“गोडावण बचाना केवल पर्यावरण नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाना है”
अजमेर, 21 मई। कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल की प्रेरणा से महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग में गुरुवार को ‘गोडावण दिवस’ उत्साह एवं जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं समाज में जागरूकता फैलाना तथा जैव विविधता संरक्षण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने गोडावण संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया तथा मरुस्थलीय जैव विविधता को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि गोडावण केवल राजस्थान की पहचान नहीं, बल्कि देश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इसकी तेजी से घटती संख्या इस बात का संकेत है कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल अकादमिक विषय न मानकर सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाएं। प्रो. प्रवीण माथुर ने अपने संबोधन में कहा कि गोडावण संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आवास में कमी, विद्युत लाइनों से टकराव तथा बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप गोडावण के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे बन चुके हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अधिक शोध, संरक्षण गतिविधियों एवं जनजागरूकता अभियानों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञ वक्ता एवं वन्यजीव जीवविज्ञानी डॉ. विवेक शर्मा ने गोडावण की पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पक्षी मरुस्थलीय जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेतक है तथा इसकी उपस्थिति स्वस्थ घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि कभी राजस्थान, गुजरात और मध्य भारत के विस्तृत क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले गोडावण आज विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को फील्ड रिसर्च एवं संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। गौरतलब है कि ‘गोडावण दिवस’ राजस्थान के राज्य पक्षी के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। गोडावण, जिसे अंग्रेज़ी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाता है, विश्व के अत्यंत संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल है। वर्तमान में इसका सीमित आवास राजस्थान के जैसलमेर एवं आसपास के घासभूमि क्षेत्रों तक सिमट कर रह गया है। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार विद्युत तारों से टकराव, अवैध शिकार तथा प्राकृतिक आवास के लगातार क्षरण के कारण इसकी संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने जैव विविधता संरक्षण एवं वन्यजीव सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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