सोमवार, 30 सितंबर 2024
अजमेर रत्न स्वर्गीय श्री मुकुट बिहारी लाल भार्गव
रविवार, 29 सितंबर 2024
काश, तब किसी जनप्रतिनिधि को स्मार्ट सिटी योजना का जिम्मा सौंपा जाता
असल में अजमेर के लोग यह देखने के आदी हो चुके हैं कि यहां लाख दावों और प्रयासों के बाद भी विभिन्न विभागों में तालमेल नहीं हो पाता। निगम या पीडब्ल्यूडी सड़क बनाती है और उसके तुरंत बाद अजमेर विद्युत वितरण निगम या भारत दूरसंचार निगम उसे केबल डालने के लिए खोद डालता है। यह मुद्दा न जाने कितनी बार संभागीय आयुक्त व जिला कलेक्टर के सामने और अजमेर विकास प्राधिकरण की बैठकों में उठता रहा है। हर बार यही कहा जाता है कि अब तालमेल का अभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, मगर नतीजा ढ़ाक के तीन पात ही रहता है।
इसके अतिरिक्त ये भी पाया गया है कि जब जब अजमेर नगर सुधार न्यास, जो कि अब अजमेर विकास प्राधिकरण है, का मुखिया प्रशासनिक अधिकारी रहा है, विकास का काम ठप ही हुआ है। और जब भी जनता का कोई नुमाइंदा अध्यक्ष रहा है, उसने अपनी प्रतिष्ठा के लिए पूरी रुचि लेकर विकास के कार्य करवाए हैं। स्वाभाविक सी बात है कि सरकारी अधिकारियों की अजमेर के प्रति कोई रुचि नहीं होती, क्योंकि उन्हें तो केवल नौकरी करनी होती है और मात्र दो-तीन साल के लिए अजमेर आते हैं। ऐसे में यह जरूरी सा लगता है कि अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाए जाने के लिए जो अजमेर स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड गठित होगा, उसका मुखिया जनता का ही कोई नुमाइंदा हो।
इस महती योजना की ठीक से मॉनिटरिंग भी अधिकारियों की बजाय जनता का ऐसा नुमाइंदा कर सकता है या कर पाएगा, जो स्थानीय कठिनाइयों, जरूरतों और संभावनाओं को बेहतर जानता होगा। अधिकारियों के भरोसे काम किस प्रकार होते हैं, इसका अनुमान तो इसी बात से लग जाता है स्मार्ट सिटी के लिए सबसे पहले घोषित तीन शहरों में अजमेर का नाम शुमार होने के बाद भी उसकी औपचारिकता में कितनी लापरवाही बरती गई।
लब्बोलुआब, सरकार को नीतिगत निर्णय करते हुए स्मार्ट सिटी कारपोरेशनों को जनता के प्रतिनिधियों को सौंपना चाहिए और उसकी कमेटी में स्थानीय विशेषज्ञों के साथ संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल करना चाहिए। तभी अपेक्षित परिणाम सामने आएंगे। नहीं तो इसका हाल वही होना है, जैसा अब स्लम फ्री सिटी, जेएनएनयूआरएम आवास योजना और सीवरेज लाइन योजना का हुआ है। आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी। आज लगभग सभी जनप्रतिनिधि सियापा कर रहे हैं कि अधिकारियों ने उनके सुझावों पर गौर किया ही नहीं।
शनिवार, 28 सितंबर 2024
जुझारू पत्रकार थे स्वर्गीय श्री कृष्ण गोपाल गुप्ता
शुक्रवार, 27 सितंबर 2024
अजमेर में है पैगम्बर मोहम्मद साहब के मुए मुबारक
इस मौके पर जनाब मौलाना बशीरुल कादरी साहब ने सलातो सलाम का नजराना पेश किया व अमीन मूए मुबारक जनाब ख्वाजा सैय्यद गयासुद्दीन चिश्ती साहब दुआ फरमाई।
पूर्व दीवान दादा शैखुल मशाएख हज़रत सैयद इनायत हुसैन व वालिद पूर्व दीवान सैयद सौलत हुसैन की औलाद ख्वाजा सैयद गयासुद्दीन चिश्ती 1 जुलाई 1959 को अजमेर में पैदा हुए। आपने शुरुआती तालीम अपने वालिद और खास तरबियत वालिदा से हासिल की। जोधपुर के दारूल उलूम इस्हाकिया से मौलवी की सनद और तजवीद व किरअत में महारत हासिल की। मोईनिया इस्लामिया स्कूल से हायर सेकण्डरी का इम्तेहान पास किया। आपकी नियुक्ति राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1979 में हुई। आप राजस्थान लोक सेवा आयोग मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रहे हैं। 1977 में अपने वालिद से मुरीद हुए। 2002 में वालिद के इन्तेकाल पर जलसा-ए-आम में मशाइकीन ने दस्तारबन्दी की। दीवान ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (ख़्वाजा साहब की कविताओं का संकलन) का दूसरा एडीशन आपकी निगरानी में छप चुका है। नगमाते ख्वाजा, सलामे ख़्वाजा, गुलदस्ता-ए-चिश्तिया, खत्मे ख़्वाजगान आप की लिखी हुई किताबें हैं। कलेक्ट्रेट अजमेर के पास मस्जिद मूए मुबारक (कचहरी मस्जिद) की आपने नई तामीर की, जो 1947 के बाद इतने बड़े पैमाने पर तामीर होने वाली पहली तीन मंज़िला मस्जिद है। हिन्दुस्तानी हुकुमत की तरफ से खिदमत अन्जाम देते हुए दो बार हज-ए-बयतुल्ला अदा फरमाया।
बुधवार, 25 सितंबर 2024
खिलाडियों की सेवा में जुटे शक्ति सिंह गौड़
ज्ञातव्य है कि शक्ति सिंह गौड़ गत 30 अगस्त को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सराधना से सेवा निवृत हुए हैं। वे शिक्षा विभाग में बहुत चर्चित व लोकप्रिय रहे हैं। वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री से सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। प्रसंगवश बता दें कि उनके अनुज भ्राता जसवंत सिंह गौड़ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भूड़ोल में बास्केटबाल से वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक हैं।
