रविवार, 18 जनवरी 2026
एसआईआर के शोर का फायदा बीजेपी को
इन दिनों एसआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस चौडे धाडे आरोप लगा रही है कि सरकार द्वारा नियुक्त बी.एल.ओ. द्वारा फर्जी आपत्तियों की पुष्टि किये बगैर व पार्टी बी.एल.ए. के फर्जी हस्ताक्षरों द्वारा कूटरचित षिकायतों के आधार पर अल्पसंख्यकों व कांग्रेस विचाधारा के मतदाताओं के नाम हटाये जा रहे हैं, जो कि लोकतंत्र व मतदान प्रक्रिया के विरूद्ध है। इसी तरह का आरोप मुस्लिम एकता मंच ने भी लगाया है। मोटे तौर पर यही निहितार्थ निकल रहा है कि अल्पसंख्यकों के वोट बडे पैमाने पर कटवाने की कवायद चल रही है। विपक्ष के नाते कांग्रेस का विरोध प्रदर्षन उसकी मजबूरी है, मगर भाजपाई मन नही मन खुष्ज्ञ हैं कि कांग्रेस जितनी जोर से विरोध करेगी, मतदाताओं का धु्रवीकरण उतना अधिक होगा और उसका लाभ सीधे तौर पर भाजपा को होगा। ज्ञातव्य है कि अजमेर अति संवेदनषील है। यदाकदा ऐसे मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे हैं, जिससे मतदाताओं का पोलराइजेषन हो। हालांकि ऐसे प्रयासों को कम ही सफलता मिल पाई है, और उसकी वजह है अजमेर का भाईचारे वाला मिजाज। आर्थिक कारणों से कोई भी समुदाय यहां अषांति नहीं चाहता। फिर भी ताजा एसआईआर विवाद से मतदाताओं के धु्रवीकरण का खतरा तो बना ही हुआ है। देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस कटने जा रहे नामों को कितना बचा पाती है, मगर धरातल पर काम करने की बजाय कोरी बयानबाजी और कोरा षोर मचाया तो उसका उलटा नुकसान हो सकता है।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें