शुक्रवार, 22 मई 2026

एसआई भर्ती पुनः परीक्षा-2021 : फॉर्म अपडेट करने में आ रही कठिनाइयों पर आयोग का संवेदनशील निर्णय

 अभ्यर्थियों की सहूलियत के लिए वेबसाइट पर डेटा उपलब्ध,एसएमएस से भी जा रहा अलर्ट

अजमेर, 22 मई। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा-2021 का पुनः आयोजन आगामी 20 सितंबर 2026 (रविवार) को किया जा रहा है। परीक्षा की शुचिता, पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की सुविधा के मद्देनजर आयोग द्वारा आवेदन पत्र में संशोधन तथा अनिवार्य केवाईसी की प्रक्रिया 16 मई से 30 मई 2026 तक संचालित की जा रही है।

आयोग का संवेदनशील निर्णय

 विगत पाँच वर्षों में कई अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी या एसएसओ आईडी बदल चुके हैं। इस कारण अनेक अभ्यर्थियों को अपना पुराना आवेदन ढूंढने और वर्तमान संशोधन प्रक्रिया को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस हेतु अभ्यर्थियों के हितों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हुए परीक्षा हेतु पात्र अभ्यर्थियों का आवश्यक डेटा सीधे आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दिया गया है।

वेबसाइट पर सूची का प्रकाशन और एसएमएस अलर्ट

आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई इस विशेष संकलित सूची में अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, आवेदन क्रमांक तथा उनकी मूल एसएसओ आईडी अंकित है। जिन अभ्यर्थियों के पुराने मोबाइल नंबर बंद हो चुके हैं, वे भी इस सूची से अपनी सही एसएसओ आईडी जानकर आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही आयोग द्वारा सभी पात्र अभ्यर्थियों के पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर फार्म एडिट करने हेतु मैसेज भी भेजे जा रहे हैं, ताकि उन्हें उनके आवेदन क्रमांक और एसएसओ आईडी की त्वरित जानकारी मिल सके।

लापरवाही पर निरस्त हो सकता है आवेदन

आयोग ने उन अभ्यर्थियों, जिन्होंने समय-सीमा शुरू होने के बावजूद अब तक अपने आवेदन में आवश्यक सुधार अथवा अनिवार्य सम्मति दर्ज नहीं की है, को आगाह किया है, कि निर्देशों की अवहेलना करने या निर्धारित तिथि (30 मई) तक प्रक्रिया पूर्ण न करने की स्थिति में अभ्यर्थियों का आवेदन स्वतः निरस्त माना जा सकता है। यह जानकारी 8 मई 2026 जारी किए गए प्रेस नोट द्वारा पूर्व में भी प्रसारित की जा चुकी है।

तकनीकी सहायता हेतु डिजिटल गाइडलाइंस जारी

वन टाइम रजिस्ट्रेशन अपडेट करने, पूर्व के डेटा को वर्तमान प्रोफाइल में स्थानांतरित करने तथा फार्म एडिट करने की प्रक्रिया को समझाने के लिए आयोग ने ओटीआर आधारित सेवा के लिए सहायता दस्तावेज हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करते हुए ओटीआर एवं केवाइसी प्रक्रिया की जानकारी हेतु डेमोन्सट्रेटिव वीडियों भी अपलोड किया हुआ है। इसका अवलोकन आयोग की वेबसाइट के होम पेज पर उपलब्ध इम्पोर्टेन्ट लिंक्स में उपलब्ध एप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक कर किया जा सकता है।

अभ्यर्थियों के लिए इन प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य

  • फेच एप्लीकेशन का विकल्प- यदि किसी अभ्यर्थी ने अपनी पूर्व की एसएसओ आईडी बदल ली है, तो वे फेच एप्लीकेशन फार्म के माध्यम से अपना पुराना रिकॉर्ड नए प्रोफाइल में स्थानांतरित कर लें।
  • निशुल्क करवा सकते है मोबाइल नंबर तथा ईमेल आइडी अपडेट- अभ्यर्थी अपने मोबाइल नंबर तथा ईमेल आइडी परिवर्तित होने के कारण ओटीपी वेरिफिकेशन में नहीं होने की स्थिति में आयोग कार्यालय से संपर्क कर इन्हें संशोधित करवाने के उपरांत एप्लीकेशन फेच कर सकते हैं। एसआई भर्ती पुनः परीक्षा-2021 के अभ्यर्थियों हेतु यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध है।
  • नो-चेंज अभ्यर्थियों के लिए भी लॉग-इन अनिवार्य- जिन अभ्यर्थियों को अपने विवरण में कोई संशोधन नहीं करना है, उन्हें भी अनिवार्य रूप से एक बार अपना फॉर्म एडिट मोड में खोलना होगा। वहां अपनी लाइव फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठा निशानी के उपयोग की सहमति देनी होगी।
  • ओटीपी आधारित फाइनल सबमिशन- सहमति के पश्चात फाइनल सब्मिट बटन पर क्लिक कर पंजीकृत मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी को दर्ज करना अनिवार्य है। इस अंतिम प्रमाणीकरण के बिना आवेदन की प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।

महत्वपूर्ण सूचना
  • इस परीक्षा में केवल वही अभ्यर्थी सम्मिलित होने के पात्र हैं, जो पूर्व में आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में उपस्थित रहे थे। भर्ती के अंतर्गत आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, आरक्षण, भर्ती परीक्षा स्कीम एवं सिलेबस तथा अन्य समस्त नियम व शर्तें 3 फरवरी 2021 को जारी मूल विज्ञापन तथा 7 जून 2021 को जारी शुद्धि-पत्र के अनुसार ही यथावत रहेंगी। अभ्यर्थी प्रामाणिक व अद्यतन सूचनाओं के लिए नियमित रूप से आयोग की वेबसाइट का अवलोकन करते रहें।
  • जिन अभ्यर्थियों के विरूद्ध एसआई भर्ती परीक्षा-2021 की शुचिता भंग करने के संबंध में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उन्हें 16 मई से शुरू होने वाली एप्लीकेशन अपडेट प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे प्रकरण के तथ्यों का सूक्ष्मतापूर्वक अध्ययन करते हुये प्रत्येक प्रकरण पर विधिसम्मत निर्णय लिया जाकर तद्नुसार कार्यवाही कर परीक्षा आयोजन से पूर्व संबंधित अभ्यर्थियों को पृथक से सूचित किया जाएगा।

अजमेर डेयरी का बड़ा फैसलाः सरस दूध हुआ 2 रुपये लीटर महंगा

अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी बोले- 'किसानों को नुकसान से बचाने के लिए मजबूरी में उठाया कदम'*

अजमेर: देश में बढ़ती अभूतपूर्व महंगाई और लगातार बढ़ती उत्पादन लागत के बीच अजमेर सरस डेयरी ने उपभोक्ताओं और पशुपालक किसानों के हितों में संतुलन बनाने के लिए एक बेहद कठिन लेकिन आवश्यक निर्णय लिया है। डेयरी को हो रहे भारी नुकसान से उबरने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी हमारे किसान भाईयों को बर्बादी से बचाने के लिए, अजमेर डेयरी ने बेहद मजबूरी वश आज से दूध की सभी किस्मों के विक्रय मूल्य में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। इस फैसले के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने बताया कि डेयरी को यह कदम उठाना क्यों अनिवार्य हो गया था।

अमूल और मदर डेयरी के नक्शेकदम पर चलने की मजबूरी :-
डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने विवशता जाहिर करते हुए बताया कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बड़ी डेयरी संस्था 'अमूल डेयरी' और उसके बाद केंद्र सरकार (NDDB) द्वारा संचालित 'मदर डेयरी' ने भी भारत सरकार की अनुमति मिलने के बाद अपने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए थे। ऐसे में अजमेर सरस डेयरी के पास भी इस आर्थिक दबाव के बीच इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
किसानों को घाटे से बचाकर देश में सबसे ऊंचा खरीद मूल्य दे रही है डेयरी :-
यह स्पष्ट किया गया है कि हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है। किसानों पर इस महंगाई का बोझ न आए और उन्हें पशुपालन में कोई नुकसान न उठाना पड़े, इसके लिए अजमेर सरस डेयरी आज भी पूरे देश में दूध का उच्चतम खरीद मूल्य (लगभग 10 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस) किसानों को चुका रही है।
सिर्फ अप्रैल महीने में डेयरी को हुआ 2.5 करोड़ का भारी घाटा :-
किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें लगातार ऊंचे दामों पर भुगतान जारी रखने के कारण अकेले पिछले महीने (अप्रैल) में अजमेर डेयरी को लगभग 2.5 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय हानि उठानी पड़ी है।लागत मूल्य में भारी उछाल (डीजल, गैस और पैकिंग मटेरियल की मार):-
दूध को गांवों से संकलित करने और विपणन (मार्केटिंग) का खर्च अब काफी बढ़ चुका है:-
वर्तमान में डीजल की दरों में लगभग रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।
प्लांट संचालन में काम आने वाली PNG गैस के दाम 30 रुपये बढ़ गए हैं।
दूध की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले 'पैकिंग मटेरियल' (Packing Material) की कीमतें 30% से 40% तक महंगी हो चुकी हैं।
इन तमाम कारणों से डेयरी की लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिसे अब और सहना संभव नहीं था।
डेयरी प्रबंधन ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि आर्थिक तंगी और घाटे के बावजूद दूध की शुद्धता और गुणवत्ता के मामले में अजमेर डेयरी आज भी पूरे देश में सर्वोच्च स्थान पर बनी हुई है।
सरकार से बड़ी मांगः राशन प्रणाली की तरह दूध भी मिले सस्ता :-
अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने आम जनता को महंगाई से स्थायी राहत देने के लिए एक अहम सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि, "अगर भारत सरकार डेयरी व्यवसाय को भी कृषि में शामिल करती है, तो जिस प्रकार राशन में गेहूं, चावल, दालें आदि पर भारत सरकार हजारों करोड़ रूपए खर्च कर राशन प्रणाली के माध्यम से इन्हें सस्ती दर पर आम जनता को उपलब्ध करा रही है, ठीक उसी प्रकार दूध एवं दुग्ध उत्पाद भी सस्ती दर पर आम उपभोक्ता को मिल सकेंगे।"
भविष्य की विवशता पर भी डाला प्रकाश :-
अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि उपभोक्ता डेयरी की इस मजबूरी को समझेंगे और सहयोग करेंगे, ताकि क्रय-विक्रय का बाजार संतुलित रहे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में पेट्रोल. डीजल, PNG गैस और पैकिंग मटेरियल के दामों में और ज्यादा बढ़ोतरी होती है, तो डेयरी प्रबंधन को बेहद भारी मन से दूध के दाम आगे और भी बढ़ाने पड़ सकते हैं।

आईआईएम संभलपुर द्वारा ‘वेस्टर्न ओडिशा एबिलिटी समिट 2026’ का आयोजन

22 मई, 2026; संभलपुर: भारत के अग्रणी प्रबंधन संस्थानों में से एक, आईआईएम (IIM) संभलपुर ने एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'WE४YOU' के सहयोग से ‘वेस्टर्न ओडिशा एबिलिटी समिट २०२६’ की मेजबानी की। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय “पहुंच से आय तक: समावेशी आजीविका के लिए स्थानीय मार्ग” (From Access to Income: Local Pathways for Inclusive Livelihood) था, जिसमें २०० से अधिक दिव्यांगजनों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुगमता, नवाचार और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था, जो आईआईएम संभलपुर के मूल मूल्यों में से एक यानी 'समावेशिता' (Inclusivity) के बिल्कुल अनुरूप है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि आईआईएम संभलपुर का परिसर भी पूरी तरह से दिव्यांग-अनुकूल है।

इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें श्री जयनारायण मिश्रा, विधायक, संभलपुर; प्रो. महादेव जैसवाल, निदेशक, आईआईएम संभलपुर; श्री टी.एम. प्रकाश, अध्यक्ष - मानव संसाधन प्रमुख (Head HR), डाउनस्ट्रीम बिजनेस, मुंबई, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड; और श्री प्रवीन वर्मा, सीईओ, टीपीडब्ल्यूओडीएल (TPWODL) शामिल थे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए आईआईएम संभलपुर के निदेशक प्रो. महादेव जैसवाल ने कहा, “मैं प्रतिभागियों से यह याद रखने का आग्रह करता हूं कि सबसे बड़ी बाधा मानसिक है, शारीरिक नहीं। इसलिए, शारीरिक सीमाओं से परे देखें और एक अधिक समावेशी समाज के निर्माण के लिए मिलकर काम करें। आईआईएम संभलपुर में, हम एक ऐसा व्यावसायिक शिक्षा तंत्र (Business Education Ecosystem) विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो न केवल भारत की सेवा करे, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल बने।”
शिखर सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए संभलपुर के विधायक श्री जयनारायण मिश्रा ने कहा, “मैं आईआईएम संभलपुर की इस उल्लेखनीय १० साल की यात्रा की सराहना करता हूं। संभलपुर में अपनी स्थापना के बाद से इस संस्थान ने जिस तरह से प्रगति की है और शिक्षा तथा नवाचार के माध्यम से सामुदायिक विकास और सामाजिक परिवर्तन में अपना योगदान देना जारी रखा है, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।”
यह पहल सामाजिक प्रभाव, समावेशी विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण के माध्यम से एक समावेशी भविष्य के निर्माण के प्रति आईआईएम संभलपुर की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

एमडीएस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर व्याख्यान, पुस्तक विमोचन एवं विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन

अजमेर, 22 मई। महार्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन को समर्पित विविध कार्यक्रमों, व्याख्यानों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन पर्यावरण विज्ञान विभाग, वनस्पति विज्ञान विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) तथा राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की मूल आधारशिला है तथा इसके संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन एवं प्राकृतिक आवासों के विनाश के कारण जैव विविधता गंभीर संकट का सामना कर रही है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने तथा पर्यावरणीय चेतना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का आह्वान किया। प्रो. अग्रवाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूज्य माना गया है। ऋग्वेद से लेकर कालिदास के साहित्य तक प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने अंतर्विषयी शोध को बढ़ावा देने तथा साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण को जोड़ते हुए “ईको-क्रिटिसिज्म” जैसे विषयों पर शोध कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. सुजीत नरवाडे, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) ने “अजमेर क्षेत्र में लेसर फ्लोरिकन पक्षी का संरक्षण” विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोकलिया एवं आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ एवं संकटग्रस्त पक्षी लेसर फ्लोरिकन के संरक्षण प्रयासों की जानकारी देते हुए उसके आवास, व्यवहार एवं संरक्षण चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संरक्षण कार्यों पर आधारित एक रोचक वीडियो भी प्रदर्शित किया, जिसे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने अत्यंत रुचि के साथ देखा।

पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। वहीं वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद पारीक ने स्थानीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों एवं पारंपरिक जैव संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर की जैव विविधता पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इनमें एक पुस्तक परिसर की वृक्ष विविधता पर आधारित थी, जबकि दूसरी पुस्तक विश्वविद्यालय परिसर की समृद्ध जैव विविधता के सचित्र सूचीकरण से संबंधित थी।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डिजिटल इन्फोग्राफिक प्रतियोगिता में रिया खटीक ने प्रथम, तन्वी सिंह ने द्वितीय तथा अमीषा करवासरा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में वंशिका खीची प्रथम, कल्याण प्रसाद खंडेलवाल द्वितीय तथा प्राची शर्मा तृतीय स्थान पर रहीं। बर्ड ट्रिविया प्रतियोगिता में रूबी ने प्रथम, आयुषी मीणा ने द्वितीय तथा विकास जांगिड़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं फ्लोरा ट्रिविया प्रतियोगिता में शालू चौधरी प्रथम, हिमांशु बकोलिया द्वितीय एवं सानिया खान तृतीय स्थान पर रहीं। कार्यक्रम में प्रो. प्रवीण माथुर, प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. आशीष भटनागर, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. राजू शर्मा, डॉ. सपना जैन, डॉ. श्रुति ओझा, डॉ. रेनू जांगिड़ सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। अंत में सभी विजेताओं को बधाई देते हुए जैव विविधता संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों का संकल्प लिया गया।

गजेंद्र पंचोली भारत विकास परिषद से जुड़े

अजमेर। वरिष्ठ समाजसेवी गजेंद्र पंचोली ने हाल ही में भारत विकास परिषद, संयोगिता शाखा पंचशील, अजमेर की सदस्यता ग्रहण की। राजस्थान मध्य प्रांत के संयुक्त सचिव डॉ. सुरेश गाबा की प्रेरणा से उन्होंने परिषद से जुड़कर सामाजिक एवं सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता का संकल्प व्यक्त किया।

पंचोली ने कहा कि भारत विकास परिषद समाज सेवा, संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है, जिससे जुड़ना उनके लिए गौरव का विषय है।
इस अवसर पर कमल गंगवाल, विजय जैन पांड्या, राजेंद्र गांधी, गुंजन माथुर, गिरिराज माथुर सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने पंचोली को बधाई दी।