बुधवार, 20 मई 2026

अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस - 21 मई : चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक हिस्सा है

  चाह है तो चाय है। ये बात आज आम आदमी पर चरितार्थ होती है। चाय हम भारतीयों के लिए एनर्जी ड्रिंक है। सुबह बिस्तर से उठने के लिए एनर्जी चाहिए हो या काम पर जाने के लिए या फिर दिनभर की थकान मिटाने के लिए...नींबू पानी, शिकंजी ये सब फेल हैं चाय के आगे।  आज कोई मेहमान नवाजी में भी अच्छा खाना खिला दो लेकिन चाय नहीं पूछा तो सब बेकार है।

 

 भारत में चाय ब्रिटिशर्स की देन है। वही भारत में चाय लेकर आए थे। साल 1834 में जब गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक भारत आए तो उन्होंने असम में लोगों को एक तरह की पत्तियों को पानी में उबालकर दवाई की तरह पीते हुए देखा था। दरअसल ये चाय की ही पत्तियां थीं। बैंटिक ने असम के लोगों को इस पत्तियों के बारे में बताया और इस तरह से भारत में चाय की शुरुआत हुई। ऐसा माना जाता है कि 2732 बीसी में चीन के शासक शेंग नुंग ने गलती से चाय की खोज की थी।

 

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार  अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस प्रतिवर्ष 21 मई को मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य विश्व भर में चाय के लंबे इतिहास और इसके गहन सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस का लक्ष्य चाय के सतत उत्पादन और उपभोग के पक्ष में गतिविधियों को लागू करने हेतु सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना और भूख एवं गरीबी से लड़ने में इसके महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

 

 भारत  श्रीलंका  नेपाल  वियतनाम  इंडोनेशिया  बांग्लादेश  केन्या  मलावी  मलेशिया  युगांडा और तंजानिया जैसे चाय उत्पादक देशों में 2005 से 15 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य सरकारों और नागरिकों का ध्यान श्रमिकों और उत्पादकों पर वैश्विक चाय व्यापार के प्रभाव की ओर आकर्षित करना है और इसे मूल्य समर्थन और निष्पक्ष व्यापार के अनुरोधों से जोड़ा गया है ।

 

चाय पर एफएओ आईजीजी विश्व चाय अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए बहुपक्षीय प्रयासों का नेतृत्व करता है और अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस की घोषणा का प्रबल समर्थक रहा है। 2015 में, इटली के मिलान में एक बैठक के दौरान  चाय पर आईजीजी ने अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के विचार पर चर्चा की। इस प्रस्ताव को बाद में कमोडिटी प्रॉब्लम्स (सीसीपी) पर एफएओ समिति द्वारा अनुमोदित किया गया और बाद में दिसंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा इसे 21 मई को मनाने का निष्चय किया गया।

 

चाय हमारे जीवन का अहम हिस्सा है लेकिन सीमित मात्रा में ही लाभकारी होती है। अधिक सेवन से एसिडिटी अनिद्रा आयरन की कमी और हड्डियों पर असर पड़ सकता है। चाय प्रेमियों का दिन हर साल 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल चाय पीने वालों के लिए खास होता है बल्कि यह उन किसानों और मजदूरों को भी सम्मान देने का दिन है जो कठिन परिश्रम से चाय की पत्तियों की खेती तोड़ाई और प्रसंस्करण करते हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2019 में घोषित किए गए इस दिवस का उद्देश्य है चाय उद्योग से जुड़े लोगों की स्थिति में सुधार लाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है और यहां चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक हिस्सा है। सुबह की शुरुआत हो दफ्तर में ब्रेक हो मेहमान नवाज़ी हो या शाम की थकान हर मौके पर चाय की चुस्की जरूरी मानी जाती है। असम दार्जिलिंग और नीलगिरि जैसी जगहों की चाय दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

 

चाय के बदलते रूपः स्वाद से सेहत तक

आज के समय में चाय के पारंपरिक स्वरूप से आगे बढ़ते हुए अनेक प्रकार देखने को मिलते है। जैसे ग्रीन टी हर्बल टी ब्लैक टी व्हाइट टी मसाला चाय लेमन टी आदि. जहां एक ओर ये चाय स्वाद के अलग-अलग विकल्प प्रदान करती हैं वहीं दूसरी ओर इनमें कुछ स्वास्थ्यवर्धक गुण भी होते हैंः-

 

ग्रीन टीः- एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है जो वजन घटाने त्वचा सुधारने और मेटाबॉलिज्म बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

हर्बल टीः- तुलसी अदरक दालचीनी पुदीना आदि से बनी यह चाय रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।

ब्लैक टीः- यह कैफीन युक्त होती है और जागरूकता तथा ऊर्जा देने में मदद करती है।

व्हाइट टीः- यह सबसे कम प्रोसेस्ड चाय होती है और इसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं।

 

चाय की लोकप्रियता के पीछे का विज्ञान

 

चाय में मौजूद कैफीन और थीनाइन जैसे तत्व मस्तिष्क को स्फूर्ति देते हैं। ये तत्व अलर्टनेस बढ़ाते हैं और थकान दूर करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि लंबे समय से चाय को मानसिक और शारीरिक स्फूर्ति देने वाले पेय के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसी ही कुछ मशहूर चाय की वैराइटीज भी हम देखते आ रहे है।

मसाला चाय- मसाला चाय में कई तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसका स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि फायदे भी बढ़ाते हैं। सर्दियों में इस चाय को पीने से गर्मी आती है। लौंग दालचीनी काली मिर्च जैसे मसाले इसमें यूज किए जाते हैं।

ईरानी चाय-ईरानी चाय का स्वाद आप भारत में भी ले सकते हैं। हैदराबाद और पुणे में ये चाय ज्यादा पॉपुलर है।

बटर टी - बटर टी हिमाचय की वैराइटी है। जिसे याक के बटर चाय की पत्तियों और नमक से साथ बनाया जाता है। स्वाद में जबरदस्त होती है ये चाय।

तंदूरी चाय- तंदूरी रोटी महाराष्ट्र की खासियत है। जिसे तंदूर में पकाया जाता है और कुल्हड़ में सर्व किया जाता है।

नून चाय- नून चाय का स्वाद कश्मीर में चखने को मिलता है। यह यहां की ट्रेडिनशल चाय है। वैसे कश्मीर के अलावा राजस्थान और नेपाल में भी नून चाय मशहूर है।

आइस टी- गर्मियों में आइस टी ज्यादा पसंद की जाती है लेकिन ऐसा नहीं है इसे बनाने में आइस का इस्तेमाल होता है। इसके बेसिकल चायपत्ती शुगर और नींबू का स्वाद आता है। चाय हम भारतीयों के लिए एनर्जी ड्रिंक है। सुबह बिस्तर से उठने के लिए एनर्जी चाहिए हो या काम पर जाने के लिए या फिर दिनभर की थकान मिटाने के लिए...नींबू पानी शिकंजी ये सब फेल हैं चाय के आगे। चाय को बनाने और पीने के कई तरीके हैं।

 

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावः चिकित्सकों की चेतावनी-

हालांकि चाय के अनेक फायदे हैं लेकिन चिकित्सक आगाह करते हैं कि यदि चाय का सेवन आवश्यकता से अधिक किया जाए तो यह शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दिन में 2 से 3 कप चाय तक सीमित रहना बेहतर होता है। अधिक मात्रा में चाय पीने से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं -

गैस और एसिडिटी की समस्याः- चाय में मौजूद टैनिन्स पेट में अम्ल बढ़ा सकते हैं।

नींद में खललः- अत्यधिक कैफीन नींद के चक्र को बाधित करता है और अनिद्रा का कारण बन सकता है।

हड्डियों की कमजोरीः- ज्यादा चाय पीने से कैल्शियम का अवशोषण घट सकता है, जिससे हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं।

आयरन की कमीः- चाय आयरन के अवशोषण में बाधा डालती है, जिससे शरीर में खून की कमी हो सकती है।

डिहाइड्रेशनः- बार-बार चाय पीने से शरीर से तरल पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।

खाली पेट चाय पीना है नुकसानदायक

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह उठते ही खाली पेट चाय नहीं पीनी चाहिए। इससे पेट की आंतरिक परत पर नकारात्मक असर पड़ता है जिससे गैस्ट्रिक प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। बेहतर होगा कि सुबह सबसे पहले गुनगुना पानी पिया जाए और फिर हल्के नाश्ते के बाद ही चाय ली जाए।

 

कैसे बनाएं चाय को स्वास्थ्यवर्धक

चाय में चीनी की मात्रा कम करें या उसकी जगह शहद का उपयोग करें। दिन में 2 कप से अधिक न पिएं। भोजन के तुरंत बाद चाय पीने से बचें कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें।

ग्रीन टी या हर्बल चाय को दिनचर्या में शामिल करें। अत्यधिक गर्म चाय न पिएं यह गले और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

 

आर्थिक और सामाजिक पक्ष भी महत्वपूर्ण

भारत में चाय उद्योग लाखों लोगों को रोज़गार प्रदान करता है, विशेषकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में. चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए यह दिन एक वैश्विक प्रयास की याद दिलाता है। साथ ही, चाय का निर्यात भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

स्वाद सुकून और सावधानी का संगम

चाय निस्संदेह एक ऐसा पेय है जो थकान मिटाता है बातचीत को शुरू करता है और समाज को जोड़ता है। लेकिन इसके अंधाधुंध सेवन से बचना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर हमें इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि कैसे हम अपने स्वास्थ्य पर्यावरण और श्रमिकों की भलाई के साथ संतुलन बना सकते हैं। तो अगली बार जब आप चाय की चुस्की लें तो सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सतर्कता को भी ध्यान में रखें।

-श्रीमती संतोष शर्मा

स्वतंत्र पत्रकार  साकेत नगर

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