बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ गए डॉ. रमेश क्षेत्रपाल

अजमेर के प्रतिष्ठित एवं वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. रमेश क्षेत्रपाल का 26 अक्टूबर 2026 को 88 वर्ष की आयु में देहावसान हो गया। उनके निधन से अजमेर ने चिकित्सा जगत की एक ऐसी शख्सियत खो दी, जिसने अपनी विशेषज्ञता, सेवाभाव और मिलनसारिता के बल पर लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। 27 अक्टूबर को पुष्कर रोड स्थित मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

डॉ. क्षेत्रपाल का जीवन चिकित्सा सेवा, परिश्रम और निरंतर प्रगति की एक प्रेरक मिसाल रहा। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उनका योगदान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक ऐसी परंपरा की नींव रखी, जिसे आज उनके परिवार की अगली पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। डॉ. रमेश क्षेत्रपाल का जन्म 13 अगस्त 1939 को पाकिस्तान के सरगोधा में हुआ था। चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने एम.बी.बी.एस. और एम.एस. की डिग्रियां हासिल कीं। अपनी प्रतिभा और चिकित्सा के प्रति समर्पण के बूते उन्होंने कम उम्र में ही चिकित्सा जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

वर्ष 1968 में उनकी नियुक्ति जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अजमेर में ट्यूटर के पद पर हुई। इसके बाद वर्ष 1974 में वे प्रवक्ता बने। सरकारी चिकित्सा सेवा में कार्य करते हुए उन्होंने अनुभव और विशेषज्ञता हासिल की, लेकिन वर्ष 1975 में उन्होंने राज्य सेवा से इस्तीफा देकर निजी चिकित्सा क्षेत्र में कदम रखने का निर्णय किया।

कचहरी रोड पर अपने निजी चिकित्सालय की स्थापना के साथ उनकी स्वतंत्र चिकित्सकीय यात्रा शुरू हुई। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। अपनी मेहनत, दक्षता और मरीजों के प्रति आत्मीय व्यवहार के बल पर वे लगातार आगे बढ़ते गए और अजमेर के अग्रणी नेत्र विशेषज्ञों में शुमार हो गए।

डॉ. क्षेत्रपाल की चिकित्सकीय उपलब्धियों का उल्लेख करते समय उनके द्वारा किए गए दो लाख से अधिक ऑपरेशनों का आंकड़ा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह उनके लंबे अनुभव और नेत्र चिकित्सा के प्रति समर्पण को रेखांकित करता है।

उनकी सेवाएं केवल निजी चिकित्सालय तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने अनेक निःशुल्क चिकित्सा शिविरों में भी अपनी सेवाएं दीं। ऐसे शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

एक चिकित्सक की सफलता केवल उसकी डिग्रियों या व्यावसायिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी आंकी जाती है कि उसने कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। इस कसौटी पर डॉ. क्षेत्रपाल का लंबा चिकित्सकीय सफर उनकी विशिष्ट पहचान बनकर सामने आता है।

समय के साथ डॉ. क्षेत्रपाल ने अपने चिकित्सा संस्थान के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए। लगभग ग्यारह वर्ष पहले अजमेर के पंचशील क्षेत्र में बहुउद्देशीय अस्पताल की स्थापना इसी सोच का परिणाम थी। निजी चिकित्सा क्षेत्र में इस अस्पताल ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

अस्पताल में कैंसर यूनिट की शुरुआत भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इससे चिकित्सा सेवाओं के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में प्रयास हुआ।

उनके पुत्र अरुण क्षेत्रपाल अब अस्पताल की देखरेख कर रहे हैं। वहीं, उनके पौत्र डॉ. आशुतोष क्षेत्रपाल भी जाने-माने नेत्र चिकित्सक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इस तरह क्षेत्रपाल परिवार की तीन पीढ़ियों का चिकित्सा जगत से जुड़ाव एक ऐसी विरासत का परिचायक है, जिसमें अनुभव, विशेषज्ञता और सेवा की भावना का समन्वय दिखाई देता है।

डॉ. रमेश क्षेत्रपाल की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका मिलनसार स्वभाव था। चिकित्सा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा हासिल करने के बावजूद लोगों से सहजता और आत्मीयता के साथ मिलना उनके व्यक्तित्व की विशेषता रही।

उनके संपर्क में आने वाले लोगों के लिए वे केवल एक कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि एक आत्मीय और सहज व्यक्तित्व के धनी इंसान भी थे। यही वजह रही कि उनकी पहचान मरीजों और उनके परिजनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अजमेर के सामाजिक जीवन में भी उनका विशिष्ट स्थान बना।

डॉ. रमेश क्षेत्रपाल का निधन एक ऐसे दौर का अवसान है, जिसमें चिकित्सा सेवा और व्यक्तिगत आत्मीयता एक-दूसरे के पूरक हुआ करते थे। उन्होंने अपने कार्य और समर्पण से जो पहचान बनाई, वह उनके परिवार की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

आज जब चिकित्सा जगत में आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक सुविधाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है, तब डॉ. क्षेत्रपाल जैसे चिकित्सकों का जीवन यह याद दिलाता है कि चिकित्सा की असली सार्थकता मरीज के प्रति संवेदना, सेवा और भरोसे में भी निहित है।

डॉ. रमेश क्षेत्रपाल भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उनका योगदान, उनके द्वारा स्थापित संस्थान और परिवार की आगे बढ़ती चिकित्सकीय परंपरा उनकी स्मृतियों को लंबे समय तक जीवित रखेगी। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।


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