रविवार, 18 जनवरी 2026

पायलट की चादर पर कौतुहल बरकरार

पिछले दिनों उर्स के दौरान पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से ख्वाजा साहब की मजार षरीफ पर चादर चढाई गई, मगर आज तक उजागर नहीं हो पाया है कि नागौर जिले के जो युवा कांग्रेसी नेता चादर ले कर आए थे, वह क्या पायलट ने भेजी थी या फिर उन्होंने पायलट को खुष्ज्ञ करने के लिए अपनी ओर से ही चादर चढा दी? इस सवाल से भी बडा सवाल यह है कि क्या वजह रही कि चादर चढाए जाने के दौरान अजमेर के स्थानीय पायलट समर्थक महेन्द्र सिंह रलावता, हेमंत भाटी व विजय जैन को सूचित करना ही उचित नहीं समझा? इससे इस बात का अंदाजा लगता है कि नागौर के नेता ने अपने स्तर पर ही चादर चढाई थी। स्थानीय नेताओं को सूचित इसलिए नहीं किया क्योंकि वे नहंीं चाहते थे कि वे हाईलाइट हो जाएं। अकेले क्रेडिट लेना चाहते थे। यह वाकया वाकई चौंकाता है कि पायलट की ओर से चादर चढे और उनके समर्थकों को हवा तक न लगे। एक सवाल और उठता है कि इस बार पायलट ने अपनी ओर से चादर क्यों नहीं भेजी? हालांकि इस बात की संभावना कम है कि पायलट ने ही चादर भेजी हो, मगर यदि यह सही है तो स्थानीय राजनीति के लिहाज से गहरे निहितार्थ निकलते हैं।


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