गुरुवार, 21 मई 2026

मित्तल हॉस्पिटल में किडनी व कैंसर जागरूकता कार्यशाला आयोजित

 सीजीएचएस जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत विशेषज्ञों ने दी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी


अजमेर, 21 मई। मित्तल हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर एवं केन्द्र सरकार पेंशनर्स एसोसिएशन राजस्थान — ईकाई अजमेर जिला के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को सीजीएचएस जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत किडनी एवं कैंसर रोग जागरूकता कार्यशाला का आयोजन मित्तल हॉस्पिटल के सभागार में बी के सांवरिया की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में पेंशनर्स, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग, विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में अजमेर, ब्यावर, मदनगंज—किशनगढ़ से आए लगभग 100 से अधिक सीजीएचएस लाभार्थी एवं सीजीएचएस पैनलबद्ध अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं स्वास्थ्य तथा सीजीएचएस संबंधी जानकारियां प्राप्त की।

अजमेर ईकाई की तरफ से जे पी गुडेश्वर महासचिव सीजीपीए ने अतिथियों एवं सदस्यों का स्वागत उद्बोधन दिया।

कार्यशाला में गुर्दा रोग एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. चक्रपाणि मित्तल ने कहा कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप के कारण किडनी रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने किडनी रोगों के प्रारम्भिक लक्षणों, बचाव, डायलिसिस एवं किडनी ट्रांसप्लांट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।

वहीं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रजत चौधरी ने कैंसर रोग के कारणों, बचाव एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कैंसर को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है, क्योंकि समय पर पहचान एवं उचित उपचार से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने तंबाकू सेवन, प्रदूषण एवं अनियमित दिनचर्या को कैंसर के प्रमुख कारण बताते हुए लोगों से सतर्क रहने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में रेडिएशन आन्कोलॉजिस्ट डॉ. आयुषी पाटनी भी उपस्थित रहीं।

कार्यशाला के दौरान उपस्थितजनों ने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन सीजीएचएस उपाध्यक्ष बी एल बारोलिया ने किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किडनी एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति आमजन को जागरूक करना तथा समय पर जांच एवं उपचार के महत्व को रेखांकित करना रहा। इसके साथ ही सीजीएचएस जागरूकता कार्यक्रम के तहत सीजीएचएस उपाध्यक्ष बी एल बारोलिया ने नवीनतम सीजीएचएस नियमों, डिजिटल अपडेट्स, सीजीएचएस इम्पेनल्ड हॉस्पिटल की सुविधाओं की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई। कार्यक्रम में उपस्थितजनों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधे संवाद का अवसर भी प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में वरिष्ठ प्रबंधक युवराज पाराशर व अमित मित्तल सहित सीजीएचएस पेंशनर्स एसोसिएशन राजस्थान ईकाई अजमेर जिला के अनेक पेंशनर्स एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने भविष्य में भी जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर इस प्रकार की जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करते रहने की बात कही।

कार्यक्रम के अंत में बी के सांवरिया ने आज के सफल कार्यक्रम आयोजन पर सभी चिकित्सकों, प्रतिभागियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। अंत में राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

राजस्थान की शान ‘गोडावण’ संरक्षण का संदेश: एमडीएस विश्वविद्यालय में उत्साहपूर्वक मनाया गया गोडावण दिवस

 “गोडावण बचाना केवल पर्यावरण नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाना है”

अजमेर, 21 मई। कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल की प्रेरणा से महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में गुरुवार को ‘गोडावण दिवस’ उत्साह एवं जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं समाज में जागरूकता फैलाना तथा जैव विविधता संरक्षण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने गोडावण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया तथा मरुस्थलीय जैव विविधता को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि गोडावण केवल राजस्थान की पहचान नहीं, बल्कि देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इसकी तेजी से घटती संख्या इस बात का संकेत है कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल अकादमिक विषय न मानकर सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाएं। प्रो. प्रवीण माथुर ने अपने संबोधन में कहा कि गोडावण संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आवास में कमी, विद्युत लाइनों से टकराव तथा बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप गोडावण के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे बन चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अधिक शोध, संरक्षण गतिविधियों एवं जनजागरूकता अभियानों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञ वक्ता एवं वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. विवेक शर्मा ने गोडावण की पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पक्षी मरुस्थलीय जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेतक है तथा इसकी उपस्थिति स्वस्थ घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि कभी राजस्थान, गुजरात और मध्य भारत के विस्तृत क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले गोडावण आज विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को फील्ड रिसर्च एवं संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। गौरतलब है कि ‘गोडावण दिवस’ राजस्थान के राज्य पक्षी के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। गोडावण, जिसे अंग्रेज़ी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाता है, विश्व के अत्यंत संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है। वर्तमान में इसका सीमित आवास राजस्थान के जैसलमेर एवं आसपास के घासभूमि क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया है। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार विद्युत तारों से टकराव, अवैध शिकार तथा प्राकृतिक आवास के लगातार क्षरण के कारण इसकी संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण एवं वन्यजीव सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

मानदेय भुगतान न होने पर एनएचएम कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार शुरू, “दाम नहीं तो काम नहीं” के लगे नारे

 

आगरा। आगरा में प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों जैसे जिला अस्पताल, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सैकड़ों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारियों द्वारा बुधवार से कार्य बहिष्कार शुरू किया गया। इसी क्रम में आगरा के आईआरएल, एसटीडीसी में भी कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। कर्मचारियों द्वारा लंबित मानदेय भुगतान की मांग को लेकर यह कदम उठाया गया है।

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के दामोदर सिंह ने बताया कि कर्मचारियों का पिछले तीन माह से मानदेय लंबित है, जिसके कारण उन्हें गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने “दाम नहीं तो काम नहीं” के नारे के साथ कार्य बहिष्कार शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारियों के खातों में लंबित मानदेय, इन्क्रीमेंट एवं लॉयल्टी बोनस जमा नहीं हो जाता, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।

संघ के विशाल सक्सेना ने बताया कि पिछले दो महीने से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कई बार उच्च अधिकारियों से वेतन भुगतान की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक किसी स्तर पर समाधान नहीं हो सका है।

कर्मचारियों ने कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन न मिलना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। कर्मचारियों ने शासन से जल्द लंबित भुगतान जारी करने तथा इन्क्रीमेंट, लॉयल्टी बोनस, समान कार्य समान वेतन, डीए, एचआरए, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश, रिस्क अलाउंस एवं आयुष्मान/दीनदयाल कैशलेस योजना जैसी मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।

कार्य बहिष्कार में डॉ. संजीव कुमार माहेश्वरी, डॉ. अविजित कुमार अवस्थी, डॉ. ब्रह्मानंद राजपूत, दामोदर सिंह, विशाल सक्सेना, पवन कुमार, गजेन्द्र बंसल, पंकज कुमार, उबैश, अंजली, मैसर, योगेन्द्र, शिव कुमार, राजेश, शिवोम, प्रीति, अभिषेक सहित सभी एनएचएम व आउटसोर्सिंग कर्मचारी मौजूद रहे।

“योग भारत की सांस्कृतिक विजय का प्रतीक, राष्ट्र निर्माण का आधार” - कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

 योग केवल व्यायाम नहीं, समत्व, अनुशासन और सकारात्मक जीवन का माध्यम :

अजमेर, 21 मई। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के योग विज्ञान एवं मानव चेतना विभाग द्वारा आयोजित एक माह के योग शिविर के उद्घाटन समारोह में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को समत्व, अनुशासन, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाला संपूर्ण विज्ञान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जिस होलिस्टिक एजुकेशन की बात की गई है, योग उसका साक्षात स्वरूप है।अपने संबोधन में कुलगुरु ने कहा कि उनके जीवन में इस प्रकार के योग शिविरों का अनुभव पूर्व में भी रहा है और उन्होंने सदैव योग एवं प्राणायाम को जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि योग से शरीर और मन दोनों में अद्भुत शांति एवं ऊर्जा का अनुभव होता है। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि योग ने भारत को केवल राजनीतिक शक्ति ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी विश्व में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाना भारत की सांस्कृतिक विजय का प्रतीक है। यह निर्णय विश्व समुदाय द्वारा भारत की महान परंपरा और ज्ञान को सम्मान देने का प्रमाण है। उन्होंने योग के विभिन्न स्वरूपों की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को योग का महान आचार्य माना गया है। गीता में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण ने कर्मयोग को सर्वोच्च बताया है। उन्होंने कहा कि कर्म ही मनुष्य को सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय में समभाव बनाए रखने की शक्ति देता है और यह शक्ति केवल योग से प्राप्त होती है। कुलगुरु ने कहा कि योग केवल देखने या करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में भी परिलक्षित होना चाहिए। योग मनुष्य को अनुशासित, सकारात्मक और कर्मशील बनाता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्वस्थ होता है तो परिवार स्वस्थ होता है, परिवार स्वस्थ होता है तो समाज स्वस्थ होता है और समाज के स्वस्थ होने से राष्ट्र सशक्त बनता है। इस प्रकार योग राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से व्यक्ति न केवल स्वयं की सेवा करता है, बल्कि राष्ट्र सेवा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्राप्त करता है। कार्यक्रम में कुलगुरु ने योग शिविर के आयोजन के लिए विभाग एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सभी प्रतिभागियों से अनुशासन और समयपालन के साथ इस प्रकार के आयोजनों में सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रभारी डॉ. आशीष पारीक डॉ लारा शर्मा, जयंती देवी, योग अतिथि शिक्षक योग विज्ञान एवं मानव चेतना विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे।

आईआईटी मंडी ने 19 भाषाओं में नदी बेसिन के जलवायु भविष्य का आकलन करने वाला निःशुल्क एआई उपकरण किया लॉन्च

 कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यह उपकरण शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए 19 भाषाओं में प्रकाशन-स्तरीय जलग्रहण क्षेत्र जलवायु रिपोर्ट तैयार करता है


21 मई, 2026; मंडी: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (आईआईटी मंडी), जो देश के अग्रणी आईआईटी संस्थानों में से एक है, ने जलवायु जानकारी और जल संसाधन आकलन को अधिक सुलभ एवं किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने “भारतीय जलवायु सूचना अन्वेषक” मंच पर “वॉटरशेडएआई” नामक एक क्रांतिकारी अनुप्रयोग लॉन्च किया है।

आईआईटी मंडी की “हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला” द्वारा विकसित यह मंच जल विज्ञान मॉडलिंग, गहन अधिगम और बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर भारत के किसी भी जलग्रहण क्षेत्र का व्यापक जलवायु आकलन मात्र 3 से 8 मिनट के भीतर तैयार करता है।

यह मंच पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है और 19 भाषाओं में प्रकाशन-स्तरीय जलग्रहण क्षेत्र रिपोर्ट प्रदान करता है, जिससे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए जलवायु विज्ञान एवं जल संबंधी जानकारियों तक पहुँच काफी आसान हो गई है।

आईआईटी मंडी के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विद्यालय के संकाय सदस्य एवं “हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला” के प्रमुख डॉ. विवेक गुप्ता ने इस उपकरण के उद्देश्य के बारे में कहा:
“हमारा लक्ष्य अत्याधुनिक जल विज्ञान अनुसंधान और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया के बीच की दूरी को कम करना रहा है। ‘वॉटरशेडएआई’ विशेषता भू-आकृतिक विश्लेषण, मिट्टी एवं भूमि उपयोग की विशेषताओं, प्रेक्षित एवं अनुमानित जलवायु आँकड़ों, सूखा सूचकांकों तथा गतिशील जल-उपज मॉडल को एक समेकित स्वरूप में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक रिपोर्ट पुनरुत्पादनीय है, अपने आँकड़ा स्रोतों से सत्यापित है और इसे किसी मापित अथवा पूर्णतः अमापित बेसिन के लिए भी तैयार किया जा सकता है।”

इस उपकरण की बहुभाषी क्षमता इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है। “वॉटरशेडएआई” अपनी पूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रिपोर्ट 19 भाषाओं में उपलब्ध कराता है — जिनमें हिंदी, तमिल, बंगाली, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मराठी, पंजाबी, ओड़िया, उर्दू और मलयालम जैसी भारतीय भाषाएँ शामिल हैं, साथ ही अंग्रेज़ी, अरबी, चीनी, जापानी, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन और पुर्तगाली जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएँ भी सम्मिलित हैं।

“हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला” के पीएचडी शोधार्थी एवं इस विशेषता के सह-विकासकर्ता श्री सिद्धिक ने कहा:
“हम चाहते थे कि तमिलनाडु का कोई जल वैज्ञानिक, हिमाचल प्रदेश का कोई जिला योजनाकार और मणिपुर का कोई विद्यार्थी — सभी एक ही वैज्ञानिक प्रश्न किसी जलग्रहण क्षेत्र के बारे में पूछ सकें और अपनी मातृभाषा में उत्तर प्राप्त कर सकें, बिना वैज्ञानिक गुणवत्ता से समझौता किए।”

भारत की वास्तविक आधारभूत संरचना की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस मंच को तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण था। आईआईटी मंडी के तृतीय वर्ष के बीटेक छात्र एवं मंच के वेब विकासकर्ता श्री पीयूष पनपालिया ने कहा:
“अभियांत्रिकी पक्ष पर हमारा मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करना था कि जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया उपयोगकर्ता को सरल और सहज अनुभव प्रदान करे। मानचित्र-आधारित निकास चयन, असमकालिक रिपोर्ट निर्माण, बहुभाषी प्रस्तुति और अनुप्रयोग के भीतर संवाद सुविधा — इन सभी को सीमित इंटरनेट संपर्क और विभिन्न उपकरणों पर भी सुचारु रूप से कार्य करना था, क्योंकि भारत के अधिकांश उपयोगकर्ताओं की यही वास्तविक स्थिति है।”

सरकारी एजेंसियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के उपयोग हेतु तैयार किया गया “वॉटरशेडएआई” भारत के विभिन्न जलग्रहण क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं अमापित क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय जलवायु एवं जल संबंधी जानकारी तक आसान पहुँच प्रदान करता है। वैज्ञानिक आकलनों को तेज, बहुभाषी और विशेष तकनीकी उपकरणों के बिना सुलभ बनाकर यह मंच जल शक्ति, डिजिटल इंडिया और जलवायु अनुकूलन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन प्रदान करता है।

“वॉटरशेडएआई” अब “भारतीय जलवायु सूचना अन्वेषक” मंच पर उपलब्ध है। इसकी सहायता से उपयोगकर्ता मात्र एक क्लिक पर जलग्रहण क्षेत्र की संरचना, जल निकासी प्रतिरूप, मिट्टी की स्थिति, भूमि उपयोग, जलवायु रुझान, सूखे का इतिहास, चरम मौसम घटनाओं तथा भविष्य में जल उपलब्धता से संबंधित विस्तृत जलवायु आकलन प्राप्त कर सकते हैं। यह सभी जानकारी मूल वैज्ञानिक आँकड़ा स्रोतों पर आधारित और प्रमाणित है।
WatershedAI अब INCLINE प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है:
incline.iitmandi.ac.in