बुधवार, 6 मई 2026

सम्राट पृथ्वीराज चौहान टेनिस प्रतियोगिता : नन्हे हाथों ने दिखाया खेल का रोमांच

अजमेर, 06 मई, यहां खेली जा रही सम्राट पृथ्वीराज चौहान टेनिस प्रतियोगिता में नन्ने टेनिस सितारो ने मैदान में खेल का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दर्शकों की तालियां बटोरते हुए खेल के रोमांच को नई उचाईयां दी।

सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती समारोह के तत्वावधान में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं की श्रृंखला में कुन्दन नगर स्थित राजपूत छात्रावास, हिलव्यू टेनिस एकेडमी में बुधवार को विभिन्न आयु वर्गों के टेनिस मुकाबले आयोजित हुए।
आयोजन सचिव अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक भरत सिंह चौहान के अनुसार छात्र वर्ग 12 वर्ष से कम आयु वर्ग के मुकाबलों में तरंक ने विहान को 4-0 से पराजित किया। सेमीफाइनल में वरुण का मुकाबला अभिराज से हुआ, जिसमें उसे 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। अन्य मुकाबलों में राज ने नरेन्द्र को 4-0 से तथा युवराज ने अपने प्रतिद्वंदी को 4-2 से हराया। दूसरे सेमीफाइनल में आयुष ने राज को 7-4 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।
बालिका वर्ग (12 वर्ष से कम आयु) में शिया एवं नविका के बीच पहला सेमीफाइनल तथा परीधी और पीहू के बीच दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा। इससे पूर्व मुकाबलों में शिया ने उमिका को 4-0 से, नविका ने तन्वी को 4-0 से, परीची ने आध्या को 4-1 से तथा पीहू ने कनिष्क को 4-1 से हराया।
छात्र वर्ग (14 वर्ष से कम आयु) में सुशांत ने मयूर को 5-0 से हराया। अधिराज ने वंश को 5-1 से पराजित किया। एक अन्य मुकाबले में अर्जुन को वॉकओवर मिला, लेकिन अगले मुकाबले में नक्श के विरुद्ध उसे 1-5 से हार का सामना करना पड़ा।
तैयारी बैठक कल
सम्राट पृथ्वीराज चौहान समारो समिति द्वारा आयोजन मुख्य समारोह 17 मई 2026 रविवार को सांय 6 बजे से तारागढ़ पर्वत श्रृंखला पर स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक, अजमेर पर भव्य एवं गरिमापूर्ण समारोह के रूप में मनाया जाएगा। इसको लेकर दिनांक 07 मई 2026 को सायं 5 बजे स्वामी कॉम्पलेक्स स्थित रसोई बैक्वेंट हॉल में बैठक का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मुख्य समारोह के लिए आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
विनीत लोहिया
मो. 9549860966

राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज कराने को महिला कांग्रेस द्वारा पुलिस अधिक्षक को ज्ञापन

पियुष सुराणा पर भाजपा प्रकोष्ठ की महिलाओं द्वारा स्याही छिड़कने व मारपीट मामले व राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज कराने को लेकिन महिला कांग्रेस द्वारा माननीय पुलिस अधिक्षक महोदय का दिया ज्ञापन
आज दिनांक 06 मई - अजमेर शहर जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मी बुन्देल के नेतृत्व में आज गंज थाने में पियुष सुराणा पर भाजपा प्रकोष्ठ की महिलाओं द्वारा स्याही छिड़कने एवं मारपीट करने के मामले में राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज कराने के तथा उन्हे गिरफतार करने के सम्बन्ध में श्रीमान् पुलिस अधीक्षक महोदय को ज्ञापन सौप कर अपना रोष प्रकट किया गया।
यह जानकारी देते हुए महिला अध्यक्ष लक्ष्मी बुन्देल ने बताया कि दिनांक 01 मई 2026 को पियुष सुराणा द्वारा दिल्ली की मुख्यमंत्री पर सोशल मिडिया के माध्यम से अभद्र एवं अशलील टिप्पणी करने के मामले में गंज थाना पुलिस द्वारा मुकदमा संख्या 129/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस उन्हें पकडकर गंज थाने में ले आई। पुलिस कस्टडी में ही सत्ता का दुरूपयोग करते हुए भाजपा महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष श्रीमती भारती श्रीवास्तव तथा उनके साथ आई महिलाओं के द्वारा राजकार्य में बाधा पहुंचाते हुए पियुष सुराणा पर स्याही छिड़की, मारपीट एवं गाली गलौच की गई थी। इस सम्बन्ध में पुलिस विभाग द्वारा उन महिलाओं के विरूद्ध मुकदमा संख्या 130/2026 दर्ज किया गया। परन्तु उक्त मुकदमे में राजकार्य की बाधाओं की धाराओं को नहीं जोड़ा गया, ना ही उन पर कोई कार्यवाही की गई। जबकि पुलिस कस्टडी में किया गया उक्त कार्य एक गंभीर कृत्य था, जिस सम्बन्ध में गंज थाने के एसएचओ महावीर जी सहित तीन पुलिस कर्मियों को लाईन हाजिर कर कार्यवाही की गई। परन्तु इसके उपरान्त भी उक्त दोषी महिलाओं को ना तो शांति भंग में गिरफतार किया गया ना ही उन पर राजकार्य में बाधा की कार्यवाही की गई। उन पर आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। उक्त महिला भाजपा की पदाधिकारी होने के कारण से उनको बचाने का प्रयास भाजपा सरकार एवं भाजपा नेताओं द्वारा किया जा रहा है तथा पुलिस उनके दबाव से कार्य कर रही है। आमजन में पुलिस की निष्पक्ष छवी स्थापित करने हेतु उन महिलाओं पर कार्यवाही की जानी चाहिए तथा उनकी गिरफतारी की जानी चाहिए।
ज्ञापन में यह मांग की गई है कि उक्त महिलाओं पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज किया जाए तथा गिरफतारी की जाकर उन पर कार्यवाही की जाए।
ज्ञापन देने वालो में अध्यक्ष लक्ष्मी बुन्देल, इन्द्रा सुणिया, भंवर कंवर राठौड, सरोज गहलोत, शहनाज आलम, पुष्पा राजोरिया, रंजनी कहार, धनवन्ती, पूर्णिमा बुन्देल, स्नेहलता अग्रवाल, पवन सुराणा, हर देवी व दुर्गा सहित काफी संख्या में महिला पदाधिकारी मौजूद रही।
 
    (लक्ष्मी बुन्देल)
    अध्यक्ष
    मो. 9462505487

पत्रकार दिलीप रॉय ने सादगी के साथ मनाया जन्मदिन

 क्षेत्र के पत्रकारों सहित गणमान्य लोगो ने दी बधाई

 
नसीराबाद अजमेर कस्बे के वरिष्ठ पत्रकार दिलीप राय ने बुधवार को अपना जन्मदिवस सादगी व सेवा कार्य के साथ मनाया ।
रॉय ने अपने दिन की शुरुआत अपने स्वर्गीय माता पिता  के चित्र के समक्ष नमन कर  सुबह कबूतरों को दाना व गायो को हरा चारा व गुड खिलाकर कस्बे के मंदिरों में दर्शन कर दिन की शुरुआत की
दोपहर में पत्रकार दिलीप रॉय ने फ्रामंजी चौक पर स्थित प्रेस कार्यालय पर अपने क्षेत्र के वरिष्ठ दिवंगत पत्रकार अतुल सेठी  के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर नमन कर केक काटकर सादगी के साथ जन्मदिवस मनाया
 इस मौके पर मौजूद क्षेत्र के पत्रकार अजीत सेठी हरीश गोमा योगेश परिहार, निखिल गुर्जर देव गुर्जर अशोक लोढ़ा अनिल लोहरे दिलीप सैन  योगेन्द बुलचंदानी रोहित जैन व गणमान्य लोगो ने  को माला पहनाकर रॉय को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

जनप्रिय अफसर श्री किशोर कुमार का देहावसान

ऐसे अधिकारी कम ही होते हैं, जो सार्वजनिक जीवन में सहज व सरल बने रहते हैं। सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों में खुल कर भाग लेते हैं। उनमें गिनती होती है आईएएस अधिकारी श्री किशोर कुमार की। वे बहुत विनोदी स्वभाव के थे। हाल ही उनका जयपुर में देहावसान हो गया। करीब 57 वर्षीय किशोर कुमार के निधन की खबर से प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और जयपुर में उनका उपचार चल रहा था। अजमेर में रहते हुए उन्होंने घुटने का रिप्लेसमेंट ऑपरेशन करवाया, लेकिन बाद में उन्हें गंभीर संक्रमण हो गया। यह संक्रमण धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करने लगा। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें जयपुर में भर्ती कराया गया, जहां पिछले कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था। 3 अप्रैल 2026 को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

उनका जन्म जयपुर में 4 जनवरी 1969 को हुआ। उन्होंने गणित में एम फिल की डिग्री हासिल की। 1991 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ। राजस्थान में अनेक जिलों में उच्च पदों पर काम किया। उनका राज्य प्रशासनिक सेवा में 1998, 2009, 2011 में पदोन्नत किया गया। अजमेर में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर काम किया। इसके बाद आईएएस बनाए गए। उन्होंने 4 सितंबर 2024 को खैरथल-तिजारा जिले के कलक्टर के रूप में कार्यभार संभाला था। यहां कार्यकाल के दौरान उनके पैरों में तेज दर्द रहने लगा और घुटने की समस्या भी बढ़ती चली गई। स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उन्होंने सरकार से तबादले का अनुरोध किया, जिसके बाद 25 नवंबर 2025 को उनका स्थानांतरण उनके गृह शहर अजमेर कर दिया गया। अजमेर में उन्हें राजस्व मंडल में सदस्य के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया था। अजमेरनामा न्यूज पोर्टल उनको अश्रुपूरित श्रद्धांजली अर्पित करता है।

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

आखिर कब होगी एडीए अध्यक्ष की नियुक्ति?

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अजमेर जैसा ऐतिहासिक शहर और विश्व मानचित्र पर अंकित जाने-माने पर्यटन स्थल का विकास पहले नगर सुधार न्यास व बाद में अजमेर विकास प्राधिकरण में अमूमन देर से अध्यक्ष की नियुक्ति होने के कारण बार-बार बाधित हुआ है। आज भी स्थिति ये है कि नई सरकार दो साल से भी ज्यादा समय पूरा कर चुकी है, मगर अब तक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है। फिलवक्त होने की संभावना कम ही है।

यह सर्वविदित ही है कि पहले यूआईटी हो या अब एडीए, शहर के विकास के नए आयाम स्थानीय राजनीतिक व्यक्ति के अध्यक्ष रहने पर स्थापित हुए हैं। जब भी प्रशासनिक अधिकारी के हाथों में कमान रही है, विकास की गति धीमी हुई है। इसके अनेक उदाहरण हैं। वजह ये है कि जिला कलेक्टर या संभागीय आयुक्त के पास अध्यक्ष का भी चार्ज होने के कारण वे सीधे तौर पर कामकाज पर ध्यान नहीं दे पाते। वैसे भी उनकी कोई विशेष रुचि नहीं होती। वे तो महज औपचारिक रूप से नौकरी को अंजाम देते हैं। उनके पास अपना मूल दायित्व ही इतना महत्वपूर्ण होता है कि वे टाइम ही नहीं निकाल पाते। निचले स्तर के अधिकारी ही सारा कामकाज देखते हैं। इसके विपरीत राजनीतिक व्यक्ति के पास अध्यक्ष का कार्यभार होने पर विकास के रास्ते सहज निकल आते हैं। एक तो उसको स्थानीय जरूरतों का ठीक से ज्ञान होता है। इसके अतिरिक्त जनता के बीच रहने के कारण यहां की समस्याओं से भी भलीभांति परिचित होता है। वह किसी भी विकास के कार्य को बेहतर अंजाम दे पाता है। प्रशासनिक अधिकारी व जनता के प्रतिनिधि का आम जन के प्रति रवैये में कितना अंतर होता है, यह सहज ही समझा जा सकता है। राजनीतिक व्यक्ति इस वजह से भी विकास में रुचि लेता है, क्योंकि एक तो उसकी स्थानीय कामों में दिलचस्पी होती है, दूसरा उसकी प्रतिष्ठा भी जुड़ी होती है। उनका प्रयास ये रहता है कि ऐसे काम करके जाएं ताकि लोग उन्हें वर्षों तक याद रखें और उनकी राजनीतिक कैरियर भी और उज्ज्वल हो। 

इस बात के प्रमाण हैं कि जब भी न्यास के अध्यक्ष पद पर कोई राजनीतिक प्रतिनिधि बैठा है, शहर का विकास हुआ है। चाहे कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की। हर न्यास अध्यक्ष ने चाहे शहर के विकास के लिए, चाहे अपनी वाहवाही के लिए, काम जरूर करवाया है। पृथ्वीराज चौहान स्मारक, सिंधुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक, लवकुश उद्यान, झलकारी बाई स्मारक, वैकल्पिक ऋषि घाटी मार्ग, अशोक उद्यान, राजीव उद्यान, गौरव पथ, महाराणा प्रताप स्मारक सहित अनेक आवासीय योजनाएं उसका साक्षात प्रमाण हैं। सरकारों की अरुचि अथवा कोई अन्य मजबूरी हो सकती है, मगर अध्यक्ष की नियुक्ति समय पर न होना अजमेर शहर के लिए नुकसानदेह है। महत्वपूर्ण ये नहीं है कि नियुक्ति के दावेदारों को इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि शहर के विकास में अहम भूमिका अदा कर सकने वाली इस विशेष संस्था की निष्क्रियता से शहर का विकास अवरुद्ध हो रहा है। ये उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि दावेदारों की अपेक्षा पूरी हो, बल्कि जरूरी ये है कि अजमेर वासियों की अपेक्षाएं पूरी हों।

वर्तमान में प्राधिकरण प्रशासनिक अधिकारियों भरोसे ही चल रहा है। ऐसे में विकास तो दूर रोजमर्रा के कामों की हालत भी ये है कि जरूरतमंद लोग चक्कर लगा रहे हैं और किसी को कोई चिंता नहीं। नियमन और नक्शों के सैंकड़ों काम अटके पड़े हैं। स्पष्ट है कि विकास अवरुद्ध हुआ है। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि प्राधिकरण गठित होने की वजह से भविष्य में विकास की रफ्तार तेज होने की आशा बलवती हुई थी। वजह ये कि प्राधिकरण का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया था। इसके तहत किशनगढ़ और पुष्कर शहर के अतिरिक्त 118 गांव भी इसका हिस्सा बन गए। यानि कि प्राधिकरण यूआईटी की तुलना में एक उच्च शक्ति वाली संस्था बन गई। न्यास अध्यक्ष को 25 लाख रुपए और सचिव को दस लाख रुपए के वित्तीय अधिकार थे, मगर अध्यक्ष और कमिश्नर (सचिव) दोनों के वित्तीय अधिकार एक-एक करोड़ रुपए हो गए। इसमें सरकार की ओर से घोषित एक चेयरमैन के अलावा एक सचिव और 19 सदस्यों का प्रावधान है। 19 सदस्यों में से 12 सदस्य अधिकारी और 7 सदस्य राजनीतिक नियुक्तियों के रखने का प्रावधान है। जैसे ही प्राधिकरण का गठन हुआ तो सभी समाचार पत्रों में यह शीर्षक सुर्खियां पा रहा था कि अब लगेंगे अजमेर के विकास को पंख। उम्मीद जताई गई थी कि सही योजनाएं बनीं और तय समय में काम पूरे हुए तो एक दशक में ही अजमेर महानगर में तब्दील हो सकता है। इसके ठोस आधार भी हैं। प्राधिकरण की सीमाएं किशनगढ़ औद्योगिक क्षेत्र तक हैं, यानि केंद्रीय विद्यालय तक हमारी पहुंच हो गई है। बाड़ी घाटी अब प्राधिकरण का हिस्सा है, यानि विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बने पुष्कर तीर्थ को हम विकास की दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं दे सकते हैं। ब्यावर रोड पर सराधना और नारेली तीर्थ हमारी सीमा में आ जाने से हम कई दृष्टि से विकसित हो जाएंगे। हवाई अड्डा तो गेगल निकलते ही हम छू लेंगे। कुल मिला कर अजमेर विकास प्राधिकरण का गठन अजमेर के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता था। मगर वह इस कारण नहीं हो पा रहा कि पिछली बार भी नियुक्ति में देरी हुई, इस बार भी हो रही है।

कुल मिला कर जब तक प्राधिकरण के सदर पद पर किसी राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होती, तब तक अजमेर का विकास यूं ही ठप पड़ा रहेगा।