सेवा भाभी हर्षिता एवं मन्दिर सेवादारियों द्वारा  अन्न- वस्त्र सेवा, सामाजिक सेवा एवं बच्चों की शिक्षा  सेवा का कार्य किया जाता है। अब सेविका हर्षिता जी एवं अन्य सेवादारियों द्वारा धनेश्वर मन्दिर सेवा ट्रस्ट का गठन कर मन्दिर के सेवा कार्य गर्मी में जगह वाटर कूलर, पक्षियों के अन्न-जल पात्र बांटना, गौ मां के चारा-पानी की शुरुआत करने का विचार बन रहा है।