सोमवार, 30 सितंबर 2024

अजमेर रत्न स्वर्गीय श्री मुकुट बिहारी लाल भार्गव

अजमेर संसदीय क्षेत्र से लगातार तीन बार कांग्रेस पार्टी की ओर से लोकसभा सदस्य रहे स्वर्गीय श्री मुकुट बिहारी लाल भार्गव की अजमेर के विकास में अहम भूमिका रही। यदि यह कहा जाए कि अजमेर की विकास यात्रा का आगाज उन्होंने किया तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वे पहली बार अजमेर राज्य के समय सन् 1952 में अजमेर दक्षिण सीट से विजयी रहे और कम्युनिस्ट पार्टी के कुमारानंद को हराया। तब दूसरी सीट अजमेर उत्तर से श्री ज्वाला प्रसाद शर्मा लोकसभा सदस्य थे। अजमेर राज्य के राजस्थान में विलय के बाद यहां एक ही सीट रह गई। इस पर 1957 में श्री भार्गव जीते और उन्होंने जनसंघ के श्री रामचंद को हराया। 1962 में वे फिर विजयी रहे और जनसंघ के श्री भगवान दास को हराया।


रविवार, 29 सितंबर 2024

काश, तब किसी जनप्रतिनिधि को स्मार्ट सिटी योजना का जिम्मा सौंपा जाता

आज जब स्मार्ट सिटी के कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं, आपत्तियां सामने आ रही हैं तो यह ख्याल आता है कि इसके आरंभ में ही मीडिया ने आगाह कर दिया था कि कहीं इस महत्वाकांक्षी योजना हश्र भी अन्य योजनाओं की तरह न हो जाए। अन्य सभी संबंधित पक्षों के अतिरिक्त जिला कलेक्टर वैभव गोयल के विशेष प्रयासों और नगर निगम मेयर धर्मेन्द्र गहलोत के रुचि लेने से अजमेर को देशभर की तीसरी सूची में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शामिल कर लिया गया तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठा कि आखिर इसका काम कब शुरू होगा? इसकी मॉनिटरिंग कौन करेगा? क्या इस योजना के तहत आने वाले धन का सही उपयोग भी हो पाएगा या नहीं? ये सवाल इस कारण उठते हैं क्योंकि इससे पहले अजमेर की जनता स्लम फ्री सिटी और जेएनएनयूआरएम की आवास योजना विफल होने और सीवरेज लाइन योजना की कछुआ चाल को देख चुकी है।

असल में अजमेर के लोग यह देखने के आदी हो चुके हैं कि यहां लाख दावों और प्रयासों के बाद भी विभिन्न विभागों में तालमेल नहीं हो पाता। निगम या पीडब्ल्यूडी सड़क बनाती है और उसके तुरंत बाद अजमेर विद्युत वितरण निगम या भारत दूरसंचार निगम उसे केबल डालने के लिए खोद डालता है। यह मुद्दा न जाने कितनी बार संभागीय आयुक्त व जिला कलेक्टर के सामने और अजमेर विकास प्राधिकरण की बैठकों में उठता रहा है। हर बार यही कहा जाता है कि अब तालमेल का अभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, मगर नतीजा ढ़ाक के तीन पात ही रहता है।

इसके अतिरिक्त ये भी पाया गया है कि जब जब अजमेर नगर सुधार न्यास, जो कि अब अजमेर विकास प्राधिकरण है, का मुखिया प्रशासनिक अधिकारी रहा है, विकास का काम ठप ही हुआ है। और जब भी जनता का कोई नुमाइंदा अध्यक्ष रहा है, उसने अपनी प्रतिष्ठा के लिए पूरी रुचि लेकर विकास के कार्य करवाए हैं। स्वाभाविक सी बात है कि सरकारी अधिकारियों की अजमेर के प्रति कोई रुचि नहीं होती, क्योंकि उन्हें तो केवल नौकरी करनी होती है और मात्र दो-तीन साल के लिए अजमेर आते हैं। ऐसे में यह जरूरी सा लगता है कि अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाए जाने के लिए जो अजमेर स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड गठित होगा, उसका मुखिया जनता का ही कोई नुमाइंदा हो।

इस महती योजना की ठीक से मॉनिटरिंग भी अधिकारियों की बजाय जनता का ऐसा नुमाइंदा कर सकता है या कर पाएगा, जो स्थानीय कठिनाइयों, जरूरतों और संभावनाओं को बेहतर जानता होगा। अधिकारियों के भरोसे काम किस प्रकार होते हैं, इसका अनुमान तो इसी बात से लग जाता है स्मार्ट सिटी के लिए सबसे पहले घोषित तीन शहरों में अजमेर का नाम शुमार होने के बाद भी उसकी औपचारिकता में कितनी लापरवाही बरती गई।

लब्बोलुआब, सरकार को नीतिगत निर्णय करते हुए स्मार्ट सिटी कारपोरेशनों को जनता के प्रतिनिधियों को सौंपना चाहिए और उसकी कमेटी में स्थानीय विशेषज्ञों के साथ संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल करना चाहिए। तभी अपेक्षित परिणाम सामने आएंगे। नहीं तो इसका हाल वही होना है, जैसा अब स्लम फ्री सिटी, जेएनएनयूआरएम आवास योजना और सीवरेज लाइन योजना का हुआ है। आखिर वही हुआ, जिसकी आशंका थी। आज लगभग सभी जनप्रतिनिधि सियापा कर रहे हैं कि अधिकारियों ने उनके सुझावों पर गौर किया ही नहीं।

शनिवार, 28 सितंबर 2024

जुझारू पत्रकार थे स्वर्गीय श्री कृष्ण गोपाल गुप्ता

आज जब पत्रकारिता व्यवसाय का स्वरूप लेती जा रही है, ऐसे में मिशन के रूप में पत्रकारिता करने के लिए स्वर्गीय श्री कृष्ण गोपाल गुप्ता की याद आना स्वाभाविक है। उन्होंने पहले स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और फिर आजादी के बाद मेहनतकश लोगों के लिए लम्बा संघर्ष किया। अजमेर में समस्या चाहे पीने के पानी की हो या फिर राशन की दुकानों पर खाद्य सामग्री मिलने की, समस्या धोबी समुदाय की हो या फिर रेलवे और बस स्टैण्ड के कुलियों की, गोपाल भैया के नाम से पहचान बनाने वाले श्री कृष्ण गोपाल गुप्ता ने समाधान के लिए संघर्ष में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी सिलसिले में वे आजादी से पूर्व और आजादी के बाद कई बार सेन्ट्रल जेल गए। सन् 1974 में जब देशव्यापी रेल हड़ताल हुई तो अजमेर में इस हड़ताल का नेतृत्व भी किया। वे पत्रकारिता से भी जुड़े रहे। अपनी प्रवृत्ति और कार्यशैली के अनुरूप अपने पाक्षिक अखबार का नाम भभक रखा। भभक भले ही पाक्षिक रहा हो, लेकिन उसकी लिखावट दो नाली बंदूक की मार से कम नहीं रही। आपातकाल के दौरान 1975 में जब सरकार विरोधी अखबारों पर प्रतिबंध लगाया गया तो उसमें सबसे पहले भभक का नाम था। तब उन्होंने प्रेस कौंसिल में चुनौती दी। राजस्थान में श्री गुप्ता पहले ऐसे सम्पादक थे, जिन्होंने आपातकाल में कलैक्टर के खिलाफ शिकायत की। कौंसिल ने भी माना कि प्रतिबंध गलत है। आपातकाल के बाद संयुक्त सरकार बनने पर तब के केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री लालकृष्ण आड़वाणी ने एक सवाल के जवाब लोकसभा में कहा कि राजस्थान में भभक पाक्षिक अकेला ऐसा अखबार है, जिसका प्रकाशन आपातकाल के दौरान ही हो गया। गोपाल भैया ने पत्रकारिता एक मिशन के रूप में की, जिसका उद्देश्य निरकुंश सरकार पर लगाम लगाना और आम लोगों की सहायता करना था। अजमेर की पत्रकारिता के इतिहास में कृष्ण गोपाल गुप्ता का नाम कभी नहीं भुलाया जा सकता। वर्तमान में उनके पुत्र वरिष्ठ पत्रकार श्री एस. पी. मित्तल भभक का संचालन कर रहे हैं। अनेक समाचार पत्रों में काम किया है। वर्तमान में जाने माने ब्लॉगर हैं और टीवी चैनल्स में ज्वलंत मसलों पर पत्रकार के रूप में बहस में हिस्सा लेते हैं।


शुक्रवार, 27 सितंबर 2024

अजमेर में है पैगम्बर मोहम्मद साहब के मुए मुबारक

पैगम्बर मोहम्मद साहब के मुए मुबारक (सिर का बाल) अजमेर की कचहरी रोड स्थित मस्जिद में मौजूद है। मस्जिद में मुए मुबारक आने के बाद से ही कचहरी रोड मस्जिद मस्जिद मुए मुबारक के नाम से जाने जानी लगी है। बारावफात के बाद आने वाले जुमे से मस्जिद में मुए मुबारक की जियारत करवाई जाती है। हर साल की तरह इस साल भी मस्जिद मुए मुबारक ( कचहरी ), अजमेर शरीफ में बतारीख 27 सितंबर 2024, बरोज जुमा, बवक्त बाद नमाज जुमा, हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम के मूए मुबारक (पवित्र बाल) की जियारत कराई गई, साथ ही अहले बैत अतहार रजिअल्लाहु तआला अन्हु के मूए मुबारक (पवित्र बाल) वा हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी गौस ए आजम रहमतुल्लाह अलैहि के मूए मुबारक (पवित्र बाल) की भी जियारत कराई गई।

इस मौके पर जनाब मौलाना बशीरुल कादरी साहब ने सलातो सलाम का नजराना पेश किया व अमीन मूए मुबारक जनाब ख्वाजा सैय्यद गयासुद्दीन चिश्ती साहब दुआ फरमाई।

पूर्व दीवान दादा शैखुल मशाएख हज़रत सैयद इनायत हुसैन व वालिद पूर्व दीवान सैयद सौलत हुसैन की औलाद ख्वाजा सैयद गयासुद्दीन चिश्ती 1 जुलाई 1959 को अजमेर में पैदा हुए। आपने शुरुआती तालीम अपने वालिद और खास तरबियत वालिदा से हासिल की। जोधपुर के दारूल उलूम इस्हाकिया से मौलवी की सनद और तजवीद व किरअत में महारत हासिल की। मोईनिया इस्लामिया स्कूल से हायर सेकण्डरी का इम्तेहान पास किया। आपकी नियुक्ति राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1979 में हुई। आप राजस्थान लोक सेवा आयोग मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रहे हैं। 1977 में अपने वालिद से मुरीद हुए। 2002 में वालिद के इन्तेकाल पर जलसा-ए-आम में मशाइकीन ने दस्तारबन्दी की। दीवान ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (ख़्वाजा साहब की कविताओं का संकलन) का दूसरा एडीशन आपकी निगरानी में छप चुका है। नगमाते ख्वाजा, सलामे ख़्वाजा, गुलदस्ता-ए-चिश्तिया, खत्मे ख़्वाजगान आप की लिखी हुई किताबें हैं। कलेक्ट्रेट अजमेर के पास मस्जिद मूए मुबारक (कचहरी मस्जिद) की आपने नई तामीर की, जो 1947 के बाद इतने बड़े पैमाने पर तामीर होने वाली पहली तीन मंज़िला मस्जिद है। हिन्दुस्तानी हुकुमत की तरफ से खिदमत अन्जाम देते हुए दो बार हज-ए-बयतुल्ला अदा फरमाया।

बुधवार, 25 सितंबर 2024

खिलाडियों की सेवा में जुटे शक्ति सिंह गौड़

शिक्षा विभाग से हाल ही सेवानिवृत्त वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक शक्ति सिंह गौड़ खिलाडियों की सेवा में जुट गए हैं। वे 68 वीं जिला स्तरीय सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता को सफल बनाने हेतु जम कर पसीना बहा रहे हैं। उनकी सेवाओं से अभिभूत जिला सॉफ्टबॉल एसोसिएशन ने उनको द्रौणाचार्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है।

ज्ञातव्य है कि शक्ति सिंह गौड़ गत 30 अगस्त को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सराधना से सेवा निवृत हुए हैं। वे शिक्षा विभाग में बहुत चर्चित व लोकप्रिय रहे हैं। वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री से सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। प्रसंगवश बता दें कि उनके अनुज भ्राता जसवंत सिंह गौड़ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भूड़ोल में बास्केटबाल से वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक हैं।